Nov 6, 2018

Best Domain Registrar Website List, Domain Kaise Kharidte Hai, Puri Jankari

How to Register Domain Name Domain Name Kaise Kharide
 
Domain Kaise kharide,
Jankari vistar se Bataya gaya hai, isliye thodi lambi hai, Aap se nivedan hai ki aap bade pyar se padhe,
Domain kharidna bahut hi aasand hai, aaj aapko mai domain kaise kharidte hain yah step by step Puri Tarah Se, acche tarike se bata raha hoon, aap se nivedan hai ki, aap achche se padh,
Domain Anek Prakar ke Hote Hai, Jaise
.com
.in
.co.in   
.net
.org
.gov.in
.us

is Tara se Anek Prakar ke domain Hote Hain,
aur har domain ka Arth alag-alag Hota Hai,
agar aap business ke liye domain karna chahte hain to .com ya .net .org Best domain,
agar aap Janna Chahte Hain ki website ka naam kya Rakhe toh Aapko Hamari dusri link yah hai,

http://www.inhindiindia.in/2017/08/website-ka-name-kya-rakhewhats-name-of.html

Domain kharidne ke liye chuki Anek website hai lekin aaj main aapko World ki top 1 website Batane jaa raha hoon,

Jisme aap sabse saste Domain kharid sakte hain
www.godaddy.com
Domain kharidne ka process Kuch Is Tarah Se Hai,

Sabse Pehle Aapko 1 user account banana Hota Hai Jis Ke Naam Se domain ko register karna Hota Hai,
TipYa aap pahle Name ko bhi pasand kar sakte hai, 

ek baat yaad rakhna jiske Naam Se domain kharida Jayenge wahi domain ka Malik hoga,
Ab  aap samajh Gaye Honge domain ko  Kiske Naam Se registered karna hai,
 User account banate Samay Address,  mobile number,  email ID,  pin code,  Naam  aur Jankari poori Tarah Se Sahi Sahi bhare,
User account banane ke liye niche link click kare,
https://sso.godaddy.com/account/create?realm=idp&path=%2F&app=myaya


ya Sine in me click karna hai,
ya Sine in me click karna hai,

Aur niche image Create my account me click karna hai,

godaddy create my account


Yahan Par user account banane ke liye Facebook ka use karne ke liye Kaha Jayega
Lekin aap ko bilkul bhi Facebook se login Karke nahi kharidna hai,
Kyunki Facebook ID Kabhi block ho sakti hai aur kabhi bhi Delete kiya Ja sakta hai,

Tip:- Form is tarah se bhare,
Aur Email @ dalna hai,
User name apne pasand anusar se dalna hai,
Uske bad Password dalna hai,
Password is tarah se banaye
Step 1. small leter, abcd
Step 2.Capital Letar, EFGH
Step 3. Symbol Chinh Jaise @#$&* is tarah se,
Step 4. Number Jaise 12354656658
Adik se adhik Password 10 ka banaye Aur hamesha Yad rakhe,
Jab tak password ko is tarike se nahi dalenge tab tak Account nahi bana payenge,
Demo abcABD@123

Godaddy account

Uske bad 4 anko Ka User Pin number dalna hai, jise aap yad rakhe,
Aur i an not robot capcha ko pura karna hai,

Create account me click kare,

Tip:- uske bad email me login karke email Verify kar lena hai

Uske bad Email id likhe,

Ab aap new Domin Name ko dekhna hai, jis name se rakhna hai,


Yah bhi Padle Pahle:- Website ka name kya rakhe,
http://www.inhindiindia.in/2017/08/website-ka-name-kya-rakhewhats-name-of.html
Domain name ko pasand karke Add to card me click karna hai,

new domain by

Countinue to card me Click karna hai,

continue to card

Sabhi me No Yhank Ko select karna hai,

no thanks select now

Countinue With this option Me Click Karna hai,

Countinue With this option

Year Ko 1 Year me select karna hai, 

select one year

Tip Aur Register Date se pahre renewal karna hai , Exparidate se pahle,

Proceed to Checkout Me click karna hai,

proccess to chek out

Pura Address Ko Bharna Hai,

Jis Madhyam se Payment karna chahte hai, use select kare, aur countinue me click karen,

payment option

Place Your Order me click kare, aur Payment kar de, Aapka domain Register  Ho Jayega,

Place Your Order

Ab banki hai, Domain ko Website Se Jodne ki Aur Hosting Kharidne ki,
Ya free hosting website me bhi website bana sakte hai,

Nov 5, 2018

संत शिरोमणि गुरुघासीदास बाबा जी पर निबंध और पूरी कहानी उपदेश, हर एक चीज पूरा विस्तार से
आज आपको विश्व के उस महान संत के बारे में बताने जा रहा हूँ, जिसने जीवन की वास्तविकता से बोध कराया और जीवन जीने का वास्तविक सत्य का मार्ग बताया |
संतो में सबसे श्रेष्ट संत शिरोमणि गुरुघासीदास बाबा का जन्म, पहाड़ो की गोद में, गिरौदपूरी नामक गाँव में, संत 18 दिसम्बर, 1756 को हुआ था |
इनके पिता का नाम, महंगू दास, और माता का नाम अमरौतिन बाई |
बाबा जी के पत्नी का नाम माता सफुरा, और बाबा जी के बच्चे |
गुरूघासीदास बाबा के पूर्वज नारनौल पंजाब, से हुए सोना खान इस तरह से कई पीढ़ी बाद इनके पूर्वज गिरौधपुरी में आये थे |
गुरुघासीदास बाबा जब कुछ 30 वर्ष के थे, तो उन्होंने अपने ज्ञान को जगाने के लिए ध्यान साधना में लीन हो गए, इस तरह से 6 माह तक धयान किये |
तब जाकर गुरुघासीदास बाबा को ज्ञान की प्राप्ति हुई |
गुरुघासीदास बाबा के बारे में बाबा साहेब आंबेडकर ने अंग्रेजो द्वारा लिखी पुस्तक के माध्यम से जाना |
गुरुघासीदास बाबा को छत्तीसगढ़ का विशेष संत का दर्जा और गुरुघासीदास सम्मान और अनेक सम्मान है |
तो जानते है क्या है वह ज्ञान |
sant shiromani gurughasidas baba ji ki puri kahani pura vistar se jane

गुरूघासीदास बाबा के उपदेश और सतनाम सन्देश 

हम वास्तव में जानते है, की यह जाति धर्म भेद भाव सभी इन मानव ने बनाई है,
इसी वास्तविकता को गुरुघासीदास बाबा ने सबको बताया की,
1. सभी मानव एक समान होते है |
कोई जाति से धर्म से बड़ा नहीं होता, यह सभी राज करने के लिए भेद बनाया है | किसी प्रकार की जाति धर्म न मानो, जो मानव मानव में भेद बताये उसे न मानो |
2. मांस भक्षण न करो |
गुरुघासीदास बाबा ने कहो की मांस भक्षण न करो, मानव मांस खाने के लिए नहीं है, शाकाहारी रहो |
3. मूर्ति पूजा मत करों |
गुरुघासीदास बाबा ने कहाँ की पत्थर को पूजने से कुछ नहीं मिलेगा, अगर किसी को पूजना है तो माता पिता गुरु को पूजो, जिनसे तुम्हे ज्ञान मिलता है, पत्थर न तो बोलेंगे, न खायेंगे, और न कुछ ज्ञान देंगे |
4. नशा खोरी शराब अन्य नशा का सेवन न करों |
नशा का सेवन करने से दिमाग ख़राब हो जाता है, मानसिक और शाररिक विकास नहीं होता, इसलिए नशाखोरी का कार्य न करों |
5. चोरी न करों |
गुरुघासीदास बाबा ने चोरी करने के लिए मना किया है, क्योकि दुसरे के चीजो लेने से वह अपना नहीं हो जाता, इसलिए मेहनत से, अपने दम पर प्राप्त करने के लिए कहा है |
6. जुआ न खेलो |
गुरुघासीदास बाबा ने जुआ खेलने के लिए मना किया है, क्योकि जुआ का धन अपने मेहनत का नहीं होता, और वह पैसा सुख भी नहीं देता |
7. दुसरे की स्त्री पर नजर न लगाओ |
गुरुघासीदास बाबा ने अपना चरित्र सुधारने का सन्देश जन जन को दिया है |
गुरुघासीदास बाबा ने और हजारो सन्देश दिए है मगर, ये 7 सन्देश बहुत महत्वपूर्ण है,
जीवों पर दया करो, इन्हें न खाओ |
इन जानवरों जन्तुओ पर अत्याचार न करो |

गुरुघासीदास बाबा के जन्म स्थान के विषय में,

सन 1756 में भारत देश में किसी प्रकार का कोई राज्य नहीं था, इसलिए हम नहीं कह सकते की गुरुघासीदास बाबा का जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ या, छत्तीसगढ़ के संत है |
वास्तव में कोई भी ज्ञान का क्षेत्र नहीं होता, संतो की कोई जाति या धर्म नहीं होता ओ सबके लिए एक समान होते है, इसलिए यह बिलकुल भी नहीं कहना चाहिए की ये इस समाज से आते है |

गुरुघासीदास बाबा का सतनाम आन्दोलन,

गुरुघासीदास बाबा ने रावटी चलाकर सतनाम का सन्देश जन जन को दिया है, और पुरे छेत्र में जा जाकर सत्य के सन्देश का प्रचार किया है |
उस समय की स्तिथि को आज के माहौल से थोड़े से समझ सकते है,
आज भी देखो दुसरे समाज का दुसरे समाज के साथ खुलकर शादी नहीं हो पा रही है, इसलिए आज भी छुआ छुत का माहौल बना हुआ है, आज लोग मंदिर में माथा पटक कर मर रहे है, पत्थर को जायदा माता पिता को गुरु को कम सम्मान दे रहे है |
अगर रास्ते कोई देवी का पत्थर और उसी उसके बगल ने अपनी जन्म देने वाली माता क्यों न हो, कुछ तो ऐसे है, जो पहले मूर्ति को उठा लेंगे मगर जिन्दा मानव को नहीं |
तो सोचो उस समय क्या रहा होगा |

लोग गुरूघासीदास बाबा को चमत्कारी भी मानते है |

उन लोगो को बता दूँ, की चमत्कार और वास्तविकता में बहुत अंतर होता है,
गुरूघासीदास बाबा ने अपनी उर्जा शक्ति योग साधना की शक्ति के बारे में बताया था |
आज के लोग गुरुघासीदास बाबा के ज्ञान का पालन कम करते है, और दाढ़ी बढ़ाने में जायदा रूचि ले लेते है |
मगर गुरुघासीदास बाबा ने ऐसा नहीं कहाँ था, गुरुघासीदास बाबा पूरी तरह से रुढ़िवादी परंपरा के खिलाफ थे |
गुरुघासीदास बाबा ने 4 चीजो के बारे में बताया है जो जीवन में सबसे बड़ी भूमिका निभाते है, और इसे बदलने के लिए सन्देश दिया है |
बोलने में – अपनी वाणी को सुधारो |
कर्म – अपनी कर्म सुधारने पर जोर दिया है |
खानपान – अपना खाना पिता स्वच्छ शाकाहारी खाने पर जोर दिया है |
रहन सहन – गुरुघासीदास बाबा ने रहने का घर और तौर तरीका को मस्त सुधारने पर जोर दिया है |

गुरुघासीदास बाबा का सतनाम जैतखाम

जैतखाम अर्थात सत्य के विजय का खम्भा,
आपने भी सुना होगा, सत्य की विजय हो |
सत्य कभी मिट नहीं सकता, सत्य छुपता नहीं |
ये उसी सत्य का फताखा है, जिसकी पूजा की जाती है |
कई लोग कह देते है की, गुरुघासीदास बाबा ने मूर्ति पूजा को मना किया है, तो दूसरी तरफ लोग, मूर्ति के रूप में या तस्वीर में बाबा जी पूजा की जाती है |
गुरूघासीबाबा को किस प्रकार से माना जाता है यह जाने |
जैतखाम की पूजा नहीं होती है, जैतखाम के ऊपर लगे सफ़ेद चौकोर झंडे की पूजा होती है | जो सफ़ेद रंग का होता है, जैतखाम भी सफ़ेद रंग का होता है |
सतनाम को मानने वाले फोटो तस्वीर या मूर्ति की पूजा नहीं करते |
जो करते है, उनको ये ज्ञान नहीं होगा की जैतखाम के ऊपर लगे झंडे की पूजा की जाती है |
और जिस जैतखाम में झंडा नहीं लगा रहता उसकी पूजा नहीं की जाती,
इसलिए सभी जैतखाम में झंडा लगाना अनिवार्य होता है |
गुरुघासीदास बाबा को मानने वाले घंठी नहीं बजाते |
गुरुघासीदास बाबा की जयंती 18 दिसम्बर को मनाया जाता है |
छत्तीसगढ़ में गुरुघासीदास बाबा का सबसे बड़ा मेला फाल्गुन शुक्ल पक्ष के समय में तीन दिन का मनाया जाता है |

गुरुघासीदास बाबा कौन है ?

वास्तव में गुरुघासीदास सतनाम के प्रवर्तक है, सतनाम की परम्परा कई हजारो साल से चली आ रही है, जो वर्तमान में सतनामी है, ओ आज के जाति वाचक सतनामी नहीं है, हजारो वर्ष पहले जो भी लोग सतनाम के मार्ग में आगे बढे सत्य को मानते थे, मूर्ति पूजा और मांसाहारी कार्य नहीं करते थे, सत्य का आचरण करते थे, जो सत्य के मार्ग में चलते थे वही सतनामी कहलाते थे |
वास्तव में सतनामी कोई जाति का नाम नहीं है यह एक पन्त है,
कुछ लोग इस पंथ से भटक गए है, इसलिए गलत कार्यो मोह माया शराब मांसाहारी मूर्तिपूजा में चले जाते है |

213 इसवी में सतनामी राजा ने दिल्ली में 50 वर्षो तक देश में शासन किया था |
ये उस समय से सतनामी कहलाते आ रहे है, जब कही भी किसी धर्म की न जाति की उत्पत्ति हुई थी |
छत्तीसगढ़ में जितने भी लोग रहते है, उन्हें सतनामी के नाम से जाना जाता है,
छत्तीसगढ़ के लोग गुरुघासीदासबाबा के उपदेशो पर चलते है, यहाँ किसी प्रकार की जाति पाती, ऊँच नीच का भेद नहीं है, सभी हर प्रकार के सुख दुःख में मिलकर कार्य करते है, यहाँ आज तक कोई जाति गत या धार्मिक हिंसा नहीं हुई है |
यहाँ सभी मानव मानव एक समान का सन्देश देते है |

जो सतनाम को मानते है, उनमें कुछ खास गुण देखने को मिलता है |

सभी एक जुट होकर एक विशेष दिन जैतखाम के पास आते है, और सामूहिक पूजा करते है |
साथ में अपने साथ चावल या कुछ चंदा देते है, सामाजिक कार्यो के लिए |
समाज की बुराइयों को कैसे दूर किया जाये और पारिवारिक समस्या का समाधान समाज में ही करने का सन्देश देते है |
गुरुघासीदास जयंती के समय 18 दिसम्बर को घर के सामने रंगोली और दिए जलाते है |
उस दिन सतनाम को मानने वाले किसी प्रकार की मांसाहारी और नशाखोरी कार्य नहीं करते |
कही कही तो सतनाम सन्देश यात्रा और हर गाँव शहर में गुरुघासीदास बाबा के सन्देशो का प्रचार होता है |
सतनामी किसी के सामने झुकने को नहीं मानते , ये समानता को मानते है |
इसलिए सभी को सतनाम, और साहेब सतनाम कहते है |
इस दिन गुरुघासीदास बाबा की धयान भूमि और जन्म भूमि पर सतनाम का मेला लगता है |
गुरूघासीदास बाबा को सतनाम पुरुष के नाम भी जानते है |
अर्थात वह सत्य वह सतनाम को इस संसार का जगत का मालिक है |

गुरुघासीदास बाबा को ज्ञान की प्राप्ति कैसे हुई |

आपने मेडिटेशन का नाम सुना होगा, जिसमे दिमाग शांत और बहुत बुद्धिमान हो जाता है, इसी को ध्यान कहते है, इसी की एक अवस्था ज्ञान प्राप्ति की होती है, जिसमे जिस ज्ञान को और अपने में उर्जा आ जाती है |
गुरुघासीदास बाबा जंगल में खुले जगह में ध्यान में, लगे थे ,अगर गुरुघासीदास बाबा कोई साधारण मानव होते तो शेर उनको नहीं खा जाता |
बल्कि खुद शेर गुरुघासीदासबाबा की रक्षा करने के लिए पहरा देता था, की कोई इनको चोट न पहुचाए |

गुरूघासीदास बाबा के मृत्यु के सम्बन्ध में,

गुरुघासीदासबाबा जी के मृत्यु के सम्बंध में कोई प्रमाण नहीं मिलता, बाबा अंतर्ध्यान हो गए थे | इसलिए यह कभी नहीं कह सकते की बाबा जी का मृत्यु हो गया है

गुरुघासीदास बाबा की कहानी 

जब गुरुघासीदास बाबा 5 या 7 वर्ष के हुए तो, इनके पिता मंगुदास ने गुरुघासीदास को स्कूल में भर्ती करके के लिए, बहुत दूर स्कूल ले गए |
उस समय भेद भाव इतना बढ़ा चढ़ा हुआ था की, लोगो को भेद भाव किया जाता था, गुरूघासीदास बाबा को इन्ही भेदभाव का सामना करना पड़ा और वे स्कूल में नहीं पड़ पाए |
जब वे 7 वर्ष के थे तो, गुरुघासीदास बाबा ने अपने पिता मंहगूदास से कहाँ की अब मै खाली क्या करूँगा, गाँव के गाय बैल को चराने का काम करूँगा |
इस तरह से गाँव भर में डंका बज गया की अब से गुरुघासीदास गायो को चरायेगा |
पहले दिन गुरूघासीदास गायो को लेकर पास डोंगरी में ले गया, एक पेड़ के नीचे गुरुघासीदास बैठ गए, और गए चरने लगी |
गुरुघासीदास के मन में समाज के बारे से चिंता बहुत थी, की समाज इस तरह से क्यों है, सब एक समान क्यों नहीं है |
जब वे पेड़ के नीचे बैठे थे,
उनका ध्यान एकाग्र हो गया |
इस तरह से जब शाम को उनका ध्यान टुटा तो देखते है, की सभी जानवर एक झुण्ड में एक जगह बैठे |
इनको देखकर गुरुघासीदास बाबा समझ गए की, मानव भी इन्ही की तरह है,
मानव को भी एक झुण्ड में, संगठन में, रहना चाहिए |
दुसरे दिन पेड़ पर बैठकर गाय चरा रहे थे, तभी शेर आया |
तो घोड़े और जंगली गए भाग गए, और गाये झुण्ड में हो गए और बच्चों को बीच में रख लिए | उस दिन सीखे की समाज का नेतृत्व बुध्धिमान और ताकतवर करेंगे |
उसी दिन देखा की जब हांथी वही चर रहा था, तो उनको कोई प्रभाव नहीं पड़ा, इस बात से उनको बहुत प्रभाव पड़ा,
इस तरह से गुरुघासीदास बाबा ने अनेको शिक्षा तर्कबुध्धि से प्राप्त की |
अगर किसी को अनपढ कहकर आपमान करते हो, या अपने आप को पढ़ा लिखा मानते हो, तो इस ज्ञान को याद कर लेना |
अनपढ उसे कहते है, जो पढ़ लिख न पाया हो |
लेकिन नसमझ उसे कहते है, जो पढ़ लिख कर भी तर्क बुध्धि और शिक्षित न हो पाया हो |
गुरूघासीदास बाबा ने वास्तविक ज्ञान का सन्देश दिया है इसलिए बाबा बनने में न लगो |
किसी का अपमान न करो, पढो लिखो और तर्क पूर्ण शिक्षित बनो |
अगर कुछ समझ आया हो तो शेयर भी कर दो, आपसे प्रेम करेगा |

Oct 31, 2018

छत्तीसगढ़ की विधानसभा राजनीति WhatsApp Group से जुड़े, पूरा छत्तीसगढ़ एक मंच पर

छत्तीसगढ़ की राजनीति WhatsApp Group से जुड़े 

chhattisgarh vidhansabha ki whatsapp group link se jude
अगर आप छत्तीसगढ़ की राजनीति से अवगत है, और आप अपने विधानसभा छेत्र की, राजनीति से अवगत है, तो इस ग्रुप में एक मंच में चर्चा करें |
और पहले से जाने की किस विधानसभा में कौन जीत सकता है,
यहाँ पर छत्तीसगढ़ की सभी विधानसभा का whatsapp लिस्ट दिया जा रहा है,
आप जिस विधानसभा से उसी विधानसभा ग्रुप में जुड़े किसी दुसरे विधानसभा ग्रुप में न जुड़े,
ग्रुप के कुछ नियम है, जिन्हें आपको फॉलो करना जरुरी है, क्योकि हम नहीं चाहते किसी के साथ किसी का कोई विवाद हो,
कोई किसी को गाली नहीं देगा |
कोई भी व्यक्ति, राजनीति को छोड़कर दूसरा पोस्ट नहीं डालेगा,
कोई किसी को वोट की अपील नहीं करेगा |
फालतू के शुभ अशुभ, गुड मोर्निंग, और अन्य सायरी का पोस्ट नहीं भेजना है |
आपको इस ग्रुप में अपने छेत्र की राजनीति के बारे में पोस्ट करना है 
ग्रुप का लिंक नीचे है अल्फाबेट से,
जुड़ने के लिए नीचे विधानसभा के सामने Join WhatsApp Link में क्लिक करें |

Constituency number Vidhansabha Number
VidhanSabha Name
Join Link List
District
1
Bharatpur-Sonhat
Koria
2
Manendragarh
Koria
3
Baikunthpur
Koria
4
Premnagar
Surajpur
5
Bhatgaon
Surajpur
6
Pratappur
Balrampur
7
Ramanujganj
Balrampur
8
Samri
Balrampur
9
Lundra
Surguja
10
Ambikapur
Surguja
11
Sitapur
Surguja
12
Jashpur
Jashpur
13
Kunkuri
Jashpur
14
Pathalgaon
Jashpur
15
Lailunga
Raigarh
16
Raigarh
Raigarh
17
Sarangarh
Raigarh
18
Kharsia
Raigarh
19
Dharamjaigarh
Raigarh
20
Rampur
Korba
21
Korba
Korba
22
Katghora
Korba
23
Pali-Tanakhar
Korba
24
Marwahi
Bilaspur
25
Kota
Bilaspur
26
Lormi
Mungeli
27
Mungeli
Mungeli
28
Takhatpur
Bilaspur
29
Bilha
Bilaspur
30
Bilaspur
Bilaspur
31
Beltara
Bilaspur
32
Masturi
Bilaspur
33
Akaltara
Janjgir-Champa
34
Janjgir-Champa
Janjgir-Champa
35
Sakti
Janjgir-Champa
36
Chandrapur
Janjgir-Champa
37
Jaijaipur
Janjgir-Champa
38
Pamgarh
Janjgir-Champa
39
Saraipali
Mahasamund
40
Basna
Mahasamund
41
Khallari
Mahasamund
42
Mahasamund
Mahasamund
43
Bilaigarh
Baloda Bazar
44
Kasdol
Baloda Bazar
45
Baloda Bazar
Baloda Bazar
46
Bhatapara
Baloda Bazar
47
Dharsiwa
Raipur
48
Raipur Rural
Raipur
49
Raipur City West
Chhatarpur
50
Raipur City North
Raipur
51
Raipur City South
Raipur
52
Arang
Raipur
53
Abhanpur
Raipur
54
Rajim
Gariyaband
55
Bindrawagarh
Gariyaband
56
Sihawa
Dhamtari
57
Kurud
Dhamtari
58
Dhamtari
Dhamtari
59
Sanjari Balod
Balod
60
Daundi Lohara
Balod
61
Gunderdehi
Balod
62
Patan
Durg
63
Durg Rural
Durg
64
Durg City
Durg
65
Bhilai Nagar
Durg
66
Vaishali Nagar
Durg
67
Ahiwara
Durg
68
Saja
Bemetara
69
Bemetara
Bemetara
70
Navagarh
Bemetara
71
Pandariya
Kabirdham
72
Kawardha
Kabirdham
73
Khairagarh
Rajnandgaon
74
Dongargarh
Rajnandgaon
75
Rajnandgaon
Rajnandgaon
76
Dongargaon
Rajnandgaon
77
Khujji
Rajnandgaon
78
Mohla-Manpur
Rajnandgaon
79
Antagarh
Kanker
80
Bhanupratappur
Kanker
81
Kanker
Kanker
82
Keshkal
Kondagaon
83
Kondagaon
Kondagaon
84
Narayanpur
Narayanpur
85
Bastar
Bastar-Jagdalpur
86
Jagdalpur
Bastar-Jagdalpur
87
Chitrakot
Bastar-Jagdalpur
88
Dantewada
Dantewada
89
Bijapur
Bijapur
90
Konta
Sukma
भारत में गरीबी के कारण,गरीबी मिटाने के नियम, गरीबी पर निबंध, योगेन्द्र धिरहे का विश्लेषण causes of Poverty in india in hindi

भारत में गरीबी के कारण,गरीबी मिटाने के नियम, गरीबी पर निबंध, योगेन्द्र धिरहे का विश्लेषण 

Bharat desh ke garibi ka karan hindu ke garibi ka karan

देश की गरीबी का मुख्य कारण अशिक्षा है, और अशिक्षा न देने का कारण सरकार है |
आपको बुरा लग सकता है, आपसे निवेदन है की आप वास्तविकता जानना चाहते है तो जरुर विस्तार से पढ़े |क्योकि ये सरकार जानती है, जिस दिन ये शिक्षित होकर तर्कबुध्धि से जीना शुरु कर देंगे, उस दिन 33 करोड़ देवी देवताओ की मूर्ति को त्याग देंगे, और अमीर हो जायेंगे , और सरकार भी देश के मूलनिवासियों की बन जाएगी | इसी कारण से बच्चों की मानसिक योग्यता के विषय में कुछ पढाया नहीं जाता, जब तर्क करने लगेंगे तो, समझ जायेंगे की, मूर्ति को तालाब में डालने से, तालाब गन्दा, और नदी में डालने से नदी में बाढ़ आती है, मै मानता हूँ, की गरीबी का मुख्य कारण अशिक्षा है, अगर शिक्षा होगी तो तर्क बुध्धि होगा, और तर्क बुध्धि होगा तो, इस देवी-देवता और दुनियाभर के संस्कार से छुट्टी मिलेगा |
गरीबी का सबसे बड़ा कारण कोई और नहीं प्रथा है रिवाज है,
अगर बात करूँ हिन्दू धर्म की तो, यह हिन्दू धर्म नहीं गुलाम बनाने का धर्म है, लोगो को यह पता नहीं है, धर्म के आड़ में ओ गुप्त तरीके से ओ गुलाम बना रहे, अपनी राज करने की नीति बना रखे,
और लोगो की मासिक स्तिथि को बिगाड़ रहे है, अपने बच्चे को उच्च शिक्षा दे रहे है, और दुसरो के बच्चों को गुलाम बनाने की शिक्षा,
अब समझिये विस्तार से,
क्या उपवास रहने से पति का उम्र बढ़ जाता है, अगर ऐसा होता तो, आज कोई जवान देश की सीमा पर शहीद नहीं होता |
एक वर्ष में 365 दिन होते है,
हिन्दू धर्म गुलाम बनाने का धर्म है,
लोगो को एक विशेष वर्ग गुप्त तरीके से लुट रहा है,
अगर मूर्ति में जान डाला जा सकता है, तो कोई मरता नहीं |
अब गरीबी का कारण को समझो,
इन सभी त्यौहार को मनाते-मनाते लोग गरीबी में डूब गए है,
हिन्दू त्यौहारतारीख-2018
लोहड़ी (Lohri)13 जनवरी, शनिवार
मकर संक्रांति (Makar Sankranti)14 जनवरी, रविवार
पोंगल (Pongal)14 जनवरी, रविवार
वसंत पंचमी (Vasant Panchami)22 जनवरी, सोमवार
थाईपुसम (Thaipusam)31 जनवरी, बुधवार
महाशिवरात्रि (Maha Shivaratri)13 फरवरी, मंगलवार
होलिका दहन (Holika Dahan)1 मार्च, गुरुवार
होली (Holi)2 मार्च, शुक्रवार
चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navaratri)18 मार्च रविवार से 26 मार्च तक सोमवार
ऊगड़ी/तेलुगू नया साल (Ugadi)28 मार्च बुधवार
गंगौर पर्व (Gangaur Parv)20 मार्च मंगलवार
मेवाड़ पर्व (Mewar festival)18 मार्च रविवार से 20 मार्च मंगलवार
राम नवमी (Ram Navami)25 मार्च सोमवार
महावीर जयंती (Mahavir Jayanti)29 मार्च गुरुवार
हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti)31 मार्च शनिवार
रथयात्रा (Ratha-Yatra)14 जुलाई शनिवार
गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima)27 जुलाई शुक्रवार
ओनम (Onam)15 अगस्त बुधवार से 27 अगस्त सोमवार
रक्षा बंधन (Raksha Bandhan)26 अगस्त रविवार
कुंभ मेला (Kumbh Mela)29 अगस्त बुधवार से 18 सितंबर मंगलवार
जन्माष्टमी (Janmashtami)2 सितंबर रविवार
रामलीला (Ramlila)8 सितंबर शुक्रवार से 8 अक्टूबर रविवार तक
गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi)13 सितंबर गुरुवार
ब्रह्मोत्सव (Brahma Utsav)10 अक्टूबर बुधवार से 18 अक्टूबर गुरुवार
पितृ पक्ष (Pitru Paksha)24 सितंबर सोमवार से 8 अक्टूबर सोमवार
रामबारात (Rambarat)8 अक्टूबर रविवार
नवरात्र (Navaratri)10 अक्टूबर बुधवार से 18 अक्टूबर गुरुवार तक
दशहरा (Dussehra)19 अक्टूबर शुक्रवार
महाऋषि वाल्मिकी जयंती (Valmiki Jayanti)24 अक्टूबर बुधवार
करवा चौथ (Karwa Chauth)28 अक्टूबर रविवार
देव उथानी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi)19 नवंबर सोमवार
धनतेरस (Dhanteras)5 नवंबर सोमवार
दिवाली (Diwali)7 नवंबर बुधवार
गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja)8 नवंबर गुरुवार
भाई दूज (Bhai Dooj)9 नवंबर शुक्रवार
छठ पूजा (Chhath Puja)11 नवंबर रविवार - 14 नवंबर बुधवार
और लोग, अनेक समय में आंधी धुंध खर्चा करते है,
जैसे जन्मोत्सव, शादी में, किसी के मरने पर,
सबसे ज्यादा खाने खिलाने में लोग गरीब होते है,
यही वास्तविक कारण है गरीबी का,

अगर बत्ती एक साल का 500 रुपया
दुनिया भर के त्यौहार दीवाली में 1000,
होली में 1000,
रक्षा बंधन में 2000,
दारू में, रोज का 50, कुल साल का 18000
मुर्गी में हफ्ते का 100 रूपये तो 5200,
दुर्गा में, 1000 रुपया
गणेश में 1000,
दशहरा 1000
करवा चौथ 1000
अनेक उत्सवो में अब कितना होगा आप खुद जोड़ लो,
और पुरे परिवार का जोड़ो,
और बंकि को आप जोड़ लो बहुत हो गया बुराई करते करते, बुराई करना गलत बात है |
अगर वर्ष में यही पैसे बचते तो हर व्यक्ति अमिर होते | आप लोगो को पता भी नहीं, जो आपको ये 33 करोड़ सौगात में मिला है |
आपको तो ये भी नहीं पता, आप पूज नहीं रहे, आपको ही पुजाया जा रहा है |
आपको धर्म के नाम पर गुलाम बनाया गया है,
आप पूजा नहीं कर रहे, आपको पूजा करने के लिए डर को बिठाया जा रहा है,
जब आप तर्क बुध्धि से जीने लग जाओगे तो इस गरीबी का निदान हो जायेगा,
और तर्क करने के समझ होना अन्दर में जरुरी है,
कोई व्यक्ति बिना पढ़े तर्क कर सकता है, लेकिन हर एक चीज के बारे में सिर्फ पढ़ा लिखा शिक्षित ही तर्क कर सकता है |
बाबा साहेब आंबेडकर ने इन ग्रंथो के बारे में क्या कहाँ
गड़रिया की कहानी |
अब आदमी मुख से पैदा हो सकता, ब्रम्हा के तो चार मुख है,
एक ही मुख से पैदा हुआ या चारो से,
क्षत्रिय, एक को पैदा किये बहुतो को,
वैश्य को एक पैदा किया बहुत सारे,
शुद्र को एक पैदा किया बहुत सारे,
या सामान्य सब को,
अगर यह सत्य है तो,
यह जो ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, और शुद्र, केवल भारत में ही क्यों पाए जाते है |
अन्य देशो में क्यों नहीं, इसका मतलब ब्रम्हा ने उनको नहीं बनाया,
नहीं बनाया तो उनको कौन बनाएगा |
ब्राम्हण की संख्या, 3% और शुद्र की संख्या 85% कुछ समझ रहे हो |
ये सब कपोल कल्पित कल्पना की गई कहानी है,
जिसे पहले ब्राम्हण लोगो को कहानी सुनाकर मनोरंजन किया करता था,
जो आज भी जारी है |

कैसे मिलेगा गरीबी से मुक्ति 

कबीर दास ने क्या कहा है याद नहीं,
पाथर पूजे हरी मिले,
तो मै पूजू पहाड़ !
घर की चक्की कोई न पूजे,
जाको पीस खाए संसार !!

मुंड मुड़या हरि मिलें ,सब कोई लेई मुड़ाय |
बार -बार के मुड़ते ,भेंड़ा न बैकुण्ठ जाय ||

माटी का एक नाग बनाके,
पुजे लोग लुगाया !
जिंदा नाग जब घर मे निकले,
ले लाठी धमकाया !!

एक बूँद ,एकै मल मुतर,
एक चाम ,एक गुदा ।
एक जोती से सब उतपना,
कौन बामन कौन शूद

कितना बताया है समझते नहीं, आपको लाखो इस तरह के उदाहरण मिल जायेंगे |
भारत के मशहुर संत गुरुघासीदास बाबा ने स्पष्ट कहाँ है
मूर्ति पूजा मत करो |
नशाखोरो न करो |
मानव मानव एक समान |
जो भी सब मानव ने बनाया है |
सभी धर्म,जाति, वर्ण लोगो ने बनाया है,
कोई शुभ अशुभ नहीं होता ये सब लोगो ने कल्पना किया है |
आज भीम वादी, कबीर पंथ, सतनाम पंथ, और बहुत सारे धर्म समानता की बात करने है, इन हिन्दुओ को तो ये भी नहीं पता की |
धर्म के आड़ में इन्हें गुलाब बनाया गया है, जाति बनाया गया है |
वर्ण बनाया गया, ऊँच नीच का भेद बनाया गया है |
अगर आप अमिर बनना चाहते है, तो बाबा साहेब आंबेडकर की book पड़ लेना, साथ में पेरियार, ललाई सिंह, खासकरके एस कुमार, का book, |
इस तरह का सरकार बनाओ जो तर्कबुध्धि की शिक्षा की बात करता हो,
यह नहीं की, शंकर ने गणेश का सर काटकर हांथी का जोड़ दिय,
अब खुद सोचो, मिटटी से बना,
बच्चे के सर में हांथी का सर, और पेशी फिट हो गया,
और सबसे बड़ी बात जानवर का खून आदमी में भी मिल गया
एक तरफ चंदा मामा, तो दूसरी तरफ करवाचौथ पर चाँद मामा को पति, एक तरफ चंदा मामा तो दूसरी तरफ चन्द्र देव |

कहाँ मिलेगा बाबा साहेब और जय भीम क्रन्तिकारी बुक

जहाँ पर बहुजनो की,सभा, या बौध विहार मेला, आप इन जगहों पर book ले सकते है |
कोई देवी देवता नहीं कहते book पड़ने के लिए,
जब देवी देवता में अटक जाओ ये है तो इस वेबसाइट www.inhindiindia.in या योगेन्द्र धिरहे गूगल में लिखकर कांटेक्ट कर लेना, आपको उत्तर मिल जायेगा |