द महान डॉ. भीम राव आंबेडकर जीवन परिचय The Gret Dr. BhimRav Ambedkar Biography in Hindi

विशेष-आप इसे स्कूल कालेज, या अन्य भाषणों में प्रिंट करके ले जा सकते है, इसकी अनुमति दी जाती है
नाम- महान डॉ. भीमराव आंबेडकर
जन्म- 14 अप्रैल 1981
पिता का नाम- रामजी मालोजी सकपाल
माता का नाम- भीमाबाई
पत्नि- अंबेडकर की शादी 1906 में नौ साल की रमाबाई से हुई थी |
जन्म स्थान-  मध्य्प्रदेश राज्य, के एक गाँव में हुआ था |

डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ज्ञान के विद्वान थे, वे उनकी माता पिता के 14 वे संतान थे, डॉ. आंबेडकर 14 वे आखरी संतान थे,
द आंबेडकर का जन्म घाटियाँ मनु द्वारा रचित जाति व्यवस्था महार जाति में हुआ था, जो जाति आज हिन्दू धर्म में आता है |
जिसे उस समय लोगो की मानसिकता ख़राब होने के कारन अछूत जाति माना जाता था, जिसे घटिया मनु द्वारा रचित वर्ग शुद्र कहते थे,
उस समय शुद्र वर्ग को लोग मानसिकता ख़राब होने के कारण, अछूत जिसे छूना तक भी मना मानते थे |

शिक्षा का विकास - भीम राव जी के पिता हमेशा शिक्षित बनने, पढने लिखने, पर जोर देते थे , वे ब्रिटिश भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवा में थे ;
रामजी सकपाल के केवल तीन बेटे, बलराम, आनंदराव और भीमराव और दो बेटियाँ मंजुला और तुलासा ही इन कठिन हालातों मे जीवित बच पाए ।
अपने भाइयो बहनों में आंबेडकर पढने लिखने में जायदा रुचिकर था, इसलिए वह आगे हाई स्कूल पड़ पाया |
1908 में वे एलफिंस्टन कॉलेज में दाखिला लेने वाले पहले दलित बच्चे बनें.
भीमराव अम्बेडकर करीब 9 भाषाएँ जानते थे
बाबा साहब ने 21 साल तक लगभग सभी धर्मों की पढाई की |
बाबा साहब के पास कुल 32 डिग्री थी. वो विदेश जाकर अर्थशास्त्र में P.H.D. करने वाले पहले भारतीय थे.
नोबेल प्राइज जीतने वाले अमर्त्य सेन अर्थशास्त्र में इन्हें अपना पिता मानते थे
.
आंबेडकर का नाम आंबेडकर कैसे हुआ - एक ब्राह्मण शिक्षक महादेव अंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे, उन्होंने ने आंबेडकर का नाम रजिस्टर में आम्बेडकर लिख दिया, जो उनके गांव के नाम "अंबावडे" पर आधारित था।

29 अगस्त 1947 को अंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए आमंत्रित किया गया, क्योकि देश भर में डॉ.भीमराव आंबेडकर के जितना पढ़ा लिखा ज्ञानी, होनहार मेहनती कोई और महिला या पुरुष नहीं था; तथा
बाबा साहब को सविधान सभा का अध्यक्ष चुना गया |

भारत का सविधान बनने में

2 वर्ष
11 माह
18 दिन लगे थे,

भारत का सविधान दुनिया का सबसे बड़ा सविधान है, जो बाबा साहब आंबेडकर के द्वारा लिखा गया,
26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया।
और भारत का सविधान 26 जानवरी 1950 को लागु हुआ जिसे आज गड्तंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है |
झंडे में अशोक चक्र डॉ. भीम राव आंबेडकर जी ने ही लगवाए थे,

सविधान पूर्ण बनने के बाद बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा था,

"मैं महसूस करता हूं कि संविधान, साध्य (काम करने लायक) है, यह लचीला है पर साथ ही यह इतना मज़बूत भी है कि देश को शांति और युद्ध दोनों के समय जोड़ कर रख सके। वास्तव में, मैं कह सकता हूँ कि अगर कभी कुछ गलत हुआ तो इसका कारण यह नही होगा कि हमारा संविधान खराब था, बल्कि इसका उपयोग करने वाला मनुष्य अधम था।"

आंबेडकर द्वारा तैयार किया गया सविधान, सवैधानिक गारंटी के साथ-साथ, भारत के हर व्यक्ति को एक व्यापक श्रेणी की नागरिकता, और स्वतंत्रता प्रदान करता है,
जिसमे, आर्थिक, धार्मिक, राजनितिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, प्रदान करता है; साथ ही साथ भेदभाव को गैर क़ानूनी भी करार दिया गया है,
उन्होंने पिछड़े हुए जाति के लिए आरक्षण का प्रावधान किया -जिसमे अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, और अन्य पिछड़ा वर्ग आता है |
लोग यह समझते है की बाबा साहब ने सिर्फ अछूतों के लिए काम किया ये उन्हा अज्ञान है |
भीमराव अम्बेडकर भारत के पहले कानून मंत्री थे.

धर्म परिवर्तन- 14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर में बाबा आंबेडकर ने एतिहासिक घोसडा किया, धर्म परिवर्तन का- और उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया -आखिर बौद्ध धर्म ही क्यों,
उन्होंने कहा- संसार में बौद्ध धर्म ही एक ऐसा धर्म है, जो समाज को एकता के सूत्र में बांधता है, इस धर्म में कोई जाति नहीं, सब एक सामान है और हिन्दू जैसा वर्ग जतिव्यस्ता नहीं है, एक दिन जब लोगो को इस ज्ञान की समझ होगी, तो उस समय सभी बुद्धा हो जायेगें |
आज मै हिन्दू धर्म का त्याग करता हूँ, और प्रतिज्ञा लेता हूँ, की हिन्दू धर्म के देवी देवता का पूजा नहीं करूँगा, | और न ही उन पर विश्वास करूँगा, और न कभी मंदिर पूजा के लिए जाऊंगा |
और उस दिन लाखो लोगो ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ बौद्ध हो गए |

डॉ. भीमराव जी बहुत समय से मधुमेह से पीड़ित थे, 6 दिसंबर 1956 को महान  डॉ. भीमराव आंबेडकर जी का निधन हो गया |
और वे हमेशा के लिए जीवित हो गए हमारे, सविधान, हम सब की सांसो में , रग-रग में |
जय भीम, जय भारत

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