Dec 18, 2018

जीता कांग्रेस, हारी जनता, भाजपा कार्यकर्ताओं की नज़र में : भाजपा का तीन राज्यों में हार का विश्लेषण
bhajpa ke har ka vishleshan

bhajpa ke har ka vishleshan

कटघरे में हमेशा जनता ही क्यों ? जनता दोषी है या ढाल है ? या सिर्फ वोट ? क्या उसे ठगना बेहद आसान है? मेरा एक छोटा सा सवाल है! किसी के लिए व्यक्तिगत नहीं है!

 (उन लोगों के लिये है, जो तीन राज्यों के परिणाम पर जनता को नादान, भ्रमित या दोषी मानती है) ;
चलिए मान लिया कि किसान केवल वादों पे वोट कर दिया। वादों के लालच में बिछ गई। लेकिन ये शहरों में जो केबिनेट मंत्रियों की करारी हार हुई है, यहां के शहरी वोटर अपने घर में, छत में कौन सी खेती करते हैं, उनका कौन सा कर्जा माफ होता होगा? उन्हें कौन सा बोनस मिलेगा?

प्रदेश के जो बड़े शिक्षित सभ्य शहर जिसमें भिलाई, रायपुर, बिलासपुर शहर हैं वहां के वोटर किस फसल की खेती करते हैं, जो लालच में आकर कांग्रेस को वोट किया रमन सरकार को चौथी बार मौका नहीं दिया।

कुछ कार्यकर्ता, जनता को लगातार गरिया रहे हैं, उन्हें लगता है जो bjp के साथ वही हिंदुत्व, राष्ट्रवाद के साथ, ये IT सेल वाले फैलाते हैं।

लेकिन इस गन्दी राजनीति में जनता का क्या कसूर है? भाई उसने वोट नहीं दिया तो कैसे उसने अपने पैर में कुल्हाड़ी मार लिया क्या आपने बिना मूल्याकंन के कोर्ट, वकील, अदालत बन उसे फैसला सुना दिया उसे सीधा जन्ताजनार्दन से दोषी साबित कर दिया! कैसे और क्यों?

क्या उसकी अपनी मर्जी या आजादी नहीं है? उसे हक नहीं है अपनी पसंद के या विकल्प को एक मौका देना या लगातार केवल एक ही के शासन को स्वीकार करते रहने पर वे प्रतिबद्ध हैं, वचनबद्ध हैं?

कुछ का मानना है जनता बिकाऊ है, पैसे लेकर किसी को भी वोट दे देगी? लेकिन भाई जनता मजबूर है, मेहनत करती है, टेक्स जमा करती है जिससे आपकी सरकार चल सके, आपको देश की और जनता के सेवक के रूप में चुना गया है ना कि केवल राज करने वाले एकतरफा शासन चलाने वाले के रूप में!

डॉ साहब के कामों को कोई झुठला नहीं रहा है, न झुठला सकता है। परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। प्रक्रिया के अनुरूप विकास, विकल्प और नई अपेक्षाएं लोगों की बलवती होती जाती है। किसी के मन को बांधा नहीं जा सकता।
तारीफों के ऊंची इमारतों के बीच अपने लोगों व भीतर की जो गलतियां हैं, कमियां हैं, उन्हें भी स्वीकार करना चाहिए।

हमारे जैसी जनता व वोटर को भोला भाला, लालच, मूर्ख, बिकाऊ समझना बेहद आसान है। लेकिन नेता मंत्री अफसर कौन हैं, वे भी इसी बीच से निकले हैं!

मान लिया डॉ साहब ने 1 रु 2रु किलो का चावल दिया लेकिन प्रदेश में कितने ऐसे नए लोग काबिल हुए हैं जो अपनी मेहनत से बासमती का चावल खरीद खा सकें, सब मुफ्त भरोषा बन गए, बिना काम, फूल आराम।
नो कॉलेज फुल नॉलेज जैसी स्थिति  है। शिक्षा और रोजगार का स्तर बच्चे-बच्चे को पता है। घर-घर, गांव-गाँव की कहानी है।

अगर लोग लायक दार बनेंगे तो काम करके, अपनी पसंद का भोजन खरीद सकते हैं। फ्री की लत बच्चे को, दामाद को, वोटर को और देश को कामचोर बना देती है।

अच्छी शिक्षा और रोजगार दीजिए बच्चे होशियार होंगे, तो किसी चुनावी पार्टी के लालच और छलावे में नहीं आएंगे।

आपलोगों से विनम्र गुजारिश है कि संगठन के भीतर मूल्यांकन करिवाईये, ताकि असल कमियों को चिन्हांकित कर भविष्य के लिए उसे दूर किया जा सके।

क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी ने आज से 15 वर्ष पूर्व एक टीवी इंटरव्यू में कहा था, कि विपक्ष को आंकने में भूल, अन्य संगठनों से विभेद, और अतिउत्साहीपन हमारी हार का मुख्य कारण बना उन्होंने कभी भी जनता पर दोषारोपण या उन्हें कटघरे में या बहानेबाजी के रुप में ढाल की तरह इस्तेमाल नहीं किया।

जनता की विमुखता और घोषणा पत्र का छलावे वाला आसान ठीकरा, बेहद आसान है जनता के सिर पर फोड़ना। पर जनता जानती है, नेता के वायदे हवा के झोंके हैं। कहाँ फुर्र हो जाए और कब जुमलों का शक्ल इख्तियार कर ले ये तो किसी को नहीं पता। हवा हवाई वायदों से अब हम ऊब चुके हैं।

बहुतों ने भांति भांति की बात कर ली है, निवेदन है हमारे घर-घर की बात भी सुनी जाए, जिस तरह एक एक वोट लिया जाता है, ठीक उसी तरह, एक-एक वोटर के मन की बात भी सुनी जाए। उसके मूल्य को समझा जाए, इससे देश प्रदेश का भला होगा।

आप लोगों के कार्य और प्रयास को ससम्मान आभार!
दूरदर्शिता के साथ प्रयास करिए, जनता का दिल और विश्वास पुनः जीतिए।

सम्मानीय अटल जी के शब्दों में....
"सरकार आएंगी, सरकार जाएंगी! पर यह देश नहीं झुकना चाहिए।" 

और इस गणतंत्र जनता से यह देश है वरना खाली मकान, खाली दुकान, खाली जमीन का टुकड़ा है।

"हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ, 
गीत नए गाता हूँ।"

कबीर जी को याद करते हुए आपलोगों के निर्मल आत्म-मन्थन शुभकामनाओं के सहित...
"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, 
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।"

सादर ससम्मान प्रदेश के जनप्रतिनिधियों का आभार 💐

आपका परम् हितैषी।
Amit K. C. (वोटर)
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छत्तीसगढ़
राजनीति के हारे हुए बाजीगर: पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी बनाम पत्रकार आशुतोष
कलेक्टर ओपी चौधरी का हाल भी कुछ, आप पार्टी के नेता व पूर्व पत्रकार आशुतोष जैसा रहा?
asutosh image
पत्रकार आशुतोष
पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी

पूर्व #आप नेता 'आशुतोष' पत्रकार दिल्ली, के मर्म को समझिए एक अलग अंदाज़ में... हमारे वरिष्ठ पत्रकार मित्र नदीम जी की कलम से... उनके फेसबुक वाल से साभार........
पोस्ट 95 (पत्रकारिता और नेतागीरी का फर्क) : फेसबुक पर एक ट्रेंड देखिए. एक पत्रकार जब नेता बना, तो जनता से कट गया. अमूमन उसकी पोस्ट नहीं दिखती. कभी दिखती भी तो वह मन की बात लिखकर गायब हो जाता. लोग उस पर प्रतिक्रिया देते, पर वह घमंड में चुप रहता. यानी नेता वाले गुमान में. नेता मतलब एलीट. जनता का माई-बाप. कुछ बरस उसने नेतागीरी में काटे कि कहीं कोई पद या मलाई मिल जाए. पर नहीं मिली. उसका स्वामी धोखेबाज निकला. पत्रकार को टोपी तो पहना दी पर ताज नहीं पहनाया. पत्रकार भौंचक. अपनी जाति भी बता दी. फिर भी स्वामी का दिल नहीं पसीजा. हारकर नेताजी घर लौट आए. अपनी पुरानी बिरादरी के पास. पत्रकारों के पास.

पर यहीं ट्रेंड है. जैसे ही नेताजी वापस पत्रकार बनने के मोड में आए, वह फेसबुक पर सक्रिय हो गए. कुछ पुराने पत्रकारों को लेकर भ्रमण भी कर लिया कि तस्दीक हो जाए, राजनीति छोड़ दी है. घूमा-घुमाई की फोटुक और वीडियो फेसबुक पर डालने लगे या डलवाने लगे. कभी नहाने की फोटो तो कभी दिल का हाल. सब कुछ जनता को बताने-दिखाने लगे. कि मैं ऐसा होता तो कैसा होता और ये मेरा बचपन और ये मेरी जिदंगी और भी पता नहीं क्या-क्या !!!

बॉटम लाइन ये है कि नेताजी ने जैसे ही नेतागीरी छोड़ी, पत्रकार का लबादा दोबारा ओढ़ा और एलीट सर्कल से बाहर आए, आम आदमी के बीच सक्रिय हो गए. लोगों से संवाद करने लगे.

यही इस देश की विडम्बना है. जनता का प्रतिनिधि यानी नेता जनता से कटा हुआ है. वह खुद को शासक समझता है और जनता से संवाद सिर्फ हाथ जोड़कर वोट मांगने के लिए करता है. जबकि होना ये चाहिए था कि नेता को जनता से ज्यादा जुड़ा होना चाहिए था. पत्रकार से भी ज्यादा. हां, पत्रकार आज भी मिशन पर है और हर पल जनता से जुड़ा हुआ है. जनता से उसका संवाद कायम है, देश की नब्ज समझ रहा है.

आज की पत्रकारिता और नेतागीरी में यही फर्क है. नेता जनता से कटा होता है और पत्रकार जनता से जुड़ा होता है. पत्रकार से नेता बने और फिर पत्रकारिता की ओर लौटने का प्रयास करते व्यक्ति ने अपने कर्मों से इसे साबित किया.....

अगली कड़ी में फुर्सत के कुछ यादगार पल... #OP_Chaudhary जी

युवा आपसे प्रेरणा लेंगे, पहले आईएएस के लिए लेते थे. अब शायद रणजी ट्रॉफी के लिए प्रेरणा लेकर बच्चों का चयन हो जाए।
प्रेरणा कहीं से भी हो, लेकिन आती रहनी चाहिए, जैसे कृपा (निर्मल दरबार) आनी शुरु हो जाती थी लेकिन रुक गयी, उस तरह की नहीं!!
कोई बात नहीं! माटी की सेवा कई तरह से की जा सकती है, आप कुछ अलग अंदाज में करेंगे, शायद शुरु भी कर दिया होगा।
विरोधियों पर कहर बनकर टूटने का मौका इस बार जनता ने नहीं दिया शायद अगली बार जनता की मैहर आप पर हो.... हम जो सोचते हैं कई बार वो वापस मिल जाता है, प्यार से प्यार, कहर से कहर, अगर मैहर की सोंचे तो शायद मैहर... कोशिश होती रहनी चाहिए।

op chaudhri ias kharsia chhattisgarh

सहवाग भी बोलरों पर कहर बनकर टूटते थे, अब शायद आप भी बाल पर बल्लेबाजी से जमकर कहर बरपा सकते हैं।

कलेक्टरी के दौर में, प्रदेश में भ्रटाचार चरम पर रहा काश उस पर भी एक आध बार कहर बनकर टूटे रहते तो वो भी कोई कम चैलेंजिंग नहीं होता! मजा ही आ जाता!

कोई बात,नहीं वो बात रह गयी! लेकिन जितना भी आपने काम किया, लोग याद रखेंगे!
अब जीतकर के या हारकर के, जो भी हो, इस बाजीगरी ने आपको सपनों का बाजीगर तो बना ही दिया है!!

शायद! कल आपकी जीत हो, फिर से लोग आपको सलाम करें!
हमें तो कलेक्टर वाला, 'सर' ही पसन्द है
नेता वाले 'भैया', को धुरिहा से जोहार हे!!

शुभकामनाएं! आनंदित स्वस्थ प्रसन्न रहिए!!
लेख के इस भाग को 25 अगस्त 2018 को लिखा गया था, जब, पूर्व कलेक्टर व भाजपा विधायक ओम प्रकाश चौधरी के, कलेक्टरी से इस्तीफा देने के बाद लिखा गया था... इस लेख में आगे उनकी दशा और दिशा क्या हो सकती है इस पर विश्लेषण किया गया था... प्रस्तुत है कुछ अंश...

"अब आ ही रहे हैं तो आपका विजन किसी छोटे मोटे नेता के रूप में पूरा नहीं हो पाएगा। एजुकेशन हब का विजन आप सीधे मुख्यमंत्री के उच्च दायित्व को पाकर पूरा कर सकते हैं, इसपर ध्यान दे सकते हैं। इससे छोटी कुर्सी और क्या होगी। आपसे बेहतर मुख्यमंत्री भविष्य में और कौन होगा, शानदार कलेक्टरी, जाबाज प्रशासनिक अधिकारी। लेकिन अभी ये सब दूर के ढोल सुहावने जैसा है। इसे पूरा किया जा सकता है और मुझे आपकी योग्यता पर पूरा यकीन है, आपमें जबरदस्त ऊर्जा और जुनून है।
आपने बहुत बड़ा फैसला लिया है, आपके सारे चाहने वाले स्वागत भी कर रहे हैं और डर भी रहे हैं।
मेरे मन में भी एक प्रश्न है। बस आपके साथ राजनीतिक धोखा नहीं होना चाहिए जैसा आम आदमी पार्टी के आशुतोष के साथ हुआ। दूध भी गया, दुहना भी गया। हाई सैलेरी की पत्रकारिता पद सब गया और अब नेता भी नहीं रहे।
लेकिन आपमें दम है। जो काम एक कलेक्टर के रूप में नहीं कर पाए मेरी शुभकामनाएं हैं कि वो काम आप एक जनप्रतिनिधि के तौर पर करें। और जैसा आपने स्वयं का स्वर्णिम काया कल्प किया ठीक वैसे ही आप छत्तीसगढ़ का कायाकल्प करने में सफल हो, जबर जोहार।
आदरणीय छत्तीसगढ़ के रतन बेटा
श्री ओ पी चौधरी जी, कलेक्टर रायपुर"

आपका परम् हितैषी
AMIT K.C. छत्तीसगढ़िया
https://www.facebook.com/amitchauhanktu

#ओपीचौधरी #कलेक्टरओपीचौधरी #ओमप्रकाशचौधरी #OPChaudharyIAS #OPChaudharyChhattisgarh

भारत के हर गाँव के युवा से अपील की जा रही है, जरुर पढ़े...
bharat ke sabhi yuva se apil ki jati hai

कृपया जरुर पढ़े, यह लेख आपकी जीवन बदल सकती है | आज के समय में बहुत सारे लोग सभी मोबाइल जरुर चलाते है, और व्हाट्सएप्प फेसबुक, YouTube चलाना आम बात है, लोग रोज पड़ने जाते है, रोजाना न्यूज़ और विडियो फिल्म देखते है, बात करते है राजनीति की, मै आपसे पूछना चाहता हूँ | क्या आपको अपने प्रधानमंत्री का नाम पता है | जरुर पता होगा, क्या आपको किसी न्यूज़ ने बताया प्रधानमंत्री कैसे चुना जाता है |
नहीं बताया होगा | क्या आपको अपने मुख्यमंत्री का नाम पता है | जरुर पता होगा, क्या आपको किसी ने कही बताया मुख्यमंत्री कैसे चुना जाता है |
कभी नहीं बताएँगे | आप नौकरी के लिए फॉर्म तो भरते है, पर सरकार फॉर्म भरने के 5 साल से अधिक समय में बुलावा लेता है, और कभी-कभी परीक्षा में पास करने के बाद भी नियुक्ती रदद कर देती है | और आपको इसका हिसाब भी नहीं देती | क्या आपको अपने ग्राम के शहर के पार्षद का नाम पता है, सचिव, सरपंच, रोजगार सहायक का नाम पता है, अगर आप इन लोगो के नाम नहीं जानते तो, सब राजनीतिक ज्ञान बेकार है, आखिर कैसे ? तो ध्यान से सुनिये, जब प्रधानमंत्री,या मुख्यमंत्री, विधायक, कलेक्टर या कोई भी किसी भी योजना को लागु करता है, तो किसके पास आता है, और वह फॉर्म कौन भरता है, उस योजना को कौन पूर्ण करवाता है, लोगो से संपर्क कौन करता है निश्चित रूप से ग्राम पंचायत, और अगर आपको ग्राम सभा की सदस्यों की कार्यशैली की जानकारी नहीं, तो आपको राजनीति में मेरे तरफ से 100 में से 10 नंबर मिलेंगे | आज जिसे देखो, वह सरकार को, अधिकारियों को कोसने में लगा रहता है, क्या आप चाहते है ? कोई आपसे घूस न मांगे | कोई आपसे रिश्वत न मांगे | आपके अधिकार को कोई छीने नहीं | आपका मोहल्ले में पानी की समस्या हो, तो एक कम्पलेन में पानी की समस्या ठीक हो | गाँव में अगर कोई शिक्षक ठीक नहीं तो उसे ठीक करें | अगर कोई सरपंच, विधायक, मुख्यमंत्री सही तरीके से काम न कर रहा हो, तो उसका कान पकड़कर कैसे उठक- बैठक करवाए | अगर आप बेधड़क, आप नागरिक की तरह जीना चाहते है, तो हमारे साथ जुड़े, हमारा उद्देश्य ...... हम आपको एक ऐसे ज्ञान की ओर ले जायेंगे जहाँ, लोग बेधड़क होकर जी रहे है | भारत के हर गाँव से लोगों को जुड़ने का निवेदन कर रहे है | आपसे किसी प्रकार की जानकारी नहीं पूछी जायेगी | न आपको किसी प्रकार की कोई फॉर्म भरना है | योग्यता .... योग्यता कुछ नहीं है, लेकिन जितना शिक्षित और युवा जुड़ेंगे, उतना ही अच्छा है | यह कोई राजनीतिक या कोई संस्था नहीं है, यह आपको जागरूक करने का मंच है | जुड़ने के लिए व्हाट्स एप्प करें, - योगेन्द्र कुमार 09131880737 अपना नाम और गाँव का, तहसील का, जिला, राज्य, का नाम भेजना है | शेयर करों सभी युवा को, आपको जागरूक होना है |
संत शिरोमणि गुरुघासीदास बाबा जी पर निबंध और पूरी कहानी उपदेश, हर एक चीज पूरा विस्तार से
आज आपको विश्व के उस महान संत के बारे में बताने जा रहा हूँ, जिसने जीवन की वास्तविकता से बोध कराया और जीवन जीने का वास्तविक सत्य का मार्ग बताया |
संतो में सबसे श्रेष्ट संत शिरोमणि गुरुघासीदास बाबा का जन्म, पहाड़ो की गोद में, गिरौदपूरी नामक गाँव में, संत 18 दिसम्बर, 1756 को हुआ था |
इनके पिता का नाम, महंगू दास, और माता का नाम अमरौतिन बाई |
बाबा जी के पत्नी का नाम माता सफुरा, और बाबा जी के बच्चे |
गुरूघासीदास बाबा के पूर्वज नारनौल पंजाब, से हुए सोना खान इस तरह से कई पीढ़ी बाद इनके पूर्वज गिरौधपुरी में आये थे |
गुरुघासीदास बाबा जब कुछ 30 वर्ष के थे, तो उन्होंने अपने ज्ञान को जगाने के लिए ध्यान साधना में लीन हो गए, इस तरह से 6 माह तक धयान किये |
तब जाकर गुरुघासीदास बाबा को ज्ञान की प्राप्ति हुई |
गुरुघासीदास बाबा के बारे में बाबा साहेब आंबेडकर ने अंग्रेजो द्वारा लिखी पुस्तक के माध्यम से जाना |
गुरुघासीदास बाबा को छत्तीसगढ़ का विशेष संत का दर्जा और गुरुघासीदास सम्मान और अनेक सम्मान है |
तो जानते है क्या है वह ज्ञान |
sant shiromani gurughasidas baba ji ki puri kahani pura vistar se jane

गुरूघासीदास बाबा के उपदेश और सतनाम सन्देश 

हम वास्तव में जानते है, की यह जाति धर्म भेद भाव सभी इन मानव ने बनाई है,
इसी वास्तविकता को गुरुघासीदास बाबा ने सबको बताया की,
1. सभी मानव एक समान होते है |
कोई जाति से धर्म से बड़ा नहीं होता, यह सभी राज करने के लिए भेद बनाया है | किसी प्रकार की जाति धर्म न मानो, जो मानव मानव में भेद बताये उसे न मानो |
2. मांस भक्षण न करो |
गुरुघासीदास बाबा ने कहो की मांस भक्षण न करो, मानव मांस खाने के लिए नहीं है, शाकाहारी रहो |
3. मूर्ति पूजा मत करों |
गुरुघासीदास बाबा ने कहाँ की पत्थर को पूजने से कुछ नहीं मिलेगा, अगर किसी को पूजना है तो माता पिता गुरु को पूजो, जिनसे तुम्हे ज्ञान मिलता है, पत्थर न तो बोलेंगे, न खायेंगे, और न कुछ ज्ञान देंगे |
4. नशा खोरी शराब अन्य नशा का सेवन न करों |
नशा का सेवन करने से दिमाग ख़राब हो जाता है, मानसिक और शाररिक विकास नहीं होता, इसलिए नशाखोरी का कार्य न करों |
5. चोरी न करों |
गुरुघासीदास बाबा ने चोरी करने के लिए मना किया है, क्योकि दुसरे के चीजो लेने से वह अपना नहीं हो जाता, इसलिए मेहनत से, अपने दम पर प्राप्त करने के लिए कहा है |
6. जुआ न खेलो |
गुरुघासीदास बाबा ने जुआ खेलने के लिए मना किया है, क्योकि जुआ का धन अपने मेहनत का नहीं होता, और वह पैसा सुख भी नहीं देता |
7. दुसरे की स्त्री पर नजर न लगाओ |
गुरुघासीदास बाबा ने अपना चरित्र सुधारने का सन्देश जन जन को दिया है |
गुरुघासीदास बाबा ने और हजारो सन्देश दिए है मगर, ये 7 सन्देश बहुत महत्वपूर्ण है,
जीवों पर दया करो, इन्हें न खाओ |
इन जानवरों जन्तुओ पर अत्याचार न करो |

गुरुघासीदास बाबा के जन्म स्थान के विषय में,

सन 1756 में भारत देश में किसी प्रकार का कोई राज्य नहीं था, इसलिए हम नहीं कह सकते की गुरुघासीदास बाबा का जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ या, छत्तीसगढ़ के संत है |
वास्तव में कोई भी ज्ञान का क्षेत्र नहीं होता, संतो की कोई जाति या धर्म नहीं होता ओ सबके लिए एक समान होते है, इसलिए यह बिलकुल भी नहीं कहना चाहिए की ये इस समाज से आते है |

गुरुघासीदास बाबा का सतनाम आन्दोलन,

गुरुघासीदास बाबा ने रावटी चलाकर सतनाम का सन्देश जन जन को दिया है, और पुरे छेत्र में जा जाकर सत्य के सन्देश का प्रचार किया है |
उस समय की स्तिथि को आज के माहौल से थोड़े से समझ सकते है,
आज भी देखो दुसरे समाज का दुसरे समाज के साथ खुलकर शादी नहीं हो पा रही है, इसलिए आज भी छुआ छुत का माहौल बना हुआ है, आज लोग मंदिर में माथा पटक कर मर रहे है, पत्थर को जायदा माता पिता को गुरु को कम सम्मान दे रहे है |
अगर रास्ते कोई देवी का पत्थर और उसी उसके बगल ने अपनी जन्म देने वाली माता क्यों न हो, कुछ तो ऐसे है, जो पहले मूर्ति को उठा लेंगे मगर जिन्दा मानव को नहीं |
तो सोचो उस समय क्या रहा होगा |

लोग गुरूघासीदास बाबा को चमत्कारी भी मानते है |

उन लोगो को बता दूँ, की चमत्कार और वास्तविकता में बहुत अंतर होता है,
गुरूघासीदास बाबा ने अपनी उर्जा शक्ति योग साधना की शक्ति के बारे में बताया था |
आज के लोग गुरुघासीदास बाबा के ज्ञान का पालन कम करते है, और दाढ़ी बढ़ाने में जायदा रूचि ले लेते है |
मगर गुरुघासीदास बाबा ने ऐसा नहीं कहाँ था, गुरुघासीदास बाबा पूरी तरह से रुढ़िवादी परंपरा के खिलाफ थे |
गुरुघासीदास बाबा ने 4 चीजो के बारे में बताया है जो जीवन में सबसे बड़ी भूमिका निभाते है, और इसे बदलने के लिए सन्देश दिया है |
बोलने में – अपनी वाणी को सुधारो |
कर्म – अपनी कर्म सुधारने पर जोर दिया है |
खानपान – अपना खाना पिता स्वच्छ शाकाहारी खाने पर जोर दिया है |
रहन सहन – गुरुघासीदास बाबा ने रहने का घर और तौर तरीका को मस्त सुधारने पर जोर दिया है |

गुरुघासीदास बाबा का सतनाम जैतखाम

जैतखाम अर्थात सत्य के विजय का खम्भा,
आपने भी सुना होगा, सत्य की विजय हो |
सत्य कभी मिट नहीं सकता, सत्य छुपता नहीं |
ये उसी सत्य का फताखा है, जिसकी पूजा की जाती है |
कई लोग कह देते है की, गुरुघासीदास बाबा ने मूर्ति पूजा को मना किया है, तो दूसरी तरफ लोग, मूर्ति के रूप में या तस्वीर में बाबा जी पूजा की जाती है |
गुरूघासीबाबा को किस प्रकार से माना जाता है यह जाने |
जैतखाम की पूजा नहीं होती है, जैतखाम के ऊपर लगे सफ़ेद चौकोर झंडे की पूजा होती है | जो सफ़ेद रंग का होता है, जैतखाम भी सफ़ेद रंग का होता है |
सतनाम को मानने वाले फोटो तस्वीर या मूर्ति की पूजा नहीं करते |
जो करते है, उनको ये ज्ञान नहीं होगा की जैतखाम के ऊपर लगे झंडे की पूजा की जाती है |
और जिस जैतखाम में झंडा नहीं लगा रहता उसकी पूजा नहीं की जाती,
इसलिए सभी जैतखाम में झंडा लगाना अनिवार्य होता है |
गुरुघासीदास बाबा को मानने वाले घंठी नहीं बजाते |
गुरुघासीदास बाबा की जयंती 18 दिसम्बर को मनाया जाता है |
छत्तीसगढ़ में गुरुघासीदास बाबा का सबसे बड़ा मेला फाल्गुन शुक्ल पक्ष के समय में तीन दिन का मनाया जाता है |

गुरुघासीदास बाबा कौन है ?

वास्तव में गुरुघासीदास सतनाम के प्रवर्तक है, सतनाम की परम्परा कई हजारो साल से चली आ रही है, जो वर्तमान में सतनामी है, ओ आज के जाति वाचक सतनामी नहीं है, हजारो वर्ष पहले जो भी लोग सतनाम के मार्ग में आगे बढे सत्य को मानते थे, मूर्ति पूजा और मांसाहारी कार्य नहीं करते थे, सत्य का आचरण करते थे, जो सत्य के मार्ग में चलते थे वही सतनामी कहलाते थे |
वास्तव में सतनामी कोई जाति का नाम नहीं है यह एक पन्त है,
कुछ लोग इस पंथ से भटक गए है, इसलिए गलत कार्यो मोह माया शराब मांसाहारी मूर्तिपूजा में चले जाते है |

213 इसवी में सतनामी राजा ने दिल्ली में 50 वर्षो तक देश में शासन किया था |
ये उस समय से सतनामी कहलाते आ रहे है, जब कही भी किसी धर्म की न जाति की उत्पत्ति हुई थी |
छत्तीसगढ़ में जितने भी लोग रहते है, उन्हें सतनामी के नाम से जाना जाता है,
छत्तीसगढ़ के लोग गुरुघासीदासबाबा के उपदेशो पर चलते है, यहाँ किसी प्रकार की जाति पाती, ऊँच नीच का भेद नहीं है, सभी हर प्रकार के सुख दुःख में मिलकर कार्य करते है, यहाँ आज तक कोई जाति गत या धार्मिक हिंसा नहीं हुई है |
यहाँ सभी मानव मानव एक समान का सन्देश देते है |

जो सतनाम को मानते है, उनमें कुछ खास गुण देखने को मिलता है |

सभी एक जुट होकर एक विशेष दिन जैतखाम के पास आते है, और सामूहिक पूजा करते है |
साथ में अपने साथ चावल या कुछ चंदा देते है, सामाजिक कार्यो के लिए |
समाज की बुराइयों को कैसे दूर किया जाये और पारिवारिक समस्या का समाधान समाज में ही करने का सन्देश देते है |
गुरुघासीदास जयंती के समय 18 दिसम्बर को घर के सामने रंगोली और दिए जलाते है |
उस दिन सतनाम को मानने वाले किसी प्रकार की मांसाहारी और नशाखोरी कार्य नहीं करते |
कही कही तो सतनाम सन्देश यात्रा और हर गाँव शहर में गुरुघासीदास बाबा के सन्देशो का प्रचार होता है |
सतनामी किसी के सामने झुकने को नहीं मानते , ये समानता को मानते है |
इसलिए सभी को सतनाम, और साहेब सतनाम कहते है |
इस दिन गुरुघासीदास बाबा की धयान भूमि और जन्म भूमि पर सतनाम का मेला लगता है |
गुरूघासीदास बाबा को सतनाम पुरुष के नाम भी जानते है |
अर्थात वह सत्य वह सतनाम को इस संसार का जगत का मालिक है |

गुरुघासीदास बाबा को ज्ञान की प्राप्ति कैसे हुई |

आपने मेडिटेशन का नाम सुना होगा, जिसमे दिमाग शांत और बहुत बुद्धिमान हो जाता है, इसी को ध्यान कहते है, इसी की एक अवस्था ज्ञान प्राप्ति की होती है, जिसमे जिस ज्ञान को और अपने में उर्जा आ जाती है |
गुरुघासीदास बाबा जंगल में खुले जगह में ध्यान में, लगे थे ,अगर गुरुघासीदास बाबा कोई साधारण मानव होते तो शेर उनको नहीं खा जाता |
बल्कि खुद शेर गुरुघासीदासबाबा की रक्षा करने के लिए पहरा देता था, की कोई इनको चोट न पहुचाए |

गुरूघासीदास बाबा के मृत्यु के सम्बन्ध में,

गुरुघासीदासबाबा जी के मृत्यु के सम्बंध में कोई प्रमाण नहीं मिलता, बाबा अंतर्ध्यान हो गए थे | इसलिए यह कभी नहीं कह सकते की बाबा जी का मृत्यु हो गया है

गुरुघासीदास बाबा की कहानी 

जब गुरुघासीदास बाबा 5 या 7 वर्ष के हुए तो, इनके पिता मंगुदास ने गुरुघासीदास को स्कूल में भर्ती करके के लिए, बहुत दूर स्कूल ले गए |
उस समय भेद भाव इतना बढ़ा चढ़ा हुआ था की, लोगो को भेद भाव किया जाता था, गुरूघासीदास बाबा को इन्ही भेदभाव का सामना करना पड़ा और वे स्कूल में नहीं पड़ पाए |
जब वे 7 वर्ष के थे तो, गुरुघासीदास बाबा ने अपने पिता मंहगूदास से कहाँ की अब मै खाली क्या करूँगा, गाँव के गाय बैल को चराने का काम करूँगा |
इस तरह से गाँव भर में डंका बज गया की अब से गुरुघासीदास गायो को चरायेगा |
पहले दिन गुरूघासीदास गायो को लेकर पास डोंगरी में ले गया, एक पेड़ के नीचे गुरुघासीदास बैठ गए, और गए चरने लगी |
गुरुघासीदास के मन में समाज के बारे से चिंता बहुत थी, की समाज इस तरह से क्यों है, सब एक समान क्यों नहीं है |
जब वे पेड़ के नीचे बैठे थे,
उनका ध्यान एकाग्र हो गया |
इस तरह से जब शाम को उनका ध्यान टुटा तो देखते है, की सभी जानवर एक झुण्ड में एक जगह बैठे |
इनको देखकर गुरुघासीदास बाबा समझ गए की, मानव भी इन्ही की तरह है,
मानव को भी एक झुण्ड में, संगठन में, रहना चाहिए |
दुसरे दिन पेड़ पर बैठकर गाय चरा रहे थे, तभी शेर आया |
तो घोड़े और जंगली गए भाग गए, और गाये झुण्ड में हो गए और बच्चों को बीच में रख लिए | उस दिन सीखे की समाज का नेतृत्व बुध्धिमान और ताकतवर करेंगे |
उसी दिन देखा की जब हांथी वही चर रहा था, तो उनको कोई प्रभाव नहीं पड़ा, इस बात से उनको बहुत प्रभाव पड़ा,
इस तरह से गुरुघासीदास बाबा ने अनेको शिक्षा तर्कबुध्धि से प्राप्त की |
अगर किसी को अनपढ कहकर आपमान करते हो, या अपने आप को पढ़ा लिखा मानते हो, तो इस ज्ञान को याद कर लेना |
अनपढ उसे कहते है, जो पढ़ लिख न पाया हो |
लेकिन नसमझ उसे कहते है, जो पढ़ लिख कर भी तर्क बुध्धि और शिक्षित न हो पाया हो |
गुरूघासीदास बाबा ने वास्तविक ज्ञान का सन्देश दिया है इसलिए बाबा बनने में न लगो |
किसी का अपमान न करो, पढो लिखो और तर्क पूर्ण शिक्षित बनो |
अगर कुछ समझ आया हो तो शेयर भी कर दो, आपसे प्रेम करेगा |

Dec 17, 2018

राजनीति क्या है ? Rajneeti Kya Hai ? What is Politics ? लेख - योगेन्द्र कुमार चरौदी
आपने बहुत राजनीति से सम्बंधित लेख पढ़े होंगे, आपको अगर वास्तव में राजनीति को समझना है तो इस लेख को, राजनीति की विचारधारा को जरुर जाने समझे पढ़े |
राजनीति को समझने के बाद आप, आपकी अपनी किस्मत और तक़दीर खुद लिखेंगे |

raajneeti kya hai raajneeti ka arth raajneeti ka paribhasha

राजनीति का अर्थ ?

राजनीति दो शब्दों से मिलकर बनी है, 
1. राज,   और दूसरा 
2. नीति,

यहाँ पर राज का सम्बंध राज करने से है |
और नीति का सम्बंध,
किस नियम से राज करना है, इससे है |

अर्थात - राज करने की नीति ही राजनीति है |

यहाँ पर शब्द का अर्थ को स्पस्ट कर देना चाहता हूँ |
राज का अर्थ - राज, गुप्त जानकारी को भी कहते है , पर यह वह राज नहीं है |
राज का अर्थ - राजा का राज करना को भी राज कहते है , पर यह राजा का राज करना से भी नहीं है |
राज का अर्थ - राज का सम्बंध राज्य से भी नहीं है, यह अलग राज है |

राज का वास्तविक अर्थ - राज का सम्बंध राज करने से है |

नीति का अर्थ - नीति को नियम कहते है, किस प्रकार से राज करना है, किस नीति से राज करना है, किस नियम से राज करना है, यह नीति नियम बताता  है |

अब तक आपने राजनीति का अर्थ जाना अब परिभाषा जाने |

राजनीति की परिभाषा - अपने विचारों से, किसी दुसरे को प्रभावित करने का नाम ही, राजनीति है |
इसे इस तरह कह सकते है, जब कोई अपने विचारों से किसी दुसरे को प्रभावित कर लेता है, अर्थात राजनीति कर लेता है |

यहाँ पर स्पस्ट हो जाता है, राजनीति का सम्बंध विचार से है |
इस अनुसार से विचार को समझना जरुरी है |

विचार क्या है ?

समानता की भावना ही विचार है |

अर्थात जब हम किसी को हेल्लो कहते है , और उससे बदले में हेल्लो की आशा रखते है |
यहाँ पर दोनों ओर से समानता आ रही है, इसी को विचार कहते है |

राजनीति कैसे की जाती है ?

जब कोई नीति के माध्यम से, किसी दुसरे को अपने में प्रभावित करके राजनीति करता है |

राजनीति कितने प्रकार की होती है ?
राजनीति दो प्रकार की होती है |
1. समानता की राजनीति ( अच्छी राजनीति, )
और दूसरा 
2. असमानता की राजनीति ( गन्दी राजनीति )

उदाहरण :- अगर कोई मुख्यमंत्री अपने बच्चे को बड़े प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहा हो |
और गरीब से कह रहा हो, तुम्हारा बच्चा, सरकारी स्कूल में पढ़ेगा |
अगर कोई कहता है, आप शराब पीओ |

यह गन्दी राजनीति है |

और वही मुख्यमंत्री अगर यह कहे, की मेरा बच्चा उसी स्कूल में पढ़ेगा, जिस स्कूल में आपका बच्चा पढ़ेगा |
यह अच्छी राजनीति है |
और वही कहता है, 


राजनीति किसके लिए की जाती है ?

राजनीति प्रकृति के लिए की जाती है |
कोई सोचता है, राजनीति मानव के लिए की जाती है, लेकिन वास्तव में राजनीति प्रकृति के लिए की जाती है |

मानव का जीवित शरीर पांच तत्व से बना होता है |

भूमि, गगन, वायु, आकाश, नीर,

राजनीति में स्वच्छ वायु और आक्सीजन के लिए राजनीति की जाती है |
राजनीति में पानी , और पीने के स्वच्छ पानी के राजनीति की जाती है |
राजनीति में आग, खाना पकाने की समाग्री  के लिए राजनीति की जाती है |
राजनीति में भूमि, प्राकृतिक मृदा तत्व, और मिटटी तत्व को सुरक्षित रखने के लिए राजनीति की जाती है |

क्या इनमे से किसी एक चीज के बिना कोई मानव जीवित रह सकता है, अगर नहीं तो, राजनीति इनकी आवश्यकता,  और इनको स्वच्छ, और बचाए रखने के लिए की जाती है |

और जो इनको नष्ट करने का कार्य करता है, वह गन्दी राजनीति करता है |

राजनीति मानव में किस प्रकार से की जाती है ?
मानव में राजनीति दो प्रकार से की जाती है,
1. शरीर से, 
और दूसरा 
2. मन से,

जब विचार शरीर से सम्बंधित हो तो शरीर की राजनीति |
और 
जब विचार मन से हो तो मन की राजनीति |

इसे इस तरह से समझ सकते है |

गुलामी से,

किसी को शरीर से गुलाम बना कर उस पर राज किया जा सकता है |
और दूसरा,
उसके मन को गुलाम बना कर उस पर राज किया जा सकता है |

हम जिस राजनीति की पढाई और अध्ययन कर रहे है, यह राजनीति वोट की राजनीति और बिना वोट की राजनीति से सम्बंधित है |

इस राजनीति को हर एक के ऊपर लागु कर सकते है |
आगे लेख जारी है .....

Dec 16, 2018

Chhattisgarh new cm name 2018, छत्तीसगढ़ के नये मुख्यमंत्री का नाम, chhattisgarh new chief minister name 2018
छत्तीसगढ़ के नये मुख्यमंत्री का नाम,

Chhattisgarh New Chif Minister Name- Bhupesh Baghel 

छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल है,
chhattisgarh new cm bhupesh baghel 2018

यह घोषणा आज दिनांक 16/12/2018  ( 16 दिसम्बर 2018 ) को पार्टी द्वारा ऐलान किया जाता है,
अधिकारिक शपथ ग्रहण ( 17 दिसम्बर 2018 ) को शाम 4 बजे होगा, उसके बाद पूरी तरह से, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बन जायेंगे |
जाने कौन है भूपेश बघेल की जीवनी और पूरा परिचय |
नाम – भूपेश बघेल छात्तिसगढ़हिया
Category - ( OBC )
जन्म – 23 अगस्त 1961 दुर्ग में,
राष्ट्रीयता (Nationality) - भारतीय
पार्टी – कांग्रेस
इनके माता पिता का नाम – नन्द कुमार बघेल, माता, बिन्देश्वरी,
पत्नी का नाम – मुक्तेश्वरी बघेल,
निर्वाचन विधायक क्षेत्र – पाटन
2018 में हुए चुनाव के नतीजे इस तरह से है,
Chhattisgarh - Patan
Result Declared
CandidatePartyVotes
BHUPESH BAGHELIndian National Congress84352
MOTILAL SAHUBharatiya Janata Party56875
राजनीति करियर -
सन 1993 में भूपेश बघेल ने अपना पहला चुनाव, मध्यप्रदेश की पाटन विधानसभा सीट से लड़ा था, उस समय यह सीट मध्यप्रदेश में आता था, उसके बाद यह, सन 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद यह सीट छत्तीसगढ़ में आ गया |
मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष 1994 – 95
कैबिनेट में राज्य मंत्री 1998
मध्यप्रदेश परिवहन मंत्री 1999
भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे है, उसके बाद चुनाव जितने के बाद, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बनाये गए |

भूपेश बघेल का नेतृत्व गुण –

भूपेश जी छत्तीसगढ़ के जाने माने नेता के रूप में जाने जाते है, जब भाजपा ने छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड में चावल देना बंद कर दिया तो, इन्होने अपनी पार्टी के साथ आन्दोलन करके गरीबो को चावल दिलाया |
जब भाजपा ने किसानो को निर्धारित मूल्य और बोनस नहीं दिया तो, कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ में भरपूर आन्दोलन किया था |
जब छत्तीसगढ़ में लोगो का अधिकार छिना जा रहा था, तो कांग्रेस ने लोगो के लिए आन्दोलन किया
और कार्यकर्ताओ ने डंडे खाए |
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यह भी पढ़े -

Dec 15, 2018

इस संसार में तीन प्रकार के मानव होते है | संसार में कितने प्रकार के मानव होते है |
is sansar me tin prakar ke manav hote hai, sansar me kitne prakar ke manav hote hai

इस संसार में तीन प्रकार के मानव होते है |

इस लेख को जब आप पढेंगे और समझेंगे तो, मानव को भी समझने में आपको बहुत असानी होगी |
इस लेख को समझने से पहले आपको, जीवन को समझना होगा |
जीवन क्या है ?
जो मानव जीता है |
लेकिन जीवन को किस तरह से जीता है ?
मानव जीवन को उसी तरह से जीता है, जैसी उसकी समझ होती है |
ठीक इसी प्रकार से, जीवन को जीने की, तीन अवधारणा होती है, और ये मानव भी इन तीनो में से किसी एक अवधारणा को लिए जीवन को जीता है,
ये अवधारणा इस प्रकार है,
1. एक मानव जो आत्मा, परमात्मा में विश्वास करता है |
2. एक मानव जो आत्मा परमात्मा को नहीं मानता |
3. और तीसरा मानव, है और नहीं, के असमंजस में रहता है |
अब जानते है जीवन का उद्धेश्य
हर मानव का जीवन में एक ही उद्देश्य होता है,
शांति प्रिय जीवन,

Reed More :- 
धर्म क्या है ? परिवार क्या है ? रिश्तेदार क्या है ? जाति क्या है ? गोत्र क्या है ?
मेरा आखरी प्रश्न ? क्या हमारे शरीर में आत्मा होती है ?

जो आत्मा और परमात्मा को मानता है, वह जीवन में हमेशा मोक्ष के लिए भटकता रहता है, लेकिन समझने वाली बात यह है, उसे मोक्ष क्या होता है, पता भी नहीं होता |
जो व्यक्ति आत्मा, परमात्मा को नहीं मानता वह जीवन को निडर होकर जीता है, न वह मोक्ष के लिए भटकता है, और न ही स्वर्ग नर्क के चक्कर में पड़ता है, वह किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराता, बल्कि खुद को और समाज को प्रकृति को दोषी मानता है |
और एक तीसरा होता है, जो कभी आत्मा को मानता है, और कभी नहीं है कहता है, वह समाज के भ्रमजाल में फंसा होता है, उसे यह भी पता नहीं होता की वह आत्मा को मानता है, या नहीं मानता है, अगर कोई देवी देवता को पूज रहा है, इसका अर्थ यह बिलकुल नहीं, की वह आत्मा को परमात्मा को मानता है |
वह तो उस भ्रम में पड़ा है, जिसे जैसा बताया गया है, जैसी उसकी मानसिकता बनाई गई उसी अनुसार से जी रहा है |
अगर आपको समाज का उद्धार करना है तो, इन तीनो विचारधारा के लोगो को एक मंच में लाना होगा |
                                                                                      - योगेन्द्र कुमार चरौदी

Dec 12, 2018

Chhattisgarh MLA List 2018 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम कुछ इस प्रकार हैं। CG New MLA Result 2018

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम कुछ इस प्रकार हैं।


chhattisgarh vidhansabha chunav 2018 parinam vidhayak list

विधान सभा क्रमांक | विधानसभा नाम | नाम | पार्टी नाम |
01- भरतपुर सोनहत -गुलाब कमरों, कांग्रेस
02- मनेन्द्रगढ -डॉ विनय जैसवाल,कांग्रेस
03- बैकुंठपुर -अम्बिका सिंहदेव, कांग्रेस
04 प्रेमनगर - खेल साईं सिंह, कांग्रेस
05- भटगांव - पारसनाथ रजवाड़े, कांग्रेस
06- प्रतापपुर -डॉ प्रेम साईं सिंह टेकाम, कांग्रेस
07- रामानुजगंज -बृहस्पत सिंह, कांग्रेस
08- सामरी -चिंतामणि महाराज, कांग्रेस
09- लुन्ड्रा -प्रीतम राम, कांग्रेस
10- अंबिकापुर -टी एस सिंघदेव, कांग्रेस
11- सीतापुर -अमरजीत भगत, कांग्रेस
12- जशपुर -विनय कुमार भगत, कांग्रेस
13- कुनकुरी -यू. डी. मींज, कांग्रेस
14- पत्थलगांव -राम पुकार सिंह ठाकुर ,  कांग्रेस
15- लैलुंगा -चक्रधर सिदार, कांग्रेस
16- रायगढ़ - प्रकाश नायक, कांग्रेस
17- सारंगढ -उत्तरी जांगड़े, कांग्रेस
18- खरसिया -उमेश पटेल, कांग्रेस
19- धरमजयगढ़ -लालजीत सिंह राठिया, कांग्रेस
20- रामपुर -ननकी राम कंवर, भाजपा
21- कोरबा -जय सिंह अग्रवाल, कांग्रेस
22- कटघोरा -पुरुषोत्तम कंवर, कांग्रेस
23- पाली तानाखार -मोहित राम, कांग्रेस
24- मरवाही -अजित जोगी, जनता कांग्रेस
25- कोटा -रेनू अजित जोगी, जनता कांग्रेस
26- लोरमी -धर्म जीत सिंह, जनता कांग्रेस
27- मुंगेली -पुन्नुलाल मोहले, भाजपा
28- तखतपुर -रश्मि आशीष सिंह, कांग्रेस
29- बिल्हा -धरमलाल कौशिक, भाजपा
30- बिलासपुर -शैलेश पाण्डेय, कांग्रेस
31- बेलतरा -रजनीश सिंह, भाजपा
32- मस्तूरी -डॉ कृष्णमूर्ति बंधी,भाजपा
33- अकलतरा -सौरभ सिंह, भाजपा
34- जांजगीर चांपा - नारायण चंदेल, भाजपा
35- सक्ति -चरणदास महंत, कांग्रेस
36- चन्द्रपुर -रामकुमार यादव, कांग्रेस
37- जैजैपुर -केशव प्रसाद चंद्रा, बसपा
38- पामगढ़ -इंदु बंजारे, बसपा
39- सरायपाली -किस्मत लालनन्द, कांग्रेस
40- बसना -देवेन्द्र बहादुर सिंह, कांग्रेस
41- खल्लारी -द्वारकाधीश यादव, कांग्रेस
42  महासमुंद - विनोद चंद्राकर, कांग्रेस
43- बिलाईगढ़ -चन्द्रदेव प्रसाद राय, कांग्रेस
44- कसडोल -शकुन्तला साहू, कांग्रेस
45- बलौदाबाजार -प्रमोद कुमार शर्मा, जनता कांग्रेस
46- भाटापारा -शिवरतन शर्मा, भाजपा
47- धरसींवा -अनीता योगेश शर्मा, कांग्रेस
48- रायपुर ग्रामीण -सत्यनारायण शर्मा, कांग्रेस
49- रायपुर पश्चिम -विकास उपाध्याय, कांग्रेस
50- रायपुर उत्तर -कुलदीप जुनेजा, कांग्रेस
51- रायपुर दक्षिण -बृजमोहन अग्रवाल, भाजपा
52- आरंग -शिवकुमार डहरिया, कांग्रेस
53- अभनपुर -धनेन्द्र साहू, कांग्रेस
54- राजिम -अमितेश शुक्ल, कांग्रेस
55- बिन्द्रानवागढ़ - डमरू धर पुजारी, भाजपा
56- सिहावा - लक्ष्मी ध्रुव, कांग्रेस
57- कुरूद -अजय चंद्राकर, भाजपा
58- धमतरी -रंजना डीपेंद्र साहू, भाजपा
59- संजारी बालोद -संगीता सिन्हा, कांग्रेस
60- डौंडीलोहारा - अनिला भेंडिया, कांग्रेस
61- गुंडरदेही - कुंवर सिंह निषाद, कांग्रेस
62- पाटन -भूपेश बघेल, कांग्रेस
63- दुर्ग ग्रामीण -ताम्रध्वज साहू, कांग्रेस
64- दुर्ग शहर - अरुण वोरा, कांग्रेस
65- भिलाई नगर - देवेंद्र यादव, कांग्रेस
66- वैशाली नगर - विद्या रतन भसीन, भाजपा
67- अहिवारा - गुरुरूद्र कुमार, कांग्रेस
68- साजा -रविन्द्र चौबे, कांग्रेस
69- बेमेतरा - आशीष छाबड़ा, कांग्रेस
70- नवागढ़ -गुरुदयाल सिंह बंजारे
71- पंडरिया -ममता चंद्राकर, कांग्रेस
72- कवर्धा - अकबर भाई, कांग्रेस
73- खैरागढ़ -देवव्रत सिंह, जनता कांग्रेस
74- डोंगरगड़ -  डालेश्वर  साहू,  कांग्रेस
75- राजनांदगांव -रमन सिंह,  भाजपा
76- डोंगरगांव -दलेश्वर साहू, कांग्रेस
77- खुज्जी -छन्नी चंदू साहू, कांग्रेस
78- मोहला मानपुर -इन्द्रशाह मंडावी, कांग्रेस
79- भानुप्रतापपुर -मनोज सिंह मंडावी, कांग्रेस
80- अंतागढ - अनूप नाग, कांग्रेस
81- कांकेर -शिशुपाल शोरी, कांग्रेस
82- केशकाल -संतराम नेताम, कांग्रेस
83- कोंडागांव -मोहन मरकाम, कांग्रेस
84- नारायणपुर -चंदन कश्यप, कांग्रेस
85- बस्तर -लखेश्वर बघेल, कांग्रेस
86- जगदलपुर -रेखचंद जैन, कांग्रेस
87- चित्रकोट -दीपक बैज, कांग्रेस
88- दंतेवाड़ा - भीमा मंडावी, भाजपा
89- बीजापुर -विक्रम मंडावी,कांग्रेस
90-कोंटा-कवासी लखमा, कांग्रेस
Chhattisgarh
Result Status

Status Known For 90 out of 90 Constituencies
PartyWonLeadingTotal
Bahujan Samaj Party202
Bharatiya Janata Party15015
Indian National Congress68068
Janta Congress Chhattisgarh (J)505
Total90090
Partywise Vote Share
Please move your mouse over the chart or legend to view more details.Party {Votes%,Vote Count}INC {43.0%,6144192}BJP {33.0%,4707141}JCCJ {7.6%,1086581}IND {5.9%,839053}BSP {3.9%,552313}GGP {1.7%,247459}AAAP {0.9%,123526}CPI {0.3%,48255}APoI {0.3%,42013}SHS {0.2%,34678