Jul 9, 2018

संस्कृति का पतन ( हार का जश्न ) - संगीत के सन्दर्भ में

bhartiy sanskriti ka patan
यह सत्य है की समाज का आचार विचार, उसके मूल्य एवं उनकी मान्यताएं, साहित्य, संगीत, कला, एवं धर्म दर्शन, आदि
       अनेक माध्यमो से झलकती एवं दृष्टिगोचर होती है | तभी तो साहित्य को जनता के चित्त का प्रतिबिम्ब कहा गया है | जिस
     प्रकार साहित्य को पढ़कर जनमानस की युगीन चेतना एवं उनके नैतिक सामाजिक एवं अध्यात्मिक मूल्य को जाना जा सकता है,
     उसी प्रकार गीत संगीत के विषय वस्तु एवं उसकी सामग्री को सुनकर एवं पढ़कर भी उस युग के मनुष्यों के व्यव्हार उनकी चेतना 
    के स्तर एवं उनकी मानसिकता आदि का भी आकलन किया जा सकता है | संकृति की स्पष्ट झलक वहां का नृत्य एवं संगीत
     अभिव्यक्त करता है | आप संगीत जगत में उपलब्ध गीतों के विषय वस्तु का वर्तमान एवं अतीत के सन्दर्भ में तुलनात्मक
     अध्ययन करके भी जनमानस के विचार में आये परिवर्तनों के बारे में पता लगा सकते हैं |

          आदर्श गीत के विषय वस्तु के परखने के पैमाने


     1) वह गीत कितना संदेस परक है |
     2) वह कितना उत्तेजक है |
     3) उसमे अश्लीलता की मात्रा कितनी है
     4) उसमे अंग प्रदर्शन की सीमा क्या है
     5) वह समाज में सकारात्मक विचार कितना प्रसारित करता है
     6) गीत में कामुकता को प्रत्यक्ष दर्शित किया गया अथवा सांकेतिक रूप में
     7) मनोरंजन के साथ साथ सार्थक सन्देश का सामंजस्य है की नहीं
     8) मूल भाव का पोषण हो रहा की नही
     9) वह हमारे आदर्श विचार एवं मूल्यों को कितना प्रतिशत प्रदर्शित करता है
    10) स्वस्थ मनोरंजन की मात्र कितनी है 
    11) क्या केवल मनोरंजन ही गीत का उद्देश्य है| आदि |

               उपरोक्त विश्लेषण से यह ज्ञात होता है की एक उत्कृष्ट गीत की विशेषता में अनेक महत्वपूर्ण तत्वों का संयोजन है |
   जिनको अनदेखा कर के गीतकार एवं संगीतकार केवल वाहवाही ही लुट सकता है और अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकता है परंन्तु
   संस्कृति एवं सभ्यता का पुनर्रक्षण नही कर सकता, भले ही अवसर पड़े तो राष्ट्र भक्ति का बखूबी शपथ ले सकता है |

          हलाकि ऐसा भी नहीं है की वर्तमान गीत केवल अश्लीलता ही परोस रहे हैं उनमे भी गहराइयाँ है स्वस्थ विचार हैं परन्तु
   उनके उत्तेजत्मकता वेदिओ एवं स्टाइलिश अंदाज के अनुकरण ने व्यक्ति के नैतिक मूल्यों का हास किया है |

          उदहारण :     दारू बदनाम करती
                                      इस गीत से बच्चा बच्चा वाकिफ है, और इसमें कोई बुराई भी नहीं है यह प्रेराणास्पद
              गीत है | जो यह सन्देश देता है की शराब पीने से बदनामी ही हासिल होता है यह व्यक्ति को बदनाम करके ही
         छोडती है दारु पिने से व्यक्ति की मान मर्यादा इज्जत रुद्बा सम्मान सब कुछ ख़त्म हो जाता है |

           अब विडम्बना यह है की इस सुन्दर विचार को आत्मसात करके जीवन सँवारने के बजाय व्यक्ति बोटल भर दारू पीकर
           उसी शिक्षा प्रद गीत में टून एवं मदमस्त होकर नाचता है और और अपने पतन का जश्न भी मनाता है | और ताजुब की
       बात यह है की उसे पता भी नहीं होता की वह जश्न भी मन रहा है | ( अपनी हार का जश्न )


                                          उपरोक्त लिखित बातें  लेखक के निजी विचार हैं अगर किसी के भावना को आहत
                           पहुँचती है तो लेखक इसके लिए क्षमाप्रार्थी है|
                                                             लेखक- जीवेन्द्र कुमार
Previous Post
Next Post

post written by:

0 Comments: