May 12, 2017

वर्तमान की वास्तविकता

vartman ki wastvikta

कबीर घाट पुकारया, चढ़ चन्दन की डार |
बात लगाये ना लगे, फिर क्या लेत हमर ||
कबीर दास जी कहते है, मैंने चन्दन की डाली पर बैठकर बहुत से लोगो को पुकारकर उनका उचित मार्गदर्शन किया, परन्तु जो इस मार्ग पर नहीं आता वह ना आवे | वह हमारा क्या लेता है, अर्थात जो वास्तविकता का ज्ञान प्राप्त नहीं करना चाहता वह अपना ही नुकसान करता है |
कबीर दास जी सत्य कहते है, जो व्यक्ति वर्तमान की नहीं सुनता, सोचता, जो केवल भविष्य और भुतकाल में खोया रहता है, वह वर्तमान को गंवाता रहता है | व्यक्ति को चाहिए की वर्तमान को भी समय देवे | वास्तविकता में जीने की ओर बढ़े | क्योकि जीने का मजा तो वर्तमान में है, अगर भविष्य की कल्पना करते रहोगे तो, इस स्वप्न में जीवन कट जायेगा | अपने वास्तविकता से अपना जीवन परिचय करो | भविष्य में क्या करना है, उसकी योजना बनाओ | तभी आप आगे बढ़ सकते हो, यह न सोचो की भविष्य कैसा होगा | क्योकि भविष्य तो वर्तमान से है |  भविष्य पहले से बना हुआ नहीं है, वह तो नाम मात्र है | याद रखना वर्तमान से ही भविष्य है, आज से कल है | अतः आज को सुधारोगे तो, कल सुधर जायेगा | अत्यधिक भविष्य की चिंता व्यर्थ है, जो चिंता से चिता की ओर ले जाये | अपने वर्तमान में क्या करना चाहिए, इसके बारे में सोचो, देखो कोई चन्दन की वृक्ष में बैठकर अपनी ओर आने का इशारा कर रहा है | देखो तुम्हे वह इशारे से रास्ता बता रहा है | उस रास्ते को पकड़ो, जो तुम्हारी जिंदगी को बेहतरीन बना सकता है | आशा है आपसे, एक दिन सत्य मार्ग में चल पड़ेंगे |
समझदार के लिए इशारा ही काफी होता है |


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