Dec 7, 2018

प्रेम विवाह के लाभ और हानि – मेरे विचार – योगेन्द्र धिरहे

प्रेम विवाह के लाभ और हानि
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इस लेख में मैंने अपने विचार रखे है, मेरा किसी जाति या धर्म या अन्य कोई और को ठेस पहुचना नहीं है, मै अपने विचार पर कायम हूँ |
"सोना चमक रहा है, यह बड़ी बात नहीं मेरे लिए, बड़ी बात तो यह है, की वह कैसे चमक रहा है |"
व्यक्ति समाज की परेशानी को नकार दे ,मगर वह परेशानी जब अपने पर आती है तब सब समझ आता है,
प्रेम विवाह भी इसी सामाजिक समस्या का एक स्वरुप है,
इस पृथ्वी में ना जाने कितने सारे देश है, मगर उनमे से भारत एक अनोखा देश है, जहाँ ज्ञान का भंडार होते हुए भी लोग मुर्ख बने रहना ही पसंद करते है ,
वर्तमान समय में हर व्यक्ति का संबंध किसी न किसी धर्म से अवस्य होता है,
और धर्म के बाद भारत में वर्ण व्यवस्था, उसके बाद हर वर्ण की जाति, और गोत्र,
भारत देश में वैसे तो अनेक धर्म पाए जाते है, मगर हिन्दू धर्म को आज समझ लेते है, वर्ण व्यवस्था में,
ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, और शुद्र,
विवाह के नियम- शुद्र सिर्फ शुद्र से ही विवाह कर सकता है,
वैश्य सिर्फ वैश्य और शुद्र से विवाह कर सकता है,
क्षत्रिय सिर्फ क्षत्रिय और वैश्य और शुद्र तीनो से विवाह कर सकता है, और
ब्राम्हण, किसी से भी विवाह कर सकता है,
इसमें बहुत बड़ी दुविधा भी है, हर वर्ण के बहुत सारे जाति है, और अंतिम में बात कही पर आती है, वह है जाति,
जो व्यक्ति जिस जाति का होगा, वह उसी जाति के व्यक्ति से विवाह कर सकता है, जाति के अन्दर अनेक प्रकार के गोत्र होते है, अगर लड़की लड़का एक गोत्र से हो तो समाज शादी के लिए अनुमति नहीं देता, |
विवाह के वैसे तो अनेक प्रकार होते है, आज हम दो तरह के विवाह के बारे में बात करेगे,
एक पारिवारिक विवाह और दूसरा प्रेम विवाह,
जीवन भी अनेक प्रकार से जिया जाता है, एक सोचकर समझकर और दूसरा प्रकृति के नियम से,
पारिवारिक विवाह के लक्षण – इस विवाह में लड़का और लड़की के घर वाले मेल जोल करते है, हर चीज को और लड़का लड़की को देखता है, कही कही तो बात भी नहीं करते, और सिर्फ देखकर ही शादी कर लेते है,
यह परिवार की सामने होती है, पुरे रस्मो रिवाज के साथ, इस विवाह में पुरे समाज को रिश्तेदारों को, दोस्तों मित्रो को बुलाया जाता है, और बाराती के साथ दुल्हन को लड़का अपने घर ले जाता है |
प्रेम विवाह के लक्षण – प्रेम विवाह में लड़का और लड़की एक दुसरे को पसंद करते है, इस विवाह में कोई तीसरा नहीं होता न दोस्त, न रिश्तेदार, न परिवार, न समाज, और न अन्य इस विवाह में लड़के और लड़की की शादी अपनी मर्जी से होती है |
विवाह से तापतर्य :- किसी का भी विवाह से तापतर्य शाररिक सुख, और साथी, और वंशवाद, होता है, सभी प्रकार के विवाह में यही नियम लागु होते है,
पारिवारिक विवाह सोचकर विचारकर, हर नियम धर्म, वर्ण, वंश, जाति गोत्र को देखकर किया जाता है, तो वही प्रेम विवाह में इस तरह के किसी भी नियम को नहीं देखा जाता, प्रेम विवाह में एक ही नियम लागु होता है |
“ लड़का लड़की राजी तो क्या करें काजी “ का नियम चलता है,

मै व्यक्ति के जीवन को किस तरह से देखता हूँ,

जिस तरह से अन्य जीव होते है, उसी तरह से मानव जीवन भी होता है , फर्क बस इतना है, व्यक्ति जीव से होते हुए, अपनी ज्ञान और प्रकृति के नियम से व्यक्ति बन गया है,
रही बात धर्म की,
पुराने ज़माने की जीने की कला को धर्म बना दिया गया,
और रही बात वर्ण की, मैंने अरबो लोगो की इस मानसिक बिमारी का शिकार पाया है, और मुंह से बच्छे पैदा होते नहीं देखा, और ना सुना आज के समय में,
और रही बात जाति की, यह समुदाय का नियम है, और कर्म के अनुसार लोगो को बाँट दिया गया है,
और रही बात गोत्र की यह भी एक भ्रम है,
प्रेम विवाह अगर रिश्तेदारी बंधन में जो मान्य नहीं उसे गलत मानता हूँ, जो गुरू तुल्य और सगे हो |
मै समाज की रस्मो को नकारता हूँ, मै जन्मो के बंधन को नकारता हूँ, मै शादी में जन्मो के बंधन को नहीं मानता,
“कागज के दो पन्नो पर, हो नहीं सकता प्यार का फैसला |
प्यार तो अपनों से बनता है निभाने वालो का है फैसला ||”

व्यक्ति के एक जन्मो का भरोसा नहीं, न जाने कितने बार तलाक हो रहे है, तो किस्से साथ, साथ जन्म का बंधन,

प्रेम विवाह के लाभ और हानि

प्रेम विवाह में लड़की को मै दुःख को पोटली, और सुख का साधन भी मानता हूँ,
यह सभी स्थिथि और परिस्थिथि , और प्रेमियों के मानसिकता के ऊपर है,
जाहिर है यह विवाह समाज में न होकर, भागने वाला विवाह है, मै जिस विवाह की बात कर रहा हूँ, वह लड़की की परिवार की मर्जी के खिलाफ, समाज और धर्म से परे है,
अगर लड़का, लड़की से विवाह करता है तो, तो लड़की के लिए लड़का ही सब कुछ है, वही परिवार, वही पति, वही सबकुछ, क्योकि लड़की के लिए उसका परिवार पहले छुट चूका होता, न पिता न माँ, न बहन, न रिश्तेदार, लकड़ी के लिए अपना पति ही सब कुछ है,
अगर लड़की परिवार में ख़ुशी लाती है, तो खुशी का पिटारा, और अगर वही कुछ गलत करता है तो उस समय लड़की, लड़का के लिए दुःख का पिटारा के सामान है,
प्रेम विवाह में घर को खुशी से सजाने का सबसे जायदा दायित्व लड़की के ऊपर होता है, लड़की को हमेशा खुशी देने की कोसीश करनी चाहिए, और लड़के को लड़की को यह बिलकुल भी एहसास नहीं होने देना चाहिए की, तुम अपनी माँ बाप परिवार से बिछड़कर ख़ुश नहीं, लड़के को लड़की के लिए यह प्रेम आवश्यक है,
समाज में हर कोई इस बात से परिचित है, की जाति नाम का कोई चीज नहीं होता, यह तो बस समाज के डर से वह मान बैठता है, पर वास्तव में सभी इसे स्वीकार करते है की जाति नहीं होता,
लड़के के परिवार वालो को लड़के का साथ देना चाहिए, समाज परिवार से अपने बच्चों की ख़ुशी से बढकर नहीं होता |
प्रेम विवाह के बाद सबसे बड़ी खुशी का नियम और दुःख को दूर करने का उपाय यही है, की कभी अपने मन में नहीं सोचना की मैंने प्रेम विवाह करके गलत किया है, और लड़के या लड़की को अपनी बुध्धि भ्रष्ट करके यह नहीं सोचना या किसी से बोलना चाहिए की मै छोटी जाति का या बड़ी जाति इस तरह  से जाति नाम के इस कीड़े को अपने से दूर रखना चाहिए |
समाज का दबाव - प्रेम विवाह में समाज का दबाव रहता है, और समाज पूरी तरह से इस तरह के चीजो के ऊपर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिस करता है, समाज और जाति को लगता है, की 
:- यह हमारे जाति का, धर्म का, परिवार का, गोत्र का, अमीरी का, ग़रीबी का, मेरे अहम् का, 
या 
:- अगर इसी तरह से सभी गैर विवाह करने लग जाए तो, अपने समाज का क्या होगा |
इसलिए समाज प्रतिबन्ध लगाता है, पर इससे आपको डरना नहीं चाहिए,
"वह समाज सबसे घाटियाँ है, जो गैर विवाह करने पर लड़की या लड़के वालो से समाज पैसे की मांग करता है "
यह नियम अपने ही समाज के लोगो को गरीब से गरीब बनाने का नियम है, अरे अभी तो उसने समाज के बंधन को तोडा है, उसे थोड़ा परिवार चलाने का हिम्मत तो दो, तुम तो उसकी जीने का हक़ ही झिन रहे हो,
आपके लिए खुशी की बात है, कोई तो है जो दो पक्षों को जोड़ने का कदम उठाया है, और उसे तुम उल्टा डाट रहे हो, यह गलत है इसे समाज जाओ, नहीं तो यह प्रेमी जोड़े, तुम्हारे बंधन को तोड़ने के लिए और आगे आयेंगे,
कितनो को रोकोगे, कितनो को टोकोगे, 
जितना रोकोगे उतना, बढेगा, जितना टोकोगे, उतना सोचेगा,
प्रेम विवाह सबसे उत्तम विवाह है, 
अपने विचार कमेंट करके जरुर बताये,
लेखक एवं सामाजिक विचारक -योगेन्द्र धिरहे,
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धन्यवाद् 
जय राधव माधव
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