Apr 15, 2017

समानता की शक्ति -

समानता की शक्ति -

समानता का वास्तविक अर्थ होता है, समान(बराबर) |  लेकिन यह किस विषय में कहा जा रहा है, यह बड़ी बात है; | यहाँ समानता उस स्थान से लिया गया है, जब जीवन कि शुरुआत होती है, | कोई भी बच्चे का जब जन्म होता है, तो उस समय, वह अन्य बच्चों कि तरह होता है | कोई गर्भ से साथ में पैसे लेकर नहीं आता, |माँ कि कोख सबके लिये समान होती है, सभी बच्चे उसी स्तिथि से गुजरकर जन्म को प्राप्त करते है | कोई भी जब बच्चा जन्म लेता है, तो उस समय  अन्य बच्चो कि तरह उसमे समान गुण होता है , सभी मुठ्ठी बांधकर आते है, सभी कि आँखे, कान, नाक, जीभ, तवचा होती है |कोई जन्म से बुद्धिमान नहीं होता, कोई जन्म से बोलना शुरु नहीं कर देता | वह तो जन्म लेने के बाद इसी प्रकृति से इसी जीवन से, इन्ही लोगो से सीखता है, और अपने उन्नति की ओर आगे बढता है,  निराशा वाली कोई बात नहीं, फर्क तो बस इतना है, निराशा का जब कोई हाथ पकड़ लेता है, तो वह उसी ओर बढने लगता है | अपने आप को पहचान तुम क्या नहीं कर सकते, |अपने आस पर दूर दृष्टी से देखो , सब इसी परिस्तिथि से बढकर मंजिल को प्राप्त हुए है | अगर आगे बढ़ना है, अपने आप को कमजोर न समझ, कमजोरी को समझ, इस कमजोरी को दूर करने के उपाय निकाल, तुम्हे अपनी मंजिल तह स्वमं बढ़ना है | देखो अपने आस पास सब तुम्हारे उठने का इंतजार कर रहे है,  अपने हाथ को बढा रहे है, | सोच समझकर किसी का हाथ पकड़ ले, अगर तुम गलत हाथ पकड़ते हो, तो वह तुम्हारी गलती होगी | आगे बढ़ो, देखो, महसूस करो तुम्हारी मंजिल तुम्हे बुला रही है, अब दुविधा के लिये कुछ बचा नहीं, फिर क्या देर है, अपने आप को पहचान किस लिये जन्म लिये हो, तुम्हे कुछ करना है, कुछ बेहतर करना है,.........................

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