Jul 26, 2018

धार्मिक कथाओ का आयोजन बंद करें, बिजनेस मेन की कथा सुनाए |

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धार्मिक कथाओ का आयोजन बंद करें, बिजनेस मेन की कथा सुनाए |

दोस्तों आज इकीसवी सदी में भी घर-घर में, आज भी धार्मिक कथाए कहलवाई जाती है, इस आशा और उम्मीद पर की कोई चमत्कारिक कृपा होगी | परन्तु ऐसी कोई कृपा होती नहीं है | उल्टा व्यक्ति का धन एवं समय ही बर्बाद होता है | चमत्कार की आशा से हम जो धार्मिक कथाओ का आयोजन करते है , वो मात्र पौराणिक कहानी है जिनकी कोई प्रमाणिकता नहीं और यदि प्रमाणिकता है भी तो उसे सुनने से व्यक्ति के क्लेश एवं कष्टों का नाश होना वाला नहीं है | क्योकि अपने दुखो का जिम्मेदार व्यक्ति स्वंम है, और उन कष्टों से मुक्ति के साधन व्यक्ति स्वंम ही कर सकता है अन्यत्र कोई नहीं – (महात्मा बुध्द)
 
              धार्मिक कहानियां सुनने से क्या हमारे दुखो का समाधान हो सकता है, बिलकुल नहीं वे हमारे लिए रोटी कपडा मकान एवं सम्मानपूर्व जीवन की व्यवस्था कदापि नहीं कर सकते, हाँ कुछ समय के लिए हमारे घर परिवार आदि के माहौल को तनावरहित बना सकते है क्योकि, इस प्रकार के कथाओ के साथ संगीत का भी सामंजस्य रहता है जो लोगो को एक राग-विशेष में बांध कर रखती है जिसके कारण लोग शंतत्व का अनुभव करते है धयान रखे ये शांति चिरस्थाई नहीं है, बल्कि यह कथा के आयोजन होने तक ही है या जायदा से जायदा एक सप्ताह | इसके पश्चात् मनुष्य की प्रिविती पुनः पूर्ववत होने लगती है |

              तात्पर्य यह है की कथा श्रावण क्षणिक संतुष्टि मात्र है जिस प्रकार दो मिनट के लिए अचानक बारिश | इस संतुष्टि को प्राप्त करने के लिए हमारे पास और भी अनेक साधन है जिसमे किसी भी प्रकार का झमेला नहीं और किसी भी प्रकार का खर्च नहीं और फायदा तो इतना जायदा है जिसकी कोई सीमा नहीं – वह साधन है योग | योग के माध्यम से आप उन समस्त अनुभवों को प्राप्त कर सकते है जो आपके कथाओ के आयोजन में अधिक रूप से महसूस होता है | और इस प्रकार से प्राप्त शांति कथा से 50 गुनी बड़ी होगी | यह शांति चिरस्थाई होगी बस प्रयास और अभ्यास आपको करते रहना है |

        ये सभी बाते कथाओ की अल्पउपयोगिता को प्रदर्शित करती है जिसे मैंने क्षणिक शांति का नाम दिया है | परन्तु मनुष्य जाति की जो मूल समस्या है वह है न्यूनतम आवाश्यक्ताओ की पूर्ति | मनुष्य के लिए प्रथमतः यह ज्यादा जरुरी है की वह अपनी आर्थिक उन्नति का साधन पहले ढूंढे | क्योकि गरीबी दुखो के लिए प्रथमतः जिम्मेदार कारक है | यदि व्यक्ति गरीब नहीं है – जाहिर सी बात है की उसके पास सुख सुविधाओ के लिए अधिकांश साधन है केवल संतुष्टि को छोड़कर |

             इसलिए उसे चाहिए की अब धार्मिक कथाओ का आयोजन बंद करके अपने बच्चो को किसी महान बिजनेस मेन की कथा सुनाए मै 101% विश्वास के साथ कहता हूँ इस कथा में आपको धार्मिक कथाओ से प्राप्त प्रेरणा के 90% भाग मिल जायेंगे | प्रश्न उठता है वो कैसे – क्या एक बिजनेस मेन का संघर्ष उसकी आदमी इच्छा शक्ति को प्रदर्शित नहीं करता | इस नई कहानी से आपके बच्चे में तथा आप में एक नया जोश एक नई शांति संचारित होगी | क्योकि उस बिजनेस मेन का सम्पूर्ण जीवन – त्याग, मेहनत,लगन,संघर्ष,उत्साह,वीरता,जूनून, आदि की कहानी है | उसने अपने जीवन में अनेक प्रकार की बाधाये सही, बड़ी-बड़ी विपति एवं समस्याए आई परन्तु उन्होंने बिना घबराए बिना विचलित हुए अपने महान उद्देश्य को प्राप्त किया | क्या इस संघर्ष की कहानी धार्मिक कथाओ की कहानी से अलग है, बिलकुल नहीं | अलग है तो केवल इस बात पर की धार्मिक कहानी का उद्धेश्य मनुवाद, ब्राम्हणवाद का प्रचार प्रसार है | जो मनुष्य को कायर, भीरु, और गुलाम, बनाती है |

                जबकी एक सफल बिजनेस मेन की कहानी आपके घर परिवार के प्रत्येक व्यक्ति को उर्जा, एवं नए जोश से भर देगी | आप प्रत्येक कार्य को लग्न एवं निष्ठा से करेंगे | इस प्रकार एक बिजनेस मेन की कहानी आपको कर्म की ओर प्रेरित करेगी, जबकि धार्मिक कहानी आपको चमत्कार का दिलासा देकर आस्वस्थ रखेगी | एक तरफ शाररिक शक्ति को प्राथमिकता दी गई है तो दूसरी तरफ कामचोरी और आलस्यता को | एक तरफ उपलब्धि है तो दूसरी ओर पतन |

        अतः आपको शीघ्र ही चयन करना पड़ेगा की आपको कौन सा रास्ता अपनाना है  | उन्नति और अवनति दोनों आप ही के हाँथ है | 

           कृपया आने वाली पीढ़ी को एक नई दिशा दे, धार्मिक कथाओ का आयोजन बंद करें | अपने बच्चो को बिजनेस मेन की कहानी सुनाए|
धन्यवाद्
    -    जीवेन्द्र भारती
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