Jul 3, 2018

मोटिवेशनल क्या है ? उत्तर यह एक शब्द मात्र है ! By Yogendra Kumar

Motivational Kya Hai By Yogendra Kumar Dhirhe.jpg

एक समय था जब मै कई घंठो तक बैठे-बैठे मोटिवेशनल विडियो देखा करता था, मै विडियो इसलिए देखता था, अन्दर से आवाज आती थी,
तू कुछ नहीं कर रहा है, तुझे कुछ करना चाहिये,
मगर विडियो देखते-देखते बहुत दिन गुजर गए, मै कुछ नहीं कर पाया,
अरे ये क्या मै कुछ करने के लिए विडियो देख रहा हूँ, और ये बिलकुल उल्टा होता जा रहा है,
उसके कुछ दीन बाद मैंने कुछ करना शुरु कर दिया,

आखिर कैसे मैंने कुछ करना शुरु कर दिया |
यह कोई मोटिवेशनल विडियो का कमाल नहीं था,
क्योकि मै मोटिवेशनल को समझ चूका था, यह मोटिवेशनल नाम का कुछ होता ही नहीं है, यह एक शब्द मात्र है,

जिस तरह से आज लोग भाषण सुनना पसंद करने लगे है, चाहे हकीकत कुछ भी हो, उससे कोई लेना देना नहीं, इसी तरह से यह मोटिवेशनल चीज होता है,

कुछ न करने की वजह से मै भोर हो गया था, तो यह भोर कैसे गया,
मात्र एक शब्द से वह है “समझदारी”

दुनिया में इतने सारे लोग है वह कुछ कैसे कर पाते है,
क्या वे किसी से मोटिवेट होते है, या कुछ करने के लिए मोटिवेशनल शब्द के पीछे भागते रहते है,

जिस पल आप समझदारी से काम लेने लग जायेंगे, उस दिन आप मोटिवेशनल शब्द की हकीकत को समझ जायेंगे,

कैसे करें सुरुआत, कुछ करने की,

जैसे मैंने करना शुरु किया मैंने किसी से सिखा नहीं बस अपने से किया,
और वास्तव में यही बेस्ट लगा.
आपको अपनी कहानी न बताकर, गीता ग्रन्थ में जो दिया है उसे बताता हूँ,

अगर आप कुछ करना चाहते है तो आपके पास तीन चीजे होनी चाहिये,
कर्ता, परिस्तिथी, और प्रेरणा,

   जो कार्य करता है उसे कर्ता कहते है, जैसे, आप,
अगर आप कुछ करना चाहते है तो आपके पास कुछ परिस्तिथी भी होगी,
जब आप कुछ करने के लिए तैयार हो जायेंगे तो, आपको किसी से प्रेरणा मिल चुकी होगी, तभी आप कुछ कर पाएंगे,

आलस को समझदारी से ही दूर किया जा सकता है, कोई विडियो देखने से नहीं,
आप तीन चीजो को सोचे,

क्या आप कुछ करना चाहते है, उनकी लिस्ट बनाये,
जैसे मैंने बनाया था, और दीवाल में लटका दे, रोज देखे,
आपके पास क्या होना चाहिये, और क्या है, इनकी भी लिस्ट बनाये,
आप देखेंगे, आपके लिस्ट के पुरे होते जायेंगे |

आपके परिवार और आपके मुड आपकी परिस्तिथी कैसी है, उसे दिमाग में रखे,
आप कुछ करने की कब सोचते है, जब परिस्तिथी ठीक हो, या आप किसी चीज का इंतजार कर रहे है,
लेकिन वास्तविकता तो यह है, परिस्तिथी हमेशा वैसे की वैसे रहती है,
उसे हमें ही बदलना होता है, 
परिस्तिथी वैसी ही रहती है, परिस्तिथी को बनाया भी जा सकता है,

अगर आप कुछ करना चाहते है तो आपको किसी से प्रेरणा जरुर मिलेगी,
जैसे मै बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर, जी जो सोचते थे, उसे याद करता हूँ,
और सच में मुझे कोई चीज मोटीवेट नहीं कर पाया,
और मेरा जब समझदारी से सामना हुआ तो मोटीवेट को भूल गया,
                          -    योगेन्द्र कुमार धिरहे
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