Apr 15, 2017

कर्म का फल

कर्म का फल


तुम्हारा कर्म करने में अधिकार है, फल में नहीं, अगर फल के लिये भी कर्म करते हो तो वह भी तुम्हे समय के आने पर प्राप्त होगी | लेकिन उसके लिए निरंतर अपने कर्म की ओर बढ़ना होगा | सफलता के लिए निरंतर प्रयास करने की  आवश्यकता होगी | कर्म करो, तुम्हे फल अवश्य मिलेगा | लेकिन कर्म के बीच निराशा का कीड़ा काट खायेगा तो, निराशा की ओर बढ़ना शुरु हो जायेगा |
इससे बचने के लिए एक उपाय है, कर्म हो रहा है, उसमे कमी ढूढना; और फिर से कर्म को अच्छे से करना | बढ़ो आगे बढ़ो अभी तो शुरुआत हुई है, अभी तो रात हुई है, सवेरा आना बांकी है, ओ सुबह आ गया है | उस लाल लौह ने मुझे जला दिया, अपनी आग से मुझमें आग लगा दिया |
कैसे करूँ मै, इस लौह की किरण को, आज मुझमे इस्फुरती भर आया है,
किसी के रोके न रुके मै तो चलने लगा |
सूरज के संग हर सुबह जलने लगा |
सात रंग के सात घोड़े सूर्य को ले बढे |
मैं भी सूर्य के साथ बढ़ने लगा |
सात रंग के सात सबक सिख कर मै बढ़ने लगा |
चल पड़ा मै चल पड़ा किसी के रोके न रुके अब मैं बढ़ने लगा |
आई कितनी मुशिबते, मै हल करते गया |
सूर्य की तरह मै चढ़ गया |
आएगा एक दिन ऐसा, जब कर्म अपना रंग बिखेरेगा |
आशा है, मुझमे और विश्वास है |
धैर्य भी मेरे साथ है |
मै बढ़- मै बढ़ चला, मै चढ़- मै चढ़ चला, सूर्य की नई किरण के संग |
योगेन्द्र कुमार 

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