Apr 5, 2018

SC / ST एक्ट क्या है ? कौन -कौन दोषी होते है इस नियम के अनुसार

SC/ST एक्ट क्या है, क्या मुद्दा है,

SC ST Act Kya Hai Kya Kya Niyam Hai

वर्तमान समय में एस टी / एस सी एक्ट को लेकर बड़ा घमासान मचा हुआ है,
SC/ST का पूरा नाम है
SC - अनुसूचित जाति (दलित )
ST - अनुसूचित जनजाति (आदिवासी )
यह SC/ST एक्ट एक कानून है जिसे एट्रोसिटी एक्ट अर्थात (अत्याचार निरोधक अधिनियम ) यह कानून 11 सितम्बर 1989 को पारित किया गया था |
यह कानून 30 जनवरी को जम्मू और कश्मीर छोड़कर सभी राज्य में लागु कर दिया गया था |
क्या है यह कानून,
यह कानून उन सभी व्यक्ति पर लागु होता है, जो SC/ST नहीं है, अर्थात SC/ST को छोड़कर अगर कोई अन्य वर्ग OBC/ Other / Genral इनके साथ को
उत्पीडन करता है, तो वह SC/ST एक्ट के तहत दोषी माना जायेगा |
SC/ST के तहत नियम,
इस तरह के मामले की सुनवाई के लिए खास तरह के फ़ास्ट ट्रैक अदालते होती है, जिनसे इन मामलो को निपटाया जाता है,

SC/ST एक्ट के तहत आने वाले अपराध कौन -कौन से है |

इस एक्ट के तहत बहुत सारे क्रूर अपराध आते है ,
SC/ST व्यक्ति को जाति प्रताड़ना,
SC/ST व्यक्ति को जबरदस्ती मल मूत्र खिलाना पिलाना,
SC/ST व्यक्ति परिवार का सामाजिक बहिस्कार करना,
SC/ST व्यक्ति को अपने पसंद अनुसार बिजनेस करने से रोकना,
SC/ST व्यक्ति को काम पर ना रखना, उन्हें नौकरी पर ना रखना,
SC/ST व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुचना,
SC/ST व्यक्ति के घर के पास जबरदस्ती कूड़ा करकट, या मलमूत्र करना, या जानवरों के मास फेकना,
SC/ST व्यक्ति के कपडे उतारना, जबरदस्ती उतारने के लिए मजबूर करना,
SC/ST व्यक्ति को नंगा करने उन्हें सार्वजनिक रूप से घुमाना,
SC/ST व्यक्ति के मुह में कालिख पोतना, और सार्वजनिक रूप से घुमाना,
SC/ST व्यक्ति की जमीन पर जबरदस्ती कब्ज़ा कर लेना, या उनके फसल काट लेना, जानवरों को जबरदस्ती फसल बर्बाद करने के लिए चराना,
SC/ST व्यक्ति को भीख मांगने के लिए मजबूर करना,
SC/ST व्यक्ति को काम कराने के लिए बंधुआ मजदुर बनाना,
SC/ST व्यक्ति को बोट करने से रोकना या किसी को खास बोट करने के लिए जबरदस्ती करना,
SC/ST महिला का जबरदस्ती बलात्कार करना,
SC/ST समुदाय के लोगो पीने, नहाने वाले पानी को जबरदस्ती जानबूझ कर गन्दा करना,
SC/ST के लोगो को सार्वजानिक जगहो पर जाने से रोकना,
SC/ST के लोगो को जबरदस्ती घर गाँव छोड़ने के लिए मजबूर करना,
SC/ST व्यक्ति को मिलकर सामुदायिक पीटना, या हत्या करना, कोशिस करना,
इस तरह से इस कानून में 20 बिन्दुओ को रखा गया है,

अगर कोई SC/ST व्यक्ति के उपर इस तरह के अपराध करता है तो उन्हें कितनी सजा होगी,
अगर किसी के ऊपर इन अपराधो के तहत केस किया जाता है तो 6 माह कारावास, से लेकर 5 साल तक सजा का प्रावधान है,
और जुर्माने का भी प्रावधान है, और हत्या करने पर मौत की सजा का प्रावधान है,

अगर कोई अधिकारी SC/ST वर्ग का अधिकारी नहीं है, और जानबूझ कर इस मामलो को दबाने की, तथा लापरवाही करता है, तो इस कानून के अनुसार 6 माह से लेकर
1 साल तक कारावास का प्रावधान किया गया है,

इस कानून के तहत नियम,

इस कानून के तहत सहकारी अधिकारी को बहुत सारे नियमो का पालन करना होता है,
सबसे पहले FIR लिखना होगा,
दस्तखत करवाने से पहले FIR को पड़कर सुनाना होगा,
FIR की कॉपी देनी होगी जिसने रिपोर्ट लिखाया है उसे,
पीड़ित या गवाह का बयान रिकॉर्ड करना होगा,
FIR दर्ज कराने के 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होगी,

अब जानते है की सुप्रीम कोर्ट ने क्या नियम को बदला है,

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च 2018 को कहा की,
इन अपराधो के तहत कोई गिरफ़्तारी जरुरी नहीं है,
सबसे पहले जाँच होगी उसके बाद ही कार्यवाही की जाएगी,
अगर पहली जाँच में कोई मामला नहीं बनता है तो दोषी व्यक्ति को पूर्ण बेल दे दी जाएगी,
FIR दर्ज कराने के बाद तुरंत गिरफ़्तारी नहीं होगी,
इस मामले की जाँच DSP लेवल का अधिकारी जाँच करेगा,
अगर कोई अधिकारी इस मामले में दोषी पाया जाता है, तो उसकी गिरफ़्तारी के लिए अनुविभागीय अधिकारी की अनुमति जरुरी होगी,
अगर कोई इस मामले में आम आदमी के खिलाफ FIR कराता है, तो उसकी गिरफ़्तारी के लिए SP या SSP से अनुमति ले होगी,

अब आपने पूरा मामला जान लिया, आप नीचे व्हाट्सएप्प में शेयर करें,
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