Apr 13, 2019

एक अच्छे लेखनी के गुण, एक अच्छे #लेखक में कौन-कौन से गुण होने चाहिए ?


  • जिस भी भाषा में लेख लिखे, उस भाषा में अच्छी पकड़ हो |


  • लेखनी में सबसे जायदा जरुरी विराम चिन्ह का प्रयोग सही जगह पर हो तो सही रहता है, नहीं तो इसके विपरीत पढ़ने में गलत, और अवगुण नजर आते है |


  • जिस भी विषय में लेख लिखे, उस विषय पर विचार, विमर्श और कल्पना शक्ति अत्यधिक करनी चाहिए |


  • सम्भावना को ध्यान में रखकर लेख लिखे |

    • लोगों की भावना और रूचि को ध्यान में रखकर लेख लिखे |
    • किसी भी विषय पर लिखते समय उस पर ध्यान केन्द्रित हो, उस वक्त तक लिखते रहे, जब तक लिखने का मन बना रहे |
    • जिस विषय पर लेख लिख रहे है, उस विषय पर आपकी अच्छी जानकारी हो, तभी आप उसे बेहतर तरीके से लिख पायेंगे |
    • शब्दों के माध्यम से अपनी भावना को लेख में प्रस्तुत करते रहे |
    • अपनी बात को बड़ी ही मजबूती और उत्साह के साथ लिखे, डर कर लिखेंगे तो पढ़ने वाले में आलस पन आएगा, और वह पढ़ नहीं पायेगा |
    • अगर आप जायज लिख रखे है, आप के लेखनी में दम है, तो यह न सोचे यह वह पढ़ने के बाद क्या सोचेगा |
    • जिस विषय पर आप लेखनी करेंगे, वह आपकी भावना और होबी, विचार से जुड़ा हो तो सबसे बेहतर है, नहीं हो, लेख के भाव दब जाते है |
    • लिखते समय बड़ी सावधानी रखे, जल्दी बाजी न करें, जल्दी लिखने से नया शब्द, विचार, भाव, छूट जाते है, जो लेख को और पीछे छोड़ देते है |
    • लिखने के बाद एक दो बात अवश्य पढ़ना चाहिए, कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं |
    • इसका ध्यान बिलकुल न रखे, लेख के कितने पैसे मिलेंगे, कितने लोग पसंद करेंगे |
    • अपनी गलती को नजर अंदाज न करें, लेखनी में सुधार के लिए, लगातार लिखते रहे, और गलतिओं को सुधार करते रहे |
    • अगर लेख प्रकाशित होने के बाद लोग, पसंद नहीं कर रहे है, तो लोगों को दोष नहीं, यह जानने का प्रयास करें, क्यों पसंद नहीं किया जा रहा, फीडबैक ले |
    • अगर आप सर्च करके, पुस्तक पढ़कर नया लिख रहे है, तो बहुत जायदा पढाई करें, और थोड़ा लिखाई करें |
    • जितना जायदा हो सके श्रोता बनने के, लोगो की बात को सुनने की, समझने की, आदत डाले, जितना सुनेगे, उतना ही अच्छा लेखन कर पायेंगे |
    • जिस भी विषय पर लेख लिख रहे है, उस पर जानकारी, और अन्य सूचना रखना, उस पर जानना आवश्यक है |
    • और अंतिम में पठन करना, चिंतन करना, मनन करना, दर्शन करना और लेखन करना चाहिए |
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