Jul 24, 2018

शिक्षाकर्मी भर्ती प्रक्रिया कैसे होनी चाहिये - कृपया एक बार जरुर पढ़े

siksha karmi bharti prakriya kaisi honi chahiye www.inhindiindia.in

शिक्षाकर्मी भर्ती प्रक्रिया कैसे होनी चाहिये 

दोस्तों हम काफी लम्बे समय से देख रहे है की सरकार इ कोई भी योजना एवं प्रक्रिया में एक रूपता  नहीं है खासकर विभिना पदों की भर्ती प्रक्रिया में तो और भी अनियमितताए है जिसके चलते पढ़े बेरोजगार दर-दर की ठोकर खा रहे है | इन अनियमित्ताओका कारण सरकार द्वारा किए जा रहे नविन परिवर्तन एवं संशोधन भी प्रक्रियाहिन् है | सरकार नविन योजनाओ का निर्माण करते समय अन्य नियमो के साथ समन्वय नहीं बना पा रही है | इसके दो कारण हो सकते है  | या तो वह जानबूझकर कर ऐसा कर रही है  या फिर वह मूढ़ है | ये दोनों ही कारण सरकार की नाकामी को दर्शाते है | नीति निर्धारण करते समय उसे समन्वय स्थापित करना चाहिये |

        शिक्षा कर्मी भर्ती प्रक्रिया को देखे तो प्रारंभ में इसे पंचायत विभाग द्वारा लिया गया जिसमे परीक्षा की कोई आवश्यकता नहीं थी, चयन की प्रक्रिया पूर्णता पंचायत पर निर्भर करती थी  की वह जिस प्रक्रिया के तहत पूर्ति करे | उसके बाद की भर्ती प्रक्रिया उम्मीदवारों के मार्कशीट के प्रतिशत की वरीयता के आधार पर किया गया जिसमे उच्च प्रतिशत वाले अभ्यर्थी को प्रथम प्राथमिकता दी गई | इसमें भी परीक्षा लो की आवश्यकता नहीं थी | तत्पश्चात भर्ती प्रक्रिया में एक नया मोड़ आया, इस बार परीक्षा सिस्टम से भर्ती किया जाने लगा और इसके लिए वही व्यक्ति पत्र होंगे जो बी.एड. एवं टेड की परीक्षा उत्तीर्ण किये रहेंगे | इसके लिए सरकार ने पृथक रूप से टेंट की टेट की परीक्षा ली तत्पश्चात भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई | इस प्रक्रिया में कई जगह पर ऐसी अनियमितताए सामने आई की जहाँ पर बी.एड. प्लसटेट वाले भी पत्र नहीं हो पाए ये कहाँ न्याय संगत है |

        भर्ती प्रक्रिया की सबसे बड़ी दिक्कत और अनियमितता यह है कि मान लीजिए एक शिक्षा कर्मी के लिए 1000 पोस्ट है | इसमें अलग-अलग जिलो में पदों की संख्या कम जायदा है, मानलीजिए सुकमा में एक पद और राजनंदगांव में 10 पद है | इस स्तिथि में निम्न समस्याए पैदा होती है |
(1)     एक पोस्ट में डालने के लिए कोई हिम्मत नहीं करता एकाक दो हिम्मत करते है जो जिंदगी के साथ जुआ खेलते है  |
(2)     जहाँ पर 10 पोस्ट है वहां पर अभ्यर्थियो की भीड़ लग जाती है और प्रतियोगिता बहुत जायदा बाद जाती है फलस्वरूप उच्च प्रतिशत वालो का भी चयन नहीं हो पाता |
(3)     जबकि वहां पर एक पोस्ट है वहां कोम्पिटीसन कम होने के कारण न्यूनतम प्रतिशंत वालो का भी चयन हो जाता है –

निष्कर्ष यह निकल रहा है कि एक जगह पर 70% वाले अभ्यर्थी का भी चयन नहीं हुआ जबकि अगली जगह पर केवल 40% वाले का भी चयन हो गया |
अब 70% वाला नोलेजेबलव्यक्ति  बेरोजगार हो गया जबकि 40% वाला अल्पज्ञ बच्चो को पढ़ा रहा है |

    फिर सरकार शिक्षा में गुणवत्ता खोजने का ढकोसला कर रही है, नई-नई समितियां बनाई जा रही है , ताकि गुणवत्ता की दिशा में कागजी प्रयास कर सके |

भर्ती प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए

केंद्र या राज्य लेवल जहाँ भी हो जितना भी पोस्ट निकलता है उनकी भर्ती एक मुस्त की जाए | पृथक-पृथक विज्ञापन न निकाला जाए जैसे रायगढ़ में 10 पोस्ट तो बिलासपुर में 15 पोस्ट | कुल पदों पर परीक्षा आयोजित किया जाए जैसे छत्तीसगढ़ में 5000 पोस्ट है तो उस 5000 पोस्ट के विरुद्ध भर्ती प्रक्रिया की जाए और ऊपर से निचे 5000 हजार पोस्ट का वरीयता क्रम बनाया जाए |
    फिर कौन्सिलिंग कराके सर्वाधिक अंक प्राप्त व्यक्ति को इच्छानुसार स्थान या जगह पर भेजा जाए | दस प्रकार वरीयता क्रम के अनुसार 1 से लेकर पांच हजार अभ्यर्थियो को उनके सुविधा मुक्त स्थान पर भेजा जाए |  इस प्रकार की भर्ती प्रक्रिया में पांच हजार लोगो को साथ न्याय होगा |
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