Feb 6, 2019

लोग क्यों भटक रहे है ? पत्थर में तो कभी पूजा पाठ में, और कब से |

kyo bhatak rahe hai log kabhi mandir to kabhi masjid me

लोग अनेक प्रकार के पूजा पाठ, नियम क्यों करते है |

मानव ने जब से जीवन को जीना शुरु किया है, तब से उसे हमेशा लगा है, की कोई न कोई है, जो उसकी रक्षा करता है, इस तरह से,  उन्होंने प्रकृति की पेड़ पौधों की पूजा करना शुरु किया |
उसके शिक्षा का ध्यान का महत्त्व अनेक जगहों में देखने को मिलता है,
आज क्या हो रहा है, लोग अपनी मन की भटक के लिए इतना भटक रहे है, की उसे पता नहीं है, की वह क्या कर रहा है |
कुछ लोग मंदिर जाना, मस्जिद जाना, चर्च जाना, गुरुद्वारा जाना, अनेक जगहों पर रोज जाते है |

मन क्यों भटकता है ?

मन में जब विकार आते है, तो मन स्वभाविक तरीके से उसे सोचने लगता है |

विकार क्या है ?

मन जब किसी चीज के बारे में सोचने लगता है, मन में कोई भाव किसी के लिए पैदा होता है, उसे विकार कहते है |
इसी विकार को शांत करने के लिए आज लोग भटक रहे है,
शरीर में 5 प्रकार की ज्ञान इन्द्रिय होती है |
जिनसे हम ज्ञान अर्जन करते है,
कान से सुनकर,
आँख से देखकर,
जीभ से स्वाद चखकर,
नाक से सुगंध लेकर,
त्वचा से स्पर्श करके,
इन्ही के द्वारा विकार पैदा होता है,
इनको ही समान्य अवस्था में लाना है,
लोग आज भटक रहे है,
कभी पत्थर को देखकर ध्यान लगाने की कोशिश करते है, तो कोई तस्वीर को, तो कोई मूर्ति को, तो कोई चिन्ह को ये सभी ध्यान से बहुत दूर है, ये सब मानव के लिए हानिकारक है |
आज ये लोग विकार को सामान्य करने के जगह समझ रहे है विकार को मारना है | और विकार को मारने के लिए कोई विवाह नहीं कर रहा है, तो कोई नागा ( नंगा ) बनकर फिर रहा है |
तो कोई परिवार को मोह कह रहा है, तो कोई नारी को दोष दे रहा है,
अनेको-अनेको उपाय कर रहा है,
कभी ये मानव कण-कण में खोजता है, तो कभी दीया में, तो कभी कलश में, तो कभी गुफा में, कभी सोचता है, भूखा रहने से मिलेगा, कभी कहता है, कभी दूध चढाने से, कभी बकरा काटने से |
ये मानव पहले प्रकृति हमारी रक्षा करता है, समझकर उसकी सेवा करता था |
आज ये मानव उसी पेड़ को उखाड़कर फेक रहा है, उसकी डाली को तोड़कर ला रहा है, कलश सजा रहा है,
उसके बाद ध्यान करना जाना, आज ये ध्यान से भटककर, ढोंग ढकोसला में, दिया कलश, आरती में उतर आया है, पूरा सब बर्बाद करके रख दिया है, जगह-जगह कचरा फ़ैलाने का अड्डा बनता जा रहा है |
किसने किसको महत्त्व दिया है,
संत शिरोमणि गुरुघासीदास बाबा ने सिर्फ ध्यान को महत्त्व दिया है |
ध्यान को गौतम बुध्ध ने भी किया, इसी ध्यान को ईशा मसीह ने 3 महीने तक किया, रविदास, कबीर दास, अनेको संतो ने ध्यान को महत्त्व दिया है, बांकी सब का विरोध किया है, अनेको मुनियों ने ध्यान को महत्त्व दिया है |
जितने भी संत इस समाज को उबारने के लिए आगे आये है, उनके अनुआयी आज उन्हें ही, धर्म में अनेको तरीके से, इन्ही मानवों ने कैद करने का काम किया है |
सभी ने एक ही स्वर में कहाँ है, ( एक में मिलकर रहना ही जीवन का सार है )
साईं बाबा ने भी यही कहाँ, साईं बाबा ने ख़ुद मूर्ति पूजा का विरोध किया, आज लोभी लोगो ने आज उनकी मूर्ति बनाकर पूजवाना शुरु कर दिया है |
आज ये मानव ध्यान में भटक रहे है |
कोई किसी को बड़ा बता रहा है, तो कोई किसी को छोटा,
स्वंम महादेव भी किसी का ध्यान कर रहा है, वह किस पत्थर की, या मूर्ति की पूजा नहीं कर रहा है |
लोभी लोगो ने उनको ही पूजवाना शुरु कर दिया |
इस तरह के ढोंगी लोगो से सावधान रहे,
जो मानव-मानव में भेद करें, मानव को अलग बताये, ओ घटिया लोग है, उनकी नीचता को समझना चाहिये, उनसे दूर रहना चाहिये |
अगली कड़ी का इंतजार करें |
 लेख - योगेन्द्र कुमार
फेसबुक से जुड़े फेसबुक
Previous Post
Next Post

post written by:

0 Comments: