Jul 19, 2018

क्या मै मुर्ख हूँ ? या आप !

कौआ कान ले गया
अगर यही प्रश्न आपसे करूँ तो आप इसका क्या उत्तर देंगे | शायद नहीं में लेकिन आपस फिर कहूँगा, क्या आपको पता है ;

मुर्ख किसे कहते है ?

आपको शायद ही इस बात का अर्थ पता हो, अगर पता नही तो अपने आप को कैसे कह सकते हो, की मै मुर्ख नहीं, अगर यही कोई मुझसे कोई पूछे तो मै कहूँगा, मुझे पता नहीं, हो सकता है, की मै मुर्ख और नहीं भी |
कोई भी व्यक्ति हमेशा मुर्ख नहीं हो सकता, उसके कार्य ही उसे मुर्ख बनाते है, 

सबसे पहले समझते है मुर्ख किसे कहते है,
जो जड़ बुध्धि हो उसे मुर्ख कहते है
कैसे जाने अपने आपको, कैसे पहचाने अपने आप को दुसरो को बड़ी आसानी से हम कुछ भी कह देते है, कभी अपने आप को देखा है, तुम कितने मुर्ख हो,
अगर तुम्से कोई कहे देखो तुम्हारे कान को कौआ काट के ले जा रहा है, तो आप क्या करोगे,
लेकिन वास्तव में कौआ कान लेकर जा रहा था, लेकिन वह कान मरे हुए जानवर का था |
मुर्ख नसमझ लोग ऐसे ही होते है, जो अपने कान को देखने का प्रयत्न भी नहीं करते, अपना कान है या नहीं, सीधे उस चालबाज व्यक्ति की बात को पकड़ लेते है, और कौआ के पीछे भागने लगते है |

लेकिन यहाँ पर समझने वाली बात तो यह भी है कौआ ने कान को काट तो लिया मगर आप उसके पीछे क्यों भाग रहे है,
अगर वह कान उसे मिलेगा तो भी वह कान का क्या करेगा,
एक बात और समझने वाली है कौआ का तो पंख है, ओ उड़ सकता है उसे पकड़ोगे कैसे, जब तक किसी तरह करके उसके पास पहुचोगे वह कान को खा चूका होगा |

मै क्या कहना चाहता हूँ आप समझ रहे है, मुर्खता का सुरुआत एक जगह से होती है, और सभी को समेटते हुए बुध्धि का नाश करने लोगो को मुर्ख बना देता है, और जब तक वास्तविकता का पता चलता है, तब तक वह चालबाज हिन्दू मुश्लिम के नाम पर तो कभी बुलेट ट्रेन के नाम तो कभी किसानो के नाम वाह वाही लुट चूका होता है, अगर वास्तविकता जाननी है तो
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