Apr 19, 2018

Mai
अगर आपसे यह प्रश्न किया जाए, तुम कौन हो ? 
आप इसका उत्तर क्या देंगे, शायद आप अपना नाम बताएँगे | अपने निवास का पता बताएँगे | लेकिन यहाँ पर मै का अर्थ अलग है, फिर से प्रश्न किया जाता है | तुम कौन हो उत्तर आता है, मै शरीर हूँ |
यह कैसा उत्तर आता है, लेकिन यही सत्य है, क्योकि शरीर के लिए तो नाम है |
शरीर का ही तो निवास स्थान है,  अर्थात जो कुछ भी है, वह सभी शरीर का ही है |और इसी का महत्त्व है, बांकी किसी का नहीं |
मै शब्द के अनेक अर्थ निकलते है, मै शब्द अंहकार को दर्शाता है | मै शब्द अपने आप को दर्शाने के लिए प्रयोग में आता है | यहाँ पर उच्चारण में अंतर मै और मै में समझा जा सकता है | मै शब्द स्वम को इंगित करने के लिए, धीमी गति स्वर से निकले; और जो मै अपने तेज गति से स्वर से निकले वह अंहकार है | 
यहाँ पर सभी का सम्बन्ध शरीर से है, अतः शरीर क्या है, यह जानना भी चाहिये |
दुनिया की सभी चीजे शरीर के लिए है, शरीर पञ्च महाभूतो से मिलकर बना है,  अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश |
आँख, कान, नाक, जीभ, तव्चा, ये सभी इस सभी को संचालित करने के लिए मन बना है |
मन को संचालित करने के लिए, बुध्धि है |
और बुध्धि को संचालित करने के लिए विवेक |
और विवेक को संचालित करने के लिए आत्मा, और आत्मा जो कुछ भी करता है, वह परमात्मा में मिलने के लिए करता है |
अच्छे कर्म करे, मन को संतुष्ट रखे | मन की संतुष्टि, ही आत्मा की और परमात्मा की संतुष्टि है |

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