Feb 17, 2019

छत्तीसगढ़ सतनामी समाज की पूरी जानकारी |
satnami samaj ki puri jankari

Chhattisgarh me satnami logo ki sankhya karib 50 Lakh hai,
Satnami Samaj Murti Pooja Nahi Karta,
Aur Na Hi Mas Khate hai,
Satnami Samaj ke Log Nasha Nahi Karte,

Satnami Samaj ke log Hindu Nahi Hai,
Satnam Ek Marg Hai, Koi Jati Nahi Hai,

Satnami Samaj ke log Sindur Nahi Lagate, Chandan Lagate hai, Aur Na hi Mangal Sutra Pahante hai,
Vivah me Poolmala aur Chandan Pan Karte hai,

Satnami Samaj me Mundan Nahi Kiya Jata,

Satnami Samaj me Mrityu Bhoj Me Mithai Nahi Banta Jata,

Satnami Smaj ke Log Devi Devtao Ki Pooja Nahi karte, Videshi Logo ki Gulami Pratha,
Ganesh, Durga, Kali, Ramayan, MahaBharat, Krishna, Bhagwat, Shni, Bajrang bali, is tarah ke kisi bhi devi devtao ki pooja nahi karte aur n hi chanda dete hai.

Satnami Samaj me Kisi Prakar Ka Koi Chhut Achhut, Pap, Punya, Nahi Mana Jata,

Satnam Marg me Baba Guru Ghasidas Ko Guru Mana Jata hai,
Aur Koi Guru Nahi Hai.
#ब्राम्हणवाद #मनुवाद का अंत और #आंबेडकरवाद अभियान कैसे सफल होगा |

ब्राम्हणवाद मनुवाद का अंत और आंबेडकरवाद अभियान


bramhanwad manuwad ka ant aise hoga

#मूलनिवासी या #दलित कहे तो, एस.टी., एस.सी., ओबीसी, आते है इनमे
आप तो भली भाती जानते होंगे की ब्रम्हान्वाद और मनुवाद क्या है, सीधे बात करते है, पॉइंट के ऊपर हमें क्या करना है |
भारत देश ऐसा है, यहाँ कोई भी अपनी विचारधारा को रख सकता है, किसी के ऊपर कोई दबाव नहीं डाल सकते है |
ब्रम्हान्वाद और मनुवाद किसी को कार्य करने के लिए विवश तो नहीं कर रहा बस, करने के लिए मन में डर दिखा रहा है |
और लोग समझ लेते है, यही हमारी प्रथा है |
क्या ब्राम्हणों को समझाने से समाज शिक्षित हो जायेगा |
क्या ब्राम्हणों को समझाने से लोग ढोंग को त्याग देंगे |
क्या ब्राम्हणों को समझाने से लोग समझ जायेंगे |
बिलकुल नहीं, तो करना क्या है |
एक ब्राम्हण है जो लोगो से कह रहा है, आपके ऊपर शनि है, और शनि के ऊपर 1 लीटर तेल चढ़ाना होगा |
आप किसे समझोगे |
उस ब्राम्हण को या उस आदमी को जो तेल चढाने वाला है |
अगर कोई होली खेल रहा है तो किसे मना करोगे, उस खेलने वाले को, या किसी दुसरे को |
अगर ब्राम्हणों ने गलत नियम बनाया है, अगर जान कर उस नियम आप पालन करते  है, तो आप भी गलत है, ध्यान रहे |
अगर कोई राजश्री बेच रहा है, तो जो खा रहा है वह भी, जानबुझकर गलत कर रहा है, अगर किसी में इंतनी ताकत है, की पुरे कंपनी को बंद कर दे, या उस व्यक्ति को समझाए, जो खा रहा है, कितने बेचने वाले को समझोगे, अगर बेचना जायज है तो |
यहाँ तक आप समझ गए, समझाना किसे है |
व्यक्ति को, लोगो को ,समझाना है, जो ऐसा कर रहा है, मगर कैसे समझाना है,
आज के समय में अनेक प्रकार के लोग है, किस-किस को समझाओगे, और किस माध्यम से समझाओगे |
कोई बहरा है, तो कोई गूंगा, कोई कोई पागल है, तो नासमज, कोई अनपड़ है, तो किसी को पड़ना नहीं आता, किसी की आँखे कमजोर है, तो कोई कुछ और अनेक तरह से |
इन्टरनेट के माध्यम से समझाओगे, facebook के माध्यम से बताओगे |
Whatsapp के माध्यम से बताओगे, लिख कर भेजोगे, या विडियो बनाकर, कितने लोग देखेंगे |
यह तो सभी कर रहे है, कभी इसकी बुराई तो कभी उसकी बुराई |
मानता हूँ की यह सोशल साईट हमारा सबसे बड़ा हथियार है, मगर इसका उपयोग हमें सही तरीके से करना होगा |
किसकी बुराई करोगे, उम्र गुजर जायेगा, बुराई करते-करते, कोई एक भी नहीं सुधरेगा |
चलो मान लिया 10 भी सुधर गए, क्या इससे कुछ होने वाला है |
आज लोगो के मन में ये छोटा जात का ये बड़ा जात का, ये उस धर्म का ये इस धर्म का, ये मेरा ये तेरा, आपस में ये मनुवादी लडवा रहे है |
तो करें तो करें क्या, इसे समझो
#योगेन्द्र_कुमार #योगेन्द्र #Yogendra #Yogendra_Kumar
आज के समय में अनेक प्रकार से लोग काम कर रहे है, जैसे राजनीतिक पार्टी, संगठन जैसे #भीम_आर्मी, बामसेफ, DS4, और भी अनेक तरह के |
आज के समय में देश #मनुस्मृति से नहीं #संविधान से चलता है |
आज मनुवादी बड़े प्रेम से सभी जगह-जगह पहुँच रहे है, लुभावने आयोजन कर रहे है, विवाह, मुंडन और अनेक प्रकार के रीति रिवाज को करवा रहे है, और लोग कर रहे है, ये नहीं जानते की ये गुलाम बनाने की तैयारी चल रही है, गरीब बनाने की प्रथा का सुरुआत है, एक दिन इनको इतना विवश कर दिया जायेगा, की ब्राम्हण के बिना कोई कार्य नहीं होगा |

आज भी ओबीसी समाज और अन्य मूलनिवासी समाज की इतनी औकात नहीं की अपने बच्चे का नाम क्या रखना है, यह सोच पाए, जायदा नहीं तो फिर से राशि के चक्कर में पड़ेंगे, ग्रह नक्षत्र देखेंगे |
आज लोग अनेक जाति और समाज में बंटे हुए है,
एक व्यक्ति, और परिवार, पूरा गाँव, इकाई, सेक्टर, 100 गवा तहसील इकाई, जिला इकाई, राज्य इकाई, और देश, पूरा विश्व |
आज लोग किसी-किसी को ही समझाने का काम कर रहे है, और कोई-कोई पूरा समाज को समझाने का काम कर रहा है, तो कोई-कोई पुरे गाँव को समझाने का काम कर रहा है |

लोगो को किस प्रकार से जागरूक करें |

आप किसी खास-खास लोगो को एक-एक करके समझा सकते है,
अगर किसी एक समाज को टारगेट करके समझायेंगे, तो भेदभाव आ जायेगा |
इसलिए पुरे गाँव को, सर्व समाज को समझाने की जरुरत है |
लेकिन गाँव में तो अनेक प्रकार से, बच्चे, युवा, जवान, बुजुर्ग, महिला, लडकियाँ रहते है |
कैडर करोगे तो गिने चुने लोग ही आयेंगे, मोहल्ले से, ओ भी महिला बहुत कम आयेंगे |
सबसे जरुरी ध्यान देने वाली बात, जो अभियान चलाता है, उस व्यक्ति को देखकर ही समाज आगे बढ़ता है, इसलिए व्यक्ति का चरित्र, और बात करने का तरीका, व्यक्ति समझदार और शिक्षित हो |

आपको 4 विषय को लेकर कार्य करना है |

1. मनुवाद के बारे में बताना, जागरूक करना, मनुवाद से निकालना |
2. शिक्षा के प्रति जोर देना, Tuition देना, शिक्षित करना |
3. उसके बाद संगठित करना, सभी में एकता की भावना, मिलकर कार्य करना |
4. और अंतिम में संघर्ष करना |

यह कार्य किसी राजनीति पार्टी के द्वारा न हो तो बेहतर है, इससे यह अभियान कमजोर हो सकता है |

किस तरह करें अभियान की शुरुआत |

लोग आपकी बात क्यों सुने, आप उनकी वास्तविक भलाई की बात करें |
मनुवाद से लोग किस तरह से गरीब हो रहे है, इसको बताये |
#मनुवादी_त्यौहार, जयंती के 15 दिन पहले, लेख अभियान, प्रिंट करके घर-घर बांटे |
लोगो को समझाए, ब्राम्हणों से किसी प्रकार का कोई भी रस्म, पूजा पाठ, विवाह कुछ भी न करवाए |
फिर पुरे गाँव के लोगो को एकता के सूत्र में रहने के लिए कहे |
अपने पैसे को फालतू, टेंट, और अन्य में खर्च न करें |
गाँव में कुछ भी मनुवादी त्यौहार होता है, तो उससे पहले ही सजग हो जाये, लोगो को समझाए, यह गुलाम बनाने के लिए उपहार में दिया गया है |
लोगो को ध्यान कराएँ, यह ध्यान किसी धर्म से सम्बंधित न हो, न किसी का नाम जपे, बस योग की तरह |
समाज से आग्रह करें, मूर्ति पूजा न करें, इन मनुवादियों के गुलामी प्रथा से दूर रहे |
बच्चो के ऊपर ध्यान देवे |
यह अभियान में गाँव के हर व्यक्ति को जागरूक करें |
किसी से कोई धर्म परिवर्तन न कराये |
यह अभियान निरंतर जारी रखे, हर दिन प्रत्येक दिन, अपने गाँव को प्राथमिकता दे, जो परिवार सुधर सकता है, उस पर जायदा ध्यान दे |
मोक्ष की बात आये तो कहे, कर्म से ही मोक्ष मिलता है, इस संसार में कोई नहीं मोक्ष देने वाला |
( बच्चे से लेकर 25 वर्ष तक के व्यक्ति के ऊपर सबसे अधिक ध्यान देवे |
बच्चे ही, यही आगे के भविष्य है, इन्हें सुधार लोगे तो समाज सुधर जायेगा  )
मनुवादी शिकारी के जाल से, इन मूलनिवासी पक्षी को बचाते रहे |

ऐसा अभियान हर गाँव में चलाओ |
यह सभी एक झटके में नहीं होगा |
लोगो से कुछ ऐसा न कहो जिससे उनकी भावना को ठेस पहुंचे |

अभियान चलाने के लिए पैसे कहाँ से आयेंगे ?

हर घर से चंदा मांगे, जो नौकरी कर रहे है वह,3 से 5% प्रत्येक मंथ देवे |
जो लोग मूर्ति पूजा नहीं करते, नशाखोरी नहीं करते, इनको सम्मानित करने का काम करें |
जो लोग इस अभियान में आगे बढ़ रहे है, उनका फूलमाला, पुस्तकों, किताब, पेन से सम्मानित करें |
घर-घर में मूलनिवासी लिख दो, हम इस देश के शासक है |
यह अभियान प्रत्येक दिन जारी रहे, बच्चो को प्रत्येक दिन Tuition देवे, अगर पैसे अभियान के लिए न हो तो, बच्चो के पालक से 30 रूपये महीने, या देखकर ले सकते है, इस पैसे का 50% अभियान में और बांकी पढ़ाने वाला रख सकता है, अर्थात पढ़ाने वाला अपना 50% अभियान को दे रहा है |
किसी से लड़ना नहीं करना , डरना नहीं, अपना अभियान जारी रखना, कुछ भी हो जाये, यह अभियान जारी रहे |
कुछ भी आन्दोलन का समय आता है तो, इस टीम से संघर्षकारी लोग आगे आयेंगे, बांकी अपना काम करेंगे |
चतुर शिकारी ने रख्खा है, जाल बिछाकर पग-पग पर |
भूल न जाना तू पगले, नहीं तो पछतायेगा जीवन भर ||
अर्थ – इन ब्राम्हणों, क्षत्रियो, और वैश्यों के जाल से बचना |

किसी प्रकार की समस्या के लिए मुझसे संपर्क कर सकते है |
Yogendra Kumar 09131880737
www.facebook.com/yogendragyan
#Yogendra_Kumar   #Yogendra  #Mulnivasi  #मनुवाद  #मनुवादी  #मूलनिवासी  #ब्राम्हणवाद  #भीमवाद #जय_भीम  #ब्रम्हान्वाद_का_अंत  #मनुवाद_का_अंत #bramhanwad #bramhanwadkaant
#चोटी_का_अंत  #भीम_मिसन #एंटीना_का_अंत

Feb 10, 2019

फेस बुक खाता खोले, Naya Facebook Account Banaye How to create new facebook Account
फेसबुक क्या है,
फेसबुक एक सामाजिक सेवा वेबसाइट है, जिस पर लोग अपना अकाउंट बनाते है,
और बहुत सारे फेसबुक, ग्रुप, पेज से और मित्रो से जुड़ते है,
facebook में यूआरएल को लिंक किया जा सकता है,
फोटो को डाला जा सकता है,
विडिओ को डाला जा सकता है,
ऑडियो और बहुत कुछ को डाला जा सकता है,
और उसे एक दुसरे को शेयर कर सकते होते है और कमेंट भी कर सकते है,
आज के समय हर कोई का facebook खाता है,
चाहे वह किसी व्यक्ति का हो, किसी संगठन जैसे
स्कूल कालेज, कोई कंपनी या कोई समाज |
तो आप आप जाने की कैसे अपना facebook खाता खोल सकते है,
इसके लिए कोई कोर्स करने की कोई जरुरत नहीं है,
धीरे धीरे आप सब सिख जायेंगे |

खाता बनाने के लिए,




नीचे लिंक को ओपन करें
www.facebook.com
facebook create account

Frist Name लिखे उसके जगह में इसी तरह से
SurName,
Mobile Number Ya Email ID
डाले,
अपना जन्म दिनांक डाले,
आप महिला है या पुरुष या सेलेक्ट करे,
और Create Account में क्लिक करे,
आपने जो मोबाइल या ईमेल डाला है उसमे OTP पासवर्ड जायेगा उसे डाले आपका
facebook खाता तैयार है, आप अपना फोटो और प्रोफाइल को सेट कर लेवे, |

Feb 8, 2019

प्रेम विवाह के लाभ और हानि – मेरे विचार – योगेन्द्र धिरहे
प्रेम विवाह के लाभ और हानि
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इस लेख में मैंने अपने विचार रखे है, मेरा किसी जाति या धर्म या अन्य कोई और को ठेस पहुचना नहीं है, मै अपने विचार पर कायम हूँ |
"सोना चमक रहा है, यह बड़ी बात नहीं मेरे लिए, बड़ी बात तो यह है, की वह कैसे चमक रहा है |"
व्यक्ति समाज की परेशानी को नकार दे ,मगर वह परेशानी जब अपने पर आती है तब सब समझ आता है,
प्रेम विवाह भी इसी सामाजिक समस्या का एक स्वरुप है,
इस पृथ्वी में ना जाने कितने सारे देश है, मगर उनमे से भारत एक अनोखा देश है, जहाँ ज्ञान का भंडार होते हुए भी लोग मुर्ख बने रहना ही पसंद करते है ,
वर्तमान समय में हर व्यक्ति का संबंध किसी न किसी धर्म से अवस्य होता है,
और धर्म के बाद भारत में वर्ण व्यवस्था, उसके बाद हर वर्ण की जाति, और गोत्र,
भारत देश में वैसे तो अनेक धर्म पाए जाते है, मगर हिन्दू धर्म को आज समझ लेते है, वर्ण व्यवस्था में,
ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, और शुद्र,
विवाह के नियम- शुद्र सिर्फ शुद्र से ही विवाह कर सकता है,
वैश्य सिर्फ वैश्य और शुद्र से विवाह कर सकता है,
क्षत्रिय सिर्फ क्षत्रिय और वैश्य और शुद्र तीनो से विवाह कर सकता है, और
ब्राम्हण, किसी से भी विवाह कर सकता है,
इसमें बहुत बड़ी दुविधा भी है, हर वर्ण के बहुत सारे जाति है, और अंतिम में बात कही पर आती है, वह है जाति,
जो व्यक्ति जिस जाति का होगा, वह उसी जाति के व्यक्ति से विवाह कर सकता है, जाति के अन्दर अनेक प्रकार के गोत्र होते है, अगर लड़की लड़का एक गोत्र से हो तो समाज शादी के लिए अनुमति नहीं देता, |
विवाह के वैसे तो अनेक प्रकार होते है, आज हम दो तरह के विवाह के बारे में बात करेगे,
एक पारिवारिक विवाह और दूसरा प्रेम विवाह,
जीवन भी अनेक प्रकार से जिया जाता है, एक सोचकर समझकर और दूसरा प्रकृति के नियम से,
पारिवारिक विवाह के लक्षण – इस विवाह में लड़का और लड़की के घर वाले मेल जोल करते है, हर चीज को और लड़का लड़की को देखता है, कही कही तो बात भी नहीं करते, और सिर्फ देखकर ही शादी कर लेते है,
यह परिवार की सामने होती है, पुरे रस्मो रिवाज के साथ, इस विवाह में पुरे समाज को रिश्तेदारों को, दोस्तों मित्रो को बुलाया जाता है, और बाराती के साथ दुल्हन को लड़का अपने घर ले जाता है |
प्रेम विवाह के लक्षण – प्रेम विवाह में लड़का और लड़की एक दुसरे को पसंद करते है, इस विवाह में कोई तीसरा नहीं होता न दोस्त, न रिश्तेदार, न परिवार, न समाज, और न अन्य इस विवाह में लड़के और लड़की की शादी अपनी मर्जी से होती है |
विवाह से तापतर्य :- किसी का भी विवाह से तापतर्य शाररिक सुख, और साथी, और वंशवाद, होता है, सभी प्रकार के विवाह में यही नियम लागु होते है,
पारिवारिक विवाह सोचकर विचारकर, हर नियम धर्म, वर्ण, वंश, जाति गोत्र को देखकर किया जाता है, तो वही प्रेम विवाह में इस तरह के किसी भी नियम को नहीं देखा जाता, प्रेम विवाह में एक ही नियम लागु होता है |
“ लड़का लड़की राजी तो क्या करें काजी “ का नियम चलता है,

मै व्यक्ति के जीवन को किस तरह से देखता हूँ,

जिस तरह से अन्य जीव होते है, उसी तरह से मानव जीवन भी होता है , फर्क बस इतना है, व्यक्ति जीव से होते हुए, अपनी ज्ञान और प्रकृति के नियम से व्यक्ति बन गया है,
रही बात धर्म की,
पुराने ज़माने की जीने की कला को धर्म बना दिया गया,
और रही बात वर्ण की, मैंने अरबो लोगो की इस मानसिक बिमारी का शिकार पाया है, और मुंह से बच्छे पैदा होते नहीं देखा, और ना सुना आज के समय में,
और रही बात जाति की, यह समुदाय का नियम है, और कर्म के अनुसार लोगो को बाँट दिया गया है,
और रही बात गोत्र की यह भी एक भ्रम है,
प्रेम विवाह अगर रिश्तेदारी बंधन में जो मान्य नहीं उसे गलत मानता हूँ, जो गुरू तुल्य और सगे हो |
मै समाज की रस्मो को नकारता हूँ, मै जन्मो के बंधन को नकारता हूँ, मै शादी में जन्मो के बंधन को नहीं मानता,
“कागज के दो पन्नो पर, हो नहीं सकता प्यार का फैसला |
प्यार तो अपनों से बनता है निभाने वालो का है फैसला ||”

व्यक्ति के एक जन्मो का भरोसा नहीं, न जाने कितने बार तलाक हो रहे है, तो किस्से साथ, साथ जन्म का बंधन,

प्रेम विवाह के लाभ और हानि

प्रेम विवाह में लड़की को मै दुःख को पोटली, और सुख का साधन भी मानता हूँ,
यह सभी स्थिथि और परिस्थिथि , और प्रेमियों के मानसिकता के ऊपर है,
जाहिर है यह विवाह समाज में न होकर, भागने वाला विवाह है, मै जिस विवाह की बात कर रहा हूँ, वह लड़की की परिवार की मर्जी के खिलाफ, समाज और धर्म से परे है,
अगर लड़का, लड़की से विवाह करता है तो, तो लड़की के लिए लड़का ही सब कुछ है, वही परिवार, वही पति, वही सबकुछ, क्योकि लड़की के लिए उसका परिवार पहले छुट चूका होता, न पिता न माँ, न बहन, न रिश्तेदार, लकड़ी के लिए अपना पति ही सब कुछ है,
अगर लड़की परिवार में ख़ुशी लाती है, तो खुशी का पिटारा, और अगर वही कुछ गलत करता है तो उस समय लड़की, लड़का के लिए दुःख का पिटारा के सामान है,
प्रेम विवाह में घर को खुशी से सजाने का सबसे जायदा दायित्व लड़की के ऊपर होता है, लड़की को हमेशा खुशी देने की कोसीश करनी चाहिए, और लड़के को लड़की को यह बिलकुल भी एहसास नहीं होने देना चाहिए की, तुम अपनी माँ बाप परिवार से बिछड़कर ख़ुश नहीं, लड़के को लड़की के लिए यह प्रेम आवश्यक है,
समाज में हर कोई इस बात से परिचित है, की जाति नाम का कोई चीज नहीं होता, यह तो बस समाज के डर से वह मान बैठता है, पर वास्तव में सभी इसे स्वीकार करते है की जाति नहीं होता,
लड़के के परिवार वालो को लड़के का साथ देना चाहिए, समाज परिवार से अपने बच्चों की ख़ुशी से बढकर नहीं होता |
प्रेम विवाह के बाद सबसे बड़ी खुशी का नियम और दुःख को दूर करने का उपाय यही है, की कभी अपने मन में नहीं सोचना की मैंने प्रेम विवाह करके गलत किया है, और लड़के या लड़की को अपनी बुध्धि भ्रष्ट करके यह नहीं सोचना या किसी से बोलना चाहिए की मै छोटी जाति का या बड़ी जाति इस तरह  से जाति नाम के इस कीड़े को अपने से दूर रखना चाहिए |
समाज का दबाव - प्रेम विवाह में समाज का दबाव रहता है, और समाज पूरी तरह से इस तरह के चीजो के ऊपर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिस करता है, समाज और जाति को लगता है, की 
:- यह हमारे जाति का, धर्म का, परिवार का, गोत्र का, अमीरी का, ग़रीबी का, मेरे अहम् का, 
या 
:- अगर इसी तरह से सभी गैर विवाह करने लग जाए तो, अपने समाज का क्या होगा |
इसलिए समाज प्रतिबन्ध लगाता है, पर इससे आपको डरना नहीं चाहिए,
"वह समाज सबसे घाटियाँ है, जो गैर विवाह करने पर लड़की या लड़के वालो से समाज पैसे की मांग करता है "
यह नियम अपने ही समाज के लोगो को गरीब से गरीब बनाने का नियम है, अरे अभी तो उसने समाज के बंधन को तोडा है, उसे थोड़ा परिवार चलाने का हिम्मत तो दो, तुम तो उसकी जीने का हक़ ही झिन रहे हो,
आपके लिए खुशी की बात है, कोई तो है जो दो पक्षों को जोड़ने का कदम उठाया है, और उसे तुम उल्टा डाट रहे हो, यह गलत है इसे समाज जाओ, नहीं तो यह प्रेमी जोड़े, तुम्हारे बंधन को तोड़ने के लिए और आगे आयेंगे,
कितनो को रोकोगे, कितनो को टोकोगे, 
जितना रोकोगे उतना, बढेगा, जितना टोकोगे, उतना सोचेगा,
प्रेम विवाह सबसे उत्तम विवाह है, 
अपने विचार कमेंट करके जरुर बताये,
लेखक एवं सामाजिक विचारक -योगेन्द्र धिरहे,
नीचे whats app में या Facebook में अपने मित्रो को साथ जरुर शेयर करें |
धन्यवाद् 

Feb 6, 2019

लोग क्यों भटक रहे है ? पत्थर में तो कभी पूजा पाठ में, और कब से |
kyo bhatak rahe hai log kabhi mandir to kabhi masjid me

लोग अनेक प्रकार के पूजा पाठ, नियम क्यों करते है |

मानव ने जब से जीवन को जीना शुरु किया है, तब से उसे हमेशा लगा है, की कोई न कोई है, जो उसकी रक्षा करता है, इस तरह से,  उन्होंने प्रकृति की पेड़ पौधों की पूजा करना शुरु किया |
उसके शिक्षा का ध्यान का महत्त्व अनेक जगहों में देखने को मिलता है,
आज क्या हो रहा है, लोग अपनी मन की भटक के लिए इतना भटक रहे है, की उसे पता नहीं है, की वह क्या कर रहा है |
कुछ लोग मंदिर जाना, मस्जिद जाना, चर्च जाना, गुरुद्वारा जाना, अनेक जगहों पर रोज जाते है |

मन क्यों भटकता है ?

मन में जब विकार आते है, तो मन स्वभाविक तरीके से उसे सोचने लगता है |

विकार क्या है ?

मन जब किसी चीज के बारे में सोचने लगता है, मन में कोई भाव किसी के लिए पैदा होता है, उसे विकार कहते है |
इसी विकार को शांत करने के लिए आज लोग भटक रहे है,
शरीर में 5 प्रकार की ज्ञान इन्द्रिय होती है |
जिनसे हम ज्ञान अर्जन करते है,
कान से सुनकर,
आँख से देखकर,
जीभ से स्वाद चखकर,
नाक से सुगंध लेकर,
त्वचा से स्पर्श करके,
इन्ही के द्वारा विकार पैदा होता है,
इनको ही समान्य अवस्था में लाना है,
लोग आज भटक रहे है,
कभी पत्थर को देखकर ध्यान लगाने की कोशिश करते है, तो कोई तस्वीर को, तो कोई मूर्ति को, तो कोई चिन्ह को ये सभी ध्यान से बहुत दूर है, ये सब मानव के लिए हानिकारक है |
आज ये लोग विकार को सामान्य करने के जगह समझ रहे है विकार को मारना है | और विकार को मारने के लिए कोई विवाह नहीं कर रहा है, तो कोई नागा ( नंगा ) बनकर फिर रहा है |
तो कोई परिवार को मोह कह रहा है, तो कोई नारी को दोष दे रहा है,
अनेको-अनेको उपाय कर रहा है,
कभी ये मानव कण-कण में खोजता है, तो कभी दीया में, तो कभी कलश में, तो कभी गुफा में, कभी सोचता है, भूखा रहने से मिलेगा, कभी कहता है, कभी दूध चढाने से, कभी बकरा काटने से |
ये मानव पहले प्रकृति हमारी रक्षा करता है, समझकर उसकी सेवा करता था |
आज ये मानव उसी पेड़ को उखाड़कर फेक रहा है, उसकी डाली को तोड़कर ला रहा है, कलश सजा रहा है,
उसके बाद ध्यान करना जाना, आज ये ध्यान से भटककर, ढोंग ढकोसला में, दिया कलश, आरती में उतर आया है, पूरा सब बर्बाद करके रख दिया है, जगह-जगह कचरा फ़ैलाने का अड्डा बनता जा रहा है |
किसने किसको महत्त्व दिया है,
संत शिरोमणि गुरुघासीदास बाबा ने सिर्फ ध्यान को महत्त्व दिया है |
ध्यान को गौतम बुध्ध ने भी किया, इसी ध्यान को ईशा मसीह ने 3 महीने तक किया, रविदास, कबीर दास, अनेको संतो ने ध्यान को महत्त्व दिया है, बांकी सब का विरोध किया है, अनेको मुनियों ने ध्यान को महत्त्व दिया है |
जितने भी संत इस समाज को उबारने के लिए आगे आये है, उनके अनुआयी आज उन्हें ही, धर्म में अनेको तरीके से, इन्ही मानवों ने कैद करने का काम किया है |
सभी ने एक ही स्वर में कहाँ है, ( एक में मिलकर रहना ही जीवन का सार है )
साईं बाबा ने भी यही कहाँ, साईं बाबा ने ख़ुद मूर्ति पूजा का विरोध किया, आज लोभी लोगो ने आज उनकी मूर्ति बनाकर पूजवाना शुरु कर दिया है |
आज ये मानव ध्यान में भटक रहे है |
कोई किसी को बड़ा बता रहा है, तो कोई किसी को छोटा,
स्वंम महादेव भी किसी का ध्यान कर रहा है, वह किस पत्थर की, या मूर्ति की पूजा नहीं कर रहा है |
लोभी लोगो ने उनको ही पूजवाना शुरु कर दिया |
इस तरह के ढोंगी लोगो से सावधान रहे,
जो मानव-मानव में भेद करें, मानव को अलग बताये, ओ घटिया लोग है, उनकी नीचता को समझना चाहिये, उनसे दूर रहना चाहिये |
अगली कड़ी का इंतजार करें |
 लेख - योगेन्द्र कुमार
फेसबुक से जुड़े फेसबुक
#आदिकाल का जीवन कैसा रहा | - by Yogendra Kumar

#आदिकाल का जीवन कैसा रहा |

प्रारम्भिक काल में अनेक प्रकार के जीव होते थे, उस समय जीव बहुत तेजी से बढ़ते थे, प्रारम्भिक में यह मानव आदि मानव कहलाता था |
करोड़ो वर्षो के संघर्ष के बाद आज मानव यहाँ तक इस सदी में पहुंचा है,
यह जीवन काल बिलकुल वैसा ही है, जैसा वैज्ञानिक शोध करके बता रहे है,
जैसे हमने लौह युग, कास्य युग, पहले यह मानव जानवर की तरह था,
आज भी हममे और जानवर में कोई जायदा अंतर नहीं है |
हम भी तो जानवर है, लेकिन हमने अपने आप को मानव का नाम दे दिया है,
पहले का जीवन काल, खाना के लिए संघर्ष करना, खंडरो, पहाड़ो, गुफाओ में रहना,
खाने के रूप में कंद, फल, फुल भोजन के रूप में लेते थे |
जब मानव जीवन की शुरुआत हुई थी, तो किसी प्रकार का कोई नियम नहीं था, लोगो का सिर्फ एक ही कार्य होता था, खाना के लिए संघर्ष, खानाबदोश जीवन,
उस समय, न भाषा था, न बोली था, न किसी का नाम था, न जाति था, न धर्म था, जानवरों की तरह आवाज निकालना |
धीरे-धीरे मानव विकाश की ओर बढ़ चला,

मानव सबसे बुध्धिमान जीव क्यों होता है |

निरन्तरता ही मानव को सबसे बुध्धिमान बनाता है,
शरीर का बनावट ही मानव को सबसे बुध्धिमान बनाता है,
मानव का शरीर सबसे लचीला होता है, किसी भी चीजो को बहुत आसानी से पकड़ सकता है |
कोई जन्म से कुछ भी नहीं है, बच्चा जन्म लेने के बाद असहाय होता है, ख़ुद ओ कुछ नहीं कर पाता, धीरे-धीरे उसका विकास होता जाता है, वह जन्म लेने के बाद से सीखता जाता है, आँखों से देखकर, कान से सुनकर, हांथो से छूकर, खाने का स्वाद लेकर, अपने अनुभव से सब कुछ सीखता है |
कोई मानव जन्म से बुध्धिमान नहीं होता है,
जीवन की इस परिभाषा को आपने समझ तो लिया लेकिन इस ज्ञान को हम अपने जीवन में किस तरह से लागु कर सकते है, इसको जानने के लिए, समझने के लिए जुड़े रहे
www.fb.com/yogendragyan

Feb 5, 2019

आदिवासी कौन है ? गर्व है आदिवासी होना |

aadiwasi koun garv se kaho ham aadiwasi hai
ST के अन्तर्गत आने वाले लोगो को आदिवासी कहाँ जाता है, जो लोग आदिवासियों को नहीं जानते उनको जान लेना चाहिये, की आदिवासी कौन है,
और इन्हें आदिवासी क्यों कहाँ जाता है |
आदि, अर्थात पहले का, जिसका शुरु का पता न चलता हो, या कह सकते है बहुत पुराना |
वासी, अर्थात वास करने वाला, रहने वाला, रहन करने वाला |
इस तरह से जो बहुत पहले से आदिकाल से रहते आ रहे है, उन्हें आदिवासी कहते है, आदिवासी कोई गाली या गलत शब्द नहीं है |
आदिवासी कहलाना गर्व है |
क्योकि जो आदिकाल से रहते है, वास कर रहे है, वही इस जगह के असली मालिक हुए, चूकी इनको अपनी सभ्यता से बहुत प्यार है, इसलिए ये आज भी जंगलो में, पहाड़ो में, खान पान पुराने तौर तरीके से, ये लोग बहुत सरल स्वाभाव के होते है |
जल जंगल जमीन के वास्तविक मालिक होते हुए भी आज ये भटक रहे है, क्योकि जंगल में रहने के कारण, उचित मात्रा में शिक्षा का और आधुनिक युग का भरपूर उपयोग नहीं कर पा रहे है |
इसलिए लोग आज इनका मजाक उड़ाते है, यह बहुत गलत है |
सरकार भी इनकी तरफ धयान नहीं दे रही है, तभी तो योजनाओ को सही तरीके लागु नहीं करती |
आज इनकी जल जंगल और जमीन को इनसे छिनी जा रही है, और ये अशिक्षित होने की वजह से कुछ कर नहीं पा रहे है |
आज इनको नक्सली बनाकर मारा जा रहा है, तो कभी ये भूखे पेट मर रहे है |
सरकार की इस फोटो कॉपी योजना में लोग गरीब हो होते जा रहे है,
दर असल इनके समाज के पढ़े लिखे लोग ही इन आदिवासियों को धोखा दे रहे है,
सरकार के साथ क्या ये, स्वंम कोचिंग सेंटर मुफ्त में नहीं खोल सकते, रोजगार के अवसर नहीं दिला सकते |
बिलकुल कर सकते है ,

संसार की उत्पत्ति का सिध्धांत ? जीवों की उत्पत्ति कैसे हुई ?
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यह संसार बन्ने से पहले कुछ तत्व धूल के कण के रूप में मौजूद थे, उस समय कुछ नहीं बन पाया था, सब धूल था |
जिसे इलेक्ट्रान, न्यूट्रोंन, प्रोटान के रूप में जाना जाता है |

धीरे-धीरे परिवर्तन होता गया, एक समय ऐसा आया की यह गुरुत्वाकर्षण के कारण आपस में जुड़ गए, और विस्पोट हुआ, सभी तत्व एक दुसरे से टकराने लगे, जुड़ने लगे, बल के कारण घुमने लगे |

इस तरह से सभी तत्व अपने-अपने समान तत्व के संपर्क में आये |
करोड़ो वर्षो तक यही प्रक्रिया चलता रहा, इस तरह से सभी ग्रह का निर्माण हुआ |
इस तरह से पृथ्वी बना, पृथ्वी में कुछ ऐसे तत्व है, जिस कारण से चन्द्रमा भी पृथ्वी के चक्कर काटती है |

यह जो भी हुआ वह सभी गुरुत्वाकर्षण खिचाव, बल घूर्णन के कारण हुआ |
पृथ्वी ग्रह बन्ने के बाद परिवर्तन |
जब यह पृथ्वी बना उसके बाद इसके अन्दर में जितने भी तत्व थे, सब गर्म अवस्था में थे, करोड़ो वर्षो तक लावा बहता रहा,
पृथ्वी में पानी की मात्रा अधिक होने की वजह से, पानी लाखों वर्षो तक बहता रहा,
इस तरह से, सागर, नदी, नाले, झील, पहाड़, पठार, बना |
जो गरम तत्व थे, जिसमे वजन की मात्रा जायदा था, वह नीचे की ओर चला गया, और जो तत्व हलके थे ओ ऊपर की ओर आ गये |

जीवों की उत्पत्ति कैसे हुई ?

जब पृथ्वी शांत हुआ, तो पानी स्थान पर रुकने लगे, जिससे काई (हरा घांस) की उपत्ति हुआ. फिर धीरे-धीरे यह घास सड़ने लगा और छोटे-छोटे जीव की उत्पत्ति हुई, मानव की उत्पत्ति भी इसी तरह से हुई, इसी पानी से सभी जीवो की उत्पति हुई, यह दौर परिवर्तन का दौर था, लेकिन प्रश्न उठता है, मुर्गी पहले आया या अंडा, तो इसका उत्तर है |

कोई भी जीव स्वंम से उत्पन्न होने से पहले एक आवरण बनाता है, उसके बाद उस आवरण में जीव का जन्म होता है |
जैसी परिस्तिथि होती है, वैसे ही जीव ढल जाता है, यह मानव भी इसी तरह से बड़ा हुआ, जितने भी मानव है, सब एक प्रजाति के अन्तर्गत आते है |
पहले यह जमीन पर चलने वाला था, जानवर की तरह, धीरे-धीरे करोड़ो वर्षो बाद उसमे परिवर्तन आया है |
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