Jan 11, 2018

बुझ गया कुल दीपक, भगवान कहाँ था - एक सच्ची कहानी

Bujh gaya kul deepak
मेरा नाम योगेन्द्र कुमार धिरहे है, मुझे बताया गया है, की तुम्हारा धर्म हिन्दू है, पर मुझे यह नहीं बताया गया है की धर्म क्या होता है, अभी मेरी उम्र 23 वर्ष की है, यह जो कहानी कहने जा रहा हूँ यह जीवन की वास्तविक सच्चाई है, इसमें कल्पना का कोई स्थान नहीं है, हमारा एक छोटा सा गाँव है, बच्चे और बुजुर्ग मिलाकर 2500 की जनसंख्या होती है, में स्नातक तक पढाई की है, अभी आगे पड रहा हूँ, हिन्दू धर्म में ऐसा कोई न होगा, जो देवी देवता से परिचित न हो, वह जन्म से ही आस्तिक हो जाता है, भक्ति कैसे करनी है, वह स्वाभाविक बन जाता है, लेकिन कभी आपने सोचा है, जानने की कोसिस की है, की मै पूजा क्यों करता हूँ, मै आरती क्यों देता हूँ, यह प्रश्न इसलिए जरुरी है क्योकि मेरा यह जो विषय है वह इसी पर है, अगर हम भगवान या किसी भी धर्म में किसी की पूजा करते है, तो हमारा कोई न कोई स्वार्थ जरुर होता है, व्यक्ति अपने आप को स्वार्थी मानने से इंकार कर सकता है, लेकिन मै कहूँगा, अगर मोक्ष या दुःख या सुख के लिए पूजा करते हो तो यह मेरी नज़र में स्वार्थ है, क्योकि किसी चीज की भगवान या किसी से चाह करना ही स्वार्थ है, मेरी नज़र में भक्ति तो वह है, जहाँ कुछ माँगा ना जाए, जहाँ किसी चीज की इच्छा न की जाए, साधारण दृष्टि से अगर किसी को पूजा करते हुए देखे तो, एक लड़की, अच्छे पति की चाह, एक पत्नि परिवार की खुशहाली, एक बच्चे की माँ बच्चों के लिए, और एक बुडही माँ अपनों बच्चों की अच्छे कामना के लिए, एक दिन की बात है की मुझे सुनने में पता चला की गाँव में किसी की मृत्यु हो गई है, और पता किया तो पता चला हमारे घर से दूर सामने वाले घर में एक लड़का मर गया है, वह लड़का हमारे गाँव में ऐसा है, की सबसे जायदा होनहार और तरक्की में भी महीने के लाखो कमाने वाला, उस लड़के के एक बड़े पापा है, उनकी कोई चिराग जिसे लड़का कह सकते है, और ईधर ये एक लड़का और एक लड़की, अभी लड़की की शादी की उम्र ठीक हुई है, और लड़के का शादी हुए एक साल ही हुए है, एक तीन माह की लड़की, और बुझ गया परिवार और कुल का दीपक, वह लड़का लाइट से काम करते वक्त करेंट से मर गया | अब यहाँ पर मै सोचता हूँ, अगर भगवान होता तो या गॉड अल्लाह या कोई भी होता तो उस कुल के दीपक के नस्ट होने से जरुर बचा लेता, कहाँ गए उस लड़के के घर सामने वाले दो मंदिर के देवता, जो सुबह सुबह लड़के की माँ दीप जलाती थी, कहाँ गए, उस पत्नि के, उस बहन के, उस माँ के, उस दादी के कर्म जो उन्होंने दीप में जलाये थे, मै यही पर सोचता हूँ अगर वह रखवाला होता तो, दीपक एक बार जल जाता, लेकिन वास्तव में मुझे ज्ञात है, किसी दुसरे पर दोष देना गलत है, जैसे मै भगवान पर दोषी, लेकिन अगर दोष न दूँ तो पूजा अर्चना भक्ति भी क्यों करू |
है किसी के पास जवाब, जो मेरी भावना को समझ पाए, मुझे नास्तिक कहने से पहले ध्यान देना की, मै तुम्से बढकर आस्तिक हूँ |
Previous Post
Next Post

post written by:

0 Comments: