Mar 5, 2019

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्व विद्यालय बना भ्रस्टा चार का गढ़, छत्तीसगढ़
माननीय
महामहिम राष्ट्रपति / माननीय प्रधानमंत्री / कुलाधिपति महोदया / कुलपति महोदय
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर की स्थापना मूर्धन्य पत्रकार स्वर्गीय भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी ने कर्मयोगी कुशाभाऊ ठाकरे के नाम पर 2005 में बड़े सपनों के साथ की थी. बाजपेयी जी चाहते थे की पत्रकार समाज की आवाज बने. पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर, छत्तीसगढ़ शिक्षण संस्थान की राह पे कभी न चल कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राह पर अनवरत अग्रसर है। पिछले लगभग 04 सालों से विश्वविद्याय के कुलपति पद पर डॉ.मानसिंह परमार आसीन हैं। इसके पहले विश्वविद्यालय के चर्चित संघ के कार्यकर्त्ता कुलपति सच्चिदानंद जोशी रह चुके हैं। श्री जोशी ने पत्रकारिता विश्वविद्यालय को जिस तरह से संघ की शाखा के रूप में तब्दील करने की कवायद की वह अपने आप में बेमिशाल हैं। विश्वविद्यालय जहाँ धर्मनिरपेक्ष संस्थान और सरकार से अलग रहकर चलने वाली संस्था होती है, वहीं पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति साहब और तमाम प्रोफेसर बी. जे. पी. के विचारों को आगे लेकर संघ की राह पर चलते रहें हैं। आए दिन संघ से जुड़े हुए कार्यक्रम विश्वविद्याय परिसर में कराए  जाते रहे हैं। जिसमें मुख्यवक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए लोग या पदाधिकारी होते हैं और उस कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के किसी न किसी प्रोफेसर द्वारा किया जाता रहा हैं। विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी को पूर्ण करने के लिए 2005 में शैक्षणिक पदों के साथ रीडर पद की संविदा नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इसके लिए पत्रकारिता में स्नातकोत्तर उपाधि, पीएचडी या 8 वर्ष शैक्षणिक अध्यापन या पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्ष का अनुभव जरूरी था। डॉ. शाहिद अली अपनी पत्नी डॉ. गोपा बागची एसोसिएट प्रोफ़ेसर केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के माध्यम से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनाकर रीडर के पद पर भर्ती हो गया और 2008 में रीडर के पद पर नियमित हो गया। डॉ. अली बड़े ही मंझे खिलाडी है पर क्या करे नक़ल के लिए अक्ल की जरुरत होती है अली कहते है कि वे एम. ए. पत्रकारिता की डिग्री सौराष्ट्र विद्यापीठ से 1997 में पूरी की है और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर में कोर्स संयोजक और अतिथि प्राध्यापक के पद पर 1995 से ही अध्यापन का अनुभव माना गया यह व्यक्ति एम. ए. पत्रकारिता की डिग्री बाद में पूरी करता है प्राध्यापक पहले बन जाता है। और 01 साल के बीजेएमसी के आधार पर अतिथि प्राध्यापक बन गयाअली यहीं नहीं रुके वे गुजरात विद्यापीठ का रिफ्रेसर कोर्स का प्रमाण पत्र भी 1997 में फर्जी प्रमाण पत्र खुद के द्वारा हस्ताक्षर कर मोदी जी के गुजरात को पलीता लगाने में पीछे नही हटे धन्य है. कुलपति जोशी और मुख्यमंत्री रमन सिंह की पूरी लुटेरी टीम. गजब का शिक्षा के गाल पर तमाचा है. जिसे शैलेन्द्र खंडेलवाल ने आदालत में चुनौती दी. अदालत ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से पूछा की क्या डॉ. अली को जारी किए गए प्रमाण पत्र सही हैं और यह प्रमाणपत्र विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही जारी किया है, इस पर गुरु घासीदास विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिखित में जानकारी देते हुए कहा कि  डॉ .शाहिद अली ने कभी भी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर में शिक्षक के पद पर अस्थायी या स्थायी तौर पर कभी भी कार्य नही किया है। अतः डॉ. शाहिद अली की पत्नी और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की जनसंचार विभाग की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ .गोपा बागची द्वारा प्रदान की गयी अनुभव प्रमाण पत्र पूरी तरह से फर्जी है। जिसके आधार पर अदालत ने डॉ. शाहिद अली के प्रमाण पत्रों को फर्जी मानते हुए धोखाधड़ी का प्रकरण पंजीबद्ध धारा 420, 467, 468, 471 और 34 भादस के तहत दंडनीय अपराध के तहत किया, साथ ही शैलेन्द्र खंडेलवाल द्वारा किये गये शिकायतों के आधार पर तत्कालीन सामान्य प्रशासन की सचिव निधि छिब्बर ने अपने जाँच में पाया की डॉ.शाहिद अली के नियुक्ति में प्रक्रिया में UGC के मापदंडों को ताक में रखा गया है और उक्त रीडर की नियुक्ति पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है और डॉ. अली द्वारा उपलब्ध  शैक्षणिक एवं अनुभव प्रमाणपत्र पूरी फर्जी हैं। डॉ. शाहिद अली ने अपने नियुक्ति को जायज ठहराते हुए अपने निर्देशन में पी-एच.डी. की सीटों का विज्ञापन जारी कराकर भूतपूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के खास ओ.एस.डी. विक्रम सिसोदिया की पत्नी श्रीमती कीर्ति सिसोदिया (पीएचडी-शोधार्थी) ने UGC के नियमों को ताक में रखकर बिना किसी उपस्थिति हस्ताक्षर व Plagiarism certificate प्राप्त किए बिना भारत की सबसे बड़ी डिग्री हासिल कर ली।
विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग में सहायक प्रोफ़ेसर पद पर कार्यरत डॉ. आशुतोष मंडावी एवं प्रबंधन अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफ़ेसर डॉ.अभिषेक दुबे तो कुशाभाऊ ठाकरे के शोधार्थियों से दो कदम आगे निकल गए। डॉ. आशुतोष मंडावी ने अपनी पी-एच.डी. लगभग एक दशक में केन्द्रीय विश्वविद्याल बिलासपुर से फर्जी प्रमाण पत्र बाटने के जुर्म में निलंबित डॉ. गोपा बागची के निर्देशन में पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नियमित अध्यापन कार्य करते हुए बिना किसी शोध अवकाश व शोध प्रबंधन को बिना plagiarism सर्टिफिकेट के अपने राजनीतिक पहुँच बीजेपी शासनकाल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर लगातार 04 वर्षों तक व वर्तमान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के पद पर कार्यरत होने एवं संघ के प्रान्त प्रचारक दीपक विश्पुते के सिफारिश से कारण केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं UGC को गुमराह कर पी-एच.डी. की डिग्री हासिल कर लिया। सहायक प्रोफ़ेसर  आशुतोष मंडावी को कुलपति जोशी ने संविदा प्राध्यापक के रूप में नियुक्त किया था और 2008 में जोड़तोड़ से नियमित हो गये आशुतोष मंडावी अपने ज्ञान के लिए मशहूर हैं जिन्हें न लेखन आता है, न पढाना, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे प्रबुद्ध संगठन ने किस आधार पर इनका चयन किया यह सोच का विषय है जो व्यक्ति अपने विषय पर रत्तीभर ज्ञान नहीं रखता वह किसी विचारधारा को कैसे आगे बढ़ा पायेगा।  जहाँ इस व्यक्ति की चोरी पकड़ी जाती है तो अपने राजनितिक पहुँच और वर्तमान में अध्यक्ष होने का भय दुसरे विचारधारा के छात्रों को दिखाने लगता है। छात्रों के बीच कामचोर और बुद्धिहीन गुरु के नाम से लोकप्रिय हैं। इतना ही नहीं, अधिक गुणी व्यक्तित्व के होने के कारण आशुतोष मंडावी को कुलपति जोशी ने Hostel Warden, Sports Officer भी बना दिया था। जिससे वे विश्वविद्यालय को संघ और बीजेपी के आत्मपरिसर बना सकें। आशुतोष मंडावी  विश्वविद्यालय के भव्य समवेत में हर सप्ताह एबीवीपी की कार्यकारिणी मीटिंग भी करते हुए मिल जाते थे। क्या विश्वविद्यालय के कुलपति आफिस, प्रशासनिक भवन और प्रोफेसर्स के केबिन में जितना अधिकार विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों का है उतना ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का भी है? अगर नहीं तो फिर आज तक लगातार हो रहे असंवैधानिक तरीके से मीटिंग और शिक्षकों की भागीदारी पर कुलपति ने कोई क़ानूनी कार्यवाई क्यों नहीं की? क्या इसका मतलब यह नहीं मान लेना चाहिए कि मिली-जुली सरकार चलती रही है? इतना ही नहीं आशुतोष मंडावी ने विधानसभा चुनाव के आचार संहिता का जमकर धज्जियाँ उड़ाया उनके निर्देशन में प्रदेश भर के स्कुल और कालेजों में नारी आत्मरक्षा के नाम पर कराटे और आत्म रक्षा के गुर सिखाने का कार्यक्रम चुनाव के समय चलाया गया जिसमे बीजेपी और संघ के अजेंडे का खुलेआम प्रचार किया जाता रहा प्रशासन में सीधे दखल होने के कारण किसी भी संस्थान और संवैधानिक संस्थाओं ने इस तरह के कार्यक्रम में रोक लगाने का हिम्मत नहीं दिखायी। इसकी सत्यता की पुष्टि विभिन्न समाचारों में विधानसभा चुनाव के समय नारी आत्म रक्षा के लिए हुए प्रशिक्षण के कार्यक्रमों से सम्बंधित ख़बरों को देख सकते है।
    पत्रकारिता यूनिवर्सिटी में दो छात्र संगठन हैं जिसमें विवाद NSUI के छात्रों को लेकर खड़ा हुआ था है। NSUI के पदाधिकारी यूनिवर्सिटी में खुलेआम आयोजित  आर. एस. एस. के कार्यक्रम जिसमें राहुल गाँधी मुर्दाबाद, सोनिया गाँधी मुर्दाबाद, मनमोहन सिंह मुर्दाबाद, कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद के नारे लगाये जा रहे थे का विरोध करने कुलसचिव के पास गये और आशुतोष मंडावी ने पुलिस प्रशासन को अपने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का अध्यक्ष होने का धौस देते हुए NSUI समर्थित छात्रों को विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ के आरोप में जेल पंहुचा दिया क्योंकि ये छात्र श्री मंडावी के नियुक्ति और संघ समर्थित कार्यक्रमों को हमेशा चुनौती देते रहें थे। जग जाहिर है कि आशुतोष मंडावी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसी संस्था के लिए काबिल नहीं है वे अपनी नियुक्ति को बचाने के लिए संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के ओट में छुपकर अपनी राजनीती करते रहे हैं, वर्तमान में बीजेपी की सरकार बदलने के बाद अपने आप को कांग्रेसी बताने लगे है? यह संघ के लिए भी विचारणीय है।
डॉ अभिषेक दुबे ने भी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से नियमित शोधार्थी के रूप में बिना शोध अवकाश व शोध प्रबंधन को बिना Plagiarism सर्टिफिकेट के जमा कर अपने राजनीतिक पहुँच (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के रायपुर नगर के महामंत्रीं के पद पर कार्यरत व वर्तमान में प्रशासनिक अकादमी निमोरा रायपुर में प्रतिनियुक्ति में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के अनुशंसा के आधार पर कार्यरत है) का इस्तेमाल कर पी-एच.डी. की फर्जी  डिग्री लेली। अभिषेक दुबे मात्र एम. बी.ए. की डिग्री की पात्रता रखते है बिना net phd के सहायक प्रोफ़ेसर के पद पर अपने पिता श्री पद्मश्री सुरेन्द्र दुबे के राजनितिक प्रभाव के कारण नियुक्त हो गये। अयोग्य होंते हुए भी आज प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है। डॉ. दुबे जुगाड़ के लिए जाने जाते है एम.बी.ए. की डिग्री के आधार पर विश्वविद्यालय के मीडिया प्रबंधन विभाग में नौकरी पा लिया जबकि शैक्षणिक योग्यता मीडिया प्रबंधन का माँगा गया था नाकि एम. बी.ए.मार्केटिंग का अपने नौकरी में उठ रहे सवालों और 2018 में सरकार बदलने के डर से पिता श्री सुरेन्द्र दुबे और भाई जोकि संसद सदस्य राजनंदगांव के ओएसडी के राजराजनीतिक रसूख से अतिथि प्राध्यापकों के हवाले कर प्रबंधन विभाग को सत्र के मध्य में छोड़कर प्रशाशनिक अकादमी निमोरा में प्रशिक्षक के पद पर प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हो गया क्या ये सही शिक्षक है अगर देश में शिक्षक की परिभाषा मार्गदर्शक की है तो माफ़ कीजिए ये देश के सही मायने में गद्दार है।
UGC के मानक के तहत पी-एच.डी. किसी संस्थान में कार्यरत व्यक्ति अगर वह स्वयं के कार्यरत संस्थान से बाहर पीएचडी कर रहा है तो वह बिना अवकाश के नहीं कर सकता, परन्तु डॉ. शाहिद अली ने अपने फर्जी नियुक्ति के तर्ज पर ही विश्वविद्यालय में पी-एच.डी. की डिग्री की दुकान खोल दी है और डॉ. शाहिद अली ने अपनी नौकरी बचने के लिए मुख्यमंत्री के करीबी के पत्नी को मुफ्त में डिग्री बाँट दी, डॉ. शाहिद अली ने अनुसूचित जाति के पी-एच.डी.  शोधार्थी कमल ज्योति जाहिरे की पी-एच.डी. सिर्फ जाति के आधार पर ख़ारिज कर दिया क्योकिं कमलज्योति डॉ.अली के योग्यता पर लगातार सवाल उठाते रहे थे। विश्वविद्यालय में जो छात्र व शोधार्थी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई उन्हें बहार का रास्ता दिखा दिया गया या उसे फर्जी तरीके से विश्वविद्यालय में मारपीट और तोड़फोड़ के इल्जाम में पुलिस केस में फसा दिया गया इसका शिकार कमल ज्योति जाहिरे हुआ।
माननीय कुलपति महोदय आप अपने भाषणों में मीडिया और शिक्षा में सुचिता और सत्य की बात करते रहे हैं आप के आँखों के सामने विश्वविद्यालय में अयोग्य रूप से नियुक्त व्यक्तियों के द्वारा शैक्षणिक कार्य को छोड़कर संघ के प्रचार-प्रसार का कार्य करना और कर्मचारियों द्वारा पास फेल का खेल खेला जाना। आप धृतराष्ट्र की भूमिका में रहे है। आप प्रोफ़ेसर के पद से कुछ महीने में सेवानृवित हो जायेंगे, क्या अपनी अंतरात्मा की आवाज पर विश्वविद्यालय में हुए तमाम अयोग्य शिक्षकों की नियुक्तियों को जाँच कराने का कार्य करेंगे। कुलपति महोदय विश्वविद्यालय में अयोग्य प्राध्यापकों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है और आप इनके संरक्षक की भूमिका में पायें गये है। एक बार सच के साथ खड़ा होइए सारा देश आप को दुआएं देगा। योद्धा बनिए, आप नरेन्द्र मोदी जी को अपना आदर्श मानते है, एक ओर मोदी जी भ्रष्ट्राचार से लड़ रहे है। आप नैतिक भ्रष्ट्राचारियों को कब विश्वविद्यालय के पावन धरा से कब बाहर करेंगे।
साथ ही UGC-नईदिल्ली, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और उच्च शिक्षामंत्री को पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हुए अवैध नियुक्तियों एवं पी-एच.डी. डिग्री के गोरखधंधे पर जाँच कराकर दोषीयों को नौकरी से तुरंत बर्खास्त कर जेल भेजना जाना चाहिए, जिससे विश्वविद्यालय में शिक्षा और शोध में गुणवत्ता बढाई जा सके।
धन्यवाद
                                                                         प्रार्थी                                                                                                                                                    छात्र
                                                                     अंकित तिवारी
                                                              कुशाभाऊ ठाकरे
पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर
रायपुर -492013 (छत्तीसगढ़)


Feb 24, 2019

#सतनामी_समाज में नियम लागु, मुंडन, छठ्ठी, कपड़ा, मिठाई, देवपूजन, नशाखोरी, बंद जरुर पढ़े |
satnami samaj ka naya niyam lagu

रविवार, 24 फरवरी को, ग्राम-#चरौदी, तहसील-#मालखरौदा, जिला-#जांजगीर-चाम्पा, #छत्तीसगढ़ में,
ग्राम चरौदी के सतनामी समाज द्वारा सामाजिक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमे #सतनामी समाज के समस्त घर से प्रमुख ग्रामवासी पहूचे |

जिसमे समाज की रीतिरिवाज, संस्कार, खान-पान, के ऊपर समाज के लोगो द्वारा चर्चा किया गया |
ग्राम के लोगो ने ,अनेक प्रकार की सामाजिक बाते रखी गई |

जन्म संस्कार

#योगेन्द्र_कुमार ने अपनी बात को रखते हुए, कहाँ की सतनामी समाज में जन्म संस्कार को उत्सव के रूप में मनाना चाहिए |
और जोर देते हुए कहाँ की, सतनामी समाज में छूत-अछूत का कोई चलन नहीं है |

और छठ्ठी करना अनिवार्य नहीं है, जिसका मन लगे वह समाज को उत्सव भोज करा सकता है, अथवा अनिवार्य नहीं है |

सभी लोगो ने इस पर विचार किया और इसे समाज के ऊपर लागु करने पर जोर दिया, नियम बनाया गया |

मृत्यु संस्कार

मृत्यु संस्कार पर चर्चा हुई, जिसमे गाँव के सभी लोगो ने कहाँ की, मरने पर समाज के द्वारा सफ़ेद कपड़ा नहीं दिया जायेगा |
उसके जगह में सहयोग राशि, समाज के द्वारा परिवार को दिया जाए |
तथा, दस कर्म में, मिठाई को गलत माना गया, क्योकि मिठाई उत्सव के समय खाई जाती है, इसलिए मिठाई को भी समाज के द्वारा बंद किया गया |

समाज सुधारक योगेन्द्र कुमार ने अपनी बात को रखते हुए कहाँ की मरने पर मुंडन किसी को नहीं कराना चाहिए |

इस बात पर चर्चा हुई, समाज के लोगो ने कहाँ की, यह बहुत पहले से चला आ रहा है, और इससे यह पता चलता है, की परिवार में नजदीकी व्यक्ति की मृत्यु हुई है |

इसके उत्तर में योगेन्द्र ने कहाँ की, महिला को भी पिता के मरने पर मुड मुड़ा लेना चाहिए |
तथा लोगो को मुंडन की वास्तविकता को बताते हुए कहाँ की,

मुड मुड़ाये हरी मिले, सब कोई लेत मुड़ाये |
बार-बार के मुढ़ते, भेड़ न बैकुट जाए ||

इससे यह इस्पस्त होता है, मुड इसलिए मुड़ाया जाता है की पहले यह मान्यता थी की, परिवार के लोगो के मुड मुड़ाने से मृत आत्मा को शांति मिलती है, और वह स्वर्ग में जगह पाता है |
सतनाम को इस्पस्त करते हुए कहाँ की हमें स्वर्ग वासी नहीं, सतलोक वासी, सतपुरुष के पास पहुचना है, इसलिए हम मुड मुड़ाकर काल के जाल में किसी को नहीं भेजेंगे |

और इस तरह से समाज के लोगों ने कहाँ की, मुड़-मुड़ाना, मुंडन करना अनिवार्य नहीं, जिसका मन लगे ओ मुड़ा सकता है, जिसका मन न लगे ओ न मुड़ाये, यह बदलाव एक झटके में नहीं हो सकता |
लेकिन समाज के द्वारा खुली छुट दी जाती है |

विवाह संस्कार

अपनी बात को रखते हुए योगेन्द्र कुमार ने कहाँ की, आज भी सतनामी समाज के लोग, अग्नि को साक्षी मानकर विवाह कर रहे है, और मंगल सूत्र, सिंदूर प्रथा को प्राथमिकता दी जा रही है |

जो की सतनामी समाज में मान्यता नहीं है, इसलिए, सतनामी रीति नियम से विवाह करना अनिवार्य किया जाये |
लोगो ने कहाँ की इससे खर्चा जायदा होगा, इस पर सुझाव देते हुए योगेन्द्र ने कहाँ की, जब बारात वापस लड़के वालो के घर दुल्हल को लेकर आती है, तो एक सतनाम के झंडे को घर पर बांध कर फेरा लगाया जाये | और चन्दन पान, और फूलमाला डालकर विवाह सम्पन्न कराया जाए |

जिसमे समाज को भोज कराने की अनिवार्यता भी न हो |
इस तरह से समाज की रीति आगे बढ़ेगी, और समाज में अच्छे संस्कार भी आगे बढ़ेंगे |

इस पर गाँव प्रमुख लोग, तेजलाल, रामदयाल, खोलबहरा, खिखोराम, घसियाराम, भरत और सभी लोगो ने एक स्वर में कहाँ की इससे समाज आगे बढेगा |

सबसे जरुरी नियम,

इस बैठक में सबसे बड़ी चर्चा का विषय यह रहा की, किसी भी परिवार में उत्सव के समय सामाजिक रूप से, नशाखोरी, शराब पिलाना, और मास भक्षण, देवपूजन, को अनुचित माना गया |
इससे समाज में गरीबी, सामाजिक बुराई आती है, इस तरह से शराब और मास भक्षण को गाँव में सामाजिक पूरी तरह से बंद किया गया |
इन सभी नियमो को पालन करने के लिए गाँव के लोगो ने, 10 सदस्यीय टीम और नियम पर्ची का योजना बनाया गया |
जिससे नियम का पालन हो, समाज में एकरूपता आये |

योगेन्द्र ने बताया की, यह टीम गाँव में होने वाले सामाजिक कार्यक्रमों में पहुचेगी, और सामाजिक नियमो से अवगत कराएगी |
हमने जानने की कोसिस की अगर कोई परिवार नियमो को तोड़ता है, तो क्या होगा |
इस उत्तर देते हुए कहाँ की लोग जितनी बार जानबूझकर गलतिया करेंगे, हम उतना ही लोगो को समझायेंगे, की हमें गरीबी नहीं चाहिए |
हमें आगे बढ़ना है, अच्छी शिक्षा, अच्छे संस्कार प्राप्त करना है |
हम किसी को दण्डित नहीं करेंगे, समाज से अलग नहीं करेंगे |
हम मिलकर समाज में हम भी भावना लायेंगे, एक होकर कार्य करेंगे, अच्छे समाज का परिचय देंगे |
और समय-समय पर बैठक करते रहेंगे |

गाँव की मुख्य बैठक में प्रमुख रूप से, सतनामी समाज के विचारक, ग्रामवासी , तुकाराम, योगेन्द्र, तेजराम, राजेंद्र कुमार, राधे, घसियाराम,  भरत, सियाराम, गोपाल प्रसाद, महेंद्र, पुनीराम, पूना, अजय, खिखोराम, भकला, राजेश, राज कुमार, बसंत, कपिल, राजू लाल, रामनाथ, छोटे कुमार और समस्त सतनामी समाज उपस्थित रहे |
ग्राम चरौदी से सतनामी समाज से सम्बंधित किसी भी जानकारी के लिए योगेन्द्र कुमार 9131880737 से संपर्क कर सकते है |

Feb 17, 2019

छत्तीसगढ़ सतनामी समाज की पूरी जानकारी |
satnami samaj ki puri jankari

Chhattisgarh me satnami logo ki sankhya karib 50 Lakh hai,
Satnami Samaj Murti Pooja Nahi Karta,
Aur Na Hi Mas Khate hai,
Satnami Samaj ke Log Nasha Nahi Karte,

Satnami Samaj ke log Hindu Nahi Hai,
Satnam Ek Marg Hai, Koi Jati Nahi Hai,

Satnami Samaj ke log Sindur Nahi Lagate, Chandan Lagate hai, Aur Na hi Mangal Sutra Pahante hai,
Vivah me Poolmala aur Chandan Pan Karte hai,

Satnami Samaj me Mundan Nahi Kiya Jata,

Satnami Samaj me Mrityu Bhoj Me Mithai Nahi Banta Jata,

Satnami Smaj ke Log Devi Devtao Ki Pooja Nahi karte, Videshi Logo ki Gulami Pratha,
Ganesh, Durga, Kali, Ramayan, MahaBharat, Krishna, Bhagwat, Shni, Bajrang bali, is tarah ke kisi bhi devi devtao ki pooja nahi karte aur n hi chanda dete hai.

Satnami Samaj me Kisi Prakar Ka Koi Chhut Achhut, Pap, Punya, Nahi Mana Jata,

Satnam Marg me Baba Guru Ghasidas Ko Guru Mana Jata hai,
Aur Koi Guru Nahi Hai.
#ब्राम्हणवाद #मनुवाद का अंत और #आंबेडकरवाद अभियान कैसे सफल होगा |

ब्राम्हणवाद मनुवाद का अंत और आंबेडकरवाद अभियान


bramhanwad manuwad ka ant aise hoga

#मूलनिवासी या #दलित कहे तो, एस.टी., एस.सी., ओबीसी, आते है इनमे
आप तो भली भाती जानते होंगे की ब्रम्हान्वाद और मनुवाद क्या है, सीधे बात करते है, पॉइंट के ऊपर हमें क्या करना है |
भारत देश ऐसा है, यहाँ कोई भी अपनी विचारधारा को रख सकता है, किसी के ऊपर कोई दबाव नहीं डाल सकते है |
ब्रम्हान्वाद और मनुवाद किसी को कार्य करने के लिए विवश तो नहीं कर रहा बस, करने के लिए मन में डर दिखा रहा है |
और लोग समझ लेते है, यही हमारी प्रथा है |
क्या ब्राम्हणों को समझाने से समाज शिक्षित हो जायेगा |
क्या ब्राम्हणों को समझाने से लोग ढोंग को त्याग देंगे |
क्या ब्राम्हणों को समझाने से लोग समझ जायेंगे |
बिलकुल नहीं, तो करना क्या है |
एक ब्राम्हण है जो लोगो से कह रहा है, आपके ऊपर शनि है, और शनि के ऊपर 1 लीटर तेल चढ़ाना होगा |
आप किसे समझोगे |
उस ब्राम्हण को या उस आदमी को जो तेल चढाने वाला है |
अगर कोई होली खेल रहा है तो किसे मना करोगे, उस खेलने वाले को, या किसी दुसरे को |
अगर ब्राम्हणों ने गलत नियम बनाया है, अगर जान कर उस नियम आप पालन करते  है, तो आप भी गलत है, ध्यान रहे |
अगर कोई राजश्री बेच रहा है, तो जो खा रहा है वह भी, जानबुझकर गलत कर रहा है, अगर किसी में इंतनी ताकत है, की पुरे कंपनी को बंद कर दे, या उस व्यक्ति को समझाए, जो खा रहा है, कितने बेचने वाले को समझोगे, अगर बेचना जायज है तो |
यहाँ तक आप समझ गए, समझाना किसे है |
व्यक्ति को, लोगो को ,समझाना है, जो ऐसा कर रहा है, मगर कैसे समझाना है,
आज के समय में अनेक प्रकार के लोग है, किस-किस को समझाओगे, और किस माध्यम से समझाओगे |
कोई बहरा है, तो कोई गूंगा, कोई कोई पागल है, तो नासमज, कोई अनपड़ है, तो किसी को पड़ना नहीं आता, किसी की आँखे कमजोर है, तो कोई कुछ और अनेक तरह से |
इन्टरनेट के माध्यम से समझाओगे, facebook के माध्यम से बताओगे |
Whatsapp के माध्यम से बताओगे, लिख कर भेजोगे, या विडियो बनाकर, कितने लोग देखेंगे |
यह तो सभी कर रहे है, कभी इसकी बुराई तो कभी उसकी बुराई |
मानता हूँ की यह सोशल साईट हमारा सबसे बड़ा हथियार है, मगर इसका उपयोग हमें सही तरीके से करना होगा |
किसकी बुराई करोगे, उम्र गुजर जायेगा, बुराई करते-करते, कोई एक भी नहीं सुधरेगा |
चलो मान लिया 10 भी सुधर गए, क्या इससे कुछ होने वाला है |
आज लोगो के मन में ये छोटा जात का ये बड़ा जात का, ये उस धर्म का ये इस धर्म का, ये मेरा ये तेरा, आपस में ये मनुवादी लडवा रहे है |
तो करें तो करें क्या, इसे समझो
#योगेन्द्र_कुमार #योगेन्द्र #Yogendra #Yogendra_Kumar
आज के समय में अनेक प्रकार से लोग काम कर रहे है, जैसे राजनीतिक पार्टी, संगठन जैसे #भीम_आर्मी, बामसेफ, DS4, और भी अनेक तरह के |
आज के समय में देश #मनुस्मृति से नहीं #संविधान से चलता है |
आज मनुवादी बड़े प्रेम से सभी जगह-जगह पहुँच रहे है, लुभावने आयोजन कर रहे है, विवाह, मुंडन और अनेक प्रकार के रीति रिवाज को करवा रहे है, और लोग कर रहे है, ये नहीं जानते की ये गुलाम बनाने की तैयारी चल रही है, गरीब बनाने की प्रथा का सुरुआत है, एक दिन इनको इतना विवश कर दिया जायेगा, की ब्राम्हण के बिना कोई कार्य नहीं होगा |

आज भी ओबीसी समाज और अन्य मूलनिवासी समाज की इतनी औकात नहीं की अपने बच्चे का नाम क्या रखना है, यह सोच पाए, जायदा नहीं तो फिर से राशि के चक्कर में पड़ेंगे, ग्रह नक्षत्र देखेंगे |
आज लोग अनेक जाति और समाज में बंटे हुए है,
एक व्यक्ति, और परिवार, पूरा गाँव, इकाई, सेक्टर, 100 गवा तहसील इकाई, जिला इकाई, राज्य इकाई, और देश, पूरा विश्व |
आज लोग किसी-किसी को ही समझाने का काम कर रहे है, और कोई-कोई पूरा समाज को समझाने का काम कर रहा है, तो कोई-कोई पुरे गाँव को समझाने का काम कर रहा है |

लोगो को किस प्रकार से जागरूक करें |

आप किसी खास-खास लोगो को एक-एक करके समझा सकते है,
अगर किसी एक समाज को टारगेट करके समझायेंगे, तो भेदभाव आ जायेगा |
इसलिए पुरे गाँव को, सर्व समाज को समझाने की जरुरत है |
लेकिन गाँव में तो अनेक प्रकार से, बच्चे, युवा, जवान, बुजुर्ग, महिला, लडकियाँ रहते है |
कैडर करोगे तो गिने चुने लोग ही आयेंगे, मोहल्ले से, ओ भी महिला बहुत कम आयेंगे |
सबसे जरुरी ध्यान देने वाली बात, जो अभियान चलाता है, उस व्यक्ति को देखकर ही समाज आगे बढ़ता है, इसलिए व्यक्ति का चरित्र, और बात करने का तरीका, व्यक्ति समझदार और शिक्षित हो |

आपको 4 विषय को लेकर कार्य करना है |

1. मनुवाद के बारे में बताना, जागरूक करना, मनुवाद से निकालना |
2. शिक्षा के प्रति जोर देना, Tuition देना, शिक्षित करना |
3. उसके बाद संगठित करना, सभी में एकता की भावना, मिलकर कार्य करना |
4. और अंतिम में संघर्ष करना |

यह कार्य किसी राजनीति पार्टी के द्वारा न हो तो बेहतर है, इससे यह अभियान कमजोर हो सकता है |

किस तरह करें अभियान की शुरुआत |

लोग आपकी बात क्यों सुने, आप उनकी वास्तविक भलाई की बात करें |
मनुवाद से लोग किस तरह से गरीब हो रहे है, इसको बताये |
#मनुवादी_त्यौहार, जयंती के 15 दिन पहले, लेख अभियान, प्रिंट करके घर-घर बांटे |
लोगो को समझाए, ब्राम्हणों से किसी प्रकार का कोई भी रस्म, पूजा पाठ, विवाह कुछ भी न करवाए |
फिर पुरे गाँव के लोगो को एकता के सूत्र में रहने के लिए कहे |
अपने पैसे को फालतू, टेंट, और अन्य में खर्च न करें |
गाँव में कुछ भी मनुवादी त्यौहार होता है, तो उससे पहले ही सजग हो जाये, लोगो को समझाए, यह गुलाम बनाने के लिए उपहार में दिया गया है |
लोगो को ध्यान कराएँ, यह ध्यान किसी धर्म से सम्बंधित न हो, न किसी का नाम जपे, बस योग की तरह |
समाज से आग्रह करें, मूर्ति पूजा न करें, इन मनुवादियों के गुलामी प्रथा से दूर रहे |
बच्चो के ऊपर ध्यान देवे |
यह अभियान में गाँव के हर व्यक्ति को जागरूक करें |
किसी से कोई धर्म परिवर्तन न कराये |
यह अभियान निरंतर जारी रखे, हर दिन प्रत्येक दिन, अपने गाँव को प्राथमिकता दे, जो परिवार सुधर सकता है, उस पर जायदा ध्यान दे |
मोक्ष की बात आये तो कहे, कर्म से ही मोक्ष मिलता है, इस संसार में कोई नहीं मोक्ष देने वाला |
( बच्चे से लेकर 25 वर्ष तक के व्यक्ति के ऊपर सबसे अधिक ध्यान देवे |
बच्चे ही, यही आगे के भविष्य है, इन्हें सुधार लोगे तो समाज सुधर जायेगा  )
मनुवादी शिकारी के जाल से, इन मूलनिवासी पक्षी को बचाते रहे |

ऐसा अभियान हर गाँव में चलाओ |
यह सभी एक झटके में नहीं होगा |
लोगो से कुछ ऐसा न कहो जिससे उनकी भावना को ठेस पहुंचे |

अभियान चलाने के लिए पैसे कहाँ से आयेंगे ?

हर घर से चंदा मांगे, जो नौकरी कर रहे है वह,3 से 5% प्रत्येक मंथ देवे |
जो लोग मूर्ति पूजा नहीं करते, नशाखोरी नहीं करते, इनको सम्मानित करने का काम करें |
जो लोग इस अभियान में आगे बढ़ रहे है, उनका फूलमाला, पुस्तकों, किताब, पेन से सम्मानित करें |
घर-घर में मूलनिवासी लिख दो, हम इस देश के शासक है |
यह अभियान प्रत्येक दिन जारी रहे, बच्चो को प्रत्येक दिन Tuition देवे, अगर पैसे अभियान के लिए न हो तो, बच्चो के पालक से 30 रूपये महीने, या देखकर ले सकते है, इस पैसे का 50% अभियान में और बांकी पढ़ाने वाला रख सकता है, अर्थात पढ़ाने वाला अपना 50% अभियान को दे रहा है |
किसी से लड़ना नहीं करना , डरना नहीं, अपना अभियान जारी रखना, कुछ भी हो जाये, यह अभियान जारी रहे |
कुछ भी आन्दोलन का समय आता है तो, इस टीम से संघर्षकारी लोग आगे आयेंगे, बांकी अपना काम करेंगे |
चतुर शिकारी ने रख्खा है, जाल बिछाकर पग-पग पर |
भूल न जाना तू पगले, नहीं तो पछतायेगा जीवन भर ||
अर्थ – इन ब्राम्हणों, क्षत्रियो, और वैश्यों के जाल से बचना |

किसी प्रकार की समस्या के लिए मुझसे संपर्क कर सकते है |
Yogendra Kumar 09131880737
www.facebook.com/yogendragyan
#Yogendra_Kumar   #Yogendra  #Mulnivasi  #मनुवाद  #मनुवादी  #मूलनिवासी  #ब्राम्हणवाद  #भीमवाद #जय_भीम  #ब्रम्हान्वाद_का_अंत  #मनुवाद_का_अंत #bramhanwad #bramhanwadkaant
#चोटी_का_अंत  #भीम_मिसन #एंटीना_का_अंत

Feb 10, 2019

फेस बुक खाता खोले, Naya Facebook Account Banaye How to create new facebook Account
फेसबुक क्या है,
फेसबुक एक सामाजिक सेवा वेबसाइट है, जिस पर लोग अपना अकाउंट बनाते है,
और बहुत सारे फेसबुक, ग्रुप, पेज से और मित्रो से जुड़ते है,
facebook में यूआरएल को लिंक किया जा सकता है,
फोटो को डाला जा सकता है,
विडिओ को डाला जा सकता है,
ऑडियो और बहुत कुछ को डाला जा सकता है,
और उसे एक दुसरे को शेयर कर सकते होते है और कमेंट भी कर सकते है,
आज के समय हर कोई का facebook खाता है,
चाहे वह किसी व्यक्ति का हो, किसी संगठन जैसे
स्कूल कालेज, कोई कंपनी या कोई समाज |
तो आप आप जाने की कैसे अपना facebook खाता खोल सकते है,
इसके लिए कोई कोर्स करने की कोई जरुरत नहीं है,
धीरे धीरे आप सब सिख जायेंगे |

खाता बनाने के लिए,




नीचे लिंक को ओपन करें
www.facebook.com
facebook create account

Frist Name लिखे उसके जगह में इसी तरह से
SurName,
Mobile Number Ya Email ID
डाले,
अपना जन्म दिनांक डाले,
आप महिला है या पुरुष या सेलेक्ट करे,
और Create Account में क्लिक करे,
आपने जो मोबाइल या ईमेल डाला है उसमे OTP पासवर्ड जायेगा उसे डाले आपका
facebook खाता तैयार है, आप अपना फोटो और प्रोफाइल को सेट कर लेवे, |

Feb 8, 2019

प्रेम विवाह के लाभ और हानि – मेरे विचार – योगेन्द्र धिरहे
प्रेम विवाह के लाभ और हानि
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इस लेख में मैंने अपने विचार रखे है, मेरा किसी जाति या धर्म या अन्य कोई और को ठेस पहुचना नहीं है, मै अपने विचार पर कायम हूँ |
"सोना चमक रहा है, यह बड़ी बात नहीं मेरे लिए, बड़ी बात तो यह है, की वह कैसे चमक रहा है |"
व्यक्ति समाज की परेशानी को नकार दे ,मगर वह परेशानी जब अपने पर आती है तब सब समझ आता है,
प्रेम विवाह भी इसी सामाजिक समस्या का एक स्वरुप है,
इस पृथ्वी में ना जाने कितने सारे देश है, मगर उनमे से भारत एक अनोखा देश है, जहाँ ज्ञान का भंडार होते हुए भी लोग मुर्ख बने रहना ही पसंद करते है ,
वर्तमान समय में हर व्यक्ति का संबंध किसी न किसी धर्म से अवस्य होता है,
और धर्म के बाद भारत में वर्ण व्यवस्था, उसके बाद हर वर्ण की जाति, और गोत्र,
भारत देश में वैसे तो अनेक धर्म पाए जाते है, मगर हिन्दू धर्म को आज समझ लेते है, वर्ण व्यवस्था में,
ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, और शुद्र,
विवाह के नियम- शुद्र सिर्फ शुद्र से ही विवाह कर सकता है,
वैश्य सिर्फ वैश्य और शुद्र से विवाह कर सकता है,
क्षत्रिय सिर्फ क्षत्रिय और वैश्य और शुद्र तीनो से विवाह कर सकता है, और
ब्राम्हण, किसी से भी विवाह कर सकता है,
इसमें बहुत बड़ी दुविधा भी है, हर वर्ण के बहुत सारे जाति है, और अंतिम में बात कही पर आती है, वह है जाति,
जो व्यक्ति जिस जाति का होगा, वह उसी जाति के व्यक्ति से विवाह कर सकता है, जाति के अन्दर अनेक प्रकार के गोत्र होते है, अगर लड़की लड़का एक गोत्र से हो तो समाज शादी के लिए अनुमति नहीं देता, |
विवाह के वैसे तो अनेक प्रकार होते है, आज हम दो तरह के विवाह के बारे में बात करेगे,
एक पारिवारिक विवाह और दूसरा प्रेम विवाह,
जीवन भी अनेक प्रकार से जिया जाता है, एक सोचकर समझकर और दूसरा प्रकृति के नियम से,
पारिवारिक विवाह के लक्षण – इस विवाह में लड़का और लड़की के घर वाले मेल जोल करते है, हर चीज को और लड़का लड़की को देखता है, कही कही तो बात भी नहीं करते, और सिर्फ देखकर ही शादी कर लेते है,
यह परिवार की सामने होती है, पुरे रस्मो रिवाज के साथ, इस विवाह में पुरे समाज को रिश्तेदारों को, दोस्तों मित्रो को बुलाया जाता है, और बाराती के साथ दुल्हन को लड़का अपने घर ले जाता है |
प्रेम विवाह के लक्षण – प्रेम विवाह में लड़का और लड़की एक दुसरे को पसंद करते है, इस विवाह में कोई तीसरा नहीं होता न दोस्त, न रिश्तेदार, न परिवार, न समाज, और न अन्य इस विवाह में लड़के और लड़की की शादी अपनी मर्जी से होती है |
विवाह से तापतर्य :- किसी का भी विवाह से तापतर्य शाररिक सुख, और साथी, और वंशवाद, होता है, सभी प्रकार के विवाह में यही नियम लागु होते है,
पारिवारिक विवाह सोचकर विचारकर, हर नियम धर्म, वर्ण, वंश, जाति गोत्र को देखकर किया जाता है, तो वही प्रेम विवाह में इस तरह के किसी भी नियम को नहीं देखा जाता, प्रेम विवाह में एक ही नियम लागु होता है |
“ लड़का लड़की राजी तो क्या करें काजी “ का नियम चलता है,

मै व्यक्ति के जीवन को किस तरह से देखता हूँ,

जिस तरह से अन्य जीव होते है, उसी तरह से मानव जीवन भी होता है , फर्क बस इतना है, व्यक्ति जीव से होते हुए, अपनी ज्ञान और प्रकृति के नियम से व्यक्ति बन गया है,
रही बात धर्म की,
पुराने ज़माने की जीने की कला को धर्म बना दिया गया,
और रही बात वर्ण की, मैंने अरबो लोगो की इस मानसिक बिमारी का शिकार पाया है, और मुंह से बच्छे पैदा होते नहीं देखा, और ना सुना आज के समय में,
और रही बात जाति की, यह समुदाय का नियम है, और कर्म के अनुसार लोगो को बाँट दिया गया है,
और रही बात गोत्र की यह भी एक भ्रम है,
प्रेम विवाह अगर रिश्तेदारी बंधन में जो मान्य नहीं उसे गलत मानता हूँ, जो गुरू तुल्य और सगे हो |
मै समाज की रस्मो को नकारता हूँ, मै जन्मो के बंधन को नकारता हूँ, मै शादी में जन्मो के बंधन को नहीं मानता,
“कागज के दो पन्नो पर, हो नहीं सकता प्यार का फैसला |
प्यार तो अपनों से बनता है निभाने वालो का है फैसला ||”

व्यक्ति के एक जन्मो का भरोसा नहीं, न जाने कितने बार तलाक हो रहे है, तो किस्से साथ, साथ जन्म का बंधन,

प्रेम विवाह के लाभ और हानि

प्रेम विवाह में लड़की को मै दुःख को पोटली, और सुख का साधन भी मानता हूँ,
यह सभी स्थिथि और परिस्थिथि , और प्रेमियों के मानसिकता के ऊपर है,
जाहिर है यह विवाह समाज में न होकर, भागने वाला विवाह है, मै जिस विवाह की बात कर रहा हूँ, वह लड़की की परिवार की मर्जी के खिलाफ, समाज और धर्म से परे है,
अगर लड़का, लड़की से विवाह करता है तो, तो लड़की के लिए लड़का ही सब कुछ है, वही परिवार, वही पति, वही सबकुछ, क्योकि लड़की के लिए उसका परिवार पहले छुट चूका होता, न पिता न माँ, न बहन, न रिश्तेदार, लकड़ी के लिए अपना पति ही सब कुछ है,
अगर लड़की परिवार में ख़ुशी लाती है, तो खुशी का पिटारा, और अगर वही कुछ गलत करता है तो उस समय लड़की, लड़का के लिए दुःख का पिटारा के सामान है,
प्रेम विवाह में घर को खुशी से सजाने का सबसे जायदा दायित्व लड़की के ऊपर होता है, लड़की को हमेशा खुशी देने की कोसीश करनी चाहिए, और लड़के को लड़की को यह बिलकुल भी एहसास नहीं होने देना चाहिए की, तुम अपनी माँ बाप परिवार से बिछड़कर ख़ुश नहीं, लड़के को लड़की के लिए यह प्रेम आवश्यक है,
समाज में हर कोई इस बात से परिचित है, की जाति नाम का कोई चीज नहीं होता, यह तो बस समाज के डर से वह मान बैठता है, पर वास्तव में सभी इसे स्वीकार करते है की जाति नहीं होता,
लड़के के परिवार वालो को लड़के का साथ देना चाहिए, समाज परिवार से अपने बच्चों की ख़ुशी से बढकर नहीं होता |
प्रेम विवाह के बाद सबसे बड़ी खुशी का नियम और दुःख को दूर करने का उपाय यही है, की कभी अपने मन में नहीं सोचना की मैंने प्रेम विवाह करके गलत किया है, और लड़के या लड़की को अपनी बुध्धि भ्रष्ट करके यह नहीं सोचना या किसी से बोलना चाहिए की मै छोटी जाति का या बड़ी जाति इस तरह  से जाति नाम के इस कीड़े को अपने से दूर रखना चाहिए |
समाज का दबाव - प्रेम विवाह में समाज का दबाव रहता है, और समाज पूरी तरह से इस तरह के चीजो के ऊपर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिस करता है, समाज और जाति को लगता है, की 
:- यह हमारे जाति का, धर्म का, परिवार का, गोत्र का, अमीरी का, ग़रीबी का, मेरे अहम् का, 
या 
:- अगर इसी तरह से सभी गैर विवाह करने लग जाए तो, अपने समाज का क्या होगा |
इसलिए समाज प्रतिबन्ध लगाता है, पर इससे आपको डरना नहीं चाहिए,
"वह समाज सबसे घाटियाँ है, जो गैर विवाह करने पर लड़की या लड़के वालो से समाज पैसे की मांग करता है "
यह नियम अपने ही समाज के लोगो को गरीब से गरीब बनाने का नियम है, अरे अभी तो उसने समाज के बंधन को तोडा है, उसे थोड़ा परिवार चलाने का हिम्मत तो दो, तुम तो उसकी जीने का हक़ ही झिन रहे हो,
आपके लिए खुशी की बात है, कोई तो है जो दो पक्षों को जोड़ने का कदम उठाया है, और उसे तुम उल्टा डाट रहे हो, यह गलत है इसे समाज जाओ, नहीं तो यह प्रेमी जोड़े, तुम्हारे बंधन को तोड़ने के लिए और आगे आयेंगे,
कितनो को रोकोगे, कितनो को टोकोगे, 
जितना रोकोगे उतना, बढेगा, जितना टोकोगे, उतना सोचेगा,
प्रेम विवाह सबसे उत्तम विवाह है, 
अपने विचार कमेंट करके जरुर बताये,
लेखक एवं सामाजिक विचारक -योगेन्द्र धिरहे,
नीचे whats app में या Facebook में अपने मित्रो को साथ जरुर शेयर करें |
धन्यवाद् 

Feb 6, 2019

लोग क्यों भटक रहे है ? पत्थर में तो कभी पूजा पाठ में, और कब से |
kyo bhatak rahe hai log kabhi mandir to kabhi masjid me

लोग अनेक प्रकार के पूजा पाठ, नियम क्यों करते है |

मानव ने जब से जीवन को जीना शुरु किया है, तब से उसे हमेशा लगा है, की कोई न कोई है, जो उसकी रक्षा करता है, इस तरह से,  उन्होंने प्रकृति की पेड़ पौधों की पूजा करना शुरु किया |
उसके शिक्षा का ध्यान का महत्त्व अनेक जगहों में देखने को मिलता है,
आज क्या हो रहा है, लोग अपनी मन की भटक के लिए इतना भटक रहे है, की उसे पता नहीं है, की वह क्या कर रहा है |
कुछ लोग मंदिर जाना, मस्जिद जाना, चर्च जाना, गुरुद्वारा जाना, अनेक जगहों पर रोज जाते है |

मन क्यों भटकता है ?

मन में जब विकार आते है, तो मन स्वभाविक तरीके से उसे सोचने लगता है |

विकार क्या है ?

मन जब किसी चीज के बारे में सोचने लगता है, मन में कोई भाव किसी के लिए पैदा होता है, उसे विकार कहते है |
इसी विकार को शांत करने के लिए आज लोग भटक रहे है,
शरीर में 5 प्रकार की ज्ञान इन्द्रिय होती है |
जिनसे हम ज्ञान अर्जन करते है,
कान से सुनकर,
आँख से देखकर,
जीभ से स्वाद चखकर,
नाक से सुगंध लेकर,
त्वचा से स्पर्श करके,
इन्ही के द्वारा विकार पैदा होता है,
इनको ही समान्य अवस्था में लाना है,
लोग आज भटक रहे है,
कभी पत्थर को देखकर ध्यान लगाने की कोशिश करते है, तो कोई तस्वीर को, तो कोई मूर्ति को, तो कोई चिन्ह को ये सभी ध्यान से बहुत दूर है, ये सब मानव के लिए हानिकारक है |
आज ये लोग विकार को सामान्य करने के जगह समझ रहे है विकार को मारना है | और विकार को मारने के लिए कोई विवाह नहीं कर रहा है, तो कोई नागा ( नंगा ) बनकर फिर रहा है |
तो कोई परिवार को मोह कह रहा है, तो कोई नारी को दोष दे रहा है,
अनेको-अनेको उपाय कर रहा है,
कभी ये मानव कण-कण में खोजता है, तो कभी दीया में, तो कभी कलश में, तो कभी गुफा में, कभी सोचता है, भूखा रहने से मिलेगा, कभी कहता है, कभी दूध चढाने से, कभी बकरा काटने से |
ये मानव पहले प्रकृति हमारी रक्षा करता है, समझकर उसकी सेवा करता था |
आज ये मानव उसी पेड़ को उखाड़कर फेक रहा है, उसकी डाली को तोड़कर ला रहा है, कलश सजा रहा है,
उसके बाद ध्यान करना जाना, आज ये ध्यान से भटककर, ढोंग ढकोसला में, दिया कलश, आरती में उतर आया है, पूरा सब बर्बाद करके रख दिया है, जगह-जगह कचरा फ़ैलाने का अड्डा बनता जा रहा है |
किसने किसको महत्त्व दिया है,
संत शिरोमणि गुरुघासीदास बाबा ने सिर्फ ध्यान को महत्त्व दिया है |
ध्यान को गौतम बुध्ध ने भी किया, इसी ध्यान को ईशा मसीह ने 3 महीने तक किया, रविदास, कबीर दास, अनेको संतो ने ध्यान को महत्त्व दिया है, बांकी सब का विरोध किया है, अनेको मुनियों ने ध्यान को महत्त्व दिया है |
जितने भी संत इस समाज को उबारने के लिए आगे आये है, उनके अनुआयी आज उन्हें ही, धर्म में अनेको तरीके से, इन्ही मानवों ने कैद करने का काम किया है |
सभी ने एक ही स्वर में कहाँ है, ( एक में मिलकर रहना ही जीवन का सार है )
साईं बाबा ने भी यही कहाँ, साईं बाबा ने ख़ुद मूर्ति पूजा का विरोध किया, आज लोभी लोगो ने आज उनकी मूर्ति बनाकर पूजवाना शुरु कर दिया है |
आज ये मानव ध्यान में भटक रहे है |
कोई किसी को बड़ा बता रहा है, तो कोई किसी को छोटा,
स्वंम महादेव भी किसी का ध्यान कर रहा है, वह किस पत्थर की, या मूर्ति की पूजा नहीं कर रहा है |
लोभी लोगो ने उनको ही पूजवाना शुरु कर दिया |
इस तरह के ढोंगी लोगो से सावधान रहे,
जो मानव-मानव में भेद करें, मानव को अलग बताये, ओ घटिया लोग है, उनकी नीचता को समझना चाहिये, उनसे दूर रहना चाहिये |
अगली कड़ी का इंतजार करें |
 लेख - योगेन्द्र कुमार
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#आदिकाल का जीवन कैसा रहा | - by Yogendra Kumar

#आदिकाल का जीवन कैसा रहा |

प्रारम्भिक काल में अनेक प्रकार के जीव होते थे, उस समय जीव बहुत तेजी से बढ़ते थे, प्रारम्भिक में यह मानव आदि मानव कहलाता था |
करोड़ो वर्षो के संघर्ष के बाद आज मानव यहाँ तक इस सदी में पहुंचा है,
यह जीवन काल बिलकुल वैसा ही है, जैसा वैज्ञानिक शोध करके बता रहे है,
जैसे हमने लौह युग, कास्य युग, पहले यह मानव जानवर की तरह था,
आज भी हममे और जानवर में कोई जायदा अंतर नहीं है |
हम भी तो जानवर है, लेकिन हमने अपने आप को मानव का नाम दे दिया है,
पहले का जीवन काल, खाना के लिए संघर्ष करना, खंडरो, पहाड़ो, गुफाओ में रहना,
खाने के रूप में कंद, फल, फुल भोजन के रूप में लेते थे |
जब मानव जीवन की शुरुआत हुई थी, तो किसी प्रकार का कोई नियम नहीं था, लोगो का सिर्फ एक ही कार्य होता था, खाना के लिए संघर्ष, खानाबदोश जीवन,
उस समय, न भाषा था, न बोली था, न किसी का नाम था, न जाति था, न धर्म था, जानवरों की तरह आवाज निकालना |
धीरे-धीरे मानव विकाश की ओर बढ़ चला,

मानव सबसे बुध्धिमान जीव क्यों होता है |

निरन्तरता ही मानव को सबसे बुध्धिमान बनाता है,
शरीर का बनावट ही मानव को सबसे बुध्धिमान बनाता है,
मानव का शरीर सबसे लचीला होता है, किसी भी चीजो को बहुत आसानी से पकड़ सकता है |
कोई जन्म से कुछ भी नहीं है, बच्चा जन्म लेने के बाद असहाय होता है, ख़ुद ओ कुछ नहीं कर पाता, धीरे-धीरे उसका विकास होता जाता है, वह जन्म लेने के बाद से सीखता जाता है, आँखों से देखकर, कान से सुनकर, हांथो से छूकर, खाने का स्वाद लेकर, अपने अनुभव से सब कुछ सीखता है |
कोई मानव जन्म से बुध्धिमान नहीं होता है,
जीवन की इस परिभाषा को आपने समझ तो लिया लेकिन इस ज्ञान को हम अपने जीवन में किस तरह से लागु कर सकते है, इसको जानने के लिए, समझने के लिए जुड़े रहे
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