Jan 4, 2019

अजब गजब है देश में, हिंदी की स्थिति... राजधानी के केंद्रीय विश्वविद्यालय

jamiya milliya university जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी

अब इसे मौका कहें या मायूसी! अजब गजब है देश में, हिंदी की स्थिति... नई दिल्ली एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में मार्च के महीने में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी है। शोध संक्षेपिका भेजने की आखरी तारीख 31 दिसम्बर तय था। आनन फानन में 12 बजे रात्रि के लगभग जब पूरा देश नववर्ष के जश्न में डूबा था, मेरा शोधार्थी मन एब्स्ट्रैक्ट (शोध आलेख) लिख रहा था।
प्रातः मन में आशंका थी क्या! वो लोग आलेख स्वीकार करेंगे?
मैंने फोन घुमाया, एक महोदया ने फोन उठाया, इधर उधर की बातों के बीच अंत में मैंने कहा, महोदया मैंने अपना आलेख हिंदी में भेजा है। वो स्तब्ध हो गईं शायद, चुप्पी से आभाष हुआ।
उन्होंने बड़ी मासूमियत से खेद व्यक्त करते हुए कहा, अमित जी! हमारे यहां हिंदी पियर रिव्यु करने वाले पर्सन नहीं है। इसलिए हम केवल अंग्रेजी को शामिल किए हैं। मैंने अपनी भाषयी सामर्थ्यता बतलाई उन्होंने भी मजबूरी गिनाई कि हिंदी की बड़ी मजबूरी है, यहां भाषा परिषद में भी इसे शामिल करना बड़ा जंग है।
एक पल के लिए सोचा! अभी तक हम छत्तीसगढ़ी के लिए कोहराम मचाये हुए हैं, यहां तो हिंदी ही बीचक रही है। भारत में ब्रिटेन बसा है, एक पल ऐसा लगा।
मैंने ज्यादा इधर उधर किये उनकी सारी बात मान ली। उन्होंने भी मलहम भरे शब्दों में कहा, आप कैसे भी अंग्रेजी में बना लीजिए, भले ही हिंदी में प्रस्तुत कर दीजिएगा।
और हमारा जो टॉपिक है वह बहुत यूनिक है, हिंदी तो हिंदी इसमें अंग्रेजी में भी कायदे से ठीक काम नहीं हुआ है। थोड़ा बहुत फिल्मों में बस जिक्र हुआ है।
उन्होंने कहा, आगे हम कोशिश करेंगे, मैंने भी कहा, मैं भी करके देखता हूँ। शुक्रिया इतना लंबा बहाना, और मलहम लगाने के लिए।
जानते हैं उनका यूनिक टॉपिक क्या है! "कास्ट एंड कम्युनिकेशन"
जब हिंदी ही छुआछूत जैसी परिस्थितियों का शिकार हो जाए
और संचार के लिए भाषायी सीमा रेखा खींच दी जाए तो क्या ख़ाक! संचार होगा! सबसे बड़ी बाधा तो इन्होंने ही पैदा कर रखी है या तो इस देश में हिंदी के अच्छे जानकार शोधार्थी नहीं हैं?
मैं सोचता रहा, इसी देश में, इस देश की भाषा, दलित पीड़ित, पिछड़ी, शोषित हुई जा रही है।
सभी भाषा जरूरी है लेकिन कुछ इतनी जद्दोजहद में उलझ चुकी है कि वो निकल नहीं पा रही है। देशज भाषाओं का हाल, बुरा है।
शायद! अंग्रेजी की नगरिया, विकास की डहरिया... दिखा दे!!
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