Apr 13, 2017

Satya-Satyata सत्य-सत्यता

Satya satyata

सत म धरती हे, सत म हे आकाश |
कह गए बाबा गुरु घासीदास ||

सत्य उसे कहते, जो वास्तव में है, सत्य में धरती है, सत्य में आकाश है, सत्य में सूर्य है, सत्य में है चन्द्रमा, सत्य में दिन है, सत्य में रात है |
सत्य उसे कहते है, जिसे कोई नकार नहीं सकता, कोई झूठबोलकर उसे दबा नहीं सकता |
सत्य थोड़े समय के लिए लुप्त हो सकता है, मगर सूर्य की एक नई किरण के साथ निकलेगा | और झूठ सत्य के प्रभाव से भाग खड़ा होगा |
सत्य जब आएगा , तो लोगो को एहसास स्वम हो जाएगा, की सत्य आ गया है |
सत्य तुम्हे एहसास करा देगा,  कि मै हूँ, जिसे तुमने कुछ समय के लिए दबा दिया था |
सत्य में सतयुग हुआ है, सत्य में त्रेतायुग हुआ है, सत्य में द्वापर युग हुआ है, सत्य में कलियुग चल रह है |
सत्य में तीन काल है, वर्तमान कल, भूतकाल, भविष्यकाल, इन सभी सत्य को कोई नकार नहीं सकता, झुठला नहीं सकता |
किसी के मान लेने से सत्यता बदल नहीं जाएगी, जो है, सो है, यही वास्तव में सत्य है |
मनुष्य के कान, नाक, आँख, जीभ, मुह होते है, जो दिखाई देता है, मनुष्य की हड्डिया भी होती है, जो दिखाई नहीं देता; इसका अर्थ यह नहीं की हड्डिया नहीं होती है |
सत्य उसे कह सकते है, मान सकते है, जो वास्तव में है, लेकिन दिखाई भी नहीं देता |
भगवान् है, अपनी मन अर्थात ( आत्मा) से पूछो |
मैंने कितनी बार भगवान् को नकारने का प्रयास किया, लेकिन उसने मुझे हर-बार एहसास कराया की, मै हूँ, हर पल तुम्हारे साथ हूँ |
अगर मै तुम्हारे सामने आ जाऊ तो क्या तुम मुझे पहचान लोगे |

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