Dec 3, 2018

धर्म क्या है ? परिवार क्या है ? रिश्तेदार क्या है ? जाति क्या है ? गोत्र क्या है ?

dharm kya hai jati kya hai gotra kya pariwar kya hai rishtedar kya hai

धर्म क्या है ? धर्म की उत्पत्ति ? और वर्तमान धर्म ?

धर्म को जानने से पहले आपको कुछ और जानना चाहिए |
सभी जीव पृथ्वी में रहते है, यह मानव भी इसी पृथ्वी में रहता है,
जब जीवन की उत्पत्ति हुई तब, यह मानव भी इसी पृथ्वी से जन्म लिए,
जब मानव ने अपनी जीवन की सुरुआत को जानना चाहा तो अनेक प्रकार से, अपने अनुसार कल्पना करना शुरू कर दिया |
और अपने कल्पना अनुसार जीवन जीना शुरू कर दिया, किसी ने इसे पुस्तकों में लिखा तो, किसी ने इसे लोगो तक फ़ैलाने का काम किया |
आज से कुछ हजारों वर्षो पूर्व धर्म शब्द की उत्पत्ति हुई,
प्रारम्भ में धर्म का अर्थ, जीवन को सही तरीके से जीने से माना जाता है,
जो व्यक्ति धर्म का पालन करता है, वह झूट नहीं बोलता, किसी प्रकार की किसी को हानि, दुर्व्यवहार नहीं करता, जीवन को इस तरह से जीने से होता है, की कोई भी गलत न बता पाए |
लेकिन जो धर्म का आचरण करता है वह किस आधार पर करता है ?
जो नियम समाज के लिए सही बताये गए हो, जिसे समाज स्वीकार करें, इसी का नाम धर्म बताया गया है |
धर्म पुरुष अगर किसी को कहाँ जाता है तो युधिस्ठिर को कहा जाता है, लेकिन वह धर्म पुरुष नहीं कहा जा सकता, क्योकि उसने अपनी ही पत्नी को जुए में हार गया | ऐसे पुरुष को धर्म पुरुष नहीं कहा जा सकता |
जो सत्य का आचरण करता हो, वही वही धर्म पुरुष हो सकता है |

धर्म क्या है ?

धर्म एक विचारधारा है | एक मान्यता है | जीवन जीने का तरीका है |
क्रियाकलाप का संयोजन है |
धर्म एक विचारधारा है ?
किसी भी धर्म को मानने वाले, किसी मुख्य प्रवर्तक के, विचारधारा के साथ आगे बढ़ते है, और उसी विचारधारा ज्ञान को संजोते जाते है, और उसी ज्ञान को आगे बढ़ाते जाते है |
एक समय ऐसा आता है, जब वह ज्ञान वह विचारधारा बहुत सारे लोगो को अपने में प्रभावित कर लेता है, और संसार की उत्पत्ति के साथ, मानव की उत्पत्ति और मृत्यु का ज्ञान को संजो लेता है |
धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक विचारधारा की मान्यता लागु होती है,
यह विचारधारा जन्म को उत्सव के रूप में तो वही, कुछ अलग रूप में देखते है |
यही विचारधारा संस्कार और रीति रिवाज बना लेती है |
इसी का नाम धर्म है |
मानव-मानव सभी एक समान होते है |
फर्क बस इतना है, इस वास्तविकता को जानना |
आज बहुत सारे धर्म है, धर्म एक विचारधारा का नाम है |
हिन्दू धर्म का जनक कोई नहीं है |
बौद्ध धर्म का गौतम बुद्ध,
इसाई का ईशा मसीह.
सिख का गुरुनानक,
सतनाम धर्म गुरुघासीदास,
और धर्म के प्रवर्तक मिलते है |
सभी धर्म का अलग अलग नियम होता है,
लेकिन,
सतनाम धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म, में मूर्ति पूजा का कोई स्थान नहीं है, ज्ञान ही केंद्र है | इन धर्मो का मुख्य धारा समानता है, कोई छोटा बड़ा नहीं है, इस धर्मो को कोई भेद भाव, ऊँच नीच, छोटा बड़ा नहीं होता, न ही जाति की परम्परा होती है | इन धर्मो का उपदेश एक समान मिलते है, मांसाहारी न होना, नसा विरोधी, और सर्व हिताय सर्व सुखाय |
जो धर्म मानव मानव में ऊँच नीच, भेदभाव, बताये, वह गलत है,
वह धर्म गुलाम बनाने की रीति है |

परिवार क्या है ?

परिवार एक घर में रहने वाले सदस्य को कहते है,
परिवार का सम्बन्ध खून से जुड़ा हुआ होना होता है,परिवार के अंतर्गत,माता पिता, और उनके बच्चे, दादा परदादा, खून का पूरा सम्बन्ध परिवार है,

गोत्र या गोती, सरनेम, या उपनाम, Last Name क्या होता है ?

क्या आप जानना चाहते है गोत्र या सरनेम क्या होता है,
गोत्र किसी जाति का हिस्सा होता है,
जब किसी भी जाति का उत्पत्ति होता है,
तो लोग जैसा कर्म करते है, वैसा ही उसे नाम दे दिया जाता है,
जो नाम दिया जाता है, उसी को गोत्र कहते है,
वर्तमान समय में भी गोत्र का सरनेम का जो रीती है, आज भी चल रही है,
एक गोत्र का जितने भी व्यक्ति होते है, वह एक ही परिवार का हिस्सा होते है,
कभी न कभी सदियों पहले वह उसी परिवार से आते थे, इसलिए गोत्र एक बराबर है,
इस तरह से लोग मानते है, और एक गोत्र में विवाह नहीं करते है,
सतनाम धर्म में गोत्र का कोई स्थान नहीं है,
शादी के समय यह देखा जाता है, की लड़का का परिवार और लड़की का परिवार, दोनों एक दुसरे के रिश्तेदार तो नहीं लग रहे |
जब गोत्र ही नहीं रहेगा तो शादी के समय पता ही नहीं चलेगा, तो आपत्ति किस बात की होगी |
जो गोत्र की परंपरा है, वह आज के समय लोगो को तोड़ने का रीति है,

रिश्तेदार क्या होते है ?

एक परिवार को बनाने के लिए दुसरे परिवार के सदस्य को, अपने परिवार में शादी के माध्यम से मिलाया जाता है,
जैसे- लड़के लड़की की सादी,
उसके बाद, लड़की और लड़के का परिवार आपस में रिश्तेदार हो जाते है,
उनका सम्बन्ध हो जाता है, यही रिश्तेदारी है

जाति क्या है ?

जब लोगो को आपस में तोड़ने का लिए नीति खोजी है, तो पाया की लोग अनेक प्रकार के कार्य में बंटे हुए है, और उनको उसी कार्य के आधार पर लोगो को जाना जाता है,
जो जिस प्रकार का कार्य, या काम करता है, उसे वैसे ही जाना जाता है,
इसी का बहाना बनाकर, लोगो को आपस में बाटने, तोड़ने का लिए जाति बनाया गया |
जाति क्या है ?
जो व्यक्ति जैसा कार्य करता है, उसे वैसा ही जाति का नाम दे दिया गया |
जैसे :- सोना का काम करने वाले को सोनार, तेल का काम करने वाले को तेली,
कुम्हार का काम करने वाले को कुम्हार, 6500 से भी ज्यादा जाति में लोगो को बाँट दिया |
और उनको आपस में तोड़ने के लिए एक दुसरे को छोटा बड़ा बना दिया गया |
और रोटी बेटी का सम्बन्ध भी बंद कर दिया गया |
इसी को जाति कहते है,
यह किसने बनाया, क्यों बनाया, इससे किसको फायदा हो रहा है, इसके लिए जुड़े रहे,
सभी ग्रन्थ में जाति का उल्लेख है, इस अनुसार से अंग्रजो ने नहीं बनाया |
कोई और है जो आपस में तोड़कर मेवा खा रहा है |
और आपस में प्रेम करने से प्रेम बढ़ाने से रोक रहा है
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