Apr 18, 2017

मनोज्ञान- एक नई सोच 2

ManoGyan-ek nai soch 2

ज्ञान –
व्यक्ति के शरीर में एक सर (मस्तिक) होता है, जिसमे तीन प्रकार के दिमाग पाए जाते है,
इनके नाम इस प्रकार है,
अग्र , मध्य , पस्च,
इन सभी में ज्ञान भरा होता है ; इसी ज्ञान के माध्यम से जीवन को जीते है,
“ व्यक्ति वैसा ही जीवन जीता है, जैसा वह समझता है ”
इसका अर्थ यह नहीं की जिसके पास ज्ञान होता है,  वही जीवन को अच्छे से जीता है |
हम जो कुछ भी करते है, वह ज्ञान के माध्यम से करते है, यहाँ पर आप पड़ रहे है, तो दिमाग के माध्यम से ही पड़ रहे है, आप लिखावट को समझ रहे है, कि यह हिन्दी भाषा में लिखा है, अगर यह इंग्लिश में लिखा होता; और आपको इंग्लिश पड़ना नहीं आता तो क्या इस ज्ञान को आप समझ पाते, नहीं, क्योकि इंग्लिश का ज्ञान हमारे दिमाग में है, ही नहीं तो फिर कैसे समझ सकते है |
अब आपने मन, मनो, ज्ञान के बारे में थोड़ी जानकारी प्राप्त कर ली है |
हम यहाँ पर अनेक जीवो का अध्ययन न करके सिर्फ मानव के बारे में ज्ञान एकत्र कर रहे है, इसलिए यह जानना जरुरी हो जाता है, की मानव किससे बना है, कैसे बना है, कैसा दीखता है, क्यों दीखता है|
आदमी कैसा दीखता है –
हर व्यक्ति में कुछ इस तरह का बनावट देखने को मिलता है |
आदमी जब जन्म लेता है, तो उसे नवजात शिशु कहते है, और जब थोड़ा बढता है, तो उसे बच्चा कहते है |
सभी व्यक्ति में, एक आत्मा, जो दिखाई नहीं देता, होता है |
जब बच्चा जन्म लेता है, तो तुरंत बाद वह स्वास लेता है, और रोता है, अपने आँखों से देखता है |
सभी में दो नाक, दो कान, दो आँख, जीभ, मुख, दो हाँथ, दो पैर होते है, और भी बहुत सारे होते है ,
आप जानते है |
लेकिन आपको यहाँ पर कुछ विशेष ज्ञान का ज्ञात कराया जा रहा है |
कुछ विचार मेरे- मेरी भावना यह है की, जो कुछ तुम्हारे पास ज्ञान है, और नहीं भी है, वह तुम्हारे आत्मा को ज्ञात है | मै यहाँ पर आपकी आत्मा को ज्ञात करा रहा हूँ, न की ज्ञान दे रहा हूँ |
लेकिन जो ज्ञान आपके पास है उसे बताना होगा, की यह कहाँ से प्राप्त हुआ, जन्म से तो कोई ज्ञानी नहीं होता |
क्रिया क्या है –
जो कुछ भी कार्य किया जाता है, उसे क्रिया कहते है, जैसे आप पड़ रहे है , आप यहाँ पर पड़ने का कार्य कर रहे है, | मेरे अनुसार से आप क्रिया को समझ गए है |
हमारा शरीर में बहुत खास इन्द्रिय होते है,
1. दो आँख, 2. दो कान , 3, दो नाक, 4, एक जीभ, और 5, त्वचा
आँख –
आँख का कार्य देखने का होता है, बिना आँख के देख नहीं सकते |
कान का कार्य सुनने का होता है, बिना कान के सुन नहीं सकते |
नाक का कार्य स्वास लेने का होता है, मुह से स्वास लेने से असुध्धिया स्वास के साथ चली जाती है |
जीभ का कार्य स्वाद को चखने, स्वाद का पता लगाया जा सकता है |
और त्वचा के माध्यम से छुकर, स्पर्श करके पता लगा सकते है |
यहाँ पर आप सिर्फ कुछ समय के लिए कल्पना करे,
अगर शरीर का त्वचा को छोड़कर चारो काम करना बंद कर दे तो, क्या होगा |
आँख को बंद कर लेते है, कान से सुनना बंद कर देते है, जीभ को वही रहने देते है, और नाक की जगह मुह से स्वास लेते है, क्या आप दस कदम चल पाएंगे |
चलेंगे मगर किसी चीज का ज्ञात नहीं होगा, इन इन्द्रियों के बिना व्यक्ति का शरीर अधुरा हो जाता है |
दिमाग के पास किसी बात का ज्ञान को पहुचने के लिए इन्द्रिय स्व सहायता करता है |
बिना इन्द्रिय के मस्तिक तक सुचना को नहीं पहुचाया जा सकता |
यहाँ पर आपको समझना है, मन किससे बना है, तथा इन्द्रिय, और दिमाग को भी  |
मन तो आत्मा है,
इन्द्रिय तो 5 अलग-अलग है, और दिमाग तो तीन तरह के है, तो फिर क्या समझना बांकी है |
हम पढाई कर रहे है मनो ज्ञान की-  अर्थात व्याक्ति का मन कैसे, क्यों, और कब सोचता है, और सबसे महत्वपूर्ण बात की, मन कैसे निर्णय लेता है | क्योकि जो भी हम पढाई करने वाले है, वह निर्णय के बारे में ही तो पढाई करने वाले है, की उसने यह क्यों किया कब किया, कैसे किया | क्यों कर रहा है, क्यों किया, क्या करने वाला है, सभी भुत, वर्तमान और भविष्य, के निर्णय के बारे में पड़ने जानने वाले है |
लेकिन समझने वाली बात यह है, की निर्णय लेता कौन है |
निर्णय लेता कौन है – (मन अर्थात आत्मा ) या (दिमाग अर्थात बुध्धि )
और इन्द्रिय निर्णय लेगा या नहीं |
तो आइये मनोज्ञान को और आगे बढ़ाते है |
एक पल के लिए सोचना ही बंद कर दे, आप कुछ न सोचे सभी ओर देखे, लेकिन सोचे न |
क्या होगा, क्या यह दिमाग, बुध्धि, और इंद्रिय किसी काम की रह पाएगी |
आप देखेंगे तो, मगर समझ नहीं पाएंगे क्या देखे है, उसके बारे कुछ सोच ही नहीं पाएंगे, सुनेगे, तो मगर समझ नहीं पाएंगे , कि क्या सुना है, इस तरह से दिमाग अपने आप में सर्वग्य नहीं हो सकता; और न ही इंद्रिय |
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