Oct 2, 2018

जीवन को कैसे जीना चाहिए ?

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यह बहुत साधारण सा प्रशन है, जीवन को कैसे जीना चाहिए, सबसे पहले जीवन को समझना होगा, और जीवन को समझने से पहले स्वंम को समझना होगा |
तो आज इसी के विषय में बात करेंगे |
तो जानते है अपने आप के बारे में |
मै कौन हूँ ?
उत्तर मिलता है मै शरीर हूँ | शरीर एक मानव है |
जैसे अन्य सभी मानव है | क्या सभी मानव सामान रूप से होते है ?
हाँ होते है, क्योकि सभी एक जैसे शकल के नहीं होते, लेकिन सभी मानव होते है |
मानव देश विदेश सभी जगह बसते है |
देखो सभी व्यक्ति की आँखे होती है , कान, नाक, मुह, इसी तरह के सभी सामान तरीके से होते है, समझने वाली बात तो यह है की, सभी व्यक्ति की रूप रंग, बोली भाषा खान पान, व्यव्हार सोच, जीने का तरीका अलग अलग होता है |
इसलिए जिंदगी को सरल तरीके से वास्तविकता के साथ जीना है तो सभी मानव को एक सामान समझना होगा | और उसी तरह से जिंदगी को जीना होगा |
जिंदगी बहुत सरल है, जिसे जितना कठिन बनाओगे, यह उतना ही कठिन बनता जायेगा | अगर कठिन जिंदगी जीना है, तो अपने आप को, दुःख दर्द तकलीफ, मानव मानव में भेद में करना सिख लो, और अपनी राजनीति का राज की रोटी सेक लो |
अपने आप को धर्म के नाम से बाँट लो, वर्ण में बाँट लो, बड़ा छोड़ा में बाट लो, जाति पाती में बाँट लो, गोत्र में बाट लो, इस तरीके से मानव में भेद कर सकते हो इस तरह से असमझदारी का जिंदगी जी सकते हो |
लोग समझलेते है कठिन जिंदगी जीना ही बहुत बड़ी बात है |
लेकिन उससे भी बड़ी जिंदगी है, सत्य के आचरण के साथ जीना |
मानवता ही मेरा धर्म है |
सत मार्ग ही मेरा कर्म है |
मै न मानू जाति धर्म, मेरे लिए सब एक सामान, ऊँच नीच का भेद नहीं,
छोटा बड़ा यहाँ कोई नहीं, सब मानव है एक सामान |
हम है सत्पुरुष, बाबा गुरुघासीदास के संतान |
(सत्पुरुष बाबा घासीदास - मानव-मानव एक समान | )
                         विचारक – योगेन्द्र धिरहे
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