Apr 14, 2018

दलित किसे कहते है, किसे कहते है दलित,

Dalit Kise Kahte Hai

 दलित कौन है ?

यह कोई छोटी बात नहीं, इसे समझने के लिए दलितों की उस हजारो सालो पहले की त्रासदी को याद करना होगा, भारत देश हमेशा से वर्ण व्यवस्था का गुलाम रहा है,
एक सिक्के के जिस तरह से दो पहलु होता है,
और बीच में पहलु होती है उसे आधार कहते है, वह आधार प्रश्नवाचक चिन्ह के साथ खड़ा होता है हमेशा,
अभी जिस तरह से आप दलित शब्द के बारे में पड़ रहे, जान रहे है, लेकिन इस दलित शब्द को समझने के लिए उसके अन्दर (आधार) की परिधि में जाना ही होगा,

क्या है वर्ण व्यवस्था,

वर्ण चार प्रकार बनाये गए,
ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, और शुद्र,
ब्राम्हण का कार्य शिक्षा देना, क्षत्रिय का कार्य सुरक्षा, वैश्य का कार्य खाने का व्यवस्था करना और सूद्र का कार्य सभी की सेवा करना,
यह कोई व्यावहारिक कार्य नहीं है,
यह जबरदस्ती का कार्य है,
जिस शुद्र को जाति वर्ण समुदाय, समाज को प्रताड़ित करने का जो काम किया गया है,
उसी को आज कालांतर में दलित वर्ग, समाज के नाम से जाना जाता है,
आप सोच कर देखो, एक मिनट के लिए जी कर देखो, यह दलित पिछले १०००० सालो से यह नियम के गुलाम है,
पीने के लिए पानी तालाब से नहीं ले सकते, ना कुए से, ना नदी से, न किसी जलाशय से,
जिसे धन रखने का आधिकार न हो,
जिसकी बहु बेटियों, बहन को यह उच्च वर्ग हमेशा से शोषण कर रहा हो,
जिस देश में कल्पना के नाम से त्रासदी इन ब्राम्हणों ने फैलाया, उस व्यवस्था का शिकार है यह दलित समाज,
दलित का अर्थ, पिडीत, शोषित, दबा हुआ, खिन्न, उदास, टुकडा, खंडित, तोडना, कुचलना, दला हुआ, पीसा हुआ, मसला हुआ, रौंदाहुआ, विनष्ट की हुआ |
अगर आपको दलित को समझना है, तो आपको सुझाव है, किसी गरीब के घर जाकर रात में खाना खा लेना और उसी दलित के घर में सो जाना |
-योगेन्द्र धिरहे
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