Sep 23, 2018

भुत देखने वाले को 1000 रूपये योगेन्द्र धिरहे की तरफ से इनाम !
भुत देखने वाले को 1000 रूपये योगेन्द्र धिरहे की तरफ से इनाम !

आज के समय में ऐसे बहुत सारे लोग है, जो भुत देखने का दावा करते है और अंधविश्वास को फैलाते है,
पर इसकी वास्तविकता को जानने की कोशिश नहीं करते,
तो मैंने सोचा की क्यों न इसकी वास्तविकता को जाना जाए |
और मैंने 1000 रूपये का इनाम रख दिया की कोई तो ऐसा व्यक्ति मिले जो भुत देखने का दावा करता हो, आज के समय में ऐसे बहुत सारे लोग है, जो भुत के शब्द के नाम से कापने लगते है, पर क्यों ?
आज इसी के बारे में चर्चा करेंगे, आपने ऐसे बहुत सारे विडियो देखे होंगे, जो भुत पकड़ने का दावा करते है,
इसकी सच्चाई यह है, यह एक मानसिक अवस्था होती है, जिसमे नकारात्मक उर्जा अपने दिमाग में हावी हो जाती है, और दिमाग काम नहीं करता है,
यह कोई पागलपन नहीं है |
बल्कि एक भ्रम है |
इस भ्रम को वास्तविकता में पहुच कर तर्क बुध्धि से दूर किया जा सकता है |
जैसे :- अगर कोई मेरे पास इनाम लेने आये तो मै उनसे कुछ प्रशन पूछूँगा जैसे की भुत देखने वाले को 1000 रूपये योगेन्द्र धिरहे की तरफ से इनाम !

प्रशन :- आपने भुत देखा है ?
उत्तर :- हाँ में |
प्रशन :- कहाँ देखा है ?
उत्तर :- कोई जगह का नाम बताएगा |
प्रशन :- कितना बड़ा था ?
उत्तर :- बहुत बड़ा था, या जो भी आकर बताएगा |
प्रशन :- किस रंग का था ?
उत्तर :- जो भी रंग रूप आकर बताये |
प्रशन :- क्या उसके आँख कान मुह शरीर था ?
उत्तर :- यह सब था, या जो भी |
प्रशन :- भुत किस चीज का बना था, हमारे जैसे मास या मिटटी या पत्थर से ?
उत्तर :- भुत इन चीजो से नहीं बना था, या कुछ पता नहीं, और अंतिम में जवाब हर किसी का यही आता है की भुत हवा या धुंध का बना था |
प्रशन :- क्या आप हवा को देख सकते है ?
उत्तर :- नहीं |
प्रशन :- भुत से आपने बात की, कुछ बोला, कुछ कहाँ,या नहीं या खाली खड़ा था, या कुछ कर रहा था |
उत्तर :- बोला कुछ कुछ, या नहीं भी बोला होगा |
प्रशन :- हवा कैसे बोल सकता है ?
उत्तर:- मुह से, या नहीं भी बोला होगा |

अंतिम तर्क बुध्धि :- जो लोग भुत देखने का दावा करते है, वह सभी भ्रम और डर के शिकार लोग है, हवा को कोई देख नहीं सकता तो, भुत हवा से कैसे बनेगा |
ये भुत सिर्फ डराने के लिए होता है |
पर भी लोग आज किसी को जोर-जोर से चिल्लाते, या अलग व्यव्हार करते देखने है | इसका समाधान यह है |
यह सभी उर्जा का खेल है, उसमे नकारात्मक उर्जा सोच हावी हो गई है |
यह हावी पन दिमाग की डर की, मानसिक अवस्था होती है
आप अपने की पॉजिटिव उर्जा को उस ट्रान्सफर करके उसे ठीक कर सकते है |
इस विधि को लिखकर नहीं समझाया जा सकता |
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अगर अभी भी कोई इनाम जितना चाहता है तो इन प्रशनो का उत्तर पहले देवे |
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Sep 18, 2018

हिन्दू धर्म का क्या है?  ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य शुद्र क्यों ? गुलामी से निकलो ST, SC,OBC, जरुर पढ़े |
हिन्दू धर्म का क्या है?  ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य शुद्र क्यों ? गुलामी से निकलो ST, SC,OBC, जरुर पढ़े |
क्या आप जानना चाहते है हिन्दू धर्म क्या है | तो पढ़िए पूरी जानकारी
सबसे पहले धर्म को जानते है उसके बाद हिन्दू धर्म को जानेगे,
पुराने नियम या प्रथा या किसी के द्वारा बताये गए सन्देश आगे चलकर वही धर्म, उसके पथ पर चलने वाले लोगो द्वारा धर्म बना दिया जाता है |
जैसे इसाई धर्म , मुश्लिम धर्म, सिख धर्म, बौध्द धर्म, जैन धर्म |
इस तरह से लेकिन हिन्दू धर्म सबसे प्राचीन धर्म है यह तो आपने सुना ही होगा,
लेकिन इसकी वास्तविकता को आप नहीं जानते होंगे
तो गौर से पढ़े बार बार पढ़े समझे तभी आपको समझ आएगा |
हिन्दू धर्म में चार प्रकार के वर्ण है जिसे चातुरवर्ण 4 वर्ण कहते है |
जिसमे ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, और शुद्र आते है
( यही चारो वर्ण हिन्दू धर्म में आधार शिला है )
आज भारत के सभी हिन्दू इन्ही चारो वर्णों में बंटे हुए है ,
ब्राम्हण के द्वारा हमेशा से यह भ्रम लोगो के मन में डाला गया है की वर्ण कर्म के आधार पर होते है |
( परन्तु यह सबसे बड़ी झूट है | जैसे स्वर्ग की बात )
एक देवता जिसका नाम ब्रम्हा,
जिसके संतान ब्राम्हण अपने आप को मानते आये है |
ब्राम्हण स्वंम कहते है
ब्रम्हा ने अपने मुख से ब्राम्हण को पैदा किया
अपने छाती से क्षत्रिय को
पेट से वैश्य को
और पैरो से शुद्र को
ब्राम्हण का कार्य नियम बनाना देवताओ की सेवा करना
क्षत्रिय का कार्य ब्राम्हण क्षत्रिय तथा वैश्य की रक्षा करना
वैश्य का कार्य शुद्रो के द्वारा उगाये गए अन्न को लाकर ब्राम्हणों क्षत्रियो को खाने के लिए देना तथा सामग्री वसूल करना |
और शुद्र का कार्य इन ब्राम्हणों क्षत्रिय और वैश्य की गुलामी और निश्वार्थ भाव से सेवा करना है |
मनुस्मृति में स्पस्ट लिखा है शुद्रो का धर्म सिर्फ सेवा है इनका अलग से कोई धर्म नहीं है |
हिन्दू धर्म आज भी इसी वर्ण व्यवस्था पर टिका हुआ है |
हिन्दू धर्म देवी देवता वाद, और कहानिवाद है |
ब्राम्हण अपने आप को इसलिए सबसे श्रेष्ट कहते है क्योकि देवी देवता के ये पुजारी और वंसज है |
हिन्दू धर्म की वर्ण पर आधारित है | और वर्ण का आधार देवी देवता है |
( वास्तव में हिन्दू नाम का कोई धर्म नहीं हो सकता, क्योकि यह वर्ण धर्म है )
( जो लोग देवी देवता की पूजा करते है वही हिन्दू धर्म के अंतर्गत आते है बांकी नहीं ) जैसे सतनाम प्रवर्तक, कबीर प्रवर्तक, क्योकि इनमे देवी देवता को नहीं पूजा जाता | सबसे जटिल धर्म हिन्दू धर्म है इसे समझना बहुत कठिन है क्योकि कोई भी स्पस्ट सटीक जवाब नहीं दे सकता और देगा भी तो कापी पुस्तक पोथी पुराण खोल के जो की ब्राम्हणों ने खुद से कपोलकल्पित लिखी हुई है |
हिन्दू धर्म के अनुसार जो शराब और मास खाता है वह वर्ण में गिना जाता है |
तो बताओ कितने ब्राम्हण आज अपने आप को शुद्र कहते है,
कोई इतिहास बताओ जिसमे कोई ब्राम्हण शुद्र बना हो |
क्योकि ब्राम्हण का बेटा ब्राम्हण कहलायेगा, और शुद्र का बच्चा शुद्र कहलायेगा यही हिन्दू धर्म की परंपरा है |
ब्राम्हणों ने देवी देवता को पूजना शुरू किया, उनको देखकर, क्षत्रिय, इन दोनों को देखकर वैश्य,
और अब बात करते है शुद्र की |
जब ब्राम्हणों को डर सताने लगा की शुद्रो की संख्या जादा है और ये कभी भी एक हो सकते है और हमारी सत्ता को चूर चूर कर सकते है तो इन ब्राम्हणों ने शुद्रो को जाति में बांटकर इनके इतने टुकड़े किये की आज भी ये इन टुकडो को गिन नहीं पाते |
शुद्र के तीन प्रकार है
सछुत – जिसे छुआ जा सके,
अछूत – जिसे न छुआ जा सके
और नीच जो सबसे नीचे माना गया है
शुद्र = सछुत OBC, अछूत sc, नीच st, इस तरह से |
ये आज शुद्र आज भी नहीं जानते की इन्हें शुद्र की श्रेणी में माना गया है |
हिन्दू धर्म की कहानी बहुत प्राचीन है आपको फिर से बता दू इसे समझना इतना आसन नहीं है |
कोई व्यक्ति जन्म से बुध्धिमान नहीं होता वह जन्म के बाद धीरे धीरे होता है |
इन लोगो को पूजा करते देख obc भी पूजा करना शुरू किये क्योकि ये इनके कार्य किया करते थे, लेकिन शुद्र ही थे |
इस तरह से आज भी obc पूजा करना शुरू किये
obc  को देखकर प्राचीन काल से sc पूजा करना शुरू किये
sc को देखकर st शुरू किया |
अब सुनो दंड गुलाम बनाने की प्रथा को |
सबसे ऊपर ब्राम्हण खुद बैठ गए | ब्राम्हण ने सबको अपने से नीचे गुलाम बनाया |
क्रम देखो गुलाम बनाकर राज करने का
ब्राम्हण- पंडित देवता का पुजारी मंदिर इसका दुकान
क्षत्रिय - डरवाकर राज करने वाले
वैश्य - तराजू वाले
शुद्र - मजबूर लोग गुलाम, दास,
 शुद्र अगर नियम का उलंघन करें तो उन्हें जैसा चाहो वैसा दंड दो |
जैसे अगर पैर से मारे स्वर्ण =( ब्राम्हण, क्षत्रिय,वैश्य ) को तो पैर काट दो
हाँथ से मारे तो हाँथ , आख दिखाए तो आँख
मुह से बोले तो जीभ थूके तो ओठ,
कान से कुछ मंत्र सुन दे तो कान काट कर सीसे को पिघलाकर डाल दो
नाक सिकोड़े तो नाक काट दो अगर सहन न हो तो सर काट दो |
इनके बहन बेटी नारी का खुले आम बलात्कार करो इस तरह का नियम |

इसी कारण से आज के लोग आदत से मजबूर है तथा पूर्वज के ज़माने से गुलामी की जिंदगी जीते आ रहे है | इनको डर दिखाओ इनको डराओ और राज करो |
किसका डर देवी देवताओ का डर भुत प्रेत का डर और किसका डर | नर्क का डर, अगले जन्म का डर, पाप योनि का डर,
आज देखो संविधान बन्ने के बाद ये लोग अपने बुध्धिजीवो लोगो को प्रवंचन करने के बहाने शुद्र को कथा माध्यम से लुटने तथा देवी देवताओ का गुलाम बनाने के लिए छोड़ दिये है , और खुद संसद और लोकसभा और बड़े बड़े पदों में जाकर बैठ गए है | और अपने अपने पोथी पुराण रामायण की कहानियो को शुद्रो के लिए छोड़ दिए है |
राम राम कहेंगे तो मोक्ष मिलेगा, कोई हनुमान जब रहा है, कोई गायत्री मंत्र
शुद्र आज बेशक गुलामी से आजाद हो चुके है थोड़े से,  लेकिन इन लोगो को नहीं पता है, की देवीदेवताओ की पूजा का अर्थ ब्राम्हाणवाद की गुलामी है |
कभी ये काली के नाम से, कभी शनि देव के नाम से ये डराते फिरते है |
और बारह राशियों के चक्कर में सबको दूरबुध्धि बनाये फिरते है |
और इनके पंडा पुजारी भीख मांगने के बहाने अपने ब्रम्हाणवाद के राज को जानने आते है | ये आलसी लोग है ये फ़ोकट के खाने वाले है, ये लुटने वाले लोग है |
तुम्हे गुलाम बनाने वाले लोग है |
कभी पूछ के देखो तो शनि क्या हिन्दू धर्म के लोगो के ऊपर होता है या अन्य धर्म के लोगो के ऊपर भी, या विदेशो में होता है , या भारत देश में ही होता है |
कभी पूछो तो सही शनि क्या होता है ? ये दुनिया भर के ढोंग तुम्हे डरवाने के लिए होता है |
ये संविधान बन्ने के बाद भी कहते है , शुद्र अगर मंदिर में आये तो इन्हें जूते से मारो | वास्तव में ये स्वर्ण ठीक कहते है क्योकि ये स्पस्ट जानते है की शुद्रो का देवी देवता नहीं है ये सवर्णों का है |
लेकिन आज भी शुद्र देवी देवताओ की पूजा करना नहीं छोड़े इनके उद्धार के लिए अनेको इनके संतो ने मार्ग बताया ये नहीं समझे क्योंकि |
ये आदत से मजबूर है |
ब्राम्हणों ने इनके दिमाग में आदत को भर दिया है ये आदत से मजबूर है |
ओ जैसा कहेंगे वैसा ही करेंगे |
आज ये मेरा देवता बड़ा, उसका देवता बड़ा, के नाम पर लड़ते है,
आज ये मेरी जाति बड़ी, उसकी छोटी, के नाम पर लड़ते है,
इसी तरह से आमिर गरीब, खान पान, रस्मो रिवाजो के नाम पर
ये दुरबुध्धि लोग लड़ते है |
ये सोचना नहीं चाहते, जब सोचेगे ही नहीं तो समझेंगे कैसे |
जब समझेंगे ही नहीं तो विचार कैसे करेंगे, और जब विचार ही नहीं करेंगे तो तर्क बुध्धि कैसे आएगा | और जब तर्क ही नहीं लगायेंगे तो, तह तक कैसे पहुचेंगे |
आज देखो शुद्र समाज एक होने की जगह लड़ रहे है, ये जानने की कोशिस ही नहीं करना चाहते की जाति क्या है ? धर्म क्या है ? मै गरीब क्यों हूँ
ये स्वर्ण ही आमिर क्यों है हमें नौकरी क्यों नहीं मिलती है |
ये नहीं जानना चाहते |
क्योकि ये दुरबुध्धि लोग है, अगर दूर से बुध्धि को आते देख ले तो कही छुप जायंगे | उस रास्ते से पलट जायंगे, भाग जायंगे, लेकिन कोई तर्क की बात करें तो उसे पागल कहेंगे | क्योकि पागल कहना आसन है | दूरबुध्धि लोग सोच नहीं सकते इसलिए पागल कह देते है, अगर पागल नहीं कहेंगे तो सोचना पड़ जायेगा की ये क्या कह रहे है |
जैसे ब्राम्हण नए नए देवी देवता के अविष्कार में लगे हुए है जो सबसे जायदा इन शुद्रो को हमारे करीब मोह जाल, किसी भी माध्यम से अपने पास ला सके |
और हम इनका शोषण कर सके इनको गुलाम बना सके, इनको लुट सके इनको गरीब बना सके, इन शुद्रो को बीमार बना सके |
जैसे देवी देवता के मूर्ति को कहाँ डालते है,
नदी, तालाब, नाला में, तो जो डालते है क्या वे उस किचण में नहाते है, नहीं
बल्कि शुद्र ही नहाते है |
अरे शहर के लोग गन्दगी करते है, तुम गाँव के लोगो को क्या हुआ आपको स्वछता तो बहुत प्रिय है | फिर क्यों करते हो ऐसा,
एक काम करो अपने गाँव को छोड़कर दुसरे गाँव में मूर्ति को डाल के बता दो |
मै मान जाऊंगा उस गाँव के लोग सच्चे मूर्ति पूजा के भक्त है |
जो डालते है उनके बच्चे बीमार नहीं पड़ते, जो नहाते है उनके बच्चे बीमार पड़ते है | ओ तो बड़े मौज से स्विमिंग पुल में, अपने घर में, नल में नहा लेते है |
तो फिर आप उनके कचड़ा करने कैसे दे देते हो |
गणेश देवता को देखो |
ये शुद्र दूरबुध्धि लोग सोचना ही नहीं चाहते |
गणेश मिटटी से बना |
गणेश के पिता ने अपने बच्चे का सर काट दिया |
अब जोड़ने के लिए जानवर हांथी के बच्चे का सर मिला |
उसी सर को नहीं जोड़ सकता था |
काट के शिव ने गणेश में जोड़ दिया |
जोड तो दिया लेकिन इन्सान और जानवर का सर कैसा जुड़ सकता है |
चलो मान भी लिया जुड़ गया लेकिन इतना बड़ा सर कैसा जुड़ा होगा छोटे से बच्चे में |
चलो ये भी मान लेते है लेकिन आदमी और जानवर का खून तो एक नहीं हो सकता इसे कैसे माने |
चलो ये भी मान लिया लेकिन आदमी और जानवर की पेशी और दिमाग, और नली कैसे जुड़ सकती है इसे कैसे माने |
चलो ये भी मान लिया लेकिन गणेश बोलता है कैसे मान ले |
चलो ये भी मान लिया, लेकिन इतना बड़ा भारी भरकम गणेश मुसक में बैठता था |
चलो ये भी मान लिया |
जो कहाँ ओ सब तो मान लिया और क्या बंकि है |
अब तो गणेश से डर नहीं लगता लोग समझदार हो चुके है |
बच्चे अघवा बनकर आज गणेश मनाने में खुश है |
कुछ  दूरबुध्धि लोग भी इनका साथ देते है, क्या करें ये गुलामी की आदत से मजबूर है |
साहब जहाँ देखो गणेश के आड़ में बच्चे फ़िल्मी गीत चला रहे है, रात में फिल्मे चल रही है | न पढने का इनको बहाना मिला है |
और पालक भी छुट दिए है, समय आया तो यही बच्चे कहेंगे, मै भी शंकर देव जैसे बड़ा डॉक्टर बनूगा, काटे हुए सर को जोड़ दूंगा |
पिता जी आप देख नहीं रहे है मै बड़ा डॉक्टर को देख रहा हूँ |
अरे दूरबुध्धि लोगो क्यों कर रहे हो ऐसा |
बच्चों को बेवकूफ बनाना है क्या ?
आज बाबा साहेब आंबेडकर न होते तो क्या होता पता है |
आज उनके तुम गाय बैल चरा रहे होते, दूध दुते लेकिन ओ पीते,
जानवर मरने के बाद तुम्हे खाल निकालने के लिए देते |
और जब चप्पल बनाते तो वे पहनते, और उन्ही चप्पल से तुम्हे मार के ये बताते की तुम शुद्र हो गुलाम हो मेरे तुम, तुम सेवक हो मेरे, तुम्हे सोचने का अधिकार नहीं है |
तुम आज भी उनके कपड़े धो रहे हो, आज उनके लिए घर बना रहे हो लेकिन बन्ने के बाद उसे शुद्ध किया जाता है |
तुम उनकी सेवा कर रहे हो लेकिन ओ तुम्हे नीच मानते है तुम्हारे घर खाना भी नहीं खाते |
तुम्हे दूर से देखकर ही घृणा मानते है |
और फिर भी तुम कुछ नहीं कहते |
बड़े प्यार से रामायण करवाते हो, अरे तुम खुद तो गुलाब बने हुए हो अपने बच्चों को, बुलाये हुए रिश्तेदारों को, अपने औरतो बेटियों को क्यों गुलाम बना रहे हो |
ढोल पशु शुद्र और नारी |
ये है ताडन के अधिकारी ||
और आखिर में कहते हो मोक्ष मिलता है, तुम्हे इस जन्म की चिंता नहीं अगले जन्म की है |
और पूछने पर क्या कहते हो आदत है, जबरदस्ती ब्राम्हण दान और पूजा करने के लिए तो नहीं कह रहा है |
जितना हो सके उतना कर रहे है, क्यों नहीं करोगे तुम्हारा धन आज जायदा हो गया है, लुटाते रहो |
अच्छा बताओ मंदिर में पुजारी क्यों होता है |
देवी देवताओ की सेवा के लिए,
ठीक है मान लिया तो बताओ, पुजारी दान किसके लिए लेता है मंदिर के लिए या अपने लिए, आज तक बताओ किसी मंदिर का धन किसी गरीब के लिए काम आया हो तो |
क्या देवी देवता भिखारी है या गरीब है जो उसे धन चढाते है |
अगर ये पुजारी पैसे लेते है तो वास्तव में स्वार्थी हुए |
स्वार्थी का कैसा पूजा, कैसा सेवा, ये तो ढोंग है |
जो सुने यह ज्ञान बार-बार
ओकर होय दुर्गुण नाशा,
दुःख ओकर सब मिटक जाए
ज्ञान बुध्धि पास आये
जो सुनाए यह ज्ञान प्रवचन
याद करें सब लोगन
यह ज्ञान के पाठ योगेन्द्र धिरहे सुनाए |
सब लोगन के दुःख ल दूर भगाए ||

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Sep 13, 2018

New Boy And Girl Name Starting Of K क से लड़को लडकियों के हजारो नए नाम
New Boy And Girl Name Starting Of K क से लड़को लडकियों के हजारो नए नाम
कंचन रतन ,
कंचन सिन्धु ,
कंवल ,
कंवल जीत ,
कथन ,
कथन कान्त ,
कथन कुमार ,
कथन कुमार ,
कथन घोष ,
कथन प्रिय ,
कथन प्रिय ,
कथन रंजन ,
कथन वर्धन ,
कथन स्वरुप ,
कथा ,
कथानक ,
कनक ,
कनक पुत्र ,
कनिष्क ,
कनिष्क ,
कनिष्ट पाल ,
कनिष्ट स्वरुप ,
कन्तिवंत ,
कपिल ,
कपिल कान्त ,
कपिलकुमार ,
कबीर कुमार ,
कबीर स्वरुप ,
कमल ,
कमल कान्त ,
कमल किशोर ,
कमल कीर्ति ,
कमल गुप्त ,
कमल देव ,
कमल नयन ,
कमल बिंदु ,
कमल बिन्दु ,
कमल भूषण ,
कमल मित्र ,
कमल राज ,
कमल लोचन ,
कमल सागर ,
कमलधर ,
कमलपति ,
कमलयाचन ,
कमलशील ,
कमला नन्द ,
कमलाकार ,
कमलाकार ,
कमलानन ,
कमलानन ,
कमलेन्दु ,
कमलेन्दु ,
करुण कान्त ,
करुण पक्षे ,
करुण प्रज्ञा ,
करुण प्रिय ,
करुण मित्र ,
करुणपाल ,
करुणा गौरव ,
करुणा दत्त ,
करुणा धन ,
करुणा निवास ,
करुणा पति ,
करुणा पुंज ,
करुणा पुत्र ,
करुणा पुरुष ,
करुणा प्रदीप ,
करुणा प्रिय ,
करुणा बोधि ,
करुणा मित्र ,
करुणा रतन ,
करुणा रत्न ,
करुणा रत्ने ,
करुणा वासी ,
करुणा सागर ,
करुणा सिंधे ,
करुणा सिन्धु ,
करुणाकर ,
करुणाधन ,
करुणानन ,
करुणानिधि ,
करुणापुष्प ,
करुणामति ,
करुणारतन ,
करुणालोक ,
करुणावत ,
करुणावन्त ,
करुणावन्त ,
करुणाशील ,
करुणोदय ,
करुनामित ,
करुनार्थी ,
कर्ण प्रिय ,
कर्णपाल ,
कर्तव्य घोष ,
कर्तव्यपाल ,
कर्म वर्धन ,
कर्म वीर ,
कर्मवंत ,
कर्मवान ,
कर्मवीर ,
कर्मशील ,
कर्मशील ,
कर्मशील ,
कर्मानु ,
कर्यानी ,
कलपेंदु ,
कला रतन ,
कला वर्धन ,
कलावंत ,
कलावंत ,
कलावान ,
कलिंग पाल ,
कलिंग सेन ,
कलोल ,
कल्पघोश ,
कल्याण कीर्ति ,
कल्याण गौरव ,
कल्याण मित्र ,
कल्याण मित्र ,
कल्याण वर्धन ,
कल्याणनिष्ट ,
कल्याणमय ,
कवंल बिंदु ,
कश्यप बोधि ,
कात्यायन ,
कात्यायन कुमार ,
कानन ,
कानन कुमार ,
कानन कुमार ,
कानन घोष ,
कानवर ,
कान्त लोचन ,
कान्ति गुप्त ,
कान्ति चन्द्र ,
कान्ति पुत्र ,
कान्ति बोधि ,
कान्ति वीर ,
कान्तिप्रिय ,
कान्तिमान ,
कान्तिरतन ,
कान्तिरतन ,
कान्तिवर्धन ,
कान्तिवान ,
कारुणिक ,
कारुणिक ,
काश्यप ,
काश्यप कुमार ,
किरण दीप ,
किरण मित ,
किरणदीप ,
किशोर ,
किशोर कान्त ,
कीर्ति ,
कीर्ति ,
कीर्ति आनंद ,
कीर्ति आनन ,
कीर्ति कर ,
कीर्ति कान्त ,
कीर्ति कार ,
कीर्ति कुमार ,
कीर्ति गुप्त ,
कीर्ति चन्द्र ,
कीर्ति ध्वज ,
कीर्ति पुष्प ,
कीर्ति प्रकाश ,
कीर्ति प्रताप ,
कीर्ति प्रिय ,
कीर्ति बर्मन ,
कीर्ति भान ,
कीर्ति मान ,
कीर्ति रंजन ,
कीर्ति रंजन ,
कीर्ति रतन ,
कीर्ति वन्त ,
कीर्ति वर्धन ,
कीर्ति वल्लभ ,
कीर्ति वास ,
कीर्ति वास ,
कीर्ति विजय ,
कीर्ति सार ,
कीर्ति स्वरुप ,
कीर्तिकान्त ,
कीर्तिघोष ,
कीर्तिघोष ,
कीर्तिजय ,
कीर्तिपाल ,
कीर्तिप्रकाश ,
कीर्तिप्रभ ,
कीर्तिमान ,
कीर्तिरतन ,
कुंदन ,
कुंदन ,
कुंदन स्वरुप ,
कुज्जरपाल ,
कुज्जरप्रिय ,
कुणाल ,
कुणाल सेन ,
कुमार अभिषेक ,
कुमार गुप्त ,
कुमार गुप्त ,
कुमार गौरव ,
कुमार घोष ,
कुमार जीव ,
कुमार नाग ,
कुमार बुद्ध ,
कुमार बोधि ,
कुमार मित्र ,
कुमार मुद्रा ,
कुमार मुन्द्रा ,
कुमार यश ,
कुमार रतन ,
कुमार विशेष ,
कुमार शील ,
कुमार संघ ,
कुमार सम्भव ,
कुमारनिधि ,
कुमारभ्रद्र ,
कुमारिल ,
कुमारिल घोष ,
कुमुद ,
कुमुन्द कान्त ,
कुल कान्त ,
कुल दीप ,
कुल दीप ,
कुल भूषण ,
कुल भूषण ,
कुल रंजन ,
कुल रक्षक ,
कुल रतन ,
कुल रत्न ,
कुल रत्ने ,
कुल वन्त ,
कुल वन्त ,
कुल वर्धन ,
कुलकान्त ,
कुलदर्शी ,
कुलदीप ,
कुलबोधी ,
कुलबोधी ,
कुलवंत ,
कुलवन्त ,
कुलवर्धन ,
कुलेंदु ,
कुवरगुप्त ,
कुशल ,
कुशल रतन ,
कुशल वर्धन ,
कुशल वर्धन ,
कुशाग्र बुध्धि ,
कुशाग्रघोष ,
कुषाण ,
कृतमणि ,
कृतवर्धन ,
कृतियायन ,
कृपा ,
कृपा पात्र ,
कृपा पुत्र ,
कृपा मित्र ,
कृपा सिन्धु ,
कृपानाद ,
कृपाल ,
कृपाल ,
कृपाल गुप्त ,
कृपाल सिंह ,
कृपाल सेन ,
कृपालु ,
केतन पुत्र ,
केतन प्रकाश ,
केतन बोधि ,
केतन स्वरुप ,
केवल आनंद ,
केवल कान्त ,
केवल कुमार ,
केवल घोष ,
केवल प्रकाश ,
केवल प्रताप ,
केवल स्वरुप ,
कोकिल ,
कोपल ,
कोमल ,
कोयली ,
कौतुक ,
कौशल ,
कौशल ,
कौशल कान्त ,
कौशल कुमार ,
कौशल प्रिय ,
कौशल मित्र ,
कौशल रतन ,
कौशल वंश ,
कौशल वर्धन ,
कौशल सागर ,
कौशलेंदु ,
कौशल्यायन ,
क्रान्ति ,
क्रिताची ,
क्रुरांत ,

Aug 23, 2018

रक्षाबंधन या राखी क्यों मनाया जाता है Raksha Bandhan Kyo Manaya Jata Hai,
Hello Dosto Kya aap Janna Chahte hai, Raksha Bandhan Kyo Manaya Jata hai,
Aur iski suruaat kaise aur kab, Kaise hui, Kisne Manaya,
To Yah Jankari khas aapke liye hai, to suru karte hai,
rakshabandhan kyo manaya jata hai.jpg

रक्षाबंधन या राखी क्या है ? RakshaBandhan Ya Rakhi Kya Hai ?

Yah ek parv (पर्व) hai, Bharat desh aur vishv me anek dharm hai,
aur ek Prachin Dharm Bharat me Hindu Dharm hai, satya to yah hai koi kisi dharm ka nahi hota yah siddhant ki bat hai, jaise Vaighayanik

Raksha Bandhan ki suruaat kaise hui,

Mana Jata hai, ki Jab Shree Krishna Ghumne gaye the,
to krishna ka hanth kantha (काटा) numa jhadi (झाड़ी) se cut gaya aur, aur Khun (खून) nikalne laga, to wahi Pass me dropadi (द्रोपदी) thi, dropadi ne Krishna ke hanth se khun bahta dekh apni sadi ke kinare ko fad kar Krishna ke hanth me bandha, aur krishna ka Jan Bachaya,Tab se Raksha Bandhan Manaya Jata hai,

           wahi Dropadi aage chalkar 5 Pandao ki Patni hui,
Jab Pandao ne Dropadi ko juye me har gaye, aur dushashan दुश्शाशन ne dropadi ki sadi utarkar bhari sabha me nangi karna chaha to kishi ne Dropadi ko nahi bachaya aur, antim me jab Dropadi ne Krishna ko Man me yaad kiya to Krishna ne, Dropadi ki Laj rakhi,
 o aise,
Dushshashan Jitna sadi ko khichta sadi utna lamba hota jata tha,
aur aakhir me Dushshashan thak gaya, aur is tarah se krishna ne apni bahan ki raksha ki,
wastav me Dropadi Krishna ki Asal bahan Nahi thi,

Kaise Manaya Jata hai, Rakshabandhan,


Bahan Apne Bhai ke Daine Hanth me Rakhi Ko Bandhti hai, aur ganth (गांठ) lagati hai,
bas ho gaya rakshabandhan,

Banki sab Mithai Khana, Tilak Lagana, Aarti Utarna ye sab dekhawati chij hai,

Aapne Raksha Bandhan Rakhi ki badhut sari Kahani Suni hogi, Banki sabhi Kalpnik hai,

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Aug 6, 2018

निजी स्कूल बनाम सहकारी स्कूल
private school vs goverment schools

निजी स्कूल बनाम सहकारी स्कूल

आज देश में निजीकरण का बोलबाला है, प्रत्येक विभाग एवं प्रत्येक क्षेत्र में निजीकरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है | सहकारी विभाग के कार्यो का संचालन भी ढेके पर ही हो रहा है, और ऐसा करके सरकार विभागीय नियोजन संचालन एवं अपने दायित्वों से मुक्ति का अनुभव कर रही है | परन्तु क्या निजीकरण की प्रक्रिया सही है क्या यह एक्शन नयायोचित है | इनमे किनको लाभ हो रहा है और हानी किनकी हो रही है ये जानना बहुत ही आवश्यक है | क्योकि देश में एक तरफ पूंजीपति वर्ग है जो आलिशान जिंदगी जी रहे है तमाम फेसिलिटी उनको प्राप्त हो रही है तो दूसरी तरफ निम्न और किसान वर्ग है, जिनकी हालत दिनों दिन बद से बदतर होती जा रही है | क्या यही राष्ट के भीतर समानता का मापदंड है ? क्या इसी के लिए लोकतंत्र का निर्माण हुआ है ? क्या इसी दिन को देखने के लिए जनता ने राजनेताओ को चुना था |
                   
                    स्पस्ट है की राजनैतिक हालत ठीक नहीं है | अब हम तुलनात्मक रूप से निजी स्कूल एवं सहकारी स्कूल की सुविधाओ एवं गुणवत्ता की बात करते है | सबसे पहले बात करते है सहकारी स्कूल के भवन और उसके भीतर के सुविधाओ की | सहकारी स्कूल में भौतिक सुविधाए पर्याप्त मात्रा में नहीं है | कही छत टपक रही है तो कही बच्चो के बैठने के लिए कुर्सी भी नहीं, कही दीवारों में दरार है, और कही-कही तो स्कूल इतने दुर्गम क्षेत्र में है, जहाँ तक पहचाना भी बड़े मसक्कत का काम है | आए दिन सांप और बिच्छु इन भवनों में घुस जाते है | कही बच्चो के पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है | समान खरीदने के लिए आस पास व्यवस्था नहीं है, भवनों में पंखे का अभाव है | पर्याप्त मात्रा में कमरे भी नहीं है | वही दूसरी ओर निजी स्कूल सारी सुविधाए पाई जाती है | उत्तम गुणवत्ता और सुविधायुक्त भवन, बिजली, पानी कुर्सी, टेबल प्ले ग्राउंड आदि अनेक प्रकार की सुविधाए इनमे पाई जाती है, क्योकि इनका संचालन निजी सत्ता के हाँथ में है |
                    अब बात करते है शिक्षक और शिक्षा के गुणवत्ता की गुणवत्ता के मामले में निजी स्कूल सबसे आगे है | हलाकि ये सवाल उठाया जाता है की सहकारी स्कूल के बच्चे जायदा होशियार होते है | हालाकि ये सवाल उठाया जाता है कि सहकारी स्कूल के बच्चे जयादा होशियार होते है परन्तु ये स्कूल और शिक्षको की महेरबानी नहीं है वो बच्चा वंशानुक्रम रूप से होशियार था | इसलिए अपवाद स्वरुप पढ़लिखकर बड़े मुकाम तक पहुच गया | आप बताइए आज तक आपने सहकारी स्कूल में 3D एनिमेसन से पढाई देखी है | मैंने देखी है – हाँ लेकिन निजी स्कुलो में | सहकारी स्कूल में कोशिका की संरचना को एक शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर चाक के माध्यम से समझा रहा है | जबकि निजी स्कूल में कोशिका की संरचना को बच्चे जीवित रूप में एनिमेशन द्वारा देख रहे है  और बेहतर तरीके से समझ रहा है, क्योकि उसके आंतरिक भागो की संरचना को बच्चा गहराई में जाकर समझ रहा है, उसके दिमाग में एक स्पस्ट छवि बन रही है, जो कि काल्पनिक नहीं है बल्कि वास्तविक है | ये बच्चा आगे चलकर डॉक्टर बनेगा तो उसके चिकित्सा पध्धति में निश्चित ही गुणवत्ता होगी जबकि सहकारी स्कूल के बच्चे में इस गुणवत्ता का अभाव होगा |

                निजी स्कूल में शिक्षक समय के पाबंद है, जबकि सहकारी स्कूल में शिक्षक मनमौजी अपवादों को छोड़कर | सहकारी स्कूलों में शिक्षको का मूल उद्धेश्य केवल सहकारी नौकरी करना है न की बच्चो को जिम्मेदारी पूर्ण पढ़ा कर उनके उज्ज्व्वल भविष्य का निर्माण करना | जबकि निजी स्कूलों के साख को बचाने के लिए भरसक प्रयास किया जाता है, स्कूल का रेपोटेशन डाउन न हो |
            
               इन असमानताओ के मूल में झांके तो इसके लिए जिम्मेदार सरकार की अव्यवस्थित नीतिया ही होगी | और नीतियों का निर्धारण बजट को धयान में रखकर किया जाना है |

                 कुल मिलाकर देखे तो यही स्पस्ट हो रहा है की सरकार लोगो को एक काल्पनिक दुनियां ही प्रदान कर रही है , जिसका वास्तविक जीवन से न्यूनतम सम्बन्ध है | बच्चे पढने तो जा रहे है पढाई में दम नहीं, पढ़ के काबिल हो रहे है, vacancy नहीं, | शराब बिक्री के लिए सरकार के पास पर्याप्त बजट है जबकि शिक्षा ( जो देश रूपी भवन की नीव है ) उसके लिए अनेक बहाने एवं अनेक समस्याए है | इस सभी अव्यवस्थाओ के मूल में जतिवादी मानसिकता जायदा काम करती है  | क्योकि भारत का इतिहास जतिवादी मानसिकता से ही शुरू होता है |

            हड़प्पा सभ्यता एवं उससे भी पूर्व तथा आज तक इतिस्कारो ने स्वार्थपरख जानकारी ही प्रस्तुत की है, जिसके मूल में स्वच्छता का अभाव है कुंठित मानसिकता की ही प्रधानता है और इसी कारण ही राष्ट की सारी अव्यवस्थाए है |
                    आपको सतनाम
  लेखक- जीवेन्द्र भारती,    संपादक- योगेन्द्र कुमार धिरहे

Jul 27, 2018

Website kya hai. Blogger.com kya hai ? Blogspot.com Kya hai ?
नमस्कार दोस्तों जय राधव माधव
Bahut din ho gaye mai soch raha tha aapko website ke bare me kuchh bataya jaye,
Aur internet ka class bhi suru kiya jaye.

Website introduction

website introduction

Internet me pahli bar kuchh bhi khola jata hai, to waebsite hi hota hai, agar aap kuchh pad rahe hai, wah bhi website ke andar me pad rahe hai.
Jaise abhi aap http://ww.inhindiindia.in ke andar me hai.
koi padha ho ya na padha ho jane anjane me anke website ke naam janta hota hai,
jaise google, facebook, twitter, naukri , internet, computer,Gmail, Email,  agar anhe internet ki bhasha me convert kare to yah website hi hai.
Agar technology ki bhasha me baat kare to, website internet ka wah sansthan hota hai, jis par koi bhi user Road me bike chalakar sair kar sakta hai,
Website wah pata hota hai, jis par kishi jankari ko rakh dene par wah puri duniya me  internet ke madhyam se internet me save ho jata hai.
Apne suna hoga aadhar card ko internet se nikala ja sakta hai,
Kyoki aadhar card ko internet me save kiya gaya hai |
Jis prakar se ghar par saman ko rakha jata hai, usi tarah se internet par apni jankari ko internet par save kiya jata hai,
Ghar par rakha saman ak jagah par hota hai, au rise yahi se dekh sakte hai, aur nikal sakte hai |
Lekin internet me kisi jankari ko rakh dene se use kahi se bhi nikal sakte hai,
Kahi se bhi dekh sakte hai |
website anek prakar ke hote hai,
Jaise free website
Paid website jise Hosting ke naam se jana jata hai,
Free me website banane par paise nahi dene padte,
Aur wahi jab Paid website banate hai, to uske liye Hosting lene hota hai,
Jiske liye paise dene hote hai,
Yah jankari bahut andar ki hai, isliye samjhna muskil ho sakta hai.

Blogger.com Kya ? 


Introduction:-

Upar aapne jana website ko free me bhi bana sakte hai,
Blogger.com bhi Google ki free me website banane ki website hai, jis par koi
Bhi apna account banakar free me apni website bana sakta hai,
www.blogger.com apni website create karne ki,
aur login karne ka pata hota hai.
Free me website banane par google domain ke sath apni sub domain ka naam jod deta hai,
Free me website banana ke baad us domain ko kisi aur domain ke sath jod sakte aur apne website ke subdomain ko hata sakte hai,

Read More:- 

Domain kya hai ?Subdomain Kya hai ?

Agar aap apni website free me banana chahte hai, ya website banana sikhna chahte hai to aap www.blogger.com par apni website free me bana sakte hai.

Read More:-


Blogspot.com Kya hai ?

Aapne upar jana google free me website banane ko deta hai ,
Blogger par apni website free me bana sakte hai.
Website banane ke liye blogger.com par login karna hota hai,
Jab koi apni website ka naam rakhta hai to uske sath blogspot.com
Automatic jud jata hai, kyoki yah google company ki hai isliye,
Kisi website par blogspot.com laga ho to isse yah pata chal jata hai, yah blogger ki free website hai,
Jaise maine ak website banaya www.inhindiindia.blogspot.com
To yaha par blogspot.com juda hai,
www   Kya hai ?
www  ka pura naam wold wide web    hai.
isse yah pata chalta hai, yah website ka pata hai,
aap dekh sakte hai is website ke sath www.inhindiindia.blogspot.com
ka naam juda hai,
blogspot.com website ka domain name hai,
jo blogger ka subdomain hai ?
Aur website ka naam   inhindiindia hai

Read More:- 


 Aapne aaj jana website ak pata hota hai, jis par jankari ko rakha jata hai,
Jab yah jankari ko Rakha jata hai, to is ak naam website name hota hai,
Aapne jana website free me banai ja sakti hai, www.blogger.com par,
Website ke name ke sath www  laga hota hai,
www.blogger.com free me website banane ka pata hai,
blogspot.com  blogger ki domain name hai,
aapne jana blogger par free me website banana par, blogger ki subdomain atomatic website ke name ke sath jud jata hai,

Read More:-



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How to Domain By Step By Stpe in hindi How to register new domain in hindi

How to Register Domain Name Domain Name Kaise Kharide
 
Domain Kaise kharide,
Jankari vistar se Bataya gaya hai, isliye thodi lambi hai, Aap se nivedan hai ki aap bade pyar se padhe,
Domain kharidna bahut hi aasand hai, aaj aapko mai domain kaise kharidte hain yah step by step Puri Tarah Se, acche tarike se bata raha hoon, aap se nivedan hai ki, aap achche se padh,
Domain Anek Prakar ke Hote Hai, Jaise
.com
.in
.co.in   
.net
.org
.gov.in
.us

is Tara se Anek Prakar ke domain Hote Hain,
aur har domain ka Arth alag-alag Hota Hai,
agar aap business ke liye domain karna chahte hain to .com ya .net .org Best domain,
agar aap Janna Chahte Hain ki website ka naam kya Rakhe toh Aapko Hamari dusri link yah hai,

http://www.inhindiindia.in/2017/08/website-ka-name-kya-rakhewhats-name-of.html

Domain kharidne ke liye chuki Anek website hai lekin aaj main aapko World ki top 1 website Batane jaa raha hoon,

Jisme aap sabse saste Domain kharid sakte hain
www.godaddy.com
Domain kharidne ka process Kuch Is Tarah Se Hai,

Sabse Pehle Aapko 1 user account banana Hota Hai Jis Ke Naam Se domain ko register karna Hota Hai,
TipYa aap pahle Name ko bhi pasand kar sakte hai, 

ek baat yaad rakhna jiske Naam Se domain kharida Jayenge wahi domain ka Malik hoga,
Ab  aap samajh Gaye Honge domain ko  Kiske Naam Se registered karna hai,
 User account banate Samay Address,  mobile number,  email ID,  pin code,  Naam  aur Jankari poori Tarah Se Sahi Sahi bhare,
User account banane ke liye niche link click kare,
https://sso.godaddy.com/account/create?realm=idp&path=%2F&app=myaya


ya Sine in me click karna hai,
ya Sine in me click karna hai,

Aur niche image Create my account me click karna hai,

godaddy create my account


Yahan Par user account banane ke liye Facebook ka use karne ke liye Kaha Jayega
Lekin aap ko bilkul bhi Facebook se login Karke nahi kharidna hai,
Kyunki Facebook ID Kabhi block ho sakti hai aur kabhi bhi Delete kiya Ja sakta hai,

Tip:- Form is tarah se bhare,
Aur Email @ dalna hai,
User name apne pasand anusar se dalna hai,
Uske bad Password dalna hai,
Password is tarah se banaye
Step 1. small leter, abcd
Step 2.Capital Letar, EFGH
Step 3. Symbol Chinh Jaise @#$&* is tarah se,
Step 4. Number Jaise 12354656658
Adik se adhik Password 10 ka banaye Aur hamesha Yad rakhe,
Jab tak password ko is tarike se nahi dalenge tab tak Account nahi bana payenge,
Demo abcABD@123

Godaddy account

Uske bad 4 anko Ka User Pin number dalna hai, jise aap yad rakhe,
Aur i an not robot capcha ko pura karna hai,

Create account me click kare,

Tip:- uske bad email me login karke email Verify kar lena hai

Uske bad Email id likhe,

Ab aap new Domin Name ko dekhna hai, jis name se rakhna hai,


Yah bhi Padle Pahle:- Website ka name kya rakhe,
http://www.inhindiindia.in/2017/08/website-ka-name-kya-rakhewhats-name-of.html
Domain name ko pasand karke Add to card me click karna hai,

new domain by

Countinue to card me Click karna hai,

continue to card

Sabhi me No Yhank Ko select karna hai,

no thanks select now

Countinue With this option Me Click Karna hai,

Countinue With this option

Year Ko 1 Year me select karna hai, 

select one year

Tip Aur Register Date se pahre renewal karna hai , Exparidate se pahle,

Proceed to Checkout Me click karna hai,

proccess to chek out

Pura Address Ko Bharna Hai,

Jis Madhyam se Payment karna chahte hai, use select kare, aur countinue me click karen,

payment option

Place Your Order me click kare, aur Payment kar de, Aapka domain Register  Ho Jayega,

Place Your Order

Ab banki hai, Domain ko Website Se Jodne ki Aur Hosting Kharidne ki,
Ya free hosting website me bhi website bana sakte hai,

Jul 26, 2018

बाबा साहेब का मिशन और वर्तमान में सामाजिक जागरूकता
बाबा साहेब का मिशन और वर्तमान में सामाजिक जागरूकता

बाबा साहेब का मिशन और वर्तमान में सामाजिक जागरूकता

दोस्तों ये सही है कि बाबा साहेब का मिशन आगे बढ़ रहा है परन्तु वास्तव में आपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहा है | अभी भी समाज का पढ़ा लिखा व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को दरकिनार कर बचने की कोशिश करता है, और कई पढ़े लिखे लोग तो ऐसी भी है, जो बाबा साहब के जीवन संघर्ष के बारे में बखुबी जानते है, परन्तु उसे प्रसारित करने का नाम भी नहीं करते | दो शब्द भी बाबा साहेब के बारे में बोलकर लोगो का जागृत भी नहीं करते | जागृत करना तो दूर की बात है, वे स्वंम अभी भी रुढ़िवादी एवं अन्धविश्वास में फसे हुए है और अपनी संकिर्ण मानसिकता का परिचय दे रहे है | हमारे समाज में ऐसे अनेक लोग है, जो बाबा साहेब की जयंतिया मनाते है, बड़े-बड़े मीटिंग अटेंड करते है, परन्तु क्रिश्चन धर्म के कार्यक्रम में पहुचने से भी बाज नहीं आते, और मंदिर जाने में संकोच भी करते है | मै समझता हूँ, समाज का 40% लोग क्रिश्च्नो के झांसे में आ गया है और दुर्भाग्य की बात यह है भाई जय भीम बोलना है तो उसकी जगह जय युशु बोलने लगे है |    

            हमें येशु या अन्य धर्मो से कोइऊ एतराज नहीं है हम तो यही चाहते है सब धर्मो के सार को निचोड़ कर पी जाए उनके द्वारा कही गई अच्छी अच्छी बातो का अनुशरण करें उन्हें आत्मसात कर अपने जीवन को सुखमय बनाए| परन्तु सार तत्व को छोड़ अंधविश्वास को पकड़ने में लोग जायदा माहिर होते जा रहे है | क्योकि उनकी तार्किकता और विश्लेषण क्षमता सिमित है | जबकि बाबा साहब का सम्पूर्ण जीवन दर्शन हमें यही सिखाता है की व्यक्ति को कर्म करने से ही फल की प्राप्ति है जबकि अन्योन्य धर्म चमत्कारी शक्ति को पोषित करने में तुले हुए है |

        इस देश के विदेश के भी बड़े-बड़े विद्वानों और वैज्ञानिको ने भी यह कहाँ है की इस दुनिया में कोई भी चमत्कारी शक्ति नहीं है क्योकि सब कुछ भौतिक क्रियाओ से ही संचालित है |

        अब बात यह आती है की कैसे इन पिछड़े मानसिकता के लोगो को सही राह पर लाया जाए इसके लिए सबसे आवश्यक यह है की नेतृत्व की कमी दिखाई दे रही है | अलग-अलग क्षेत्रो में प्रख्यात आदर्श चेहरे हो जिनसे समाज के अन्य लोग भी प्रभावित हो सके | मै निश्चित एवं योजनाबध्द तरीके से कार्यो का क्रियान्वन करें प्राप्त परिणामो का पुनः निरिक्षण भी करते है |
     - जीवेन्द्र भारती