Oct 13, 2017

दीपावली क्यों मनाया जाता है, और कैसे मनाया जाता है, और कुछ अंधविश्वास

आज आपसे बात करने वाला हूँ, दीपावली के बारे में,
दीपावली क्या है ?
हिन्दू धर्म के अनुसार माना जाता है, की पिछले 9 लाख साल पहले जब राम भगवान थे, तो उन्हें
उनके पिता ने चौदह वर्ष के लिए वनवास जाने के लिए कहा था अर्थात
चौदह वर्ष तक वन में रहकर जीवन व्यतीत करना, पत्नि का धर्म होता है पति के साथ रहना इस तरह से
मानकर राम की पत्नि सीता भी उनके साथ वनवास गयी | और उनके छोटे भाई लक्ष्मण ने कहाँ की
बड़े भाई की सेवा करना छोटे भाई का कर्तव्य होता है, ऐसा मानकर लक्ष्मण भी साथ हो लिए |
और तीनो जंगलो में चौदह वर्ष तक भटकते रहे, और जब चौदह वर्ष बीत जाने के बाद तीनो वापस आये,
राम के आने के खुशी में माना जाता है, की नगर वासियों ने दीप जलाये थे,
इसी को आज वर्तमान में दीपावली के नाम से जाना जाता है |
दीपावली किस तरह से मनाया जा रहा है |
आज कल समय के साथ हर घर परिवार दीपावली को अपनी संस्कृति बनाने में लगा हुआ है,
घर के दरवाजे पर गेंदा फुल को लगाया जाता है, या केले के पत्ते को,
विभिन्न प्रकार के घर पर रंगोली बनाई जाती है, सभी एक दुसरे को मिठाई खिलाते है और सभी फटाखे फोड़ते है |
रात में सभी लक्ष्मी जी की पूजा करते है, और माना जाता है की जुआ खेलने से धन की वृध्दि होती है,
इस अनुसार से कुछ लोग जुआ भी खेलते है,
इस तरह से तीन दीन तह दीपावली मनाई जाती है,
लेकिन समय के साथ मुर्खता सर चड़कर नांच रही है,
इन तीनों दिनों में राम लक्ष्मण और सीता जी का कोई स्वागत नहीं किया जाता,
न इनकी आरती उतारी जाती है, और ना ही इनका स्वागत का पता चलता है,
दीपावली दीपो का त्यौहार है, लेकिन फटाखे फोड़ कर वातावरण को दूषित किया जाता है,
इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता है की दीपावली पर फटाखे फोड़ने का प्रमाण है,
दीपावली पर फटाखे जलाने के कारन हजारो घर फटाखे से आग में जल जाते है,
हजारो लोग फटाखे के कारन अंधे हो जाते है,
हजारो लोगो के हाथ फटाखे फोड़ते समय आग से जल जाते है,
लाखो लोगो के कान के परदे फट जाते है और वे सुन नहीं पाते,
और सैकड़ो लोग धुए से मर जाते है, और लाखो लोग धुए से बिमारी से ग्रसित हो जाते है,
पिछले वर्ष दिल्ली में इतने फटाखे फूटे थे की दिन में भी धुए खोहरे की तरह दिखाई देता था,
जो इस बार सुप्रीम कोर्ट ने फटाखे पर रोक लगाकर कुछ बेहतर काम किया है |
अभी दीपावली में फटाखे पर राजनीति चल रही है, हिन्दू कह रहे है, की यह सिर्फ हमारे साथ क्यों होता है,
तो इसका उत्तर इस तरह से देना चाहूँगा की, सुप्रीम कोर्ट सबके लिए है,
अगर फटाखे से नुकसानी हो रही है, तो इस पर पाबन्दी लगाई गई है, अगर मुस्लिम समुदाय में भी अगर
इस तरह की कोई नुकसानी उठाने वाला कार्य हो रहा होगा तो उस पर भी पाबंधी लगाई जाएगी |
लेकिन आपसे पूछना चाहता हूँ की दीपावली की ख़ुशी मनाने के लिए आप इनमे से क्या दान करना चाहोगे,
आँख, हाथ, चेहरा, कान, बाल, या बिमारी, क्या यही चाहते हो की फटाखे से लोग जलकर राम की ख़ुशी मनाये |
अगर इस तरह की अपने शरीर के अंग की बलिदानी नहीं दे सकते हो कहना भी नहीं की दीपावली पर फटाखे फोड़ना सही है |
और भी जाने समझे,
ऐसा कौन व्यक्ति कहता है, और कहाँ पर इसका प्रमाण है की दीपावली पर जुआ खेलना चाहिए,
यह तो मुर्खता की हद हो गई, खुशी मनाने के दिन पैसे को बर्बाद करके गम मनाने लगे हुए है,
और सबसे जायदा मुर्खता की हद तो तब हो गई जब, दीपावली पर
लक्ष्मी जी की पूजा और गणेश की पूजा जाती है भगवान राम को छोडकर, जो लक्ष्मी जी की पूजा करते है,
उनसे उत्तर जानना चाहूँगा की किस ग्रन्थ में ऐसा नियम है, और आज की बनावटी रामायण और ग्रन्थ को न बताना |
अतः अंतिम में कहना चाहूँगा की, जो इस ज्ञान को जानने के बाद भी दीपावली पर जुआ खेले, लक्ष्मी जी की पूजा करे,
और फटाखा फोड़ना अनिवार्य समझे उससे बढकर दूसरा मुर्ख नहीं |
दीपावली दीपो का त्यौहार है, दीप जलाये, इस तरह की मानसिक बिमारी से ग्रसित रहने वाला कार्य न करे,
यह कोई धर्म विरोधी पोस्ट नहीं है, मै भी हिन्दू धर्म से आता हूँ, और न ही कोई मेरा राजनीति पार्टी से संबंध है,
लेखक एवं संपादक Yogendra Kumar Dhirhe
अगर आप चाहते है, की सभी प्रेम से दीपावली मनाये तो कृपया इस लेख को व्हाट्स और facebook में शेयर करे |
धन्यवाद्
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