Apr 12, 2017

पढ़े तो कैसे -

padhe to kaise

अक्सर लोग इतना पढ़े लिखे होते है, जो आप पास के लोग सोच भी सकते | अगर इन्ही पढ़े- लिखे लोगो को से पेपर पढने के लिए कह दिया जाए , तो वे पढ़ तो लेंगे, लेकिन ऐसा पढेंगे, जैसे भेढ़ बकरी एक सामान, सरपटजिसका लय होता है, न ताल, ना भावना, न विषयक, तो क्या फायदा इतनी पढाई करने का, इसलिए कहा जा सकता है | आप उस वक्त तक अनपड़ के समान है, जब तक सही तरीके से पढना लिखना नहीं आ जाता इसका अर्थ है पढने का तरीका, हम बातो को किसी दुसरे को बताने के लिए, अपनी जुबा से बात करते है | अपनी भावना को प्रदर्शित करते है, बोलने में रुकना, बढ़ना, चलना , यह सभी का लय होता है |अपनी भावना को लय उतर चढाव, कहाँ पर वाणी अपने आप चुप हो जाता है; इस प्रकार की बातो को अपनी जिव्हा से प्रकट करते है | अगर इसी को आवाज से न प्रकट करके, लिखकर प्रकट किया जाए तो; किस तरह से लिखेंगे |इसे इस तरह से लिखना चाहिए की, भावना उसमे कण-कण में समाहित रहे |इसके लिए विराम चिन्हों का उपयोग किया जाता है,इनके नाम अल्प विराम, मध्य विराम, पूर्ण विराम, सूचक चिन्ह, और भी बहुत सारे है, जिनका अध्यन करे |आप से निवेदन है, पढ़ लिख कर अनपढ़ न रहे |धन्यवाद् 

Previous Post
Next Post

post written by:

0 Comments: