May 16, 2019

फेस बुक खाता खोले, Naya Facebook Account Banaye How to create new facebook Account
फेसबुक क्या है,
फेसबुक एक सामाजिक सेवा वेबसाइट है, जिस पर लोग अपना अकाउंट बनाते है,
और बहुत सारे फेसबुक, ग्रुप, पेज से और मित्रो से जुड़ते है,
facebook में यूआरएल को लिंक किया जा सकता है,
फोटो को डाला जा सकता है,
विडिओ को डाला जा सकता है,
ऑडियो और बहुत कुछ को डाला जा सकता है,
और उसे एक दुसरे को शेयर कर सकते होते है और कमेंट भी कर सकते है,
आज के समय हर कोई का facebook खाता है,
चाहे वह किसी व्यक्ति का हो, किसी संगठन जैसे
स्कूल कालेज, कोई कंपनी या कोई समाज |
तो आप आप जाने की कैसे अपना facebook खाता खोल सकते है,
इसके लिए कोई कोर्स करने की कोई जरुरत नहीं है,
धीरे धीरे आप सब सिख जायेंगे |

खाता बनाने के लिए,




नीचे लिंक को ओपन करें
www.facebook.com
facebook create account

Frist Name लिखे उसके जगह में इसी तरह से
SurName,
Mobile Number Ya Email ID
डाले,
अपना जन्म दिनांक डाले,
आप महिला है या पुरुष या सेलेक्ट करे,
और Create Account में क्लिक करे,
आपने जो मोबाइल या ईमेल डाला है उसमे OTP पासवर्ड जायेगा उसे डाले आपका
facebook खाता तैयार है, आप अपना फोटो और प्रोफाइल को सेट कर लेवे, |

May 8, 2019

आज आयेगा छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वी और 12वी का रिजल्ट, जाने किस समय आएगा
Chhattisgarh-borad-CGBSE-class-10th-and-12th-result-2019-date cgbse.nic.in 10th result 2019

CG Board 10th Result 2019, CG Board 12th Result 2019

Chhattisgarh Madhyamik Siksha Mandal Raipur CGMSM Raipur Result
Hello Dosto Kya Aap Janna Chahte hai, CG board 10th result 2019 date, cgbse.nic.in 10th result 2019,
Chhattisgarh Board Secondary Education Result Kab Aayega, CGBSE 10th and 12th Result Date To Yah Pura Padhe,
CG Board Result 10th  or CG Board Result 12th  Ka Result Ka Open Hone Ka Date Fix Ho Gaya Hai,
cgbse.nic.in 12th result 2019, cgbse.nic.in 10th result 2019
Aap Bahut Dino se Janna Chah rahe the na Ki 10th aur 12th ka Result Kab Aayega To Aapka Intjar Date Khatm Hua,

CG Board Ka Result 10 May Ko Time 1 PM Baje Din ke 1 baje Aayega,
10 may Cgbse results ghosit


Result Online Website Me Hoga, Jiska Link Aapko Niche Diya Ja Raha hai.
Aapke Samne Do Link Hai, Jis Class Ka Result Dekhna Chahte Hai, Use Open Kare.




CG Board 10th Result 2019

CG Board 12th Result 2019

Agar Aap Kisi Ka Roll Number Nahi Jante To Is link Ke Madhyam Se 10th and 12th 2019 Roll Number Dekh Sakte Hai,

CG Board 10th and 12th Admit Card and Roll Number 2019

Yah Bhi Dekh Sakte Hai,



9 May Ko Aapko Is Link Ko Open Karna hai, Uske Bad Aapko Box Dikhai Dega, Usme Jiska Result Dekhna Chahte Hai Uska Roll Number Dale, CG Board Result Name Vise Allowed Nahi Diya Gaya Hai.

Aap Sirf Roll Number Dalkar Search Kar Sakte Hai.
Result Open Hone Ke Bad Confirm Kar Le, Father Name, Mother Name, Aur Student Name Thik To Hai Na.

Uske Bad Result Ko Print Kara Leve, Ya Mobile Se Dekh rahe hai to, ScreenShot Ya Page Ko Save Kar Leve, Ya Subject Vise Jitna Number Mila Hai, Use Likh kar rakhe.

Agar Aapko Lagta Hai Aapko Bahut Kam Number Borad Ke Dwara Diya Gaya Hai To Aap Rechecking Ka Form Fir se Bhar Sakte Hai, Agar Aapne Achcha Banaya Hai to Aapko jarur Number diye Jayenge.

Ya Safely Hone Par Fir Se Safely Ka Form Bhar Sakte Hai.
Aagar Aapka 10th Ya 12th me 50% se Kam Hai To Aapko Nirash Nahi Hona Chahiye,
Number Kabhi important Nahi Rakhta Un Logo Ke Liye Jinhe Apne Aap Par Vishwas Hota hai,
Aaj Jitne Bhi Log Success Hai Unhone Kabhi Number Dekhkar Padhai Nahi Kiya Unko Sirf Apne Talent Par Bharosa Tha.

Aap Ki Kabiliyat Ka Pata Aap Hi Laga Sakte Hai Aur Koi Nahi,
Kyoki Jitna Aap Apne Aap Ko Jante Hai, Utna Aapko Koi Nahi Janta,
Aur Rahi Bat Fail Hone walo Ki, Koshish Karne Walo ki Kabhi Har Nahi Hoti,
Aap Mehnat Karenge To agle Class me Jarur Pass Honge,
Taiyari Karo, Taiyari, Samay Ka intjar Nahi,  

May 6, 2019

सभी प्रकार के मापने की इकाइयाँ जाने कितना-कितना होता है, हिन्दी में-
सभी प्रकार के मापने की इकाइयाँ जाने कितना-कितना होता है, हिन्दी में-
परिचय- किसी भी वस्तु की मात्रा, वजन, तौल, द्रव्य, भार,ऊंचाई, लम्बाई, मीटर को जानने के लिए मापन विधि का उपयोग किया जाता है,
जैसे- लम्बाई को मापने के लिए , मीटर का उपयोग किया जाता है, आप देख सकते है,
इसी तरह से हर वस्तु की अलग गुणों को जानने के लिए अलग-अलग मापन का उपयोग किया जाता है,
तो कुछ इस तरह से इसकी लिस्ट,

Mapan ki ikai image

दूरी को मापने की  इकाइयाँ

  • 1 फीट: 12 इंच
  • 1 मील: 1760 यार्ड
  • 1 फर्लांग: 10 चेन
  • 1 यार्ड (गज): 3 फीट
  • 1 मील: 8 फर्लांग

मात्रा को मापने की  इकाइयाँ

  • 1 सेंटीलीटर: 10 मिलीलीटर
  • 1 डेसीलीटर: 10 सेंटीलीटर
  • 1 लीटर: 10 डेसीलीटर
  • 1 डेकालीटर: 10 लीटर
  • 1 हेक्टोलीटर: 10 डेकालीटर
  • 1 किलो लीटर: 10 हेक्टोलीटर क्षेत्र

भार को मापने की  इकाइयाँ

  • 1 ग्राम: 1000 मिलीग्राम
  • 1 डेकाग्राम: 10 ग्राम
  • 1 हेक्टोग्राम: 10 डेकाग्राम
  • 1 किलोग्राम: 10 हेक्टोग्राम
  • 1 क्विंटल: 100 किलोग्राम
  • 1 टन: 1000 किलोग्राम

तौल को मापने की  इकाइयाँ

  • 1 ग्रेन: 0.000064799 किलोग्राम
  • 1 आउंस: 0.0283495 किलोग्राम
  • 1 पाउंड: 0.4535924 किलोग्राम
  • 1 हंड्रेडवेट: 50.802 किलाग्राम
  • 1 टन: 1016.05 किलोग्राम

खगोलीय मापों की  इकाइयाँ

  • खगोलीय इकाई: 9,28,97,400 मील
  • प्रकाश वर्ष: 59,00,00,00,00,000 मील
  • पारसेक (parsec): 3.259 प्रकाश वर्ष

द्रव्यमान के मात्रक

  • 1 टेराग्राम: 109 किग्रा
  • 1 जीगाग्राम: 106 किग्रा
  • 1 मेगाग्राम: 103 किग्रा
  • 1 टन: 103 किग्रा
  • 1 क्विटंल: 102 किग्रा
  • 1 पिकोग्राम: 10-15 किग्रा
  • 1 मिलीग्राम: 10-6 किग्रा
  • 1 डेसीग्राम: 10-4 किग्रा
  • 1 स्लग: 10.57 किग्रा
  • 1 मीट्रिक टन: 1000 किग्रा
  • 1 आउन्स: 28.35 ग्राम
  • 1 पाउंड: 16 आउन्स (453.52 ग्राम)
  • 1 किग्रा: 2.205 पाउंड
  • 1 कैरेट: 205.3 मिलीग्राम
  • 1 मेगाग्राम: 1 टन
  • 1 ग्राम: 10-3 किग्रा

धारिता को मापने की  इकाइयाँ

  • 4 गिल: 1 पाइंट
  • 2 पाइंट: 1 क्वार्ट (quart)
  • 4 क्वार्ट: 1 गैलन (gallon)
  • 2 गैलन: 1 पेक (peck)
  • 4 पेक: 1 बुशल (bushel)
  • 3 बुशल: 1 बैग (bag)
  • 5 बुशल: 1 सैक (sack)
  • 8 बुशल: 1 क्वार्टर (quarter)
  • 5 क्वार्टर: 1 लोड (load)
  • 2 लोड: 1 लास्ट (last)
  • 36 बुशल: 1 चालड्रोन (chaldron)

विद्युत् को मापने की  इकाइयाँ

  • वोल्ट (volt): किसी 1 ओम (ohm) प्रतिरोध (resistance) से होकर 1
    ऐंपियर (ampere) करेंट को गुजारने के लिये जितनी शक्ति की आवश्यकता होती है
    उसे 1 वोल्ट कहते हैं
  • ओम (ohm): उस परिपथ का प्रतिरोध है, जिसमें एक वोल्ट का विद्युद्वल एक ऐंपीयर धारा उत्पन्न करता है।
  • मेगओम (megohm): 10^6 ओम
  • ऐंपीयर (ampere): जो करेंट किसी एक ओम प्रतिरोध के आर पार 1 वोल्ट विभवांतर पैदा करे।
  • कूलंब (coulomb): विद्युत् की वह मात्रा जो एक ऐंपियर करेंट के एक सेकंड तक बहने से प्राप्त हो।
  • 1 वाट (watt): 1 जूल (Joule)
  • 746 वाट: एक अश्व शक्ति प्रति सेकंड
  • 1 किलोवाट: 1,000 वाट: 1.5 अश्वशक्ति

संख्याओं की नापने की  इकाइयाँ

  • 12 इकाइयाँ: 1 दर्जन
  • 12 दर्जन: 1 गुरुस
  • 20 इकाइयाँ: 1 विशंक या कोड़ी (score)
  • 5 गड्डी, कोड़ी, या 100 इकाईयाँ: 1 सैकड़ा

समुद्री/ नॉटिकल माप (दूरी) मापने की  इकाइयाँ

  • 6 फुट: 1 फैदम
  • 100 फैदम: 1 केबल की लंबाई
  • 1,000 फैदम: 1 समुद्री मील
  • 3 समुद्री मील: 1 समुद्री लीग
  • 60 समुद्री मील: 1 डिग्री देशांतर भूमध्य रेखा पर
  • 360 डिग्री: 1 वृत्त

ताप की मापों की इकाइयाँ

  • सेंटीग्रेड: इस नाप में पानी के हिमांक बिंदु को शून्य माना जाता
    है तथा जल का क्वथनांक 100 डिग्री सें0 माना गया है शरीर में रुधिर का तप
    36.8 डिग्री सें0 होता है।
  • रयूमर: इस नाप में पानी का हिमांक शुन्य माना जाता है तथा जल का
    क्वथनांक 80 डिग्री माना जाता है। इसका प्रयोग आप तौर पर जर्मनी में होता
    है।
  • फारेनहाइट: इसमें हिमांक 32 डिग्री होता है और जल का क्वथनांक (boiling
    point) 212 डिग्री माना जाता है। यह माप खास करके ग्रेट ब्रिटेन तथा
    उत्तरी अमरीका में प्रयोग में लाई जाती है।

समय को मापने की  इकाइयाँ

  • 60 सेंकंड: 1 मिनट
  • 60 मिनट: 1 घंटा
  • 24 घंटा: 1 दिन
  • 7 दिन: 1 सप्ताह
  • 4 सप्ताह: 1 महीना
  • 13 चांद्र मास: 1 साल
  • 12 कैलेंडर मास: 1 साल
  • 365 दिन: 1 साधारण वर्ष
  • 366 दिन: 1 अधिवर्ष (leap year)
  • 3651/4 दिन: 1 जूलियन वर्ष
  • 365 दिन 5 घं0 48 मि0 51 से0: 1 सौर वर्ष
  • 100 साल: 1 शत वर्ष या शताब्दी




लंबाई तथा धारिता को मापने की  इकाइयाँ

  • 1 इंच: 0.0254 मीटर
  • 1 फुट: 0.3048 मीटर
  • 1 गज: 0.9144 मीटर
  • 1 मील: 1609.344 मीटर
  • 1 इंपीरियल गैलन: 4.54596 लिटर (litres)
  • 10 मिलीलिटर: 1 सेंटीलिटर
  • 10 सेंटीलिटर: 1 डेसिलिटर
  • 10 डेसिलिटर: 1 लिटर
  • 10 लिटर: 1 डेकालिटर
  • 10 डेकालिटर: 1 हेक्टोलिटर
  • 10 हेक्टोलिटर: 1 किलोलिटर
  • 1 लिटर: 1 3/4 पाइंट

क्षेत्रफल को मापने की  इकाइयाँ

  • 1 सेंटीएयर या 1 वर्ग मीटर: 1.196033 वर्ग गज
  • 10 सेंटीएयर: 1 डेसिएयर
  • 10 डेसीएयर: 1 एयर
  • 10 एयर: 1 डेकाएयर
  • 10 डेकाएयर: 1 हेक्टाएयर
  • 100 हेक्टाएयर: 1 वर्ग किलोमीटर
  • 1 हेक्टाएयर: 2 एकड़

ठोस या घन को मापने की  इकाइयाँ

  • 1 सेंटीस्टियर (centistere): 610.240515 घन मी0
  • 1 डेसिस्टियर: 3.531658 घन फुट
  • 1 स्टियर: 1.307954 धनगज
  • 10 सेंटिस्टियर: 1 डेसीस्टियर
  • 10 डेसिस्टियर: 1 स्टियर या घन मील
  • 10 स्टियर: 1 डेकास्टियर

लम्बाई को मापने की  इकाइयाँ

  • 1 माइक्रोमीटर: 1000 नैनोमीटर
  • 1 मिलीमीटर: 1000 माइक्रोमीटर
  • 1 सेंटीमीटर: 10 मिलीलीटर
  • 1 मीटर: 100 सेंटीमीटर
  • 1 डेकामीटर: 10 मीटर
  • 1 हेक्टोमीटर: 10 डेकामीटर
  • 1 किलोमीटर: 10 हेक्टोमीटर
  • 1 मेगामीटर: 1000 किलोमीटर
  • 1 नॉटिकल मील: 1852 मीटर मात्रा

क्षेत्र मापने की  इकाइयाँ

  • 1 वर्ग फुट: 144 वर्ग
  • 1 वर्ग यार्ड: 9 वर्ग फीट
  • 1 एकड़: 4840 वर्ग गज
  • 1 वर्ग मील: 640 एकड़
इस तरह से और भी बहुत सारे मापन इकाइयाँ होती है, आप जिसका जानना चाहते है, नीचे कमेंट करके बताये, तथा, अगर कही पर गलती हो गई हो तो, भी बताये |
dhanyawad

May 3, 2019

क्या आप जानना चाहते है - जीवन क्या है? What is Life in hindi

जीवन क्या है?

जीवन दो शब्दो से मिलकर बना है,
  1. जी, और
  2. वन
jivan-kya-hai-what-is-life

जी अर्थात जो “जीवित” है, उसे “जी” से सम्बोधित किया गया है|

और वन सम्बोधन का अर्थ, यह सारा संसार, गाँव, शहर, खेत, मैदान, जंगल, धरती, पानी, जहाँ तक यह “जी” जा सकता है, जी के लिए यह सारा जहाँ “वन” है|

जी का इस वन में “जीना” ही जीवन है|

यहाँ स्पष्ट कर दूँ, वन का सम्बन्ध पेड़ पौधों से भरे जंगल से नहीं है|

मानव एक जीव है, एक जी है, इसी तरह से पेड़ पौधे, अन्य पशु, जानवर भी एक प्रकार का जी है|

इस जी की मृत्यु उस समय हो जाती है, जब जी मर जाता है, जब जीव को चलाने वाले आवश्यक पोषण जी तक नहीं पहुँच पाते तो “जीव और जी” की मृत्यु हो जाती है|

मानव जन्म से पशु के समान होता है| धीरे से मानव को बोलना सिखाया जाता है, मानव ने अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए शब्द और भाषा का निर्माण किया है|

मानव को “मन” से सम्बोधित किया जाता है, मन एक वचन है| तो वही, एक से अधिक मानव को मनखे कहकर सम्बोधित किया जाता है, यह बहुवचन है|

मानव को मन कहना ही सबसे उचित है, क्योकि इस संसार में सबसे तेज गति से मन से कार्य करने वाला, तथा “मन” से जीने वाला जीव यह मानव शरीर रूपी “मन” ही है|

जीवन किसके लिए होता है?

मानव में “मन” होता है, और मानव मन से ही कार्य करता है, इसलिए यह कह सकते है, मानव “मन” से जीता है|

मानव का मन किसके लिए होता है? मानव का मन स्वयं के लिए होता है, अब अपने उपर निर्भर करता है, इस मन को किसके लिए कर्म करूँ|

वास्तव में यह जी को वन जीने के लिए मिला हुआ है, अब जिसका जी है, उसके ऊपर निर्भर करता है, वह अपने जी को वन में किसके लिए जीता है|
यह भी पढ़े :-
धन्य है, वे लोग जो अपने जीवन को दुसरे के जीवन के जीवन को ऊँचा उठाने के लिए लगा देते है|

Apr 30, 2019

Learn English with Duolingo – Apps on Google Play
इस एप्प का नाम है Duo lingo App, जिसकी मदद से कोई भी उम्र का व्यक्ति हिन्दी English, और अन्य देश की सैकड़ो भाषा में बहुत ही आसानी से language सीखा जा सकता है


क्या आप बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई App की तलाश कर रहे है, तो आपको एक बेस्ट एप्प की सुझाव दे रहा हूँ,

Learn English with Duolingo – Apps on Google Play

इस एप्प का नाम है Duolingo, जिसकी मदद से कोई भी उम्र का व्यक्ति All Language हिन्दी English, और अन्य देश की सैकड़ो भाषा सीख सकती है |

Bachcho Ke Liye Free Language App

अगर कोई बच्चा इस App का उपयोग लगातार करें, तो बहुत आसानी से किसी भी देश की, अपनी पसंद की भाषा सीख सकता है |

इस एप्प को Mobile में तो, वही Online चलाया जा सकता है |

App को Install करने के लिए Simple से "Google Play Store" में जाना है, और Duolingo लिखना है, उसके बाद App को install कर लेवे |

इस App के माध्यम से खाली बहुत सारे Language सिखा जा सकता है,

भाषा सीखने के लिए यह बहुत ही अच्छी App है, मैंने इसका उपयोग किया है |

इस App की खासियत यह है, इसमें Tast Time आता है, जिसको पूरा करने के बाद बहुत ही आसानी से Limit Time में सीख लिया जाता है, और यह बिलकुल Game खेलने जैसा ही है |

बच्चें इस App को बहुत ही पसंद करते है, और इसका अच्छा Responce भी देखने को मिल रहा है |

Best Language Learning Duolingo App


इस "Duolingo App" को किसी भी एंड्राइड मोबाइल में चलाया जा सकता है |


Also Read :-
यह एक मुफ्त App है लेकिन इसका उपयोग Paid भी किया जा सकता है |
यह बहुत ही अच्छी एप्प है, कोई भी शुरुआत से शुरू कर सकता है, और part-by-part बहुत ही सरल तरीके से सीख सकता है |
एप्प बोलकर भी बताता है, गलती होने पर खराबी को बताता है, और याद रखता है, और सही तरीके से सिखने के लिए निर्देश देता है |

आशा करता हूँ, आपको इस App की जानकारी बहुत पसंद आई होगी, और इस एप्प को एक बात आप जरुर उपयोग करके देखेंगे, मिलेंगे जल्द ही अगली लेख में, धन्यवाद |

Apr 29, 2019

मानव और पशु में समानताएं : निबंधात्मक तार्किक विवेचन | अमित की कलम से,
ब्रम्हांड में अनेक सौर मंडल और आकाशगंगा का अस्तित्व है, यह विभिन्न अध्ययनों व तर्कों से सिद्ध हो चुका है। हाल के दिनों में बिगबैंग थ्योरी पर भी ढेरों बात हो चुकी है। साथ ही नासा ने पिछले दिनों ब्लैक होल की तस्वीरें जारीकर खलबली मचा दी है। स्टीफन हॉकिंस ने भी भगवान के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करने की कोशिश की है। आगे बात करें तो, हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा तारा सूर्य है, जिसकी परिक्रमा लगातार पृथ्वी कर रही है। जिससे दिन-रात होता है। ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी का निर्माण बहुत बड़े विस्फोट व गैस के संकुचन, ताप व दाब के परिणाम स्वरुप हुआ है।

Similarities-between-human-and-animal
Similarities-between-human-and-animal
Image Credit by Google

         ऐसी भी अवधारणा है कि जीवन केवल पृथ्वी ग्रह पर ही संभव है। भले ही वैज्ञानिकों की अनेक टीमों ने चंद्रमा और मंगल ग्रह का चक्कर जरुर लगा लिया है। जीवन की संभावना तथा पानी होने का प्रमाण भी ढूंढ रही है। अब वर्तमान में जितनी जानकारी आज हमारे पास उपलब्ध है, उससे यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि फिलहाल पृथ्वी पर ही जीवन का अस्तित्व है। अन्य किसी दूसरे ग्रह पर जीवन की संभावना फिलहाल उकल्पना मात्र है।

पृथ्वी की उत्पत्ति

        अब आते हैं पृथ्वी ग्रह पर, पृथ्वी का जब निर्माण हुआ तो शुरुआती दौर में वह बहुत गर्म था। धीरे-धीरे ठंठा होने के क्रम के साथ गैस, पानी, आक्सीजन जैसी चीजें काफी लंबे कालखंड के बाद धरती पर निर्मित हुई। गैस, धूल के कण तथा जलमंडल का निर्माण हुआ। जिसकी वजह से आगे चलकर जलमंडल में पहली बार जीवों की उत्पत्ति हुई। इसमें अनेक थ्योरी (डार्विन का सिद्धांत), अनेक वैज्ञानिकों द्वारा उपलब्ध है। विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन से अनेक तरह की बातें व तर्क पढ़ने-सुनने को मिलता है।

जीवों की उत्पत्ति

        शुरुआती दौर में, जलचर के रुप में जीवों का निर्माण हुआ फिर उसने धरती पर क्रमिक विकास के साथ अपना पग धरा। समय के साथ उसने आसमान पर भी अपने पंख पसारना प्रारंभ कर दिया। इन सबके पीछे एक कारण था, वातावरण के साथ अनुकूल होना। जीवन अपना रास्ता खोजने लगा। एक कोशिकीय जीव, द्वी कोशिकीय जीव व बहुकोशिकीय जीवों का निर्माण हुआ। जलचर, उभयचर, सरीसृप, स्तनधारी जीवों से धरती सघन होने लगी। इस समय तक सभी जीव प्राकृतिक रुप से जीवन जी रहे थे। कुछ वातावरण में अनुकूल न होने के कारण नष्ट (डायनासोर) भी हो रहे थे। साथ ही कुछ जीव जीवन जीने के क्रम में अपने आपको कठोर बना रहे थे। लगातार अपना रुप बदलकर और प्रकृति के अनुरुप अपने आपको ढालने में कामयाब हो रहे थे। यह लाखों करोड़ों वर्षों का क्रम का प्रतिफल था।

जीवों का विकास क्रम

        इसी क्रम में, इन्हीं सब जीवों से मनुष्य (होमोसेपियन्स) का अस्तित्व भी सामने आया। मनुष्य अन्य जीवों से बहुत कुछ अलग नहीं है। उसका शरीर भी अन्य जीवों की तरह हाड़, मांस, मज्जा, रक्त, कोशिका का संयोजित स्वरुप है। आक्सीजन लेना, कार्बनडाइ  आक्साइड को छोड़ना समान रुप से होता है। पशु और मानव में भोजन, जीवन, प्रजनन, निद्रा सब समान रुप से देखने को मिलता है। कुछ जीवों को उनका मस्तिष्क अन्य जीवों से अलग करता है। साथ ही कौन कितना इस संसार में अपने आपको बेहतर ढंग से विकसित कर पाता है, यह क्रम लगातार चल रहा है। इस कड़ी में मानव अन्य जीवों की तुलना में आगे है।

#मानव और पशु में शारीरिक समानताएं

       मानव और पशु में शारीरिक समानताएं व भोजन- मनुष्य स्तनधारी प्राणी है। अन्य जीवों की तरह वह भी जन्म लेता है। समान रुप से भोजन करता है। लेकिन मानव ने अपना भोजन को परिष्कृत करना सीख लिया है। खेती करना सीख लिया है। नाखून, बाल, दांत इन सब में शारीरिक समानता है। समय के साथ मानव सभ्य होता गया और उसने नाखून को काटकर सौम्यता ग्रहण करने की कोशिश की। सुंदर, सुघड़ रुप धर लिया। ठंड से बचने के लिए शरीर पर मौजूद बाल को उसने काटकर आकर्षक रुप दे दिया। अब उसके दांत कच्चा मांस नहीं खाता, उसने पकाकर स्वादिष्ट व पौष्टिक भोजन करना सीख लिया है। खुले आसमान में नहीं रहता। सियार गुफानुमा बिल में रहता है, मानव ने सर्वसुविधायुक्त पक्के मकान का निर्माण कर लिया है। घोड़ा तेज दौड़ सकता है, मानव ने मोटर कार बना लिया, उड़ने के लिए वायुयान है।

जीवों का गुण

        संचार, कष्ट, दुख, क्रोध, शारीरिक हाव-भाव- मनुष्य ने भाषा और लिपी का निर्माण संचार करने के लिए, अपनी भावनाओं व अनुभूतियों को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कर लिया है। इसी तरह अन्य जीवों ने भी संकेत व आवाजों के माध्यम से किसी आगामी खतरे को भांपकर शोर करना सीख लिया था। शिकार करने के समय एक सदस्य पहरेदारी भी करता है तथा किसी खतरे को भांपकर, सबको आगाह कर देता है। पशुओं में अपना प्रेम दिखाने के लिए अलग तरह का व्यवहार करते पाया गया है। जैसे किसी की आवाज से हम पहचान लेते हैं कि वह कौन सा जीव है। सांप के फुंकारने से, कुत्ते के दुम हिलाने से आप उसके क्रोध या गाय के चाटने से उसके सौम्य व्यवहार का पता लगा सकते हैं। मनुष्य भी इसी तरह का व्यवहार करने लगता है। गुस्सा होने पर जोर से चिल्ला-चिल्लाकर ऊंची आवाज में बात करता है तथा उसकी हृदय की गति तेज हो जाती है। 

भाव व्यक्त करना

        अगर आपने कभी किसी गाय के मृत बछड़े को देखा होगा तो आप अनुभव कर सकते हैं कि गाय की आंखों से आंसू आता है। गाय अपने बछड़े को खोजती है। कौवे के समुदाय में किसी एक साथी के मृत्यु हो जाने पर सभी मिलकर विलाप करते हैं। हाथी के परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो जाने पर भी वे वहां रुककर अपना दुख प्रकट करते हैं। हाथियों में अपने बच्चे की सुरक्षा बहुत अधिक सतर्कता देखी जाती है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मानवों की तरह ही उनमें भी कई तरह के भाव होते हैं। सिवाय इतना ही कि वे बोल नहीं पाते व हंसकर-रोकर अपनी बात नहीं कह पाते। वरन दुखी अवश्य होते हैं, उनको  भी भय व खुशी का भाव महसूस होता है।

झुण्ड में रहना 

        एक परिवार व समुदाय में रहना- चिंटियों के बहुत बड़े समूह को देखने पर लगता है कि किसी बड़े संगठन का काम चल रहा है। चीटियां बहुत व्यवस्थित व नियमबद्ध तरीके से अपना काम बहुत बेहनत से लगातार करती रहती है, जबतक कि काम पूरा न हो जाए। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानवों के समान ही चिटियों, मधुमक्खियों में एक मुखिया अर्थात् रानी (समूह प्रमुख) का राज होता है। जैसे- मनुष्यों ने कबीलों में रहना सीख लिया था। इसी तरह लकड़बग्घों, शेर, जंगली कुत्तों, भेड़िया आदि इन जैसे अनेक पशुओं को समूह में रहते व शिकार करते देखा जा सकता है। इनके समूह में एक मुखिया होता है। अलग-अलग जीवों में कोई नर या मादा, समूह का प्रमुख हो सकता है।

जीवों में जनन

        मानवों की तरह ही अन्य जीव भी अपना बसेरा बनाता है। समय के साथ अपना साथी तलाश कर प्रजनन करता है। बच्चों को दोनों जोड़े मिलकर पालते हैं। बच्चों के बड़े हो जाने पर वे स्वतंत्र होकर विचरण करने लगते हैं। इस तरह अनेक बातें उनमें दिखलाई देता है। 

मानव का स्वाभाविक गुण

       मानवों की विकृत पशुत्व आचरण- जिस तरह पशु मिलकर अपने शिकार पर मिलकर हमला करता है, ठीक उसी तरह वर्तमान समय में मनुष्यों ने दंगा व भीड़हत्या (मॉबलिंचिंग) कर रहे हैं। जिस तरह पशु घात लगाकर शिकार करते हैं, मानवों ने भी घात लगाकर लोगों को लूटने उनकी हत्या करने में इस तरह के पैतरों को इस्तेमाल करने लगा है। मानवों ने बोलना सीख लिया है, लेकिन अपशब्दों व कटु वचनों का भी जमकर प्रयोग करने लगा है। नाखून काटना सीख लिया है, लेकिन बंदूक, तलवार अनेक प्रकार के हिंसक हथियार का निर्माण कर लिया है। मानव दूसरे जीवों से ज्यादा बुद्धिमान जरुर है, लेकिन कुटीलता भी अत्यधिक है। जैसे- किसी भी चुनाव में स्वार्थ की मानव केन्द्रीत राजनीति में केवल मानवों के लिए योजनाएं होता है। अन्य जीवों के लिए इस पृथ्वी पर कोई स्थान नहीं है क्या? क्योंकि पशु वोट नहीं डाल सकता है इसलिए? भले ही पशुओं को देवता तुल्य माना जाता रहा हो, यह महज भावना मात्र या भ्रम मात्र ही है। काल्पनिक छद्म आवरण। असल में केवल मानव ही मानव, अन्य कुछ नहीं।

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मानव एक विकसित प्राणी

        अब मनुष्य स्वयं विचार कर सकता है, कि उसके अंदर कितनी मात्रा में एक मानव होने का गुण व स्वभाव है। कहीं केवल शब्दों का ही, खेल मात्र तो नहीं है! कहीं मानव ने अलग सभ्य नाम अपना जरुर रख लिया हो लेकिन पशुता को अपने भीतर हमेशा पाले रखा हो? आखिर, किस तरह की प्रकृति-प्रवृत्ति उसे पशुओं से अलग कर सकती है? यह विचार करने की आवश्यकता है, कि वे सारे नीति नियम व आचरण क्या है जो मानव को पशु से पृथक करता है? जिसका होना ही मानव का होना है, अन्यथा पशु से कोई बहुत भारी अंतर ‘मानव’ के भीतर नहीं है। 
-Amit K. C. (शोधार्थी)
लेख - सर्वाधिकार सुरक्षित

Apr 26, 2019

मानव और पशु में अंतर?  निबंधात्मक व विश्लेष्णात्मक आलेख अमित की कलम से...
   मेशा ही 'मानव' एक जिज्ञाषु प्राणी के रुप में जाना जाता है। साथ ही हर किसी के मन में ये सवाल भी जरुर आता होगा कि आखिर 'पशु' और 'मानव' में क्या अंतर और समानता है? मनुष्य के रुप में एक जीव का जब जन्म होता है तो वह सामान्यतः बहुत कमजोर होता है। अगर उसकी तुलना अन्य जीवों से करें तो! समय के साथ एक मानव में क्रमिक विकास होता है और वह धीरे-धीरे (सीखकर) बुद्धिमान होते जाता है। अब प्रश्न उठता है, क्या मानव जन्म से ही बुद्धिमान होता है या इसमें कोई बड़ा रहस्य है? क्या पशु बुद्धिमान होते हैं? पशु में जन्म के समय से या बाद में कई तरह की शारीरिक शक्ति व एक तरह का खास गुण उसके पास प्राकृतिक होता है। इन सभी प्रश्नों के उत्तर अनंत कालों से तलाशी जा रही है।

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 आमतौर पर हम कई तरह के गुणों से अन्य जीवों को सुसज्जित पाते हैं। जिनमें पशु-पक्षियों में खास तरह का विशेष गुण होता है। जैसे- जंगल का राजा शेर बहुत ताकतवर होता है। शेर के पास काफी बड़ा दांत होता है। उसका नाखून लंबा और धारदार नुकीला होता है। शेर का शरीर इतना बड़ा और मजबूत होता है कि वह बड़े से बड़े जानवर को भी शिकार कर मार गिराता है और अपने जबड़े में उठा ले जाता है। अगर हम बाज पक्षी पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि वह आसमान से कई किलोमीटर की ऊंचाई पर भी जमीन पर रेंगने वाले शिकार पर नजर बना सकता है। मछली पानी में तैर सकता है जैसे- शार्क मछली शिकार करती है। शार्क की सूंघने की शक्ति अद्वितीय होती है। इन सभी विशेषताओं में मनुष्य को रखा जाए तो हम उसे कहां पाते हैं? जरा विचार करिए!

      एक मनुष्य के पास भले ही शारीरिक शक्ति अन्य जीवों के मुकाबले कोई विशिष्ट पहचान नहीं रखती हो लेकिन उसके पास एक ऐसी शक्ति है जो अन्य सभी जीवों से अलग व खास बनाती है। और वह है उसका कमाल का मस्तिष्क जिसके बल पर उसने आकाश, जल, जमीन सभी जगहों पर अपना कब्जा जमाया है। इसमें मनुष्य ने अपनी दूरदृष्टि व सूझ-बूझ का बखूबी इस्तेमाल किया है। लेकिन इन सबके बीच सवाल यह उठता है कि क्या आज हम जिस तकनीक के दौर में जी रहे हैं उसे मनुष्य ने इतनी आसानी से प्राप्त कर लिया है या यह एक लंबे संघर्ष व क्रमिक विकास के दौर से होकर गुजरा है।

      आखिर एक मनुष्य के मानव बनने के पीछे का राज क्या है? पशु से मानव की एक अलग पहचान व अस्तित्व क्या है? क्या है मानवता और पशुता में अंतर? इन सभी प्रश्नों के जवाब या तो ढ़ूंढ लिए गए हैं या दुनियाभर के अलग-अलग बुद्धिजीवी वर्ग सदैव इस बात की तह में जाने का प्रयास करते रहते हैं। जाहिर सी बात है पशु और मनुष्य में शारीरिक व वैचारिक अंतर है, जिसके लिए बौद्धिक तत्व उसे पृथक करता है। बावजूद कुछ बातों में समानता भी नजर आती है जैसे- बालों का व नाखून का बढ़ना तथा मानव का सर्वाहारी होना।

Pashu Aur Manav me Samanta
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     मुख्यतः जो अंतर पशु और मानव के बीच दिखाई देता है वह केवल शारीरिक नहीं है। जन्म से मानव भी अऩ्य पशुओं के समान ही है। इसमें कोई बहुत भारी भिन्नता नहीं है। हमारे नजदीकी रिश्तेदार के रुप में बंदर को माना जाता है। अब इन दो बातों के बीच मानवता और पशुता के बीच के अंतर व समानता के महीन बारीक चीजों को जानने का प्रयास करते हैं। अपनी प्रवृत्ति से एक मानव पशुता जैसा व्यवहार कर सकता है। लेकिन इसका तात्पर्य यह कदापि नहीं है कि मनुष्य हर मामले में अन्य जीवों से सर्वश्रेष्ठ है। 

           मेमथ के क्रमिक विकास के चरण में होमोसेपियन्स बनने की कहानी ही एक संगठित समाज व मानव को साथ में रहने की कला की शुरुआत है। आदिमानव ने आग, पहिया, पका खाना, मकान आदि की जरुरतों को जाना। खेती करने के अलावा उसने अपने से थोड़े भिन्न पशुओं को पालतू भी बनाया। संचार करने के लिए भाषा व प्रतीक चिन्हों की खोज की। विचारों के आदान- प्रदान करने की सामर्थ्यता व भाषायी मजबूती ने मानव को दूसरी परिधि में ला खड़ा किया है। मनुष्य ने कबीलों की तरह रहना सीखा। मुखिया बना तथा कई तरह के नियमों में उन्होंने परिवार, समाज व लोगों को नैतिक जीवन व मर्यादा में जीने का रास्ता दिखाया। ताकि व्यवस्थित जीवन जीया जा सके तथा समाज इन चीजों से विकसित होते गया इसमें कोई दो राय नहीं है।

          आगे चलकर धर्म, ईश्वर, रीति-नीति, संस्कृति, सभ्यता आदि अनेक बातों के दौर से गुजरते हुए एक जीव से मानव बनने की कहानी की ओर एक मनुष्य का पदार्पण होता है। लेकिन ‘मानव’ शब्द को एक सकारात्मक तत्व के रुप में हम लेते हैं। आखिरकार एक मानव होना क्या है? मानव के भीतर सकारात्मक व नकारात्मक दोनों तरह के गुणपक्ष-अवगुण पक्ष होते हैं। कई तरह के भाव होते हैं, जिनमें हास्य, क्रोध, छल-कपट, स्वार्थ, चालाकी बहुत सी बातें हैं जो पशु से मानव को अलग करता है। तो फिर मानव किस बात पर इतना इतराता है और इस जीव जगत का खुद को स्वामी समझता है? मानव बोल पाता है, लिख पाता है, उसके पास सोचने-समझने, कुछ नया बना पाने की समझ है अर्थात उसके पास दिमाग है।

        इस करामाती दिमाग की वजह से उसने अनेक सकारात्मक कार्य किया है और विकास-उन्नति के नए आयाम स्थापित किया है। लेकिन कहते हैं न विकास और विनास में बहुत बारीक अंतर एक दूसरे के सामानांतर दूरी दिखाई देता है। जहां विकास ने दुनिया को बदला है वहीं विनाश के डर ने मानव के स्याह काले चेहरे को भी उजागर किया है। विमान, रॉकेट व कम्प्यूटर ने क्रांतिकारी बदलाव किया है साथ ही परमाणु बम की चपेट में आज पूरा पृथ्वी इसकी जद में है। जिससे मानव समेत अन्य जीव का अस्तित्व संकट में है। कुछ वर्षों में कई जीव या तो विलुप्त हो गए हैं या विलुप्ति की कगार पर हैं।

Manav Ke Dwara Prithvi Ka Vinash
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    आखिर विश्व के सामने एक देश के रुप में या वैश्विक रुप में क्या समस्याएं दिखलाई देता है। मानव का केवल स्वकेन्द्रित विचारधारा अर्थात् स्वार्थी मन, स्वार्थवस सभी चीजों को हासिल कर लेने की प्रबल इच्छा ने अतिक्रमण की ओर उसे अग्रेसित किया है। आज इस जगत में अन्य जीवों के स्वतंत्रता व उसके अधिकार को छिन लिया गया है। लेकिन इन तमाम बातों के बीच एक मानव की कई विसंगतियों व अवगुणों की वजह से एक मानव दूसरे मानव का शत्रु बनता जा रहा है। इन विनाशकारी मानसिकता जिसमें हिंसा, ध्वेष, घृणा, मॉबलिंचिंग, धार्मिक उन्माद, दंगा आदि चीजों ने मूल मानवीय समस्याओं से हमारा ध्यान भटकाने की कोशिश किया है। समाज की प्रमुख समस्या हो सकती थी, बेरोजगारी, भूखमरी, अशिक्षा, कुपोषण, रोजगार, किसानों की आत्महत्या आदि। इन सभी समस्याओं ने एक आदर्श समाज के निर्मॉण व मानवता की भलाई के संदर्भ में एक गहरा संकट पैदा किया है। इसमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय राजनीति, व्यावसायिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, धार्मिक उन्माद व आतंकवाद भी है। और इन सबके पीछे अशिक्षा व जागरुकता की कमी आग में घी डालने का कार्य करती है। तकनीक का बेहतर प्रयोग एक वरदान के रुप में भी है और गलत प्रयोग अभिषाप भी बन रहा है। 

Parmanu Vinash Ki Or Manav
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    एक पशु हिंसक है या शांतिप्रिय यह उसकी प्रकृति से हमें पूर्व से ज्ञात होता है। जैसे- सर्प विषैला है, शेर हिंसक है। किन्तु एक मानव के व्यवहार से यह ज्ञात कर पाना कठिन है कि कब उसका स्वभाव धोखा देनेवाला होगा या हिंसक होगा। मानव कब छल से हमला करेगा और बड़ा नुकसान कर देगा इस प्रवृत्ति पर प्रकृति भी मौन है। इसलिए मानव का ऐसा दुर्गुण ही उसे मानव के मानवता गुणों से पशु के पशुता की ओर बढ़ाता है। अब इसमें पशुता से तात्पर्य उनके सीमित जीवन, व उनके जंगली अपरिष्कृति जीवन से है। जिसमें वे अविकसित जीवन जी रहे हैं। वातावरण के अनूकूल जो ढल नहीं पाते वे विलुप्त हो जाते हैं। अगर ‘मानवता’ का ऐसे ही क्षरण होता रहा तो एक समय ये भी विलुप्ति की कगार पर पहुंच जाएगा। पशु में वो अवगुण नहीं है जो मानवों में है। चोरी, हत्या, व्यभिचार, धोखा इन सभी दुर्गुणों से पशु रहित हैं। प्राकृतिक जीवन जीना हम पशुओं से सीख सकते हैं। पशु प्रकृति को गंदा व विकृत नहीं करते वे प्राकृतिक जीवन जीते हैं। व उसी के अनुरुप आचरण करते हैं। सूर्य के उगने के साथ उठते हैं और सूर्य के अस्त होने के साथ सो जाते हैं। अपना भोजन परिश्रम करके हासिल करते हैं। 

इसीलिए जब भी श्रेष्ठ विद्यार्थी के गुणों की तुलना की गई जो पशु-पक्षियों से की गई थी...
अच्छे विद्यार्थी के पांच लक्षणः-
काग चेष्टा, बको ध्यानं, स्वान निद्रा, अल्पहारी, गृहत्यागी।

         अर्थात् यहां पर कहा गया है कि कौवे (काग) के समान अपने भोजन को पाने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। बगुले (बको) के समान हमारा ध्यान होना चाहिए। कुत्ते (स्वान) के समान हमारी निद्रा होना चाहिए। कम भोजन व अपने घर से कम मोह रखने वाला होना चाहिए। इन जीवों के गुणों से मानव बहुत कुछ सीख सकता है।

         अगर मानव इतना श्रेष्ठ है तो फिर उसे एक सच्चा मानव बनने की क्या आवश्यकता व उद्देश्य हो सकता है? एक मानव के रुप में हम अपने व दूसरों के अधिकारों व स्वतंत्रता का सम्मान क्यों नहीं कर सकते? चाहे व अन्य कोई जीव भी क्यों न हो। अपने नैतिक जवाबदारी की सीमा में रहते हुए अपना जीवन जीएं। अतिक्रमणकारी मानसिकता को त्यागकर हमें स्वयं के अस्तित्व को पहचानना होगा कि इस जगत में अन्य जीवों के समान ही हम भी आए हैं और प्रकृति हमें भी उतना ही अधिकार प्रदान करती है, जितना अन्य जीवों को किया है।
   
तो आइए एक मूलमंत्र को अंगिकार कर हम कुछ मात्रा में अपने मानव होने के अस्तित्व पर विचार करें... 
“जीओ और जीने दो”।

- Amit K. C. 
(शोधार्थी व पत्रकार)

(लेखक दिल्ली के एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय में जनसंचार व पत्रकारिता के पीएचडी शोधार्थी व विचारक तथा पत्रकार हैं। यह आलेख उनका नीजि विचार है। हमारा वेबसाइट इन तथ्यों व आंकड़ों की प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।) 

#मानव #पशु #विनाश #जीव #समाज #समुदाय #जीवन

Apr 24, 2019

कम्प्यूटर चलाना सिखना चाहते है हिन्दी में
Mujhe Cmputer Chalana Sikhana hai

Kya Aap Computer Chalana Sikhna Chahte hai, To Aap Sahi Lekh Aur Jankari Prapt Kar rahe hai,
Jis Prakar se School Jate hai to Sabse Pahle A. B, C, D, Auar K, Kh, Ga, Gh, Sikhaya Jata hai, uske bad Kalam Aur Kapi di jati hai.
Thik isi Tarah se Computer Ko Sikha Jata hai,
Computer Sikhna Bahit hi Saral Hai,
Agar Aap Pahli Bar Computer Chalana Sikhna Chahte hai, To Aapko Computer Ki Basic Jankari Prapt Karni Chahiye |
Ya Agar Aap Apne Bachche Ya Kisi ko Computer Chalana Sikhana Chahte hai, To Aapko Yah Karna Chahiye.
Sabse Pahle Computer me Bachcho Ko Game Khelna Aur Paint Brash Me Paint Karna Sikhaye, Usse Yah Hoga Bachche Ka Mouse Chalane Ka Pakadne Ka Mouse Ko Chalane Ka Anubhav Badhta Jayega, Aur Mouse Aur Key Board Chalana Sikhega,
Key Board Me Bachche ko Apna Naam Likhna Sikhaye,
Ya Sukhruaat Me to Pura Paint Brash hi Sikhaye,
Uske Bad Computer Ko Band Aur Chalu Karna Sikhaye,
Desktop Ke Sare icon ko Hide karke rakhe, Nahi to idhar Udhar kar sakte hai,
Paint Sikh Jane ke bad,
Minimize, Back, Next, Home, Taskbar, Yah Sabhi Bataye,
Computer Drive Mobile Ki Tarah hi Hota hai,
Computer Aur Mobile me kuchh Jayda Antar Nahi hota hai, Bas Isko Samajhne ki der Hai,
Mobile Wastav Me Mini Computer Hai,
Computer me Kise Kya Kahte ha, Ise Kapi Mi Likhkar rakhe, Bhulne Par aapko Yaad aayeg,
Aur Computer Ko Pad Pad Kar, Chalane Se Jaldi Sikh Payenge.
Computer me Save Karna Sikhe, Time Dekhna Sikhe,
Uske Bad Small and Capital Likhna Sikhe, Symbol Ko jane,
Kul MIlakar Sabse Pahle Mouse ko Pakadna Sikhna Hai,
Uske Bad Mouse Ko Chalana Sikhna hai,
Uske Bad Key Board me naam Likhna Sikha Hai,
Uske KeyBoard Me Small Capital, Number, Enter Paragraph, Space, Delete BackSpack in Sahi Ko Sikhna Hai,
Itna Janne ke bad Aap Ya job hi Sikh Rahe hai, Aaram ke sath Computer Chalana Sikh Jayenge.