Dec 12, 2018

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम कुछ इस प्रकार हैं।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम कुछ इस प्रकार हैं।


chhattisgarh vidhansabha chunav 2018 parinam vidhayak list

विधान सभा क्रमांक | विधानसभा नाम | नाम | पार्टी नाम |
01- भरतपुर सोनहत -गुलाब कमरों, कांग्रेस
02- मनेन्द्रगढ -डॉ विनय जैसवाल,कांग्रेस
03- बैकुंठपुर -अम्बिका सिंहदेव, कांग्रेस
04 प्रेमनगर - खेल साईं सिंह, कांग्रेस
05- भटगांव - पारसनाथ रजवाड़े, कांग्रेस
06- प्रतापपुर -डॉ प्रेम साईं सिंह टेकाम, कांग्रेस
07- रामानुजगंज -बृहस्पत सिंह, कांग्रेस
08- सामरी -चिंतामणि महाराज, कांग्रेस
09- लुन्ड्रा -प्रीतम राम, कांग्रेस
10- अंबिकापुर -टी एस सिंघदेव, कांग्रेस
11- सीतापुर -अमरजीत भगत, कांग्रेस
12- जशपुर -विनय कुमार भगत, कांग्रेस
13- कुनकुरी -यू. डी. मींज, कांग्रेस
14- पत्थलगांव -राम पुकार सिंह ठाकुर ,  कांग्रेस
15- लैलुंगा -चक्रधर सिदार, कांग्रेस
16- रायगढ़ - प्रकाश नायक, कांग्रेस
17- सारंगढ -उत्तरी जांगड़े, कांग्रेस
18- खरसिया -उमेश पटेल, कांग्रेस
19- धरमजयगढ़ -लालजीत सिंह राठिया, कांग्रेस
20- रामपुर -ननकी राम कंवर, भाजपा
21- कोरबा -जय सिंह अग्रवाल, कांग्रेस
22- कटघोरा -पुरुषोत्तम कंवर, कांग्रेस
23- पाली तानाखार -मोहित राम, कांग्रेस
24- मरवाही -अजित जोगी, जनता कांग्रेस
25- कोटा -रेनू अजित जोगी, जनता कांग्रेस
26- लोरमी -धर्म जीत सिंह, जनता कांग्रेस
27- मुंगेली -पुन्नुलाल मोहले, भाजपा
28- तखतपुर -रश्मि आशीष सिंह, कांग्रेस
29- बिल्हा -धरमलाल कौशिक, भाजपा
30- बिलासपुर -शैलेश पाण्डेय, कांग्रेस
31- बेलतरा -रजनीश सिंह, भाजपा
32- मस्तूरी -डॉ कृष्णमूर्ति बंधी,भाजपा
33- अकलतरा -सौरभ सिंह, भाजपा
34- जांजगीर चांपा - नारायण चंदेल, भाजपा
35- सक्ति -चरणदास महंत, कांग्रेस
36- चन्द्रपुर -रामकुमार यादव, कांग्रेस
37- जैजैपुर -केशव प्रसाद चंद्रा, बसपा
38- पामगढ़ -इंदु बंजारे, बसपा
39- सरायपाली -किस्मत लालनन्द, कांग्रेस
40- बसना -देवेन्द्र बहादुर सिंह, कांग्रेस
41- खल्लारी -द्वारकाधीश यादव, कांग्रेस
42  महासमुंद - विनोद चंद्राकर, कांग्रेस
43- बिलाईगढ़ -चन्द्रदेव प्रसाद राय, कांग्रेस
44- कसडोल -शकुन्तला साहू, कांग्रेस
45- बलौदाबाजार -प्रमोद कुमार शर्मा, जनता कांग्रेस
46- भाटापारा -शिवरतन शर्मा, भाजपा
47- धरसींवा -अनीता योगेश शर्मा, कांग्रेस
48- रायपुर ग्रामीण -सत्यनारायण शर्मा, कांग्रेस
49- रायपुर पश्चिम -विकास उपाध्याय, कांग्रेस
50- रायपुर उत्तर -कुलदीप जुनेजा, कांग्रेस
51- रायपुर दक्षिण -बृजमोहन अग्रवाल, भाजपा
52- आरंग -शिवकुमार डहरिया, कांग्रेस
53- अभनपुर -धनेन्द्र साहू, कांग्रेस
54- राजिम -अमितेश शुक्ल, कांग्रेस
55- बिन्द्रानवागढ़ - डमरू धर पुजारी, भाजपा
56- सिहावा - लक्ष्मी ध्रुव, कांग्रेस
57- कुरूद -अजय चंद्राकर, भाजपा
58- धमतरी -रंजना डीपेंद्र साहू, भाजपा
59- संजारी बालोद -संगीता सिन्हा, कांग्रेस
60- डौंडीलोहारा - अनिला भेंडिया, कांग्रेस
61- गुंडरदेही - कुंवर सिंह निषाद, कांग्रेस
62- पाटन -भूपेश बघेल, कांग्रेस
63- दुर्ग ग्रामीण -ताम्रध्वज साहू, कांग्रेस
64- दुर्ग शहर - अरुण वोरा, कांग्रेस
65- भिलाई नगर - देवेंद्र यादव, कांग्रेस
66- वैशाली नगर - विद्या रतन भसीन, भाजपा
67- अहिवारा - गुरुरूद्र कुमार, कांग्रेस
68- साजा -रविन्द्र चौबे, कांग्रेस
69- बेमेतरा - आशीष छाबड़ा, कांग्रेस
70- नवागढ़ -गुरुदयाल सिंह बंजारे
71- पंडरिया -ममता चंद्राकर, कांग्रेस
72- कवर्धा - अकबर भाई, कांग्रेस
73- खैरागढ़ -देवव्रत सिंह, जनता कांग्रेस
74- डोंगरगड़ -  डालेश्वर  साहू,  कांग्रेस
75- राजनांदगांव -रमन सिंह,  भाजपा
76- डोंगरगांव -दलेश्वर साहू, कांग्रेस
77- खुज्जी -छन्नी चंदू साहू, कांग्रेस
78- मोहला मानपुर -इन्द्रशाह मंडावी, कांग्रेस
79- भानुप्रतापपुर -मनोज सिंह मंडावी, कांग्रेस
80- अंतागढ - अनूप नाग, कांग्रेस
81- कांकेर -शिशुपाल शोरी, कांग्रेस
82- केशकाल -संतराम नेताम, कांग्रेस
83- कोंडागांव -मोहन मरकाम, कांग्रेस
84- नारायणपुर -चंदन कश्यप, कांग्रेस
85- बस्तर -लखेश्वर बघेल, कांग्रेस
86- जगदलपुर -रेखचंद जैन, कांग्रेस
87- चित्रकोट -दीपक बैज, कांग्रेस
88- दंतेवाड़ा - भीमा मंडावी, भाजपा
89- बीजापुर -विक्रम मंडावी,कांग्रेस
90-कोंटा-कवासी लखमा, कांग्रेस
Chhattisgarh
Result Status
Status Known For 90 out of 90 Constituencies
PartyWonLeadingTotal
Bahujan Samaj Party202
Bharatiya Janata Party15015
Indian National Congress68068
Janta Congress Chhattisgarh (J)505
Total90090
Partywise Vote Share
Please move your mouse over the chart or legend to view more details.Party {Votes%,Vote Count}INC {43.0%,6144192}BJP {33.0%,4707141}JCCJ {7.6%,1086581}IND {5.9%,839053}BSP {3.9%,552313}GGP {1.7%,247459}AAAP {0.9%,123526}CPI {0.3%,48255}APoI {0.3%,42013}SHS {0.2%,34678

Dec 9, 2018

padhne ka tarika batao |पढने का तरीका बताओ | लेख पढ़ने का सही तरीका, समझदार बनो |
pustak padhne ka sahi tarika

लेख पढ़ने का सही तरीका, समझदार बनो |

उस दिन मै निरुत्साहित हो जाता हूँ, जिस दिन मेरा लेख, कोई समझने की कोशिश नहीं करता |
मै अपने आप को कब तक दोषी ठहराता रहूँ, लेकिन
अगर हम अपनी बात को सामने रख रहे है, और सामने वाला उसे समझ नहीं पा रहा है, तो गलती उसकी नहीं जो समझ न पा रहा हो, बल्कि उसकी बनती है, जो सामने वाले को अपनी बात को समझा न पा रहा हो |
जब अपनी बात को लेख के माध्यम से सामने रखता हूँ,
तो उस लेख को कोई कोई ही समज पाता है,
समझने वाली बात तो यह है, पड़ने का भी एक तरीका होता है,
जिस प्रकार से विराम चिन्ह होता है, उसी प्रकार से लेख में, अपनी भावना को डालकर पढ़ा और समझा जाता है |
सबसे पहले लोगो को अपनी लेख को सही तरीके से पढने के लायक बनाना होगा |
बनना होगा, तभी वह उस लेख को अच्छे से समझ पायेगा;
हिन्दी लेखन में भी अनेक प्रकार के विराम चिन्ह होते है |
(,) इस तरह के चिन्ह को अप्ल विराम कहते है,
लेख को पढ़ते समय यहाँ थोड़ा सा रुका जाता है |
( ; ) इसे अर्द्ध विराम कहते है, लेख को पढ़ते समय यहाँ अल्प विराम से थोड़ा अधिक रुका जाता है |
और इसे कहते है ( | ) पूर्ण विराम, जब पढ़ते समय जहाँ अंतिम होता है, वहां पर यह चिन्ह होता है, इसका उपयोग पूर्ण रूकने के लिए किया जाता है |
लेख में और भी बहुत से चिन्ह होते है, पर यह सबसे अहम् भूमिका निभाता है,
आपको भी इन चिन्ह को ध्यान में रखकर पड़ना है, तभी आप अच्छे से लेख को समझ पाएंगे, और समझने में भी कोई परेशानी नहीं होगी |
और जब समझेंगे तो आलस पन भी नहीं आयेगा |
इस लेख को समझने में समझदारी लाओ,
पढ़ना तो हर किसी को आ जाता है,
मगर सही तरीके से पढ़ना किसी किसी को आता है |

Dec 7, 2018

प्रेम विवाह के लाभ और हानि – मेरे विचार – योगेन्द्र धिरहे
प्रेम विवाह के लाभ और हानि
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इस लेख में मैंने अपने विचार रखे है, मेरा किसी जाति या धर्म या अन्य कोई और को ठेस पहुचना नहीं है, मै अपने विचार पर कायम हूँ |
"सोना चमक रहा है, यह बड़ी बात नहीं मेरे लिए, बड़ी बात तो यह है, की वह कैसे चमक रहा है |"
व्यक्ति समाज की परेशानी को नकार दे ,मगर वह परेशानी जब अपने पर आती है तब सब समझ आता है,
प्रेम विवाह भी इसी सामाजिक समस्या का एक स्वरुप है,
इस पृथ्वी में ना जाने कितने सारे देश है, मगर उनमे से भारत एक अनोखा देश है, जहाँ ज्ञान का भंडार होते हुए भी लोग मुर्ख बने रहना ही पसंद करते है ,
वर्तमान समय में हर व्यक्ति का संबंध किसी न किसी धर्म से अवस्य होता है,
और धर्म के बाद भारत में वर्ण व्यवस्था, उसके बाद हर वर्ण की जाति, और गोत्र,
भारत देश में वैसे तो अनेक धर्म पाए जाते है, मगर हिन्दू धर्म को आज समझ लेते है, वर्ण व्यवस्था में,
ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, और शुद्र,
विवाह के नियम- शुद्र सिर्फ शुद्र से ही विवाह कर सकता है,
वैश्य सिर्फ वैश्य और शुद्र से विवाह कर सकता है,
क्षत्रिय सिर्फ क्षत्रिय और वैश्य और शुद्र तीनो से विवाह कर सकता है, और
ब्राम्हण, किसी से भी विवाह कर सकता है,
इसमें बहुत बड़ी दुविधा भी है, हर वर्ण के बहुत सारे जाति है, और अंतिम में बात कही पर आती है, वह है जाति,
जो व्यक्ति जिस जाति का होगा, वह उसी जाति के व्यक्ति से विवाह कर सकता है, जाति के अन्दर अनेक प्रकार के गोत्र होते है, अगर लड़की लड़का एक गोत्र से हो तो समाज शादी के लिए अनुमति नहीं देता, |
विवाह के वैसे तो अनेक प्रकार होते है, आज हम दो तरह के विवाह के बारे में बात करेगे,
एक पारिवारिक विवाह और दूसरा प्रेम विवाह,
जीवन भी अनेक प्रकार से जिया जाता है, एक सोचकर समझकर और दूसरा प्रकृति के नियम से,
पारिवारिक विवाह के लक्षण – इस विवाह में लड़का और लड़की के घर वाले मेल जोल करते है, हर चीज को और लड़का लड़की को देखता है, कही कही तो बात भी नहीं करते, और सिर्फ देखकर ही शादी कर लेते है,
यह परिवार की सामने होती है, पुरे रस्मो रिवाज के साथ, इस विवाह में पुरे समाज को रिश्तेदारों को, दोस्तों मित्रो को बुलाया जाता है, और बाराती के साथ दुल्हन को लड़का अपने घर ले जाता है |
प्रेम विवाह के लक्षण – प्रेम विवाह में लड़का और लड़की एक दुसरे को पसंद करते है, इस विवाह में कोई तीसरा नहीं होता न दोस्त, न रिश्तेदार, न परिवार, न समाज, और न अन्य इस विवाह में लड़के और लड़की की शादी अपनी मर्जी से होती है |
विवाह से तापतर्य :- किसी का भी विवाह से तापतर्य शाररिक सुख, और साथी, और वंशवाद, होता है, सभी प्रकार के विवाह में यही नियम लागु होते है,
पारिवारिक विवाह सोचकर विचारकर, हर नियम धर्म, वर्ण, वंश, जाति गोत्र को देखकर किया जाता है, तो वही प्रेम विवाह में इस तरह के किसी भी नियम को नहीं देखा जाता, प्रेम विवाह में एक ही नियम लागु होता है |
“ लड़का लड़की राजी तो क्या करें काजी “ का नियम चलता है,

मै व्यक्ति के जीवन को किस तरह से देखता हूँ,

जिस तरह से अन्य जीव होते है, उसी तरह से मानव जीवन भी होता है , फर्क बस इतना है, व्यक्ति जीव से होते हुए, अपनी ज्ञान और प्रकृति के नियम से व्यक्ति बन गया है,
रही बात धर्म की,
पुराने ज़माने की जीने की कला को धर्म बना दिया गया,
और रही बात वर्ण की, मैंने अरबो लोगो की इस मानसिक बिमारी का शिकार पाया है, और मुंह से बच्छे पैदा होते नहीं देखा, और ना सुना आज के समय में,
और रही बात जाति की, यह समुदाय का नियम है, और कर्म के अनुसार लोगो को बाँट दिया गया है,
और रही बात गोत्र की यह भी एक भ्रम है,
प्रेम विवाह अगर रिश्तेदारी बंधन में जो मान्य नहीं उसे गलत मानता हूँ, जो गुरू तुल्य और सगे हो |
मै समाज की रस्मो को नकारता हूँ, मै जन्मो के बंधन को नकारता हूँ, मै शादी में जन्मो के बंधन को नहीं मानता,
“कागज के दो पन्नो पर, हो नहीं सकता प्यार का फैसला |
प्यार तो अपनों से बनता है निभाने वालो का है फैसला ||”

व्यक्ति के एक जन्मो का भरोसा नहीं, न जाने कितने बार तलाक हो रहे है, तो किस्से साथ, साथ जन्म का बंधन,

प्रेम विवाह के लाभ और हानि

प्रेम विवाह में लड़की को मै दुःख को पोटली, और सुख का साधन भी मानता हूँ,
यह सभी स्थिथि और परिस्थिथि , और प्रेमियों के मानसिकता के ऊपर है,
जाहिर है यह विवाह समाज में न होकर, भागने वाला विवाह है, मै जिस विवाह की बात कर रहा हूँ, वह लड़की की परिवार की मर्जी के खिलाफ, समाज और धर्म से परे है,
अगर लड़का, लड़की से विवाह करता है तो, तो लड़की के लिए लड़का ही सब कुछ है, वही परिवार, वही पति, वही सबकुछ, क्योकि लड़की के लिए उसका परिवार पहले छुट चूका होता, न पिता न माँ, न बहन, न रिश्तेदार, लकड़ी के लिए अपना पति ही सब कुछ है,
अगर लड़की परिवार में ख़ुशी लाती है, तो खुशी का पिटारा, और अगर वही कुछ गलत करता है तो उस समय लड़की, लड़का के लिए दुःख का पिटारा के सामान है,
प्रेम विवाह में घर को खुशी से सजाने का सबसे जायदा दायित्व लड़की के ऊपर होता है, लड़की को हमेशा खुशी देने की कोसीश करनी चाहिए, और लड़के को लड़की को यह बिलकुल भी एहसास नहीं होने देना चाहिए की, तुम अपनी माँ बाप परिवार से बिछड़कर ख़ुश नहीं, लड़के को लड़की के लिए यह प्रेम आवश्यक है,
समाज में हर कोई इस बात से परिचित है, की जाति नाम का कोई चीज नहीं होता, यह तो बस समाज के डर से वह मान बैठता है, पर वास्तव में सभी इसे स्वीकार करते है की जाति नहीं होता,
लड़के के परिवार वालो को लड़के का साथ देना चाहिए, समाज परिवार से अपने बच्चों की ख़ुशी से बढकर नहीं होता |
प्रेम विवाह के बाद सबसे बड़ी खुशी का नियम और दुःख को दूर करने का उपाय यही है, की कभी अपने मन में नहीं सोचना की मैंने प्रेम विवाह करके गलत किया है, और लड़के या लड़की को अपनी बुध्धि भ्रष्ट करके यह नहीं सोचना या किसी से बोलना चाहिए की मै छोटी जाति का या बड़ी जाति इस तरह  से जाति नाम के इस कीड़े को अपने से दूर रखना चाहिए |
समाज का दबाव - प्रेम विवाह में समाज का दबाव रहता है, और समाज पूरी तरह से इस तरह के चीजो के ऊपर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिस करता है, समाज और जाति को लगता है, की 
:- यह हमारे जाति का, धर्म का, परिवार का, गोत्र का, अमीरी का, ग़रीबी का, मेरे अहम् का, 
या 
:- अगर इसी तरह से सभी गैर विवाह करने लग जाए तो, अपने समाज का क्या होगा |
इसलिए समाज प्रतिबन्ध लगाता है, पर इससे आपको डरना नहीं चाहिए,
"वह समाज सबसे घाटियाँ है, जो गैर विवाह करने पर लड़की या लड़के वालो से समाज पैसे की मांग करता है "
यह नियम अपने ही समाज के लोगो को गरीब से गरीब बनाने का नियम है, अरे अभी तो उसने समाज के बंधन को तोडा है, उसे थोड़ा परिवार चलाने का हिम्मत तो दो, तुम तो उसकी जीने का हक़ ही झिन रहे हो,
आपके लिए खुशी की बात है, कोई तो है जो दो पक्षों को जोड़ने का कदम उठाया है, और उसे तुम उल्टा डाट रहे हो, यह गलत है इसे समाज जाओ, नहीं तो यह प्रेमी जोड़े, तुम्हारे बंधन को तोड़ने के लिए और आगे आयेंगे,
कितनो को रोकोगे, कितनो को टोकोगे, 
जितना रोकोगे उतना, बढेगा, जितना टोकोगे, उतना सोचेगा,
प्रेम विवाह सबसे उत्तम विवाह है, 
अपने विचार कमेंट करके जरुर बताये,
लेखक एवं सामाजिक विचारक -योगेन्द्र धिरहे,
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धन्यवाद् 
जय राधव माधव
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Dec 3, 2018

धर्म क्या है ? परिवार क्या है ?  रिश्तेदार क्या है ?  जाति क्या है ?  गोत्र क्या है ?
dharm kya hai jati kya hai gotra kya pariwar kya hai rishtedar kya hai

धर्म क्या है ? धर्म की उत्पत्ति ? और वर्तमान धर्म ?

धर्म को जानने से पहले आपको कुछ और जानना चाहिए |
सभी जीव पृथ्वी में रहते है, यह मानव भी इसी पृथ्वी में रहता है,
जब जीवन की उत्पत्ति हुई तब, यह मानव भी इसी पृथ्वी से जन्म लिए,
जब मानव ने अपनी जीवन की सुरुआत को जानना चाहा तो अनेक प्रकार से, अपने अनुसार कल्पना करना शुरू कर दिया |
और अपने कल्पना अनुसार जीवन जीना शुरू कर दिया, किसी ने इसे पुस्तकों में लिखा तो, किसी ने इसे लोगो तक फ़ैलाने का काम किया |
आज से कुछ हजारों वर्षो पूर्व धर्म शब्द की उत्पत्ति हुई,
प्रारम्भ में धर्म का अर्थ, जीवन को सही तरीके से जीने से माना जाता है,
जो व्यक्ति धर्म का पालन करता है, वह झूट नहीं बोलता, किसी प्रकार की किसी को हानि, दुर्व्यवहार नहीं करता, जीवन को इस तरह से जीने से होता है, की कोई भी गलत न बता पाए |
लेकिन जो धर्म का आचरण करता है वह किस आधार पर करता है ?
जो नियम समाज के लिए सही बताये गए हो, जिसे समाज स्वीकार करें, इसी का नाम धर्म बताया गया है |
धर्म पुरुष अगर किसी को कहाँ जाता है तो युधिस्ठिर को कहा जाता है, लेकिन वह धर्म पुरुष नहीं कहा जा सकता, क्योकि उसने अपनी ही पत्नी को जुए में हार गया | ऐसे पुरुष को धर्म पुरुष नहीं कहा जा सकता |
जो सत्य का आचरण करता हो, वही वही धर्म पुरुष हो सकता है |

धर्म क्या है ?

धर्म एक विचारधारा है | एक मान्यता है | जीवन जीने का तरीका है |
क्रियाकलाप का संयोजन है |
धर्म एक विचारधारा है ?
किसी भी धर्म को मानने वाले, किसी मुख्य प्रवर्तक के, विचारधारा के साथ आगे बढ़ते है, और उसी विचारधारा ज्ञान को संजोते जाते है, और उसी ज्ञान को आगे बढ़ाते जाते है |
एक समय ऐसा आता है, जब वह ज्ञान वह विचारधारा बहुत सारे लोगो को अपने में प्रभावित कर लेता है, और संसार की उत्पत्ति के साथ, मानव की उत्पत्ति और मृत्यु का ज्ञान को संजो लेता है |
धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक विचारधारा की मान्यता लागु होती है,
यह विचारधारा जन्म को उत्सव के रूप में तो वही, कुछ अलग रूप में देखते है |
यही विचारधारा संस्कार और रीति रिवाज बना लेती है |
इसी का नाम धर्म है |
मानव-मानव सभी एक समान होते है |
फर्क बस इतना है, इस वास्तविकता को जानना |
आज बहुत सारे धर्म है, धर्म एक विचारधारा का नाम है |
हिन्दू धर्म का जनक कोई नहीं है |
बौद्ध धर्म का गौतम बुद्ध,
इसाई का ईशा मसीह.
सिख का गुरुनानक,
सतनाम धर्म गुरुघासीदास,
और धर्म के प्रवर्तक मिलते है |
सभी धर्म का अलग अलग नियम होता है,
लेकिन,
सतनाम धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म, में मूर्ति पूजा का कोई स्थान नहीं है, ज्ञान ही केंद्र है | इन धर्मो का मुख्य धारा समानता है, कोई छोटा बड़ा नहीं है, इस धर्मो को कोई भेद भाव, ऊँच नीच, छोटा बड़ा नहीं होता, न ही जाति की परम्परा होती है | इन धर्मो का उपदेश एक समान मिलते है, मांसाहारी न होना, नसा विरोधी, और सर्व हिताय सर्व सुखाय |
जो धर्म मानव मानव में ऊँच नीच, भेदभाव, बताये, वह गलत है,
वह धर्म गुलाम बनाने की रीति है |

परिवार क्या है ?

परिवार एक घर में रहने वाले सदस्य को कहते है,
परिवार का सम्बन्ध खून से जुड़ा हुआ होना होता है,परिवार के अंतर्गत,माता पिता, और उनके बच्चे, दादा परदादा, खून का पूरा सम्बन्ध परिवार है,

गोत्र या गोती, सरनेम, या उपनाम, Last Name क्या होता है ?

क्या आप जानना चाहते है गोत्र या सरनेम क्या होता है,
गोत्र किसी जाति का हिस्सा होता है,
जब किसी भी जाति का उत्पत्ति होता है,
तो लोग जैसा कर्म करते है, वैसा ही उसे नाम दे दिया जाता है,
जो नाम दिया जाता है, उसी को गोत्र कहते है,
वर्तमान समय में भी गोत्र का सरनेम का जो रीती है, आज भी चल रही है,
एक गोत्र का जितने भी व्यक्ति होते है, वह एक ही परिवार का हिस्सा होते है,
कभी न कभी सदियों पहले वह उसी परिवार से आते थे, इसलिए गोत्र एक बराबर है,
इस तरह से लोग मानते है, और एक गोत्र में विवाह नहीं करते है,
सतनाम धर्म में गोत्र का कोई स्थान नहीं है,
शादी के समय यह देखा जाता है, की लड़का का परिवार और लड़की का परिवार, दोनों एक दुसरे के रिश्तेदार तो नहीं लग रहे |
जब गोत्र ही नहीं रहेगा तो शादी के समय पता ही नहीं चलेगा, तो आपत्ति किस बात की होगी |
जो गोत्र की परंपरा है, वह आज के समय लोगो को तोड़ने का रीति है,

रिश्तेदार क्या होते है ?

एक परिवार को बनाने के लिए दुसरे परिवार के सदस्य को, अपने परिवार में शादी के माध्यम से मिलाया जाता है,
जैसे- लड़के लड़की की सादी,
उसके बाद, लड़की और लड़के का परिवार आपस में रिश्तेदार हो जाते है,
उनका सम्बन्ध हो जाता है, यही रिश्तेदारी है

जाति क्या है ?

जब लोगो को आपस में तोड़ने का लिए नीति खोजी है, तो पाया की लोग अनेक प्रकार के कार्य में बंटे हुए है, और उनको उसी कार्य के आधार पर लोगो को जाना जाता है,
जो जिस प्रकार का कार्य, या काम करता है, उसे वैसे ही जाना जाता है,
इसी का बहाना बनाकर, लोगो को आपस में बाटने, तोड़ने का लिए जाति बनाया गया |
जाति क्या है ?
जो व्यक्ति जैसा कार्य करता है, उसे वैसा ही जाति का नाम दे दिया गया |
जैसे :- सोना का काम करने वाले को सोनार, तेल का काम करने वाले को तेली,
कुम्हार का काम करने वाले को कुम्हार, 6500 से भी ज्यादा जाति में लोगो को बाँट दिया |
और उनको आपस में तोड़ने के लिए एक दुसरे को छोटा बड़ा बना दिया गया |
और रोटी बेटी का सम्बन्ध भी बंद कर दिया गया |
इसी को जाति कहते है,
यह किसने बनाया, क्यों बनाया, इससे किसको फायदा हो रहा है, इसके लिए जुड़े रहे,
सभी ग्रन्थ में जाति का उल्लेख है, इस अनुसार से अंग्रजो ने नहीं बनाया |
कोई और है जो आपस में तोड़कर मेवा खा रहा है |
और आपस में प्रेम करने से प्रेम बढ़ाने से रोक रहा है
भूत देखने वाले को 1 लाख रूपये इनाम |
हेल्लो दोस्तों मेरा नाम योगेन्द्र कुमार है,
इस लेख में आपको बताऊंगा की आप कैसे घर के भुत प्रेत, और शरीर के नकारात्मक शक्ति को कैसे दूर भगा सकते है |
तो शुरु करते है,
भुत को आज तक किसी ने नहीं देखा है, अगर कोई देखा होगा तो उसे मेरे तरफ से 1 लाख का इनाम,
bhut dekhne wale ko 1 lakh inam

कोई नहीं आएगा सामने इनाम लेने, क्योकि भुत और आत्मा को देखा नहीं जा सकता यह एक मन का भ्रम होता है,

इसी का नाम भुत है,
यह भुत कही और नहीं अपने मन में दिमाग में भ्रम के रूप में होता है

भुत को कैसे भगाए, कैसे दूर करें |

हर व्यक्ति के शरीर में उर्जा होती है, वह उर्जा वास्तविक ज्ञान है,
उस उर्जा को जगाना है, तब वह डर दूर होगा, और भुत भागेगा |

क्या करना है |
आपको एक जगह बैठ जाना है, बिलकुल गौतम बुध्ध या गुरुघासीदास बाबा की तरह,
और स्वास को लम्बा लेना है, और लम्बा छोड़ना है, आराम से,
इस तरह से मन एकाग्र होने लगेगा,

इस तरह से पुरे परिवार को ध्यान कराये,

और याद रखे, आपको किसी देवी देवता के नाम से ऐसा कुछ नहीं करना है,
और मन में किसी का जाप नहीं करना है,

यहाँ किसी को बैरागी बन्ने के लिए, गुरुघठाल की ओर जाने के लिए नहीं कह रहा हूँ |
और न सी साधू बन्ने के लिए,
आपको जेन्टल मेन की ओर जाने के लिए कह रहा हूँ |

Nov 29, 2018

सतनामी समाज और सतनाम धर्म की पूरी जानकारी |
satnami koun hai aru satnam dharm

सतनामी समाज और सतनाम धर्म की पूरी जानकारी |

सतनाम एक धर्म है एक विचार है, और जो सतनाम की विचारधारा में आगे बढ़ता है, वह सतनामी कहलाता है |
क्या सतनामी कोई जाति है ?
जब जाति में लोगो को कार्य के आधार पर बाँटा गया तो सतनामियो को सतनामी जाति का नाम दे दिया गया | 
वास्तव में सतनामी कोई जाति नहीं है एक धर्म है |
जो लोग सतनाम के राह में चलते है, वह सतनामी कहलाते है |
यह कोई जाति नही है, यह विचारधारा है |
क्या सतनाम एक पंत है ?
सतनाम कोई पंत नहीं है, यह धर्म है,
पंत इसलिए कह दिया जाता है, क्योकि वर्तमान में सतनाम धर्म को संविधान के अनुसार मान्यता नहीं मिल पाई है, 
पंत धर्म का एक हिस्सा होता है, और धर्म, पंत का सर्वोपरि होता है |
धर्म का अलग से संस्कार नियम होता है |
इसी प्रकार से सतनाम के मानने वालो का भी अलग से नियम है |
जब तक सतनाम धर्म को मान्यता नहीं मिल जाती तब तक लोग, सतनामी को पंत का हिस्सा मानते रहेंगे |
लेकिन वास्तव में यह धर्म है, जो हजारो वर्षो से चली आ रही है, 

सतनाम धर्म क्या है ?

सत अर्थात सत्य
सतनाम का श्रोत केंद्र ज्ञान है |
सतनाम की मुख्य धारा समानता है,
जो सतनाम को मानते है ओ समानता को ही सर्वोपरि मानते है |
समानता ही सतनाम का मूल उद्देश्य है |
सतनाम सभी को समानता की नजर से देखता है,
सतनाम सभी मानव को एक नजर से देखता है,
सतनाम मानव को, मानव-मानव एक सामान मानने और जानने पर जोर देता है |
जो सत्य के राह में, वास्तविकता के साथ चलता है, इसी का नाम सतनाम है |
जैसे :- 
सतनाम में आडम्बर का कोई स्थान नहीं है |
और न ही किसी प्रकार व्यर्थ के कर्मो का,
सतनाम के मानने वाले, विज्ञानवादी होते है, सत्य ही विज्ञान है,
जैसे :- सतनाम के मानने वाले, संसार की उत्पत्ति को विज्ञान के अनुसार, गुरुत्वाकर्षण सिध्धांत को मानते है |
और संसार का मालिक कर्ता-धर्ता सतनाम को मानते है |
अर्थात सत्य को, वास्तविकता को,
सतनाम के मानने वाले, तर्कशील होते है,
सतनाम के मानने वाले आत्म उर्जा पर विश्वास करते है |
अर्थात शरीर मन की ध्यान साधना,
सतनाम धर्म को मानने वालो का जीवन,
सतनाम के मानने वाले अभिवादन में साहेब सतनाम कहते है |
सतनाम को मानने वाले व्यर्थ के आडम्बर में विश्वास नहीं करते, खान-पान शाकाहारी होते है,
सतनाम को मानने वाले नशा सेवन नहीं करते | 
सतनाम के मानने वाले मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते |
सतनामी परिवार एक विशेष नियम होता है, घर पर कोई भी आये पीने के लिए पानी अवश्य देते है |
सतनाम के मानने वाले देवी देवताओ की पूजा नहीं करते |
सतनाम धर्म का चिन्ह और पूजा श्रोत |
सतनाम के मानने वाले मूर्ति पूजा को नहीं मानते,
सतनाम में एक विशेष प्रकार के चिन्ह जिसे जैतखाम कहते है,
जैतखाम के ऊपर सफ़ेद रंग का एक चौकोर झंडा लगा होता है,
सतनाम के मानने वाले उसकी पूजा करते है |
जैतखाम में दीप जला सकते है लेकिन धुप, अगरबत्ती, नहीं जला सकते,
क्योकि दीप रौशनी अंधेरो को मिटाता है, और अगरबत्ती खुशबू ले लिए जलाया जाता है, इसलिए इसे आडम्बर, और गलत माना जाता है |
सतनाम के मानने वाले जीवित लोगो को वास्तविक भगवान मानते है,
सतनाम के मानने वाले फोटो पूजा और चित्र पूजा नहीं मानते और न ही करते है |
इस जैतखाम को, जीतखाम और सतनाम विजय स्तम्भ के नाम से भी जाना जाता है, इसका अर्थ सत्य की विजय चिन्ह, सत्य की जय हो, इस तरह का माना जाता है |
सतनाम के मानने वालो का विवाह संस्कार |
सतनाम के मानने वाले साक्षी के रूप में समाज को मानते है,
सतनामी जैतखाम के भांवर फेरे लेते है |
सतनामी जाति, धर्म, वर्ण, परंपरा को नहीं मानते, ये सभी को सामान रूप से जानते है, इस अनुसार से किसी भी जाति धर्म के लोगो से विवाह करने में परहेज नहीं करते |
सतनाम धर्म में जाति परंपरा नहीं होती |
सभी सतनाम के मानने वाले उपनाम में सतनामी लिखते है |
लेकिन आज मनुवादी परम्परा में बंटे होने के कारण गोत्र को भी मान लेते है |
सतनाम धर्म के ज्ञान गुरु, और विशेष ज्ञान,
सतनाम धर्म का मुख्य गुरु संत शिरोमणि गुरुघासीदास बाबा को माना जाता है, और कबीर, गुरुनानक, बालकदास, और सभी गुरु.......
सतनाम धर्म में मानव-मानव के बीच भेदभाव, ऊँचनीच, छुआछुत नहीं माना जाता |
सतनाम के मानने वाले लग्न, शुभ मुहूर्त, अशुभ, राशी, इस तरह के आडम्बर ढोंग को नहीं मानते |
सतनाम के मानने वाले मरने पर व्यर्थ धन खर्च नहीं करते, और मुर्दे को दफ़नाने में जायदा महत्व देते है,
मिटटी से पैदा लिए मिटटी में मिल जायेंगे,
शव जलाना को सतनाम में, वायु प्रदुषण, और जलायु लकड़ी का नाश माना जाता है |
सतनाम के मानने वाले बच्चे के जन्म को उत्सव के रूप में मनाते है |
सतनाम के मानने वाले का गीत, और डांस
सतनाम में एक विशेष प्रकार का गीत जिसे पंथी गीत कहते है, और पंथी नित्य होता है | जिसे सभी द्वारा गया और बजाया जाता है, और नित्य किया जाता है |
सतनाम का कुछ हिन्दू धर्म से मेल नहीं खाता |
सतनाम एक अलग से धर्म है, 
  लेख –योगेन्द्र कुमार चरौदी

Nov 23, 2018

सभी सतनामियों का ऐलान, सभी का सरनेम एक होगा, सिर्फ सतनामी
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सभी सतनामियों का ऐलान, सभी का सरनेम एक होगा, सिर्फ सतनामी 

सत का सन्देश, मानव – मानव एक समान का उपदेश देने वाले, लोगो की वास्तविकता से परिचय कराने वाले, बाबा गुरुघासीदास के मानने वाले सतनामी कहलाये, जो अपने आप को सतनामी मानते है ओ, सतनाम को ही अपना सब कुछ मानते है |
सत्य को अपना सब कुछ जानते है |
सतनाम को मानने वाले जाति, धर्म, मूर्तिपूजा, नहीं मानते,
मनुवादियों ने सतनामियो को तोड़ने के लिए अनेक तरह के उपाय किये, और इन सतनामीयों को तोड़ने के अनेक तरह के उपनाम में बाँट दिए, आज ये सतनामी अपनी वास्तविकता को भूलते जा रहे है,
अपने नाम को महत्वहीन बना रहे है,
सरनेम को महत्त्व दे रहे है,
जबकि वास्तव में सतनामी माता पिता को भगवान, सबसे सर्वोत्तम मानते है,
माता पिता ने नाम के सिवा बच्चे को कुछ नहीं दिया |
फिर सरनेम बड़ा कैसे हुआ |
इन सतनामियो का इतिहास तो पूरी दुनिया जानती है, पर ये अपनी वास्तविकता को समझ नहीं पा रहे है,
इनको रुढ़िवादी, नियम को बदलना है,
अज्ञानता को मिटाना है,
सतनाम का प्रचार करना है,
योगेन्द्र कुमार सतनामी ने बताया की,
अब से सभी सतनामीयों ने ऐलान कर दिया है, सरनेम में सभी सतनामी ही लिखे, और सतनामी को सिर्फ सतनामी सरनेम से जाना जाए |
इससे सतनामी समाज एक होगा |
सभी सतनामी-सतनामी में भेद नहीं कर पायेगा |
कोई मनुवादी सतनामीयों को तोड़ नहीं पायेगा |
सतनामी के बारे में लोगो को जानने में आसानी होगी |
आज कोई अपने सरनेम को बड़ा बता रहा है, दुसरे के सरनेम को छोड़ा, अपने ही पंथ के लोगो को छोटा साबित करने में लगे है, अगर सभी एक सरनेम सतनामी लिखेंगे तो एकता आएगी |
कुछ लोग ऐसे होते है जो अपने सरनेम को ऊँचा उठा कर रखे हुए है, उनको सरनेम सतनामी लिखने में या कहलवाने में दुःख तकलीफ होता है |
सतनामियो को सतनामी सरनेम लिखने में सिर्फ एक ही तकलीफ होती है, ओ शादी के समय |
तो इसका यह समाधान है |
सतनामी जाति बंधन को नहीं मानते तो, सरनेम को क्यों मानेगे |
इसलिए, दो पक्षों के बीच जब रिश्तेदारी का समय आये तो, यह पता करें वह लड़की कहीं, लड़के का कोई रिश्तेदार तो नहीं लग रहा |
या परिवार से तो नहीं |
क्योकि यही वास्तविक नियम है,
अगर गोत्र-गोत्र कहते रहे तो, हो गई मनुवादी परंपरा,
इसलिए, सभी लोगो से अनुरोध है, सरनेम में सतनामी ही लिखे, और सभी को सतनामी ही जाने |
अगर सतनामी नहीं लिखते तो, अपने पिता या माता का नाम लिखे |
इस 18 दिसम्बर 2018 को संत शिरोमणि बाबा गुरुघासीदास की जयंती के समय, सभी सतनामियो ने सरनेम को एक करने का फैसला किया है |
इस सन्देश को जन-जन तक और सभी सतनामियो तक पहुचाए |
कुछ मनुवादी ऐसे होंगे जो सतनामियों को एक होने से रोकेंगे |
अगर किसी को कोई आपति हो तो कृपया सतनाम समाज योगेन्द्र कुमार सतनामी से संपर्क करें 09131880737