Mar 30, 2017

कहानी - वो बढ़ चला

wo bad chala stori
वो बढ़ चला |
यह कुछ दिन पहले कि ही तो बात है, वो मेरे पास आता था, न जाने कुछ देर रुकता और चला जाता था | मै भी बच्चा है, इधर-उधर कुछ करता होगा, ऐसा जानकर कभी ध्यान ही नहीं गया | मै भी जब से दुकान खोला करता, उसी में दिन भर लगा रहता था| कुछ साल पहले कि बात है, जब मैंने, अपनी पढाई करने के बाद कंप्यूटर कोर्से किया | कुछ दिन के बाद लगा मुझे कंप्यूटर का छोटा सा दुकान खोलना चाहिए | काम जायदा नहीं सभी कंपनियों का रिचार्ज हो जाता, फोटो कॉपी ,ज़ेरोक्स, फोटोग्राफी, डाउनलोड, और इन्टनेट में का ऑनलाइन थोडा बहुत वहीँ फॉर्म भरना, टायपिंग करना | और थोडा बहुत और कार्य कर लेते है | मेरे दुकान के पास पड़ोस में वो रहता है, कभी-कभी आता था; छोटा यही कोई 7,8 का ही रहा होगा | जब वह पहली बार आया था तब मैंने कंप्यूटर में गेम खेलने के लिये उसे खोलकर दिया था, वह अपनी माँ के साथ पहली बार आया था | उसके पिता एक गरीब आदमी थे, घर से बाहर कुछ काम किया करते थे; मुझे उनके बारे में बस इतना ही जानकारी रहा | आज के समय में कब किसके लिये समय है, व्यक्ति को अपनी काम से फुरसत मिले तब तो कोई और काम करें | मेरी भी कुछ ऐसी ही बात है; सुबह उठना और रोजाना यही काम करना, ऐसा नहीं है, कि काम ही सब कुछ है | जब शाम होता है, तो सूरज को सलाम करने, नदी के पास दोस्तों के साथ जाया करते है, | ये ठण्डी पवन के झोके ऐसे आते है, मानो कोई चमत्कार कर रहा हो सब थकान एक पल में मिटा जाते है;| ऐसी ही तो कुछ ख़ास बात है, इन वादियों में जो मुझे अपनी ओर मुझे खीच लेती है ; मगर उसको ऐसा क्या मिल गया था, जो वो रोजाना मेरे पास आने लगा था, गेम चलाते-चलाते कब इन्टरनेट में घुस गया मुझे पता ही नहीं चला, ऐसा नहीं है, कि मै उस पर नजर रखता था, या कोई शक करता था , छोटा सा बच्चा ही तो है ,वो | मै उस दिन दंग रह गया जब मुझे हिंदी में टाइप करने के लिये कहा गया | वैसे तो बीच-बीच में हिन्दी में टाइप करने के लिये आते ही रहते है | मगर उस दिन वह व्यक्ति मेरे दुकान से खाली नहीं गया, मुझे बहुत खुशी हुई कि मेरे दुकान से वह व्यक्ति निराश होकर नहीं गया, साथ में हैरानी भी, मेरे टाइप किये ही बिना उसका काम हो गया था | हैरानी इस बात कि उस छोटे से बच्चे ने हिंदी में टाइप किया, इंग्लिश कि बात कुछ और है ,क्योकि सब कीपैड में दिया हुआ होता है ; और देख कर ही तो लिखना होता है | उसने ये कैसे कर लिया, इसको तो ठीक से पड़ना भी नहीं आता होगा, और एक बड़ा सा काम कर दिखाया, जो मेरे बस कि बात नहीं वह बड़ा ही तो है, मैंने तो इंग्लिश मीडियम में पढाई कि है, मगर ओ हिंदी मीडियम पड़ रहा है; तभी तो ना | मैंने उसे उस दिन कुछ नहीं कहाँ, मै इस बच्चे को समझना चाहता था | कि इसने ये कैसे कर दिखाया, सच मनो तो मै छोटे से बच्चे का फैन हो गया था | वो कुछ दिन बाद आया, अपने काम में हमेशा कि तरह मस्त रहा | वह दुसरे कंप्यूटर में कुछ-कुछ कर रहा था | ज्यादा तर से वह ऑफलाइन ही रहा करता था | मै चाहता तो सीधे उससे पूछ सकता था , कि तुमने ये कैसे सिखा ; मुझे लगा सीधे तरह पूछना उसका अपमान है | मै तो उसका फैन हो चूका था | मुझे समस्या हो गयी, मै कैसे इससे पूछू इसने हिन्दीमे टाइप कैसे कर लिया; अगर मै इस पर नजर रखू तो इसमें मुझे गलत लगता है | क्योकि किसी के ऊपर नजर रख कर उसके बारे में जानकारी लेना थोड़ा गलत है | मै भी उसी कि तरह सिख सकता था, लेकिन नहीं मुझे तो उसी से सीखना था; मै इंतजार कर रहा था उसके स्वेच्छा का मुझे एक कथावत याद आती रहती है- अध्जल गघरी छलकत जाएँ | इसका अर्थ यह होता है, जब मटकी में पानी पूरी तरह से भरा हुआ होता है तो, पानी से भरे मटकी को सर पर रख चलने से बाहर गिरता नहीं; और वही जब पानी मटकी से थोडा आधा हो तो, पानी छलक-छलक कर गिरता रहता है | मै नहीं चाहता था, वो लड़का अध्जल गघरी बन जाए | मै इंतजार करने लगा, उसके मटके में पानी भरने का |
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