Dec 24, 2018

इंडिया चाइना फ़िल्म फेस्टिवल दिल्ली में चला बंगाली फ़िल्म "माछेर झोल" का जादू: फ़िल्म रिव्यू अमित की कलम से

Maache Jhol

बंगाली फिल्मों के मामले में ये मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है. फ़िल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक दिल को छू जाता है। एक राहत, सुकुन देने वाला है। इंडो चीन फ़िल्म फेस्टिवल में देखने का मौका लगा था. अंग्रेजी बतियाने वाले बंगाली दर्शक अधिक थे. ऑडिटोरियम हाल में राष्ट्रगीत के स्क्रीन नेम के साथ राष्ट्रगान चला दिया गया.

फ़िल्म पेरिस के एक रेस्टूरेंट से स्टार्ट होता है. एक बंगाली सेफ अपने स्टाफ को अपनी ओर हिप्नोटिज्म कर रखा है, क्योंकि वह गजब का खानसामा है. ग्राहक उसके दीवाने हैं, वहां उसकी एक गर्लफ्रैंड है जो दिलजान से उससे प्यार करती है. देव D नायक, उसके जन्मदिन पर नायिका सिमोन उसे शादी के लिए प्रपोज करती है एक केक में एक रिंग देती है, लेकिन देव न उस रिश्ते के लिए तैयार हो पाता है न इंकार कर पाता है. देव ऐसी कश्मकश में है जो उसे खुद नहीं पता.

Film Frestival indo chaina

रात को, अचानक देव को इंडिया से फोन आता है कि उसकी मां बहुत बीमार है. देव को अपनी मां से बहुत प्यार हैै, वो फिक्रमंद हो जाता है. वो सोचता है कि आखिर 13 साल से क्यों वो अपनी मां से दूर है?

आननफानन में अपनी गर्लफ्रैंड से विदा और वादा करके के वो वापस जरूर आएगा, इंडिया कलकत्ता के लिए उड़ान भरता है।
रास्ते में घर जाने के लिए टैक्सी लेता है, लेकिन वो खराब हो जाती है। कुछ लोग गुजरते हुए देव को देखकर उसे पहचान लेते हैं कि ये तो वर्ल्ड के टॉप फ्रेंच सेफ हैं. सब सेल्फी खिंचाने लगते हैं.
जब देव घर पहुंचता है अपनी मौसी के साथ तो उसके पिता बहुत रूखा व्यवहार करते हैं इसलिए देव एक होटल में चला जाता है.
जब डॉक्टर से अपनी मां के बारे में पता चलता है कि उसे ब्रेन ट्यूमर है तो वो बेचैन हो जाता है.
फिर देव के पिता फैसला करते हैं कि वो ऑपरेशन नहीं करवाएंगे क्योंकि इससे उनकी पत्नी के जान को खतरा है. लेकिन देव ऑपरेशन चाहते हैं ताकि उसकी मां हमेशा के लिए ठीक हो जाये. बाप बेटे में 13 साल से नाराजगी है.
फ्लेशबैक में स्टोरी चलती है जब वो पत्नी को बिना कारण बताए छोड़कर चला जाता है, वही लड़की उसे अचानक हॉस्पिटल में दिख जाती है, देव अचंभित हो जाता है. और पुरानी बातों को सोचकर दुखी होता है.

देव फैसला नहीं कर पा रहा है कि वो क्या करे इस बीच वो राय लेने उसकी पूर्व पत्नी जिसे उसने तलाक नहीं दिया है उसके पास राय लेने जाता है, वहां उसे एक बच्चा दिखता है. उस लड़की ने देव से कहा कि ये फैसला ऑपरेशन का, बेटा या पति क्यों ले रहा है? जिसे ऑपरेशन करवाना है उससे पूछो!

उसकी माँ ऑपरेशन के लिए मान तो जाती है लेकिन मच्छी झोर वही जो 14 साल की उम्र में देव ने बनाया था वैसा लजीज खाने का अनुरोध करती है. डॉक्टर से बात कर देव मान जाता है.

जिस होटल में देव ठहरा है वो बेस्ट होटल है. मच्छी झोर बनाने की बात से सब चौंक जाते हैं. मैनेजर को बोलकर सारे कुक को वो बुलाता है और एक कॉम्पिटिशन करवाता है. उसमें से एक बेस्ट कुक को वो अपने साथ रख लेता है ताकि वो अपनी माँ के लिए जायकेदार मच्छी झोर बना सके.

इस बीच उस महिला कूक को देव से प्यार हो जाता है. देव को जवाब नहीं दे पाता है. रोज वो अपनी मां के लिए रेसिपी बनाकर ले जाता है मगर उसकी माँ पसन्द नहीं करती और बार बार रोज देव को अपनी माँ को खुश करने के लिए मच्छी झोर बनाना पड़ता है.

इस बीच पिता से तकरार, बड़ी नौकरी व कूक क्यों बन रहे हो लेकर.. देव अपनी पूर्व पत्नी से पूछता है कि बच्चा उसका है, क्या उसका कोई हक नहीं. हैं न! एक स्पर्म डोनेट करने जितना ही एक भगोड़े बाप का।

अब देखना है कि क्या वो इन तीनों में किसके साथ जाता है? बाप बेटा साथ आते हैं? उसकी माँ के लिए लजीज मच्छी झोर बना पाता है या नहीं?
इसके लिए आपको फ़िल्म देखनी पड़ेगी!
बेहतरीन एक्टिंग, डायरेक्शन, कमाल की सिनेमेटोग्राफी, शानदार म्यूजिक...
शाकाहारी दर्शक हूँ पर फ़िल्म दिल को छू गयी.
और हां! बंगाली भाषा के कई शब्द छत्तीसगढ़ि से मिलते हैं, तो अपनापन लगा... जैसे झोर, खाबे, बस्बे, फिरबे, जाबे
तो आप फ़िल्म देखने कब जाबे?

Amit K. C.
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