Wednesday, August 14, 2019

अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के खिलाफ पूरे प्रदेश में वामपंथी पार्टियों ने आयोजित किया नागरिक-प्रतिवाद

अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के खिलाफ पूरे प्रदेश में वामपंथी पार्टियों ने आयोजित किया नागरिक-प्रतिवाद

अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के खिलाफ पूरे प्रदेश में वामपंथी पार्टियों ने आयोजित किया नागरिक-प्रतिवाद

छत्तीसगढ़ की पांच वामपंथी पार्टियों ने संविधान के अनुच्छेद 370 और 35-ए को खत्म करने तथा जम्मू-कश्मीर राज्य को विभाजित करने के केंद्र सरकार के कदम को देश के संघीय ढांचे, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और कश्मीरियत पर खुला हमला बताते हुए पूरे राज्य में आज नागरिक-प्रतिवाद प्रदर्शन आयोजित किया। रायपुर में हुए प्रदर्शन में माकपा के संजय पराते, एम के नंदी, बी सान्याल, धर्मराज महापात्र, भाकपा के विनोद सोनी, भाकपा (माले-लिबरेशन) के बृजेन्द्र तिवारी, भाकपा (माले-रेड स्टार) के सौरा यादव, तेजराम साहू और एसयूसीआई (सी) के विश्वजीत हरोड़े, आत्माराम साहू के नेतृत्व में विभिन्न संगठनों से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। भिलाई में नागरिक प्रतिवाद की अगुआई वकील भारती, शांत कुमार, डीवीएस रेड्डी, अशोक खातरकर, योगेश सोनी (माकपा), बृजेन्द्र तिवारी (भाकपा-माले-लिबरेशन), कलादास डहरिया, आई के वर्मा आदि ने की। ये नागरिक प्रदर्शन सरगुजा, सूरजपुर, छाल (रायगढ़) आदि जगहों पर भी आयोजित किये गए तथा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए।

वामपंथी नेताओं ने यहां आयोजित सभाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य के भारत में विलय की प्रक्रिया अन्य देशी रियासतों के विलय से भिन्न थी, इसीलिए कश्मीर की जनता की अस्मिता, पहचान और स्वायत्तता की रक्षा का वादा तत्कालीन भारत सरकार ने किया था और इसे पूरा करने के लिए संविधान में धारा 370 का प्रावधान किया गया था। इसलिए मोदी सरकार का यह कदम न केवल जम्मू-कश्मीर की जनता के साथ विश्वासघात है, बल्कि राष्ट्रीय एकता व संघीय गणराज्य की अवधारणा पर ही हमला है, जो देश में किसी भी प्रकार की विविधता को बर्दाश्त करने के लिए ही तैयार नहीं है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का यह कदम पारस्परिक राजनैतिक संवाद के जरिये कश्मीर समस्या को हल करने के उसके वादे के भी खिलाफ है, जो उसने संसद में तीन साल पहले दिया था। इसके बजाय उसने मुख्य राजनैतिक पार्टियों के नेताओं को गिरफ्तार करने व जनता की आवाजाही को प्रतिबंधित करने का ही तानाशाहीपूर्ण कदम ही उठाया है। इससे घाटी में अलगाववाद की भावना और मजबूत होगी।

धारा 370 हटाने के लिए दिए जा रहे तर्कों को बेनकाब करते हुए वाम नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने ही जून महीने में नागालैंड में अलग झंडे, अलग पासपोर्ट पर सहमति दी है और धारा 370 जैसे प्रावधान ही धारा 371 के रूप में नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्रप्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा व हिमाचल प्रदेश में लागू है, जहां बाहरी प्रदेश का कोई निवासी जमीन नहीं खरीद सकता।वामपंथी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने दरअसल जम्मू-कश्मीर को विभाजित करने के मुस्लिमविरोधी संघी एजेंडे को ही लागू किया है।

पांचों वामपंथी पार्टियों ने अपने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलने श्रीनगर गए माकपा महासचिव सीताराम येचुरी और भाकपा महासचिव डी राजा की गिरफ्तारी और उन्हें शहर में प्रवेश न देने की भी तीखी निंदा की है।

संजय पराते, सचिव, माकपा, 
(मो) 094242-31650
बृजेन्द्र तिवारी, सचिव, भाकपा (माले-लिबरेशन), 
(मो) 07000220358
सौरा यादव, सचिव, भाकपा (माले-रेड स्टार)
(मो) 09425560954
आरडीसीपी राव, सचिव, भाकपा, (मो) 09425591666
विश्वजीत हरोड़े, सचिव, एसयूसीआई (सी)
(मो) 09981490802
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