mere apno ko patra

मैंने जब से होश सम्हाला है, तब से मेरा जीवन जीने का नज़रिया बदल गया है, और उसी नजरिए को पत्र के माध्यम से आपको प्रेषित कर रहा हूँ |
एक सिक्के के दो पहलू होते है, और उसी तरह हर चीज के दो पहलू होते है |
इसी तरह से दो तरह से मानव की बात कर रहा हूँ,
समानतावादी और आसमानतावादी लोग,
यह पत्र खास करके उन समानतावादी लोगों के लिए है, जो समानता के साथ जीवन को जीना चाहते है |
जीवन जीने के लिए 4 चीजों को प्रमुख माना गया है,
रोटी, कपड़ा, मकान, और ईज्जत,
यह वह चीज है, जो जीवन जीने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है,
जिस तरह से मैं समानतावादी विचारधारा को मानता हूँ, और एक दूसरे तरह के मानव भी है, जो असमानतावादी विचारधारा को मानते है |
ओ असमानतावादी लोग नहीं चाहते है, कि हम समानतावादी बनकर रहे, सदियों से हम मूल निवासी लोगों पर अत्याचार होते हुए आया है,
ओ नहीं चाहता है, हम उनकी बराबरी करें, क्योंकि ओ हमें गुलाम बनाकर रखना चाहते है, हमारे महापुरुषों ने सदियों, हजारो वर्षो से इनको खधेड़ने का काम किया है, तब जाकर आज हम इतने शिक्षित हो पाए है |
मै जहां तक जानता हूँ और मानता हूँ हर कोई वास्तविकता से साथ जीवन को जीना चाहता है, लेकिन कुछ ऐसी विचारधारा के लोग होते है, जो अवास्तविकता, गुलामी जीवन जीने के लिए मजबूर कर रहे है |
बड़ी मुश्किल से हमें समानता प्राप्त करके का संविधान के रूप शक्ति मिला है, हमें इस शक्ति का भरपूर उपयोग करना है, एक तरफ दूसरे विचारधारा के लोग हमारी शक्ति को कमजोर करने में लगे हुए है, इस तरह के लोगों से आपको सचेत रहना होगा, आपको स्पष्ट बता दूँ, मैं उन मनुवादी विदेशी लोगों कि बात रहा हूँ, जो इस देश में घुश आए है, और जिन्होंने जाति-पाती, वर्ण, भेदभाव, उंच-नीच का कलंक फैला कर रखा है |
मेरा वर्तमान या भविष्य में कोई ऐसा दोस्त या पहचान के है, जो असमानतावादी है, तो उन्हे कहना चाहूँगा, आप मेरे दोस्त नहीं हो सकते, क्योंकि विचारधारा का नाम ही दोस्ती है, और आपकी असमानतावादी विचारधारा को मैं समर्थन नहीं कर सकता |
आरक्षण के संबंध में कहना चाहूँगा,
जिसकी जितनी संख्या भारी, उतनी उनकी हिस्सेदारी,
चाहे कुछ भी हो जाए आरक्षण हमारा अधिकार है, इसके रोड़े में जो कोई भी आएगा वह मेरा दोस्त नहीं हो सकता |
जब तक हमें हमारा अधिकार, समानता, पूर्ण संविधान नहीं मिल जाता तब तक जीवन पर्यन्त संघर्ष जारी रहेगा, इतिहास मे, आज, कल, भविष्य और इतिहास बनता रहेगा,
जीवन संघर्षो का नाम है,
चाहे कुछ भी हो जाए इन विदेशी बहरूपियों पर भरोषा न करना, जब तक समानता न मिल जाए इन्होने सदियों से छल करने का काम किया है,
जय सतनाम, जय भीम, जय मूलनिवासी, जय संविधान,
समानता ही जीवन का लक्ष्य है,
समानता ही जीवन का सार है,
 - योगेन्द्र कुमार
    03-05-2020

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