Feb 23, 2018

निंदक, क्या, क्यों, और कैसे, किसलिए

Nindak
मेरी एक स्वाभाविक सी आदत है, मै बातों बातों में प्रश्न पूछ लिया करता हूँ, यह प्रश्न मेरे लिए नहीं सामने वाले के लिए होता है,  आज बात करेंगे निंदा के बारे में निंदा क्या है,
समाज विचारक कबीर दास जी ने बताया है,
निंदक नियरे रखिए, आँगन कुटी छबाय |
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल होत सुहाय ||

अर्थ :- अपनी बुराई करने वाले व्यक्ति को अपने पास जरुर रखना चाहिए, उसे अपने घर के पास कुटियाँ में रखना चाहिए, ऐसा इसलिए करना चाहिए, क्योकि निंदा करने वाले व्यक्ति हमारी बुराई को देखकर हमारी बुराई करता है, जिसे समझकर हम अपनी बुराई को सुधार सकते है | और बिना साबुन और पानी के साफ हो सकते है |

निंदा क्या है,

निंदा का अर्थ चुगली करना है, निंदा किसकी की जाती है,
निंदा उसकी की जाती है, जो कुछ गलत कर रहा हो, सत्य तो यह है, व्यक्ति अपने समझ के अनुसार समझता है, इसलिए कभी-कभी सही को भी गलत की तरह चुगली कर दी जाती है,  |

निंदा कैसे की जाती है,

किसी की गलती को सापेक्ष या बिना सापेक्ष के उसके कानों तक बात को पहुचायाँ जाता है, निंदा अनेक प्रकार के होते है, एक होता है प्रिय निंदा और दूसरा अप्रिय निंदा ,
प्रिय निंदा को प्यार से सापेक्ष होकर अकेले में, या अपनों के बीच बताया या एहसास कराया जाता है,
और होता है, अप्रिय निंदा,
यह निंदा एक प्रकार के दुश्मन द्वारा या उस व्यक्ति के द्वारा की जाती है, जो सापेक्ष में अर्थात आमने सामने में बात नहीं करना चाहता होता है, इस निंदा के द्वारा एक प्रकार के ठेस पहुचाने का काम भी किया जाता है |
लेकिन वास्तविकता तो वास्तविकता है, इसे उसे समझना चाहिए, जिसकी निंदा की जारी है,
निंदा एक प्रकार का वरदान है, तो दूसरी तरफ, कमजोरी भी,
अत्यधिक निंदा करने से निंदा करने वाले व्यक्ति में भी निंदा पन आ जाता है, जो ही एक खराबी है,
निंदा उस वक्त समाज और व्यक्ति के लिए घातक बन जाता है, जब समाज में गलती करने वाले व्यक्ति का समाज खुलकर बुराई नहीं करता |
आज के लिए इतना ही,
ज्ञान :- किसी दुसरे की बुराई करने से पहले, स्वंम भी बुराई के लिए तैयार होना चाहिए |
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1 comment:

  1. बुरा जो देखन मैं चला मुझसे बुरा न कोय
    कबीर

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