Apr 18, 2019

आखिर लड़के के विवाह में लड़के की माँ, बहन और अन्य नारियों को बारात क्यों नहीं ले जाते - #Yogendra_Kumar
जब बच्चे का जन्म होता है, चाहे नर हो या नारी, माँ और परिवार, सभी कितने उत्साहित होते है |
जब बच्चा बड़ा होने लगता है, तो उसी के साथ उसकी जोड़ी की चाह माँ, परिवार सभी करने शुरू कर देते है |
फिर एक दिन समय आता था, जब विवाह कर दिया था |
बारात दूर गाँव से पैदल आते, कई दिनों के सफ़र के बाद पहुँचते |

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आज से 30 वर्ष 1990 अगल पहले ही जाते है, तो बैल गाड़ी, भैस गाड़ी से ही बारात जाते थे, उस ज़माने में सायकल किसी के पास होना आज के बाइक से जायदा महत्वपूर्ण था |
एक गाँव में एक सायकल, एक टी.वी. एक रेडियो, बहुत था, उस ज़माने में गाँव में अख़बार शब्द तक नहीं पहुच पाया था, आज की कार, बाइक, ट्रेक्टर, उस ज़माने में सिर्फ किसी-किसी गाँव में हुआ करती थी |
चोर-डाकू का लुटेरो का खतरा, तो वही भूतो का डर, और आज का, लाइट तो बहुत दूर की बात है, आज से 30 पहले के ज़माने में गाँव में लाइट का एक खम्भा भी नहीं हुआ करता था |
खाना पकाने के लिए, आज जलाने के लिए, एक गाँव में लोग आज की गुंडी को दिन रात जलाकर रखते, और उसी से पूरा गाँव आग जलाता |
जब बारात जाते थे, तो खाने का सामग्री, बर्तन भी मिटटी का, पानी कुआँ या तालाब का, आग गोबर से बने, छेना को आज लगाकर रखते और उसी से आज जलाते |
बहुत दिनों के सफ़र, थकान, भूख, प्यास के बाद बारात पहुचते, आज से 1990 के दशक में गाँव में अच्छी सड़क की काल्पन भी बहुत दूर थी, सिर्फ कच्ची सड़क और, खेत खलिहान |
इन्ही भूख, प्यास, चलने की समस्या, दूर सफ़र, चोर डाकू, की वजह से सिर्फ पुरुष ही बारात जाते थे, बच्चो और नारियों को नहीं ले जाया जाता था |
आज भी इसी मज़बूरी को नारी झेल रही है, कितना खवाब सजाये रहती है, नारी अपने बच्चे की विवाह की, जीवन में बच्चे की फिर बच्चे की विवाह की, और विवाह के बाद वंश की |
आज भी नारियों को बारात नहीं ले जाया जाता, क्योकि किसी ने यह सोचा ही नहीं है |
उस माँ की भी सोचो जो अपने लड़के का विवाह तक नहीं देख पा रही है |
आखिर ये कैसी मज़बूरी है, क्या आने-जाने के लिये अच्छी सड़क नहीं है |
यातायात का साधन नहीं है |
चोर डाकू का खतरा है |
तो फिर क्या खराबी है, महिलाओ को बारात ले जाने में, आखिर सभी रिश्तेदार विवाह में शामिल होने ही तो आते है |
या सिर्फ बहु का सिर्फ चेहरा देखने |
यह समस्या गाँव में देखने को जायदा मिलती है |
इस बात को आपको गहराई से समझना होगा |
आपको निर्णय लेना होगा, मैं अपनी माँ को, और समस्त रिश्तेदार नारियों को अपने विवाह में ले जाऊंगा |
तभी तो 21वी सदी का विवाह सफल होगा |

Apr 13, 2019

एक अच्छे लेखनी के गुण, एक अच्छे #लेखक में कौन-कौन से गुण होने चाहिए ?

  • जिस भी भाषा में लेख लिखे, उस भाषा में अच्छी पकड़ हो |


  • लेखनी में सबसे जायदा जरुरी विराम चिन्ह का प्रयोग सही जगह पर हो तो सही रहता है, नहीं तो इसके विपरीत पढ़ने में गलत, और अवगुण नजर आते है |


  • जिस भी विषय में लेख लिखे, उस विषय पर विचार, विमर्श और कल्पना शक्ति अत्यधिक करनी चाहिए |


  • सम्भावना को ध्यान में रखकर लेख लिखे |

    • लोगों की भावना और रूचि को ध्यान में रखकर लेख लिखे |
    • किसी भी विषय पर लिखते समय उस पर ध्यान केन्द्रित हो, उस वक्त तक लिखते रहे, जब तक लिखने का मन बना रहे |
    • जिस विषय पर लेख लिख रहे है, उस विषय पर आपकी अच्छी जानकारी हो, तभी आप उसे बेहतर तरीके से लिख पायेंगे |
    • शब्दों के माध्यम से अपनी भावना को लेख में प्रस्तुत करते रहे |
    • अपनी बात को बड़ी ही मजबूती और उत्साह के साथ लिखे, डर कर लिखेंगे तो पढ़ने वाले में आलस पन आएगा, और वह पढ़ नहीं पायेगा |
    • अगर आप जायज लिख रखे है, आप के लेखनी में दम है, तो यह न सोचे यह वह पढ़ने के बाद क्या सोचेगा |
    • जिस विषय पर आप लेखनी करेंगे, वह आपकी भावना और होबी, विचार से जुड़ा हो तो सबसे बेहतर है, नहीं हो, लेख के भाव दब जाते है |
    • लिखते समय बड़ी सावधानी रखे, जल्दी बाजी न करें, जल्दी लिखने से नया शब्द, विचार, भाव, छूट जाते है, जो लेख को और पीछे छोड़ देते है |
    • लिखने के बाद एक दो बात अवश्य पढ़ना चाहिए, कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं |
    • इसका ध्यान बिलकुल न रखे, लेख के कितने पैसे मिलेंगे, कितने लोग पसंद करेंगे |
    • अपनी गलती को नजर अंदाज न करें, लेखनी में सुधार के लिए, लगातार लिखते रहे, और गलतिओं को सुधार करते रहे |
    • अगर लेख प्रकाशित होने के बाद लोग, पसंद नहीं कर रहे है, तो लोगों को दोष नहीं, यह जानने का प्रयास करें, क्यों पसंद नहीं किया जा रहा, फीडबैक ले |
    • अगर आप सर्च करके, पुस्तक पढ़कर नया लिख रहे है, तो बहुत जायदा पढाई करें, और थोड़ा लिखाई करें |
    • जितना जायदा हो सके श्रोता बनने के, लोगो की बात को सुनने की, समझने की, आदत डाले, जितना सुनेगे, उतना ही अच्छा लेखन कर पायेंगे |
    • जिस भी विषय पर लेख लिख रहे है, उस पर जानकारी, और अन्य सूचना रखना, उस पर जानना आवश्यक है |
    • और अंतिम में पठन करना, चिंतन करना, मनन करना, दर्शन करना और लेखन करना चाहिए |
    द महान डॉ. भीम राव आंबेडकर जीवन परिचय The Gret Dr. BhimRav Ambedkar Biography in Hindi
    द महान डॉ. भीम राव आंबेडकर जीवन परिचय The Gret Dr. BhimRav Ambedkar Biography in Hindi

    विशेष-आप इसे स्कूल कालेज, या अन्य भाषणों में प्रिंट करके ले जा सकते है, इसकी अनुमति दी जाती है
    नाम- महान डॉ. भीमराव आंबेडकर
    जन्म- 14 अप्रैल 1981
    पिता का नाम- रामजी मालोजी सकपाल
    माता का नाम- भीमाबाई
    पत्नि- अंबेडकर की शादी 1906 में नौ साल की रमाबाई से हुई थी |
    जन्म स्थान-  मध्य्प्रदेश राज्य, के एक गाँव में हुआ था |

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ज्ञान के विद्वान थे, वे उनकी माता पिता के 14 वे संतान थे, डॉ. आंबेडकर 14 वे आखरी संतान थे,
    द आंबेडकर का जन्म घाटियाँ मनु द्वारा रचित जाति व्यवस्था महार जाति में हुआ था, जो जाति आज हिन्दू धर्म में आता है |
    जिसे उस समय लोगो की मानसिकता ख़राब होने के कारन अछूत जाति माना जाता था, जिसे घटिया मनु द्वारा रचित वर्ग शुद्र कहते थे,
    उस समय शुद्र वर्ग को लोग मानसिकता ख़राब होने के कारण, अछूत जिसे छूना तक भी मना मानते थे |

    शिक्षा का विकास - भीम राव जी के पिता हमेशा शिक्षित बनने, पढने लिखने, पर जोर देते थे , वे ब्रिटिश भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवा में थे ;
    रामजी सकपाल के केवल तीन बेटे, बलराम, आनंदराव और भीमराव और दो बेटियाँ मंजुला और तुलासा ही इन कठिन हालातों मे जीवित बच पाए ।
    अपने भाइयो बहनों में आंबेडकर पढने लिखने में जायदा रुचिकर था, इसलिए वह आगे हाई स्कूल पड़ पाया |
    1908 में वे एलफिंस्टन कॉलेज में दाखिला लेने वाले पहले दलित बच्चे बनें.
    भीमराव अम्बेडकर करीब 9 भाषाएँ जानते थे
    बाबा साहब ने 21 साल तक लगभग सभी धर्मों की पढाई की |
    बाबा साहब के पास कुल 32 डिग्री थी. वो विदेश जाकर अर्थशास्त्र में P.H.D. करने वाले पहले भारतीय थे.
    नोबेल प्राइज जीतने वाले अमर्त्य सेन अर्थशास्त्र में इन्हें अपना पिता मानते थे
    .
    आंबेडकर का नाम आंबेडकर कैसे हुआ - एक ब्राह्मण शिक्षक महादेव अंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे, उन्होंने ने आंबेडकर का नाम रजिस्टर में आम्बेडकर लिख दिया, जो उनके गांव के नाम "अंबावडे" पर आधारित था।

    29 अगस्त 1947 को अंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए आमंत्रित किया गया, क्योकि देश भर में डॉ.भीमराव आंबेडकर के जितना पढ़ा लिखा ज्ञानी, होनहार मेहनती कोई और महिला या पुरुष नहीं था; तथा
    बाबा साहब को सविधान सभा का अध्यक्ष चुना गया |

    भारत का सविधान बनने में

    2 वर्ष
    11 माह
    18 दिन लगे थे,

    भारत का सविधान दुनिया का सबसे बड़ा सविधान है, जो बाबा साहब आंबेडकर के द्वारा लिखा गया,
    26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया।
    और भारत का सविधान 26 जानवरी 1950 को लागु हुआ जिसे आज गड्तंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है |
    झंडे में अशोक चक्र डॉ. भीम राव आंबेडकर जी ने ही लगवाए थे,

    सविधान पूर्ण बनने के बाद बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा था,

    "मैं महसूस करता हूं कि संविधान, साध्य (काम करने लायक) है, यह लचीला है पर साथ ही यह इतना मज़बूत भी है कि देश को शांति और युद्ध दोनों के समय जोड़ कर रख सके। वास्तव में, मैं कह सकता हूँ कि अगर कभी कुछ गलत हुआ तो इसका कारण यह नही होगा कि हमारा संविधान खराब था, बल्कि इसका उपयोग करने वाला मनुष्य अधम था।"

    आंबेडकर द्वारा तैयार किया गया सविधान, सवैधानिक गारंटी के साथ-साथ, भारत के हर व्यक्ति को एक व्यापक श्रेणी की नागरिकता, और स्वतंत्रता प्रदान करता है,
    जिसमे, आर्थिक, धार्मिक, राजनितिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, प्रदान करता है; साथ ही साथ भेदभाव को गैर क़ानूनी भी करार दिया गया है,
    उन्होंने पिछड़े हुए जाति के लिए आरक्षण का प्रावधान किया -जिसमे अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, और अन्य पिछड़ा वर्ग आता है |
    लोग यह समझते है की बाबा साहब ने सिर्फ अछूतों के लिए काम किया ये उन्हा अज्ञान है |
    भीमराव अम्बेडकर भारत के पहले कानून मंत्री थे.

    धर्म परिवर्तन- 14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर में बाबा आंबेडकर ने एतिहासिक घोसडा किया, धर्म परिवर्तन का- और उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया -आखिर बौद्ध धर्म ही क्यों,
    उन्होंने कहा- संसार में बौद्ध धर्म ही एक ऐसा धर्म है, जो समाज को एकता के सूत्र में बांधता है, इस धर्म में कोई जाति नहीं, सब एक सामान है और हिन्दू जैसा वर्ग जतिव्यस्ता नहीं है, एक दिन जब लोगो को इस ज्ञान की समझ होगी, तो उस समय सभी बुद्धा हो जायेगें |
    आज मै हिन्दू धर्म का त्याग करता हूँ, और प्रतिज्ञा लेता हूँ, की हिन्दू धर्म के देवी देवता का पूजा नहीं करूँगा, | और न ही उन पर विश्वास करूँगा, और न कभी मंदिर पूजा के लिए जाऊंगा |
    और उस दिन लाखो लोगो ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ बौद्ध हो गए |

    डॉ. भीमराव जी बहुत समय से मधुमेह से पीड़ित थे, 6 दिसंबर 1956 को महान  डॉ. भीमराव आंबेडकर जी का निधन हो गया |
    और वे हमेशा के लिए जीवित हो गए हमारे, सविधान, हम सब की सांसो में , रग-रग में |
    जय भीम, जय भारत

    Apr 12, 2019

    रिपोर्ट - मोदी का भाषण गर्भवती महिला न सुने बच्चे को पागल पन का खतरा

    एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार यह परिणाम आया है, की अधिक गर्भवती महिलाओ के बच्चे मानसिक रूप से कमजोर और चिडचिडा पन पाया गया है |
    इनमे खास करके वह महिलाए है, जो नरेन्द्र मोंदी से जुडी हुई थी |
    रिपोर्ट का कैसे हुआ खुलाशा, यह तब हुआ जब मोंदी की भाषण सुनने वाली महिला एक गार्डन में उपस्थित हुई, और बच्चे आपस में एक दुसरे को नीचा दिखाने लगे, और गुस्सा करने लगे |
    तब कही उनकी माँ ने गौर किया की बच्चे स्वभाव से अलग व्यव्हार कर रहे है |
    और इसी जानकारी उन्होंने डॉक्टर को दी |
    डॉक्टर मामले को समझने के बाद बताया और अपना रिपोर्ट तैयार किया :-
    बच्चे गर्भ में सुकुन के पल में रहना पसंद करते है |
    बच्चे गर्भ में सोते और खेलते है, माँ जो भी करती है, उसका असर बच्चे पर पड़ता है |
    बच्चा जब गर्भ में हो तो उसे अच्छे-अच्छे भावनात्मक और मधुर स्वर सुनाने की बात करने की माँ को जरुरत होती है |
    चूँकि महिलाए इसके विपरीत कार्य करने लगी |
    आखिर क्या है, मोंदी के भाषण में जिसके कारण बच्चे और लोग मानसिक पागल हो रहे है |

    नरेन्द्र मोंदी का भाषण सुनने से बच्चे दिमागी पागल

    हर दिन घंठो-घंठो मोंदी का गुस्सा वाला भाषण सुनना |
    हर बार आरोप लगाना |
    हर भाषण में सपने दिखाने की बात करना |
    हर बार झूठ बोलना |
    हर बात को आँख मूंदकर कर भरोषा कर लेना |

    mondi ke bhashan se mansik bimari ka khatra

    आज इसका परिणाम देखने को मिल रहा है, बच्चे दिमाग से कमजोर हो रहे है |
    डॉक्टर ने तो सलाह दिया है, इन जैसे किसी भी नेताओ का भाषण न देखे, नहीं तो होने वाला बच्चा, दिमाग से कमजोर चिडचिडा पन वाला हो सकता है |
    इसलिए महिलाओ को होशियार रहने की जरुरत है, क्योंकि लोग समझ नहीं पा रहे है, इनके भाषण से बात करने के तरीके से झूठ और आक्रोश, आरोप, सपने दिखाने की वजह से बच्चे की तरह आज के मानव सपने में खो गए है |
    अगर मोंदी फिर से चुनाव जीता तो, भारत का भविष्य खतरे में है |
    यह आप व्हाट्सएप्प में खास करके मोंदी के भाषण सुनने वाले महिलाओ को इससे अवगत कराए यही से शेयर कर सकते है |

    Apr 6, 2019

    भारत में ग्रामीण गरीबी कारण और दूर करने के उपाय Poverty in India निबंध
    आज आपको इस निबंध के माध्यम से बताने वाला हूँ, की भारत देश के लोग गरीब क्यों हो रहे है, क्या है गरीबी का कारण |

    bharat me garibi ke karan par nibandh poverty in india

    भारत में गरीबी पर निबंध

    और इस समस्या को किस तरह से दूर किया जा सकता है |
    पांच तरीके से इस समस्या को हल करेंगे |

    1. समस्या की पहचान करना |
    2. समस्या के कारण का पता लगाना |
    3. समस्या के कारण का उपाय करना |
    4. उपाय करने के बाद समस्या का निदान होगा |
    5. और अंतिम में आता है, प्रबंध करना |

    समस्या गरीबी है |

    गरीबी का कारण विस्तार से :-

    जीवन में तीन चींजे आवश्यक है, 1. रोटी, 2. कपड़ा, 3.मकान,
    और यह तीनो धन से आती है, इनके प्रबंध करते-करते आदमी गरीब हो जाता है |
    तथा बीच में आवश्यक खर्च, और असमझदारी गरीबी की ओर ले जाती है |

    आदमी महीने में या वर्ष में कुल कितना कमाता है, और कुल कितना खर्च करता है, इससे यह पता लगाया जा सकता है, आदमी गरीब हो रहा है, या उन्नति कर रहा है |
    अगर पैसे बच गए तो ठीक और अधिक खर्च हुए तो गरीबी का कारण |
    गरीबी का कारण समाज और सामाजिक प्रथा है |
    अनेक प्रथा, संस्कार और त्यौहार के नाम पर आदमी गरीब हो जाता है |
    जैसे :- विवाह में जो आदमी 5000 महीने का कमाता है, वह 1 लाख खर्चा करता है,
    बच्चे के जन्म लेने पर भोज कराना |
    परिवार में मरने पर भोज कराने में |
    और दुनियाँ भर त्यौहार मनाने में आदमी गरीब हो जाता है |
    प्रथा किसी रिवाज को जबरदस्ती समाज करवाता है, जिसके कारण से आदमी गरीब हो जाता है |
    और इनकी पूर्ति के लिए जीवन भर कमाई एक दिन में उड़ा देता है |

    गरीबी का कारण बिमारी है |

    जब कोई बिमार होता है, तो उसका इलाज कराना अनिवार्य होता है, और परिवार उसका खर्च उठाता है, इसी खर्च से आदमी गरीब हो जाता है |
    और इलाज कराने के लिए या तो जमीन या कुछ बेचता है, या जमापूंजी खर्च करता है | यही सबसे बड़ी गरीबी का कारण है |

    आनावश्यक खर्च गरीबी का कारण |

    आज रोज व्यक्ति शराब पीता है, खाने में मंहगा खाना खाता है, और आनावश्यक खर्च करता है

    गरीबी को दूर करने के उपाय |

    संस्कारों में अधिक से अधिक आय कम खर्च करें |
    संस्कार का खर्च कुछ सरकार और कुछ समाज उठाये |
    विवाह में गरीब मुश्किल से 20,000 से जायदा न करें |
    समाज के और गाँव के सभी मिलकर खर्च का वहन करें |
    त्यौहार में एक दिन के आय जितना खर्च करें |
    बिमारी का खर्च सरकार उठाये, क्योंकि यह सरकार का दायित्व है |
    आनावश्यक खर्च शराब का खर्च, और मंहगा खाना कम करें |
    आवश्यकता से अधिक समान न ख़रीदे |
    और उतना ही खर्चा करें, जितना आवश्यक है |

    समस्या का निदान 

    संस्कार को समाज बदले, समाज को समझना है, इसके कारण समाज गरीब हो रहा है |
    बिमारी न हो इसके लिए ध्यान रखे, अपने शरीर को कैसे स्वस्थ रखना है, उसको करें |
    त्यौहार नहीं मनाये, क्योकिं यह गरीब बनाने के लिए काल्पनिक बनाया गया है |
    शराब न पिए, जीवन का महत्व समझे |
    सरकार गरीबी उन्मूलन योजना चलाये, नए तकनीक की ओर बढ़ाये |
    आवश्यक लोगों को लोन देवें  |
    सरकार रोटी, और मकान की व्यवस्था करें |

    प्रबंध | 

    सरकार आवश्यक खर्च पर प्रतिबन्ध लगाये |
    समझ आवश्यक खर्च पर प्रतिबन्ध लगाये |
    सरकार कौन कहाँ खर्च कर रहा है, इस पर ध्यान देवें |
    गरीबी वाले प्रथा को न मनाये |
    होली नारी को जलाने का प्रतिक है, इसमें खर्च न करें |

    यह भी पढ़े :- 
    समाज की उन्नति में बाधक तत्व - लेख योगेन्द्र कुमार

    धार्मिक कथाओ का आयोजन बंद करें, बिजनेस मेन की कथा सुनाए |

    Apr 3, 2019

    मानव के जमीनी अधिकार को कैसे पहचाने  - #योगेन्द्र_कुमार

    अधिकार अनेक प्रकार के होते है, हम बात करेंगे, मानव के जमीनी अधिकार के बारे में, इसके लिए एक छोटा सा उदाहरण देना चाहता हूँ |
    अगर कोई व्यक्ति किसी गाँव में रहता है, तो वह किस आधार पर वहाँ का निवासी होता है |

    जमीनी अधिकार
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    जबकि उसने अपना सारा जमीन, घर बार सब बेंच दिया है, उसके पास एक फूटी कौड़ी जमीन और रुपया नहीं है, तो क्या वह उस गाँव का निवासी कहलायेगा |
    क्या उस गाँव पर उस व्यक्ति का कोई अधिकार होगा |
    अगर होगा तो क्या ?
    निवास के आधार पर, या जन्म के आधार पर, परिवार के आधार पर, या गाँव की सदस्यता के आधार पर |
    आपको बता दूँ, कोई भी व्यक्ति उस गाँव के सदस्यता के आधार पर वहाँ का निवासी होता है |
    एक गाँव में कुल 1000 लोग रहते है, जहाँ की कुल जमीन 1000 एकड़ है, जिसमें का 200 एकड़ खाली मैदान है |
     एक दिन क्या होता है, उस 200 एकड़ को सरकार प्राइवेट कंपनी को दे देता है |
    क्या उस 200 एकड़ जमीन पर गाँव का कोई अधिकार नहीं होता |
    समझने वाली बात यह है, की यह जमीन सहकारी होते हुए भी सरकार की नहीं है |
    सरकारी जमीन उसे कहते है, जिस पर राज्य या केंद्र के लिए भूमि का क्षेत्र, या जमीन निश्चित किया गया है |
    जैसे :- नदी, जंगल, पहाड़, पठार, जो किसी किसी गाँव के अन्दर न आता हो |
    इस अनुसार से जो 200 एकड़ जमीन की कीमत का पैसा है, वह गाँव वालों का हुआ, क्योंकि वह जमीन गाँव की है |
    लेकिन उस पैसे पर किसका अधिकार होना चाहिए |
    यहाँ तीन चीजों को समझना है, एक वर्तमान, दूसरा भूत काल, और तीसरा आने वाला भविष्य |
    समझने वाली बात यह है, जमीन गाँव का है, इसलिए पूरे गाँव का अधिकार हुआ |
    यह पैसा किसी परिवार का नहीं है, यह पूरे गाँव के सदस्य लोगों का है, जो गाँव में रह रहा है, क्यों न उसके पास एक फूटी कौड़ी जमीन भी न हो |
    लेकिन अगर इस पैसे को यही लोग सदस्यता के आधार पर आपस में बाँट लेते है, तो इस पैसे का फायदा यही लोग पायेंगे |
    चूकी: अगर कंपनी लगेगी तो, उसका प्रभाव, वर्तमान, भूत और भविष्य के जन्म लेने वाले लोगों के ऊपर पड़ेगा, तथा आस पास के सभी लोगों के ऊपर पड़ेगा |
    इसलिए जो पैसा है, वह लोगों के विकास के लिए खर्च होना चाहिए |
    इस पैसे से प्राथमिक तौर पर, सहकारी शिक्षा, हॉस्पिटल, पानी, तथा गाँव के विकास के लिए जो आवश्यक है, उसमे खर्च होने चाहिए |
    #yogendra_kumar #योगेन्द्र_कुमार #जमीन #अधिकार #जमीनी_अधिकार

    Apr 1, 2019

    भाजपा ने देश को बर्बाद कर दिया - 2019 लोकसभा स्पेशल
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    किसी भी सरकार को पांच वर्ष का समय इसलिए दिया जाता है, कि सरकार पांच वर्ष में अपनी बात को रखे और देश को वर्तमान से ऊँचा उठाये |
    जनता के वोट देने का कारण भी यहीं होता है, की एक सरकार जब सही तरीके से अपना काम नहीं करती तो दुसरे सरकार को मौका देती है |
    भाजपा को 2014 से पांच वर्ष का मौका दिया गया, मगर अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है, देश में पूरा गाय गोबर, हिन्दू मुश्लिम की राजनीति करके देश को बाँटने का काम किया |
    नोटबंदी सही समय में नहीं किया, उपर से नोटबंदी के चक्कर में सैकड़ो लोगों की जान चली गई, और किसी को मुवाब्जा तक नहीं मिला |
    देश में दो करोड़ नौकरी देने का वादा किया मगर उल्टा हुआ, 2 करोड़ नौकरी ही लोगों की छिना गई |
    नोटबंदी से देश की हालत बिगड़ गई, काला धन तो वापस आया नहीं, उलटा काला धन बढ़ गया |
    नोटबंदी से आतंकवादियों की कमर टूटने की बात कही गई, मगर उलटा 44 जवान शहीद हो गए  |
    सर्जिकल स्ट्राइक की जगह झूठे 400 पाकिस्तानी मारने की झूठी न्यूज़ चलाई गई |
    आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया, देश के लोग आधार कार्ड बनवा-बनवा कर गरीब हो गए |
    पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया, लोग परेशान हो गए |
    बैंक के चक्कर काटकाट कर लिंक कराने में लोग पागल हो गए |
    फोटो कापी कराकर कर लोग गरीब हो गये |
    गंगा सफाई के नाम पर, देश को लुट लिया |
    बेटी बचाओ कहाँ मगर, बलात्कार पर कभी नहीं बोला,
    आज तक एक भी मीडिया कांफ्रेंस नहीं की |
    अपनी ही मन की बात करते है, सुनते किसी की नहीं |
    गरीबों को आवास मिला नहीं, शौचालय पूरा बना नहीं |
    भाजपा सरकार में पहली बार एट्रोसिटी एक्ट को बंद करने का काम किया गया |
    इन सरकार ने संविधान जलाने का काम किया |
    सवाल पूछने पर आतंकवादी पाकिस्तानी, धर्मविरोधी बताने का काम किया |
    पकौड़ा रोजगार की चलाया, एकबीबीएस को पकौड़ा बेचवाया |
    जीएसटी को सही तरीके से लागू नहीं किया |
    झूठे परोसने का काम किया |
    विदेश यात्रा में मौज करने काम किया |
    अपनी प्रचार में पैसे लुटाने का कार्य किया |
    कभी अपने आप को चायवाला, कभी फ़क़ीर, तो कभी चौकीदार के नाम से देश को उल्लू बनाने का काम किया |
    सरकारी चीजों को प्राइवेट करने का काम किया |
    200 पॉइंट रोस्टर की जगह 13 पॉइंट लाने का काम किया |
    आर्थिक आधार पर सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का काम किया |
    इस सरकार की जितनी भी बुराई की जाए उतनी काम है |
    गाय गोबर करने का काम किया |
    दंगे करवाने का काम किया |
    दलितों को मारने का काम किया |
    #भाजपा_हटाओ_देश_बचाओ
    #चौकीदार_चोर_है
    #Chaukidar_Chor_Hai

    Mar 5, 2019

    कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्व विद्यालय बना भ्रस्टा चार का गढ़, छत्तीसगढ़
    माननीय
    महामहिम राष्ट्रपति / माननीय प्रधानमंत्री / कुलाधिपति महोदया / कुलपति महोदय
    कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर की स्थापना मूर्धन्य पत्रकार स्वर्गीय भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी ने कर्मयोगी कुशाभाऊ ठाकरे के नाम पर 2005 में बड़े सपनों के साथ की थी. बाजपेयी जी चाहते थे की पत्रकार समाज की आवाज बने. पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर, छत्तीसगढ़ शिक्षण संस्थान की राह पे कभी न चल कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राह पर अनवरत अग्रसर है। पिछले लगभग 04 सालों से विश्वविद्याय के कुलपति पद पर डॉ.मानसिंह परमार आसीन हैं। इसके पहले विश्वविद्यालय के चर्चित संघ के कार्यकर्त्ता कुलपति सच्चिदानंद जोशी रह चुके हैं। श्री जोशी ने पत्रकारिता विश्वविद्यालय को जिस तरह से संघ की शाखा के रूप में तब्दील करने की कवायद की वह अपने आप में बेमिशाल हैं। विश्वविद्यालय जहाँ धर्मनिरपेक्ष संस्थान और सरकार से अलग रहकर चलने वाली संस्था होती है, वहीं पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति साहब और तमाम प्रोफेसर बी. जे. पी. के विचारों को आगे लेकर संघ की राह पर चलते रहें हैं। आए दिन संघ से जुड़े हुए कार्यक्रम विश्वविद्याय परिसर में कराए  जाते रहे हैं। जिसमें मुख्यवक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए लोग या पदाधिकारी होते हैं और उस कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के किसी न किसी प्रोफेसर द्वारा किया जाता रहा हैं। विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी को पूर्ण करने के लिए 2005 में शैक्षणिक पदों के साथ रीडर पद की संविदा नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इसके लिए पत्रकारिता में स्नातकोत्तर उपाधि, पीएचडी या 8 वर्ष शैक्षणिक अध्यापन या पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्ष का अनुभव जरूरी था। डॉ. शाहिद अली अपनी पत्नी डॉ. गोपा बागची एसोसिएट प्रोफ़ेसर केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के माध्यम से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनाकर रीडर के पद पर भर्ती हो गया और 2008 में रीडर के पद पर नियमित हो गया। डॉ. अली बड़े ही मंझे खिलाडी है पर क्या करे नक़ल के लिए अक्ल की जरुरत होती है अली कहते है कि वे एम. ए. पत्रकारिता की डिग्री सौराष्ट्र विद्यापीठ से 1997 में पूरी की है और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर में कोर्स संयोजक और अतिथि प्राध्यापक के पद पर 1995 से ही अध्यापन का अनुभव माना गया यह व्यक्ति एम. ए. पत्रकारिता की डिग्री बाद में पूरी करता है प्राध्यापक पहले बन जाता है। और 01 साल के बीजेएमसी के आधार पर अतिथि प्राध्यापक बन गयाअली यहीं नहीं रुके वे गुजरात विद्यापीठ का रिफ्रेसर कोर्स का प्रमाण पत्र भी 1997 में फर्जी प्रमाण पत्र खुद के द्वारा हस्ताक्षर कर मोदी जी के गुजरात को पलीता लगाने में पीछे नही हटे धन्य है. कुलपति जोशी और मुख्यमंत्री रमन सिंह की पूरी लुटेरी टीम. गजब का शिक्षा के गाल पर तमाचा है. जिसे शैलेन्द्र खंडेलवाल ने आदालत में चुनौती दी. अदालत ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से पूछा की क्या डॉ. अली को जारी किए गए प्रमाण पत्र सही हैं और यह प्रमाणपत्र विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही जारी किया है, इस पर गुरु घासीदास विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिखित में जानकारी देते हुए कहा कि  डॉ .शाहिद अली ने कभी भी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर में शिक्षक के पद पर अस्थायी या स्थायी तौर पर कभी भी कार्य नही किया है। अतः डॉ. शाहिद अली की पत्नी और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की जनसंचार विभाग की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ .गोपा बागची द्वारा प्रदान की गयी अनुभव प्रमाण पत्र पूरी तरह से फर्जी है। जिसके आधार पर अदालत ने डॉ. शाहिद अली के प्रमाण पत्रों को फर्जी मानते हुए धोखाधड़ी का प्रकरण पंजीबद्ध धारा 420, 467, 468, 471 और 34 भादस के तहत दंडनीय अपराध के तहत किया, साथ ही शैलेन्द्र खंडेलवाल द्वारा किये गये शिकायतों के आधार पर तत्कालीन सामान्य प्रशासन की सचिव निधि छिब्बर ने अपने जाँच में पाया की डॉ.शाहिद अली के नियुक्ति में प्रक्रिया में UGC के मापदंडों को ताक में रखा गया है और उक्त रीडर की नियुक्ति पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है और डॉ. अली द्वारा उपलब्ध  शैक्षणिक एवं अनुभव प्रमाणपत्र पूरी फर्जी हैं। डॉ. शाहिद अली ने अपने नियुक्ति को जायज ठहराते हुए अपने निर्देशन में पी-एच.डी. की सीटों का विज्ञापन जारी कराकर भूतपूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के खास ओ.एस.डी. विक्रम सिसोदिया की पत्नी श्रीमती कीर्ति सिसोदिया (पीएचडी-शोधार्थी) ने UGC के नियमों को ताक में रखकर बिना किसी उपस्थिति हस्ताक्षर व Plagiarism certificate प्राप्त किए बिना भारत की सबसे बड़ी डिग्री हासिल कर ली।
    विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग में सहायक प्रोफ़ेसर पद पर कार्यरत डॉ. आशुतोष मंडावी एवं प्रबंधन अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफ़ेसर डॉ.अभिषेक दुबे तो कुशाभाऊ ठाकरे के शोधार्थियों से दो कदम आगे निकल गए। डॉ. आशुतोष मंडावी ने अपनी पी-एच.डी. लगभग एक दशक में केन्द्रीय विश्वविद्याल बिलासपुर से फर्जी प्रमाण पत्र बाटने के जुर्म में निलंबित डॉ. गोपा बागची के निर्देशन में पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नियमित अध्यापन कार्य करते हुए बिना किसी शोध अवकाश व शोध प्रबंधन को बिना plagiarism सर्टिफिकेट के अपने राजनीतिक पहुँच बीजेपी शासनकाल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर लगातार 04 वर्षों तक व वर्तमान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के पद पर कार्यरत होने एवं संघ के प्रान्त प्रचारक दीपक विश्पुते के सिफारिश से कारण केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं UGC को गुमराह कर पी-एच.डी. की डिग्री हासिल कर लिया। सहायक प्रोफ़ेसर  आशुतोष मंडावी को कुलपति जोशी ने संविदा प्राध्यापक के रूप में नियुक्त किया था और 2008 में जोड़तोड़ से नियमित हो गये आशुतोष मंडावी अपने ज्ञान के लिए मशहूर हैं जिन्हें न लेखन आता है, न पढाना, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे प्रबुद्ध संगठन ने किस आधार पर इनका चयन किया यह सोच का विषय है जो व्यक्ति अपने विषय पर रत्तीभर ज्ञान नहीं रखता वह किसी विचारधारा को कैसे आगे बढ़ा पायेगा।  जहाँ इस व्यक्ति की चोरी पकड़ी जाती है तो अपने राजनितिक पहुँच और वर्तमान में अध्यक्ष होने का भय दुसरे विचारधारा के छात्रों को दिखाने लगता है। छात्रों के बीच कामचोर और बुद्धिहीन गुरु के नाम से लोकप्रिय हैं। इतना ही नहीं, अधिक गुणी व्यक्तित्व के होने के कारण आशुतोष मंडावी को कुलपति जोशी ने Hostel Warden, Sports Officer भी बना दिया था। जिससे वे विश्वविद्यालय को संघ और बीजेपी के आत्मपरिसर बना सकें। आशुतोष मंडावी  विश्वविद्यालय के भव्य समवेत में हर सप्ताह एबीवीपी की कार्यकारिणी मीटिंग भी करते हुए मिल जाते थे। क्या विश्वविद्यालय के कुलपति आफिस, प्रशासनिक भवन और प्रोफेसर्स के केबिन में जितना अधिकार विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों का है उतना ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का भी है? अगर नहीं तो फिर आज तक लगातार हो रहे असंवैधानिक तरीके से मीटिंग और शिक्षकों की भागीदारी पर कुलपति ने कोई क़ानूनी कार्यवाई क्यों नहीं की? क्या इसका मतलब यह नहीं मान लेना चाहिए कि मिली-जुली सरकार चलती रही है? इतना ही नहीं आशुतोष मंडावी ने विधानसभा चुनाव के आचार संहिता का जमकर धज्जियाँ उड़ाया उनके निर्देशन में प्रदेश भर के स्कुल और कालेजों में नारी आत्मरक्षा के नाम पर कराटे और आत्म रक्षा के गुर सिखाने का कार्यक्रम चुनाव के समय चलाया गया जिसमे बीजेपी और संघ के अजेंडे का खुलेआम प्रचार किया जाता रहा प्रशासन में सीधे दखल होने के कारण किसी भी संस्थान और संवैधानिक संस्थाओं ने इस तरह के कार्यक्रम में रोक लगाने का हिम्मत नहीं दिखायी। इसकी सत्यता की पुष्टि विभिन्न समाचारों में विधानसभा चुनाव के समय नारी आत्म रक्षा के लिए हुए प्रशिक्षण के कार्यक्रमों से सम्बंधित ख़बरों को देख सकते है।
        पत्रकारिता यूनिवर्सिटी में दो छात्र संगठन हैं जिसमें विवाद NSUI के छात्रों को लेकर खड़ा हुआ था है। NSUI के पदाधिकारी यूनिवर्सिटी में खुलेआम आयोजित  आर. एस. एस. के कार्यक्रम जिसमें राहुल गाँधी मुर्दाबाद, सोनिया गाँधी मुर्दाबाद, मनमोहन सिंह मुर्दाबाद, कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद के नारे लगाये जा रहे थे का विरोध करने कुलसचिव के पास गये और आशुतोष मंडावी ने पुलिस प्रशासन को अपने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का अध्यक्ष होने का धौस देते हुए NSUI समर्थित छात्रों को विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ के आरोप में जेल पंहुचा दिया क्योंकि ये छात्र श्री मंडावी के नियुक्ति और संघ समर्थित कार्यक्रमों को हमेशा चुनौती देते रहें थे। जग जाहिर है कि आशुतोष मंडावी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसी संस्था के लिए काबिल नहीं है वे अपनी नियुक्ति को बचाने के लिए संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के ओट में छुपकर अपनी राजनीती करते रहे हैं, वर्तमान में बीजेपी की सरकार बदलने के बाद अपने आप को कांग्रेसी बताने लगे है? यह संघ के लिए भी विचारणीय है।
    डॉ अभिषेक दुबे ने भी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से नियमित शोधार्थी के रूप में बिना शोध अवकाश व शोध प्रबंधन को बिना Plagiarism सर्टिफिकेट के जमा कर अपने राजनीतिक पहुँच (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के रायपुर नगर के महामंत्रीं के पद पर कार्यरत व वर्तमान में प्रशासनिक अकादमी निमोरा रायपुर में प्रतिनियुक्ति में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के अनुशंसा के आधार पर कार्यरत है) का इस्तेमाल कर पी-एच.डी. की फर्जी  डिग्री लेली। अभिषेक दुबे मात्र एम. बी.ए. की डिग्री की पात्रता रखते है बिना net phd के सहायक प्रोफ़ेसर के पद पर अपने पिता श्री पद्मश्री सुरेन्द्र दुबे के राजनितिक प्रभाव के कारण नियुक्त हो गये। अयोग्य होंते हुए भी आज प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है। डॉ. दुबे जुगाड़ के लिए जाने जाते है एम.बी.ए. की डिग्री के आधार पर विश्वविद्यालय के मीडिया प्रबंधन विभाग में नौकरी पा लिया जबकि शैक्षणिक योग्यता मीडिया प्रबंधन का माँगा गया था नाकि एम. बी.ए.मार्केटिंग का अपने नौकरी में उठ रहे सवालों और 2018 में सरकार बदलने के डर से पिता श्री सुरेन्द्र दुबे और भाई जोकि संसद सदस्य राजनंदगांव के ओएसडी के राजराजनीतिक रसूख से अतिथि प्राध्यापकों के हवाले कर प्रबंधन विभाग को सत्र के मध्य में छोड़कर प्रशाशनिक अकादमी निमोरा में प्रशिक्षक के पद पर प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हो गया क्या ये सही शिक्षक है अगर देश में शिक्षक की परिभाषा मार्गदर्शक की है तो माफ़ कीजिए ये देश के सही मायने में गद्दार है।
    UGC के मानक के तहत पी-एच.डी. किसी संस्थान में कार्यरत व्यक्ति अगर वह स्वयं के कार्यरत संस्थान से बाहर पीएचडी कर रहा है तो वह बिना अवकाश के नहीं कर सकता, परन्तु डॉ. शाहिद अली ने अपने फर्जी नियुक्ति के तर्ज पर ही विश्वविद्यालय में पी-एच.डी. की डिग्री की दुकान खोल दी है और डॉ. शाहिद अली ने अपनी नौकरी बचने के लिए मुख्यमंत्री के करीबी के पत्नी को मुफ्त में डिग्री बाँट दी, डॉ. शाहिद अली ने अनुसूचित जाति के पी-एच.डी.  शोधार्थी कमल ज्योति जाहिरे की पी-एच.डी. सिर्फ जाति के आधार पर ख़ारिज कर दिया क्योकिं कमलज्योति डॉ.अली के योग्यता पर लगातार सवाल उठाते रहे थे। विश्वविद्यालय में जो छात्र व शोधार्थी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई उन्हें बहार का रास्ता दिखा दिया गया या उसे फर्जी तरीके से विश्वविद्यालय में मारपीट और तोड़फोड़ के इल्जाम में पुलिस केस में फसा दिया गया इसका शिकार कमल ज्योति जाहिरे हुआ।
    माननीय कुलपति महोदय आप अपने भाषणों में मीडिया और शिक्षा में सुचिता और सत्य की बात करते रहे हैं आप के आँखों के सामने विश्वविद्यालय में अयोग्य रूप से नियुक्त व्यक्तियों के द्वारा शैक्षणिक कार्य को छोड़कर संघ के प्रचार-प्रसार का कार्य करना और कर्मचारियों द्वारा पास फेल का खेल खेला जाना। आप धृतराष्ट्र की भूमिका में रहे है। आप प्रोफ़ेसर के पद से कुछ महीने में सेवानृवित हो जायेंगे, क्या अपनी अंतरात्मा की आवाज पर विश्वविद्यालय में हुए तमाम अयोग्य शिक्षकों की नियुक्तियों को जाँच कराने का कार्य करेंगे। कुलपति महोदय विश्वविद्यालय में अयोग्य प्राध्यापकों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है और आप इनके संरक्षक की भूमिका में पायें गये है। एक बार सच के साथ खड़ा होइए सारा देश आप को दुआएं देगा। योद्धा बनिए, आप नरेन्द्र मोदी जी को अपना आदर्श मानते है, एक ओर मोदी जी भ्रष्ट्राचार से लड़ रहे है। आप नैतिक भ्रष्ट्राचारियों को कब विश्वविद्यालय के पावन धरा से कब बाहर करेंगे।
    साथ ही UGC-नईदिल्ली, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और उच्च शिक्षामंत्री को पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हुए अवैध नियुक्तियों एवं पी-एच.डी. डिग्री के गोरखधंधे पर जाँच कराकर दोषीयों को नौकरी से तुरंत बर्खास्त कर जेल भेजना जाना चाहिए, जिससे विश्वविद्यालय में शिक्षा और शोध में गुणवत्ता बढाई जा सके।
    धन्यवाद
                                                                             प्रार्थी                                                                                                                                                    छात्र
                                                                         अंकित तिवारी
                                                                  कुशाभाऊ ठाकरे
    पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर
    रायपुर -492013 (छत्तीसगढ़)